Ask Medha

CBSE Class 10 · Hindi A · board exam 2027

Chapter 2: अपठित काव्यांश

This chapter’s questions from CBSE’s real papers of 2023–2026 — the 20 asked most often, 3 with the full model answer, 15 with how the answer begins — and objective questions with the board’s key. All 28 questions of this chapter, with answers, are in the app.

marks a year (about)
6
questions a year (about)
2
rank in Hindi A
#3

From 4 years of papers, 2023–2026 · full chapter-wise marks

Important questions — the ones the board asked most (20)

  1. Q1Case-based7 marksAsked: 2026

    निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : गाँव में वो दिन था इतवार। मैं नन्हीं पीढ़ी का हाथ थाम निकल गई बाज़ार। सूखे दरख़्तों के बीच देख एक पतली पगडंडी मैंने नन्हीं पीढ़ी से कहा देखो, यही थी कभी गाँव की नदी। आगे देख ज़मीन पर बड़ी सी दरार मैंने कहा, इसी में समा गए सारे पहाड़। नन्हीं पीढ़ी दौड़ी : हम आ गए बाज़ार! क्या-क्या लेना है? पूछने लगा दुकानदार। भैया! थोड़ी बारिश, थोड़ी गीली मिट्टी, एक बोतल नदी, वो डिब्बाबंद पहाड़ उधर दीवार पर टँगी एक प्रकृति भी दे दो, और ये बारिश इतनी महँगी क्यों? दुकानदार बोला : यह नमी यहाँ की नहीं! दूसरे ग्रह से आई है, मंदी है, छटाँक भर मँगाई है। पैसे निकालने को साड़ी की कोर टटोली चौंकी! देखा आँचल की गाँठ में रुपयों की जगह पूरा वजूद मुड़ा पड़ा था... (iv) 'नन्हीं पीढ़ी' का अर्थ स्पष्ट करते हुए लिखिए कि उसे साथ लेकर जाने का क्या कारण था? (v) कविता जिन खतरों की ओर इशारा कर रही है उनसे बचने के दो प्रभावी उपाय लिखिए।

    Medha Ma’am

    Medha Ma’am

    Ask Medha’s AI teacher

    Model answer · unseen poem, nature destruction

    1. 1.(i) (D) जीवन से प्रकृति और उसका साहचर्य गायब होना1 mark
    2. 2.(ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या है।1 mark
    3. 3.(iii) (D) I और II सही हैं।1 mark
    4. 4.(iv) 'नन्हीं पीढ़ी' का अर्थ है भावी पीढ़ी, अर्थात् बच्चे। कवयित्री उसे साथ इसलिए ले गई ताकि उसे दिखा सके कि जहाँ आज सूखी पगडंडी और दरार है, वहाँ कभी नदी और पहाड़ थे। इस प्रकार वह भावी पीढ़ी को प्रकृति के विनाश और उसके खतरों से सचेत करना चाहती थी, उसके मन में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और प्रकृति-संरक्षण की भावना जगाना चाहती थी तथा उसे बाज़ारीकरण के खतरों से भी परिचित कराना चाहती थी।2 marks
    5. 5.(v) कविता प्रकृति के विनाश और उसके बाज़ारीकरण के खतरों की ओर इशारा करती है। इनसे बचने के दो प्रभावी उपाय ये हैं— 1. पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने वाले कार्यक्रम, जैसे नुक्कड़ नाटक और जागरूकता रैलियाँ, आयोजित किए जाएँ, ताकि लोग प्रकृति का महत्त्व समझें। 2. बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया जाए और नदियों तथा पहाड़ों का अंधाधुंध दोहन रोककर उनका संरक्षण किया जाए।2 marks
    • प्रश्न (iv) के दोनों भाग लिखिए: पहले 'नन्हीं पीढ़ी' का अर्थ (भावी पीढ़ी या बच्चे), फिर उसे साथ ले जाने का कारण।
    • प्रश्न (v) में दो अलग-अलग उपाय क्रम से लिखिए, जैसे जागरूकता कार्यक्रम (नुक्कड़ नाटक) और वृक्षारोपण।
    • बहुविकल्पी प्रश्नों में विकल्प का अक्षर और उसका पूरा उत्तर दोनों लिखिए।

