CBSE Class 10 · Hindi A · board exam 2027
CBSE Class 10 Hindi A Question Paper 2024
The board’s 2024 question paper, set 3/1/1 — all 55 questions as printed; 39 objective answers from the board’s own key; full model answers for 3 written questions, how the answer begins for 11 more. Each question names its chapter, where that chapter’s most-asked questions are.
Full marks 80 · Time 3 h
Section A · Objective questions (34)
भारत एक विशाल देश है। यहाँ के विभिन्न राज्यों की अपनी क्षेत्रीय भाषाएँ हैं। स्वतंत्रता के पश्चात से मातृभाषा को प्रोत्साहित करने की बातें चर्चा में रही हैं। परंतु इनके विकास के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए। इसके कारण प्रत्येक क्षेत्र में विदेशी भाषा अंग्रेजी का वर्चस्व स्थापित हो गया। नेल्सन मंडेला ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति के सोचने की प्रक्रिया अपनी मातृभाषा में होती है। अगर किसी व्यक्ति से उसकी मातृभाषा में बात करें तो वह बात दिल तक पहुँचती है। यह सर्वविदित है कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करना अत्यंत सहज एवं सुगम होता है। अपनी मातृभाषा में विद्यार्थी किसी भी विषय को सरलता से समझ लेता है जबकि अन्य भाषाओं में उसे कठिनाई का सामना करना पड़ता है। विश्वभर के शिक्षाविदों ने मातृभाषा में शिक्षा प्रदान किए जाने को महत्त्व दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार अपनी मातृभाषा में चिकित्सा की पढ़ाई करवाने वाले देशों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति अन्य देशों की तुलना में अच्छी है। चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और जापान सहित अनेक देश अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। सर्वविदित है कि ये देश लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी हैं। इन देशों ने अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करके ही उन्नति प्राप्त की है। यदि स्वतंत्रता के पश्चात भारत में भी मातृभाषा में चिकित्सा एवं तकनीकी शिक्षा प्रदान की जाती तो हम आज विश्व में और अधिक बेहतर स्थिति में होते। वर्तमान में इस दिशा में ठोस और क्रांतिकारी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। किसी भी देश के आधारभूत विकास के लिए आवश्यक है :
- (A) तकनीकी शिक्षा का विस्तार होना
- (B) चिकित्सीय शिक्षा का विस्तार होना
- (C) किसी भी भाषा में शिक्षा देना
- (D) मातृभाषा में शिक्षा का विस्तार होना ✓
Answer (the board’s key): (D)
भारत एक विशाल देश है। यहाँ के विभिन्न राज्यों की अपनी क्षेत्रीय भाषाएँ हैं। स्वतंत्रता के पश्चात से मातृभाषा को प्रोत्साहित करने की बातें चर्चा में रही हैं। परंतु इनके विकास के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए। इसके कारण प्रत्येक क्षेत्र में विदेशी भाषा अंग्रेजी का वर्चस्व स्थापित हो गया। नेल्सन मंडेला ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति के सोचने की प्रक्रिया अपनी मातृभाषा में होती है। अगर किसी व्यक्ति से उसकी मातृभाषा में बात करें तो वह बात दिल तक पहुँचती है। यह सर्वविदित है कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करना अत्यंत सहज एवं सुगम होता है। अपनी मातृभाषा में विद्यार्थी किसी भी विषय को सरलता से समझ लेता है जबकि अन्य भाषाओं में उसे कठिनाई का सामना करना पड़ता है। विश्वभर के शिक्षाविदों ने मातृभाषा में शिक्षा प्रदान किए जाने को महत्त्व दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार अपनी मातृभाषा में चिकित्सा की पढ़ाई करवाने वाले देशों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति अन्य देशों की तुलना में अच्छी है। चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और जापान सहित अनेक देश अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। सर्वविदित है कि ये देश लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी हैं। इन देशों ने अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करके ही उन्नति प्राप्त की है। यदि स्वतंत्रता के पश्चात भारत में भी मातृभाषा में चिकित्सा एवं तकनीकी शिक्षा प्रदान की जाती तो हम आज विश्व में और अधिक बेहतर स्थिति में होते। वर्तमान में इस दिशा में ठोस और क्रांतिकारी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य और चिकित्सा की दृष्टि से कौन-से देश अच्छी स्थिति में हैं?
- (A) मातृभाषा में चिकित्सीय शिक्षा देने वाले देश ✓
- (B) अपनी राष्ट्रभाषा को मातृभाषा बनाने वाले देश
- (C) राष्ट्रभाषा और मातृभाषा को समान मानने वाले देश
- (D) अंग्रेजी भाषा से दूरी बनाने वाले देश
Answer (the board’s key): (A)
भारत एक विशाल देश है। यहाँ के विभिन्न राज्यों की अपनी क्षेत्रीय भाषाएँ हैं। स्वतंत्रता के पश्चात से मातृभाषा को प्रोत्साहित करने की बातें चर्चा में रही हैं। परंतु इनके विकास के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए। इसके कारण प्रत्येक क्षेत्र में विदेशी भाषा अंग्रेजी का वर्चस्व स्थापित हो गया। नेल्सन मंडेला ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति के सोचने की प्रक्रिया अपनी मातृभाषा में होती है। अगर किसी व्यक्ति से उसकी मातृभाषा में बात करें तो वह बात दिल तक पहुँचती है। यह सर्वविदित है कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करना अत्यंत सहज एवं सुगम होता है। अपनी मातृभाषा में विद्यार्थी किसी भी विषय को सरलता से समझ लेता है जबकि अन्य भाषाओं में उसे कठिनाई का सामना करना पड़ता है। विश्वभर के शिक्षाविदों ने मातृभाषा में शिक्षा प्रदान किए जाने को महत्त्व दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार अपनी मातृभाषा में चिकित्सा की पढ़ाई करवाने वाले देशों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति अन्य देशों की तुलना में अच्छी है। चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और जापान सहित अनेक देश अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। सर्वविदित है कि ये देश लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी हैं। इन देशों ने अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करके ही उन्नति प्राप्त की है। यदि स्वतंत्रता के पश्चात भारत में भी मातृभाषा में चिकित्सा एवं तकनीकी शिक्षा प्रदान की जाती तो हम आज विश्व में और अधिक बेहतर स्थिति में होते। वर्तमान में इस दिशा में ठोस और क्रांतिकारी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। भारत में क्षेत्रीय भाषाओं के अपेक्षाकृत कम विकसित होने के क्या कारण हैं?
- (A) हिंदी भाषा का वर्चस्व
- (B) अंग्रेजी भाषा का वर्चस्व
- (C) उपयुक्त प्रयासों का अभाव ✓
- (D) स्थानीय इच्छाशक्ति का अभाव
Answer (the board’s key): (C)
भारत एक विशाल देश है। यहाँ के विभिन्न राज्यों की अपनी क्षेत्रीय भाषाएँ हैं। स्वतंत्रता के पश्चात से मातृभाषा को प्रोत्साहित करने की बातें चर्चा में रही हैं। परंतु इनके विकास के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए। इसके कारण प्रत्येक क्षेत्र में विदेशी भाषा अंग्रेजी का वर्चस्व स्थापित हो गया। नेल्सन मंडेला ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति के सोचने की प्रक्रिया अपनी मातृभाषा में होती है। अगर किसी व्यक्ति से उसकी मातृभाषा में बात करें तो वह बात दिल तक पहुँचती है। यह सर्वविदित है कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करना अत्यंत सहज एवं सुगम होता है। अपनी मातृभाषा में विद्यार्थी किसी भी विषय को सरलता से समझ लेता है जबकि अन्य भाषाओं में उसे कठिनाई का सामना करना पड़ता है। विश्वभर के शिक्षाविदों ने मातृभाषा में शिक्षा प्रदान किए जाने को महत्त्व दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार अपनी मातृभाषा में चिकित्सा की पढ़ाई करवाने वाले देशों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति अन्य देशों की तुलना में अच्छी है। चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और जापान सहित अनेक देश अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। सर्वविदित है कि ये देश लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी हैं। इन देशों ने अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करके ही उन्नति प्राप्त की है। यदि स्वतंत्रता के पश्चात भारत में भी मातृभाषा में चिकित्सा एवं तकनीकी शिक्षा प्रदान की जाती तो हम आज विश्व में और अधिक बेहतर स्थिति में होते। वर्तमान में इस दिशा में ठोस और क्रांतिकारी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। 'मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करना आसान होता है' इस कथन के पक्ष में निम्नलिखित में से कौन-सा / कौन-से तर्क सही है/हैं? 1. मातृभाषा में प्राप्त ज्ञान को समझना सरल है। 2. मातृभाषा में प्राप्त ज्ञान को समझना जटिल है। 3. मातृभाषा अन्य भाषाओं से सरल-स्वरूप होती है। 4. मातृभाषा और दूसरी भाषाओं में कोई अंतर नहीं है। विकल्प :
- (A) 1 सही है। ✓
- (B) 3 सही है।
- (C) 1 और 2 सही हैं।
- (D) 1 और 4 सही हैं।
Answer (the board’s key): (A)
भारत एक विशाल देश है। यहाँ के विभिन्न राज्यों की अपनी क्षेत्रीय भाषाएँ हैं। स्वतंत्रता के पश्चात से मातृभाषा को प्रोत्साहित करने की बातें चर्चा में रही हैं। परंतु इनके विकास के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए। इसके कारण प्रत्येक क्षेत्र में विदेशी भाषा अंग्रेजी का वर्चस्व स्थापित हो गया। नेल्सन मंडेला ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति के सोचने की प्रक्रिया अपनी मातृभाषा में होती है। अगर किसी व्यक्ति से उसकी मातृभाषा में बात करें तो वह बात दिल तक पहुँचती है। यह सर्वविदित है कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करना अत्यंत सहज एवं सुगम होता है। अपनी मातृभाषा में विद्यार्थी किसी भी विषय को सरलता से समझ लेता है जबकि अन्य भाषाओं में उसे कठिनाई का सामना करना पड़ता है। विश्वभर के शिक्षाविदों ने मातृभाषा में शिक्षा प्रदान किए जाने को महत्त्व दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार अपनी मातृभाषा में चिकित्सा की पढ़ाई करवाने वाले देशों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति अन्य देशों की तुलना में अच्छी है। चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और जापान सहित अनेक देश अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। सर्वविदित है कि ये देश लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी हैं। इन देशों ने अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करके ही उन्नति प्राप्त की है। यदि स्वतंत्रता के पश्चात भारत में भी मातृभाषा में चिकित्सा एवं तकनीकी शिक्षा प्रदान की जाती तो हम आज विश्व में और अधिक बेहतर स्थिति में होते। वर्तमान में इस दिशा में ठोस और क्रांतिकारी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए : कथन - भारत में शिक्षा के माध्यम में बदलाव वर्तमान की आवश्यकता है। कारण - शिक्षा के माध्यम के प्रति दृष्टिकोण समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है।
- (A) कथन गलत है, किंतु कारण सही है।
- (B) कथन और कारण दोनों ही गलत हैं।
- (C) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या है। ✓
- (D) कथन सही है किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है।
Answer (the board’s key): (C)
सच से हट कर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम। जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झर कर कुसुम। जो लक्ष्य भूल रुका नहीं, जो हार देख झुका नहीं। जिसने प्रणय पाथेय माना, जीत उसकी ही रही। सच हम नहीं सच तुम नहीं, सच है महज संघर्ष ही। ऐसा करो जिससे न प्राणों में कहीं जड़ता रहे। जो है जहाँ चुपचाप, अपने-आप से लड़ता रहे। जो भी परिस्थितियाँ मिलें, काँटे चुभें कलियाँ खिलें। हारे नहीं इंसान, है संदेश जीवन का यही। सच हम नहीं सच तुम नहीं, सच है महज संघर्ष ही। हमने रचा आओ हमीं अब तोड़ दें इस प्यार को। वह क्या मिलन, मिलना वही जो मोड़ दे मँझधार को। ‘अपने-आप से’ लड़ने का क्या अभिप्राय है?
- (A) अपने भीतर उठे अंतर्द्वंद्व से लड़ना ✓
- (B) अपने भीतर की कमजोरियों से लड़ना
- (C) अपनी शारीरिक कमजोरियों से लड़ना
- (D) अपनी मानसिक व्याधियों से लड़ना
Answer (the board’s key): (A)
सच से हट कर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम। जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झर कर कुसुम। जो लक्ष्य भूल रुका नहीं, जो हार देख झुका नहीं। जिसने प्रणय पाथेय माना, जीत उसकी ही रही। सच हम नहीं सच तुम नहीं, सच है महज संघर्ष ही। ऐसा करो जिससे न प्राणों में कहीं जड़ता रहे। जो है जहाँ चुपचाप, अपने-आप से लड़ता रहे। जो भी परिस्थितियाँ मिलें, काँटे चुभें कलियाँ खिलें। हारे नहीं इंसान, है संदेश जीवन का यही। सच हम नहीं सच तुम नहीं, सच है महज संघर्ष ही। हमने रचा आओ हमीं अब तोड़ दें इस प्यार को। वह क्या मिलन, मिलना वही जो मोड़ दे मँझधार को। ‘जो नत हुआ वह मृत हुआ’ क्यों कहा गया है?
- (A) झुकना घमंड का परिचायक है।
- (B) झुकना विनम्रता का परिचायक है।
- (C) झुकने वाला मृतक के समान है।
- (D) स्वाभिमान रहित जीवन मृतक के समान है। ✓
Answer (the board’s key): (D)
सच से हट कर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम। जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झर कर कुसुम। जो लक्ष्य भूल रुका नहीं, जो हार देख झुका नहीं। जिसने प्रणय पाथेय माना, जीत उसकी ही रही। सच हम नहीं सच तुम नहीं, सच है महज संघर्ष ही। ऐसा करो जिससे न प्राणों में कहीं जड़ता रहे। जो है जहाँ चुपचाप, अपने-आप से लड़ता रहे। जो भी परिस्थितियाँ मिलें, काँटे चुभें कलियाँ खिलें। हारे नहीं इंसान, है संदेश जीवन का यही। सच हम नहीं सच तुम नहीं, सच है महज संघर्ष ही। हमने रचा आओ हमीं अब तोड़ दें इस प्यार को। वह क्या मिलन, मिलना वही जो मोड़ दे मँझधार को। काव्यांश का संदेश है :
- (A) हर प्रकार की परिस्थिति से समझौता कर स्वयं को ढालने का।
- (B) जीत की संभावना वाले मार्ग पर ही आगे बढ़ने का।
- (C) कैसी भी कठिन परिस्थिति हो उससे हार न मानने का। ✓
- (D) हार की संभावना होने पर नवीन लक्ष्य के निर्माण का।
Answer (the board’s key): (C)
सच से हट कर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम। जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झर कर कुसुम। जो लक्ष्य भूल रुका नहीं, जो हार देख झुका नहीं। जिसने प्रणय पाथेय माना, जीत उसकी ही रही। सच हम नहीं सच तुम नहीं, सच है महज संघर्ष ही। ऐसा करो जिससे न प्राणों में कहीं जड़ता रहे। जो है जहाँ चुपचाप, अपने-आप से लड़ता रहे। जो भी परिस्थितियाँ मिलें, काँटे चुभें कलियाँ खिलें। हारे नहीं इंसान, है संदेश जीवन का यही। सच हम नहीं सच तुम नहीं, सच है महज संघर्ष ही। हमने रचा आओ हमीं अब तोड़ दें इस प्यार को। वह क्या मिलन, मिलना वही जो मोड़ दे मँझधार को। ‘काँटे’ और ‘कलियाँ’ किसके प्रतीक हैं?
- (A) सुख और दुख के।
- (B) दुख और सुख के। ✓
- (C) समृद्धि और उत्कर्ष के।
- (D) निर्माण और पतन के।
Answer (the board’s key): (B)
सच से हट कर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम। जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झर कर कुसुम। जो लक्ष्य भूल रुका नहीं, जो हार देख झुका नहीं। जिसने प्रणय पाथेय माना, जीत उसकी ही रही। सच हम नहीं सच तुम नहीं, सच है महज संघर्ष ही। ऐसा करो जिससे न प्राणों में कहीं जड़ता रहे। जो है जहाँ चुपचाप, अपने-आप से लड़ता रहे। जो भी परिस्थितियाँ मिलें, काँटे चुभें कलियाँ खिलें। हारे नहीं इंसान, है संदेश जीवन का यही। सच हम नहीं सच तुम नहीं, सच है महज संघर्ष ही। हमने रचा आओ हमीं अब तोड़ दें इस प्यार को। वह क्या मिलन, मिलना वही जो मोड़ दे मँझधार को। कथन और कारण पर विचार करते हुए सही विकल्प चुनकर लिखिए : कथन - मानव मात्र का जीवन संघर्षपूर्ण है। कारण - मानव मात्र को अपने जीवन की सम-विषम हर तरह की परिस्थितियों का डटकर सामना करना चाहिए।
- (A) कथन गलत है और कारण सही है।
- (B) कथन और कारण दोनों ही गलत हैं।
- (C) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता है। ✓
Answer (the board’s key): (D)
‘जब बाबू जी रामायण का पाठ करते तब हम उनकी बगल में बैठे रहते’ - इस वाक्य का संयुक्त वाक्य होगा :
- (A) बाबूजी रामायण का पाठ करते और हम उनकी बगल में बैठे रहते। ✓
- (B) जिस समय बाबूजी रामायण का पाठ करते उस समय हम उनकी बगल में बैठे रहते।
- (C) बाबूजी के रामायण का पाठ करते समय हम उनकी बगल में बैठे रहते।
- (D) जब बाबूजी द्वारा रामायण का पाठ किया जाता तब हम भी साथ ही बैठे रहते।
Answer (the board’s key): (A)
‘माँ थाली में दही-भात सानती और बनावटी नाम से कौर बनाकर खिलाती जाती।’ - इसे सरल वाक्य में बदला जाए तो वाक्य होगा :
- (A) माँ जब भी थाली में दही-भात सानती तब बनावटी नाम से कौर बनाकर खिलाती जाती।
- (B) माँ थाली में दाल-भात सानती और छोटे-छोटे कौर बनाकर मुझे खिलाती जाती।
- (C) माँ थाली में दही-भात सानकर बनावटी नाम से कौर बनाकर खिलाती जाती। ✓
- (D) माँ थाली में अपने लिए दही-भात सानती पर कौर बनाकर मुझे खिला देती।
Answer (the board’s key): (C)
निम्नलिखित वाक्यों में से मिश्र वाक्य पहचान कर नीचे दिए गए विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाला विकल्प चुनकर लिखिए: 1. जब दुलारी ने केश बाँध लिए तब उसने खिड़की खोल दी। 2. उसने सिर का पसीना सुखाया और वहीं खड़ी हो गई। 3. टुन्नू जब दरवाज़े पर खड़ा था तब उसके पास एक पोटली थी। 4. उसकी गृहस्थी बड़ी कठिनाई से चल रही थी फिर भी उसे चिंता नहीं थी। विकल्प :
- (A) 1, 2 और 3
- (B) 2, 3 और 4
- (C) 2 और 4
- (D) 1 और 3 ✓
Answer (the board’s key): (D)
निम्नलिखित वाक्यों में से सरल वाक्य का उदाहरण है :
- (A) उसने बंडल निकाला और उसे पकड़ा दिया।
- (B) वहाँ जल-संचय का उचित प्रबंध है। ✓
- (C) तुम जाओ, मैं कल ही लौट जाऊँगा।
- (D) जब बर्फ गिरती है तब मुश्किल होती है।
Answer (the board’s key): (B)
स्तंभ 1 को स्तंभ 2 से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प का चयन कर लिखिए : स्तंभ 1 1. मूर्ति के आसपास का तालाब सुखाकर साफ़ किया गया। 2. उसकी ख्वाब निकाली गई और ताज़ा पानी डाला गया। 3. जब बात हुक्कामों तक पहुँची तब बड़ी खलबली मची। स्तंभ 2 I. मिश्र वाक्य II. संयुक्त वाक्य III. सरल वाक्य विकल्प :
- (A) 1 I 2 II 3 III
- (B) 1 III 2 II 3 I ✓
- (C) 1 II 2 III 3 I
- (D) 1 III 2 I 3 II
Answer (the board’s key): (B)
‘लेखक ने अपने तर्कों से उनकी दलीलों का खंडन किया।’ - वाक्य में वाच्य है :
- (A) कर्मवाच्य
- (B) भाववाच्य
- (C) कर्तृवाच्य ✓
- (D) क्रियावाच्य
Answer (the board’s key): (C)
‘संगतकार द्वारा मुख्य गायक का उत्साह बढ़ाया गया।’ प्रस्तुत वाक्य का वाच्य पहचानिए:
- (A) कर्तृवाच्य
- (B) अकर्मवाच्य
- (C) कर्मवाच्य ✓
- (D) भाववाच्य
Answer (the board’s key): (C)
‘कवि ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन किया है।’ इसका कर्मवाच्य होगा :
- (A) कवि श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन करते हैं।
- (B) कवि द्वारा श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन किया गया है। ✓
- (C) कवि श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कर पाते हैं।
- (D) कवि ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन किया था।
Answer (the board’s key): (B)
निम्नलिखित वाक्यों में भाववाच्य का उदाहरण है/हैं : 1. प्रधानाचार्य द्वारा निर्देश जारी किया गया। 2. उसकी दादी से खड़ा नहीं रहा जाता। 3. सज्जन अपने से बड़ों की सेवा करते हैं। 4. खिलाड़ी से अब दौड़ा नहीं जाता। विकल्प :
- (A) 1, 3 और 4
- (B) 2 और 4 ✓
- (C) 1 और 3
- (D) 3 और 4
Answer (the board’s key): (B)
स्तंभ 1 को स्तंभ 2 से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प का चयन कर लिखिए : स्तंभ 1 (1. घायल पक्षी से उड़ा नहीं जा सका। 2. कवि बादल में क्रांति का स्वर सुनता है। 3. उससे वह गीत नहीं गाया गया।) स्तंभ 2 (I. कर्तृवाच्य II. कर्मवाच्य III. भाववाच्य) विकल्प :
- (A) 1 II 2 III 3 I
- (B) 1 III 2 II 3 I
- (C) 1 III 2 I 3 II ✓
- (D) 1 I 2 II 3 III
Answer (the board’s key): (C)
'शीला जी ने साहित्य का दायरा ही बढ़ा दिया।' - वाक्य में रेखांकित पद (शीला जी) का परिचय है :
- (A) व्यक्तिवाचक संज्ञा, एकवचन, स्त्रीलिंग, 'कर्ता' कारक ✓
- (B) व्यक्तिवाचक संज्ञा, एकवचन, स्त्रीलिंग, 'कर्म' कारक
- (C) जातिवाचक संज्ञा, एकवचन, स्त्रीलिंग, 'कर्ता' कारक
- (D) व्यक्तिवाचक संज्ञा, एकवचन, स्त्रीलिंग, 'करण' कारक
Answer (the board’s key): (A)
'लेखक ने उस घटना को पूरी ईमानदारी से लिखा।' रेखांकित पद (उस) का परिचय होगा :
- (A) पुरुषवाचक सर्वनाम, एकवचन, स्त्रीलिंग, 'कर्म' कारक
- (B) सार्वनामिक विशेषण, एकवचन, स्त्रीलिंग, विशेष्य - 'घटना' ✓
- (C) सार्वनामिक विशेषण, एकवचन, पुल्लिंग, विशेष्य - 'घटना'
- (D) पुरुषवाचक सर्वनाम, एकवचन, पुल्लिंग, 'कर्म' कारक
Answer (the board’s key): (B)
निम्नलिखित में से किस वाक्य में स्थानवाचक क्रियाविशेषण का प्रयोग नहीं हुआ है?
- (A) एक चिड़िया हमारी खिड़की पर डरी-डरी बैठी थी।
- (B) पापा की आवाज़ सुनकर मैं बाहर निकल गया।
- (C) यह खेल तो खुले में ही खेला जा सकता है।
- (D) उस ड्राइवर ने अचानक ज़ोर से ब्रेक लगाई। ✓
Answer (the board’s key): (D)
'कस्बे की नगरपालिका प्रतिवर्ष कुछ नया करती थी।' रेखांकित पद (प्रतिवर्ष) का परिचय है :
- (A) स्थानवाचक क्रियाविशेषण, 'नया करना' क्रिया की विशेषता।
- (B) कालवाचक क्रियाविशेषण, 'करना' क्रिया की विशेषता। ✓
- (C) व्यक्तिवाचक संज्ञा, एकवचन, पुल्लिंग, कर्ता कारक
- (D) व्यक्तिवाचक संज्ञा, एकवचन, पुल्लिंग, कर्म कारक
Answer (the board’s key): (B)
'बचपन में मैं दुबली-पतली और साँवली थी।' रेखांकित पद (मैं) का परिचय है :
- (A) मध्यमपुरुष सर्वनाम, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
- (B) अन्यपुरुष सर्वनाम, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
- (C) सार्वनामिक विशेषण, एकवचन, 'दुबली-पतली' विशेष्य।
- (D) उत्तम पुरुष सर्वनाम, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक। ✓
Answer (the board’s key): (D)
‘पानी परात को हाथ छुयो नहीं, नैनन के जल सों पग धोए।’ इस काव्य-पंक्ति में अलंकार है:
- (A) उत्प्रेक्षा
- (B) श्लेष
- (C) यमक
- (D) अतिशयोक्ति ✓
Answer (the board’s key): (D)
‘धीरे-धीरे उतर क्षितिज से आ बसंती रजनी’ - इस पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है :
- (A) मानवीकरण ✓
- (B) श्लेष
- (C) उत्प्रेक्षा
- (D) अतिशयोक्ति
Answer (the board’s key): (A)
‘विद्या धन उद्यम बिना कहौ जु पावै कौन। बिना डुलाए ना मिले ज्यों पंखा की पौन।।’ इन काव्य-पंक्तियों में किस अलंकार का प्रयोग हुआ है?
- (A) यमक
- (B) श्लेष
- (C) मानवीकरण
- (D) उत्प्रेक्षा ✓
Answer (the board’s key): (D)
‘मृदु मिट्टी के हैं बने हुए मधु घट फूटा ही करते हैं।’ इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है :
- (A) मानवीकरण
- (B) श्लेष ✓
- (C) उत्प्रेक्षा
- (D) यमक
Answer (the board’s key): (B)
निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों में से कौन-सी पंक्ति अतिशयोक्ति अलंकार का उदाहरण है?
- (A) विश्व शलभ सिर धुन कहता मैं, हाय न जल पाया तुझमें मिल।
- (B) अंबर के आनन को देखो, कितने इसके तारे टूटे।
- (C) वह दौड़ रहा अरि मस्तक पर, वह आसमान का घोड़ा था। ✓
- (D) ज्यों-ज्यों बूड़े स्याम रंग, त्यों-त्यों उज्जलु होई।
Answer (the board’s key): (C)
संगतकार मुख्य गायक का साथ क्यों देता है? अनुपयुक्त विकल्प छाँटकर लिखिए :
- (A) उसके समान ही अपनी पहचान बनाने के लिए। ✓
- (B) प्रदर्शन के दौरान उसका उत्साह बढ़ाने के लिए।
- (C) उसके प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए।
- (D) उसके स्वर को सहारा देने के लिए।
Answer (the board’s key): (A)
‘यह दंतुरित मुसकान’ कविता में बच्चे द्वारा पिता को एकटक देखे जाने का क्या कारण था?
- (A) ऐसे एकटक देखना उसका स्वभाव था।
- (B) उसे पलकें झपकाना नहीं आता था।
- (C) वह उन्हें पहचानने की कोशिश कर रहा था। ✓
- (D) वह उनकी उपेक्षा करने का प्रयास कर रहा था।
Answer (the board’s key): (C)
बिस्मिल्ला खाँ काशी छोड़कर क्यों नहीं जाना चाहते थे? अनुपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए:
- (A) उनकी जन्मभूमि और कर्मभूमि होने के कारण उन्हें काशी से विशेष लगाव था।
- (B) अपने पुरखों के समान वे भी काशी के बालाजी से जुड़े रहना चाहते थे।
- (C) काशी से दूर जाने पर उन्हें स्वयं पर विश्वास कम प्रतीत होने लगता था। ✓
- (D) बाबा विश्वनाथ और गंगा मइया के कारण, दोनों ही काशी में, जिनसे उनका लगाव था।
Answer (the board’s key): (C)
‘लखनवी अंदाज़’ पाठ के आधार पर लिखिए कि लेखक को नवाब साहब ‘नयी कहानी’ के लेखक कब लगे?
- (A) उन्हें पहली बार रेलगाड़ी के डिब्बे में देखकर।
- (B) उन्हें खीरा खाने की तैयारी करते हुए देखकर।
- (C) उन्हें खीरा सूंघकर उसका रसास्वादन करते देखकर।
- (D) उनके बिना खीरा खाए ही ऊँची डकार को सुनकर। ✓
Answer (the board’s key): (D)
Section B · Written questions (21)
नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।। आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।। सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई।। सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहस्रबाहु सम सो रिपु मोरा।। सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।। सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने।। बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।। येहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।। रे नृपबालक कालबस बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम त्रिपुरारिधनु बिदित सकल संसार।। ‘नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा’ - पंक्ति के संदर्भ में राम के चरित्र की कौन-सी विशेषता प्रकट होती है?
- (A) संयम
- (B) सरलता
- (C) विनम्रता ✓
- (D) वीरता
Answer (the board’s key): (C)
नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।। आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।। सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई।। सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहस्रबाहु सम सो रिपु मोरा।। सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।। सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने।। बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।। येहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।। रे नृपबालक कालबस बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम त्रिपुरारिधनु बिदित सकल संसार।। परशुराम ने शिव धनुष तोड़ने वाले को क्या चेतावनी दी?
- (A) सहस्रबाहु के समान उसे अपना शत्रु समझने की ✓
- (B) राजा जनक की सभा से बाहर निकल आने की
- (C) राजा जनक की सभा में उसे मार डालने की
- (D) उसके साथ आजीवन शत्रुतापूर्ण व्यवहार करने की
Answer (the board’s key): (A)
नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।। आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।। सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई।। सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहस्रबाहु सम सो रिपु मोरा।। सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।। सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने।। बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।। येहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।। रे नृपबालक कालबस बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम त्रिपुरारिधनु बिदित सकल संसार।। ‘न त मारे जैहहिं सब राजा’ - यह कथन परशुराम के ________ उदाहरण है।
- (A) शौर्य का
- (B) अहंकार का ✓
- (C) क्रोध का
- (D) गौरव का
Answer (the board’s key): (B)
नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।। आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।। सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई।। सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहस्रबाहु सम सो रिपु मोरा।। सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।। सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने।। बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।। येहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।। रे नृपबालक कालबस बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम त्रिपुरारिधनु बिदित सकल संसार।। सेवक किसे कहा गया है?
- (A) मधुर वचन बोलने वाले को
- (B) सेवा करने वाले को ✓
- (C) कभी क्रोध न करने वाले को
- (D) विनम्रतापूर्ण व्यवहार करने वाले को
Answer (the board’s key): (B)
नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।। आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।। सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई।। सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहस्रबाहु सम सो रिपु मोरा।। सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।। सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने।। बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।। येहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।। रे नृपबालक कालबस बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम त्रिपुरारिधनु बिदित सकल संसार।। परशुराम की धनुष पर ममता होने का क्या कारण था?
- (A) उनके आराध्य शिव का धनुष होना ✓
- (B) उनके गुरु विश्वामित्र का धनुष होना
- (C) अपने पिता का आशीर्वाद समझना
- (D) धनुष का अत्यंत प्राचीन होना
Answer (the board’s key): (A)
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए : (i) "बंद करो अब इस मन्नू का घर से निकलना।" गद्यांश में यह निर्देश किसे दिया गया है? (ii) पिताजी के भभकने का क्या कारण था? (iii) उपर्युक्त गद्यांश की भाषा है - (iv) हड़ताल का आह्वान क्यों किया जा रहा था? (v) पूरा छात्र-वर्ग चौपड़ पर क्यों एकत्रित हुआ?

Medha Ma’am
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Model answer · Ek Kahani Yeh Bhi passage
- 1.(i) उत्तर – (A) माँ को। मित्र के चले जाने के बाद पिता जी ने गुस्से में माँ से कहा, "बंद करो अब इस मन्नू का घर से बाहर निकलना।"1 mark
- 2.(ii) उत्तर – (C) पिताजी के मित्र द्वारा मन्नू की शिकायत। पिता जी के एक निहायत दकियानूसी मित्र ने घर आकर उनसे शिकायत की कि मन्नू उलटे-सीधे लड़कों के साथ हड़तालें करवाती और हुड़दंग मचाती फिर रही है। उन्होंने मान-मर्यादा और इज़्ज़त-आबरू की बात भी उठाई। इसी कारण पिता जी सारे दिन भभकते रहे।1 mark
- 3.(iii) उत्तर – (C) मुहावरेदार भाषा। गद्यांश में 'लू उतारना', 'आग लगाना', 'भभकना', 'थू-थू करना' और 'मत मारी जाना' जैसे मुहावरों का प्रयोग हुआ है, जिनसे रचना रोचक बनी है।1 mark
- 4.(iv) उत्तर – (A) आज़ाद हिंद फ़ौज के खिलाफ़ मुकदमे के विरोध में। उन दिनों आज़ाद हिंद फ़ौज पर मुकदमा चल रहा था। इसलिए सभी कॉलेजों, स्कूलों और दुकानों के लिए हड़ताल का आह्वान था, और छात्रों का एक बड़ा समूह जगह-जगह जाकर हड़ताल करवा रहा था।1 mark
- 5.(v) उत्तर – (A) आयोजित हड़ताल के समर्थन के लिए। शाम को अजमेर का पूरा विद्यार्थी-वर्ग चौपड़ (मुख्य बाज़ार का चौराहा) पर इकट्ठा हुआ। वहाँ हड़ताल के समर्थन में भाषणबाज़ी हुई।1 mark
- हर भाग में विकल्प का अक्षर और उसका पूरा उत्तर लिखिए, जैसे "(C) मुहावरेदार भाषा"।
- भाग (iii) में गद्यांश के मुहावरे लिखिए, जैसे 'लू उतारना', 'आग लगाना' और 'थू-थू करना'।
- भाग (iv) में "आज़ाद हिंद फ़ौज के खिलाफ़ मुकदमे" के शब्द पूरे लिखिए।
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'नेताजी का चश्मा' पाठ के संदर्भ में लिखिए कि पान वाले ने कैप्टन को 'पागल' क्यों कहा?

Medha Ma’am
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Model answer · pan seller calling Captain mad
- 1.पान वाले ने कैप्टन को पागल इसलिए कहा क्योंकि कैप्टन बिना किसी स्वार्थ के नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगाता था। वह नेताजी की मूर्ति की आँखों पर लगे चश्मे के टूट जाने पर बार-बार उसे बदलता रहता था, कभी सरकंडे का चश्मा तक बना देता था, जबकि इसमें उसका कोई निजी लाभ नहीं था।1 mark
- 2.कैप्टन की देशभक्ति को पान वाला समझ नहीं पाया और उसकी इस हरकत को उसने पागलपन मान लिया। उसकी नज़र में यह एक व्यर्थ काम था, क्योंकि मूर्ति पर असली चश्मा टिक नहीं पाता था और कैप्टन फिर भी बिना थके इस काम में लगा रहता था, इसी कारण पानवाला उसे पागल कहता था।1 mark
- पहले बिंदु में 'बिना स्वार्थ' और 'नेताजी की मूर्ति' शब्द अवश्य लिखें।
- चश्मा बदलने और सरकंडे के चश्मे का उल्लेख करना न भूलें।
- दूसरे बिंदु में 'देशभक्ति', 'पागलपन' और 'व्यर्थ काम' जैसे शब्द स्पष्ट रूप से लिखें।
Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme
'संस्कृति' पाठ से ली गई पंक्ति 'संस्कृति के नाम से जिस कूड़े-करकट के ढेर का बोध होता है,....।' में 'कूड़े-करकट' से क्या अभिप्राय है?

Medha Ma’am
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Model answer · meaning of phrase, Sanskriti essay
- 1.'कूड़े-करकट' से अभिप्राय उन पुरानी और अनुपयोगी परंपराओं या रूढ़ियों से है जो समय के साथ अर्थहीन हो गई हैं। समाज में ऐसी व्यर्थ और अर्थहीन मान्यताएँ जमा हो गई हैं जिन्हें लोग भ्रम में पड़कर संस्कृति समझ लेते हैं, जबकि वे वास्तविक संस्कृति नहीं हैं।1 mark
- 2.यह उन आडंबरों और दिखावे की संस्कृति को भी दर्शाता है जो समाज की प्रगति में बाधक हैं। इस प्रकार की रूढ़ियाँ और आडंबर केवल दिखावे के लिए निभाए जाते हैं और समाज को आगे बढ़ने से रोकते हैं, इसलिए इन्हें कूड़ा-करकट कहा गया है।1 mark
- पहले बिंदु में 'अनुपयोगी परंपराएं', 'रूढ़ियाँ' और 'अर्थहीन' शब्द अवश्य लिखें।
- दूसरे बिंदु में 'आडंबर', 'दिखावा' और 'बाधक' शब्द अवश्य लिखें।
- दोनों बिंदुओं में अलग-अलग भाव लिखें, एक बात को दोबारा न लिखें।
Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme
बिस्मिल्ला खाँ का जीवन वर्तमान और भावी पीढ़ी को क्या संदेश देता है?
How the model answer begins
1. बिस्मिल्ला खाँ का जीवन हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति समर्पित रहने का संदेश देता है। उन्होंने पूरे अस्सी बरस संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा और सुर की साधना को ही अपनी…
The full answer from Medha Ma’am →'बालगोबिन भगत' पाठ के आधार पर लिखिए कि अपनी पतोहू के प्रति बालगोबिन भगत का व्यवहार उनके किन गुणों को उजागर करता है?
How the model answer begins
1. बालगोबिन भगत का अपनी पतोहू के प्रति व्यवहार उनकी संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है। वे अपनी पतोहू के दुख और भविष्य के प्रति सजग थे और उन्होंने एक पुत्रवधू के साथ पिता जैसा नहीं बल्कि एक संवेदनशील, उदार…
The full answer from Medha Ma’am →'आत्म कथ्य' कविता से ली गई 'अनंत नीलिमा में असंख्य जीवन इतिहास' पंक्ति का क्या आशय है?
How the model answer begins
1. 'अनंत नीलिमा में असंख्य जीवन इतिहास' पंक्ति का आशय यह है कि इस संसार रूपी अनंत विस्तार में अनगिनत लोगों ने अपने जीवन के सुख-दुख और अनुभवों की गाथाएं लिखी हैं। कवि कहना चाहता है कि इस अनंत नीलिमा में असंख्य जीवन के…
The full answer from Medha Ma’am →'उत्साह' कविता के शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालिए
How the model answer begins
1. 'उत्साह' कविता में नागार्जुन के स्थान पर निराला ने बादल को संबोधित करते हुए उसे बार-बार गरजने का आह्वान किया है। कविता में बादल एक तरफ़ पीड़ित-प्यासे जन की आकांक्षा को पूरा करने वाला है, तो दूसरी तरफ़ वही बादल नयी…
The full answer from Medha Ma’am →सूरदास के 'पद' के अनुसार गोपियों को ऐसा क्यों लगा कि कृष्ण ने राजनीति पढ़ ली है?
How the model answer begins
1. गोपियों को कृष्ण के व्यवहार में छल-कपट और चतुरता दिखाई दी, जो राजनीति का मुख्य लक्षण है। मथुरा जाने के बाद कृष्ण स्वयं न लौटकर उद्धव के जरिए संदेश भेजते हैं, जिससे गोपियों को लगा कि वे अपने स्वार्थ के कारण सीधे न आकर…
The full answer from Medha Ma’am →फागुन मास में प्रकृति के सौंदर्य का वर्णन, 'अट नहीं रही है' कविता के आधार पर कीजिए
How the model answer begins
1. 'अट नहीं रही है' कविता में फागुन की मादकता और सुंदरता चारों ओर फैली हुई दिखाई देती है। कवि कहता है कि फागुन की आभा तन में अट नहीं रही है अर्थात उसका सौंदर्य इतना अधिक है कि वह शरीर में समा नहीं पा रहा। यह सुंदरता…
The full answer from Medha Ma’am →'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ में लेखिका को कब और क्यों लगा कि तमाम भौगोलिक विविधता और वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद भारत की आत्मा एक ही है?
How the model answer begins
1. यूमथांग की यात्रा में रास्ते में लेखिका ने एक कुटिया में घूमता हुआ चक्र देखा, जिसे धर्म चक्र या प्रेयर व्हील कहते हैं।
The full answer from Medha Ma’am →'माता का अंचल' पाठ में जिस ग्राम्य जीवन और संस्कृति का उल्लेख है, उसमें वर्तमान में क्या अंतर आया है? क्या उस अंतर को आप सकारात्मक मानते हैं?
How the model answer begins
1. 'माता का अंचल' पाठ में वर्णित ग्राम्य जीवन में बच्चों का खेल-कूद, प्रकृति से जुड़ाव और सामूहिक सामाजिक परिवेश प्रमुख था। बच्चे खेतों, पेड़ों और गाँव की गलियों में सहजता के साथ खुलकर खेलते थे और पूरा गाँव एक सामूहिक…
The full answer from Medha Ma’am →'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए कि क्या एक रचनाकार और उसकी रचनाएँ बाहरी दबाव से भी प्रभावित हो सकती हैं? आपकी दृष्टि में वे कौन-से बाहरी दबाव हैं जो रचनाकार की रचना को प्रभावित करते हैं?
How the model answer begins
1. हाँ, रचनाकार और उसकी रचनाएँ बाहरी दबाव से भी प्रभावित हो सकती हैं। अज्ञेय मानते हैं कि लेखन का मूल कारण लेखक की आंतरिक विवशता है, फिर भी कृतिकार बाहरी दबाव से पूरी तरह अप्रभावित नहीं रहता।
The full answer from Medha Ma’am →निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए : (क) साइबर सुरक्षा : जागरूकता ही समाधान भूमिका, अर्थ, वर्तमान में चर्चा का कारण, जागरूकता का प्रभाव (ख) सौर ऊर्जा : सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा भूमिका, स्रोत, देश के लिए क्यों आवश्यक, लाभ (ग) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस भूमिका, उद्देश्य, संसार की लगभग आधी आबादी, महिलाओं की स्थिति पर प्रभाव
(क) आप चंदा/चंदन हैं। खराब जीवनशैली के कारण आपके मित्र का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। संयमित और स्वस्थ जीवनशैली का महत्त्व बताते हुए लगभग 100 शब्दों में उसे एक पत्र लिखिए। अथवा (ख) पुलिस द्वारा उठाए गए विविध कदमों से शहर में अपराध कम तो हुआ है पर अभी और सुधार की आवश्यकता है। अपने क्षेत्र के दैनिक समाचार पत्र के संपादक को लगभग 100 शब्दों में पत्र लिखकर जन सामान्य का ध्यान इस ओर दिलाइए कि अपराध पर अंकुश सिर्फ पुलिस की ही नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
How the model answer begins
1. पत्र के आरंभ में प्रेषक का पता (परीक्षा भवन, क ख ग नगर), खाली दिनांक, 'प्रिय मित्र' संबोधन और 'सप्रेम नमस्ते' अभिवादन है। अंत में 'तुम्हारा अभिन्न मित्र' और नाम 'चंदन' लिखा है। इससे प्रारूप का अंक मिलता है।
The full answer from Medha Ma’am →(क) आप रजनी/राजन हैं। आपके विद्यालय की पत्रिका 'प्रखर' के लिए छात्र संपादक की नियुक्ति होनी है। आप उक्त पद के योग्य हैं। इस पद के लिए प्रधानाचार्य को संबोधित कर लगभग 80 शब्दों में अपना एक संक्षिप्त स्ववृत्त तैयार कीजिए। अथवा (ख) आप राजन/रजनी हैं। अपने बैंक खाते में नेट बैंकिंग की सुविधा प्राप्त करने के लिए संबंधित शाखा प्रबंधक को लगभग 80 शब्दों में एक ई-मेल लिखिए।
(क) राज्य परिवहन निगम की ओर से सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता के लिए लगभग 40 शब्दों में एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए। अथवा (ख) आपके कक्षाध्यापक का चयन उप प्रधानाध्यापक के पद पर हुआ है। उन्हें बधाई देते हुए लगभग 40 शब्दों में संदेश लिखिए।
How the model answer begins
1. विज्ञापन चौखटे की सजावट में है। उसमें बड़ा शीर्षक 'सड़क सुरक्षा अभियान', नारा 'सावधानी हटी, दुर्घटना घटी' और बिंदुवार संदेश हैं, इसलिए वह आकर्षक बना है।
The full answer from Medha Ma’am →
The same preparation, with Medha Ma’am — on your phone
Every question of every chapter with its model answer, practice questions in the board’s own shapes, 60 minutes of class a day, written answers marked, a test every Sunday and a WhatsApp report to parents.
Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.