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  2. Q2Case-based7 marksAsked: 2026

    निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए : (काव्यांश का पाठ दिया गया है) तुम्हारे लगाए आम फल आए हैं बेटी घर आना तुम्हारी पाली बकरियों ने बच्चे दिए हैं बेटी घर आना घर आना कि अबकी बारिश में भरपूर फ़सल होने वाली है फूल रहा है सनई जमकर सेम में फलियाँ आई हैं अपनी शक्ति में यही भर है प्यार से बुलाती हूँ अपनी माँ को याद करना बेटी घर आना आँगन उदास है घर के चौखट तुम्हारा रस्ता देखते हैं आम, फ़सलें और पेड़-पशु सब कहानी है असल बात जो तुम्हें बतानी है तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाते हैं पर कह नहीं पाते हैं अकेले में सिसकते हैं, बुदबुदाते हैं बेटी घर आना।

    Medha Ma’am

    Medha Ma’am

    Ask Medha’s AI teacher

    Model answer · unseen poem, daughter's homecoming

    1. 1.(i) (D) बेटी के पिता उसे बहुत अधिक याद कर रहे हैं।1 mark
    2. 2.(ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।1 mark
    3. 3.(iii) (A) केवल I सही है।1 mark
    4. 4.(iv) पिता अपनी बेटी को बुलाना चाहते हैं, पर कह नहीं पाते। इसका कारण यह है कि हमारे पितृसत्तात्मक समाज में पुरुष से कठोर बने रहने की अपेक्षा की जाती है। पुराने संस्कारों और मर्यादा के पालन का दबाव तथा भावनाएँ प्रकट करने में पुरुषोचित संकोच उन्हें अपने मन की बात कहने से रोकते हैं। इसीलिए वे अकेले में सिसकते और बुदबुदाते हैं।2 marks
    5. 5.(v) आशय : 'आँगन उदास है, घर के चौखट तुम्हारा रस्ता देखते हैं' पंक्ति का आशय है कि बेटी के बिना घर-परिवार में उदासी और सूनापन छाया है और सब उसके आने का इंतज़ार कर रहे हैं। प्रभाव : इस पंक्ति से पता चलता है कि घर में बेटी की कमी बहुत खल रही है। माता-पिता ही नहीं, घर का आँगन और चौखट भी उदास होकर उसकी राह देख रहे हैं।2 marks
    • बहुविकल्पीय प्रश्नों में विकल्प का अक्षर और उसका पूरा कथन, दोनों लिखिए।
    • प्रश्न (iv) में पिता के न कह पाने के कारण लिखिए, जैसे पुरुषोचित संकोच, मर्यादा का दबाव और रूढ़िवादी सोच।
    • प्रश्न (v) में 'आशय' और 'प्रभाव' दोनों हिस्से अलग-अलग शीर्षक देकर लिखिए।

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  3. Q3Short answer7 marksAsked: 2026

    निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए : आदमी हो, स्नेह-बाती बन नया दीपक जलाना । दर्द की परछाइयों के दानवी बंधन हटाना । छटपटाती ज़िंदगी को चेतना संगीत देना । विश्व को नवपंथ देना; हारते को जीत देना । आदमी हो, बुझ रहे ईमान को विश्वास देना । मुस्कुराकर वाटिका में मधुभरा मधुमास देना । शूल के बदले जगत को फूल की सौगात देना । जो पिछड़ता हो उसे नवशक्ति देना, साथ देना । आदमी हो, डूबते मँझधार में पतवार देना । थक चला विश्वास साथी, आस्था आधार देना । क्रांति का संदेश देकर राह युग की मोड़ देना । फिर नया मानव बनाना, रूढ़ियों को तोड़ देना । आदमी हो, द्वेष के तूफ़ान को हँसकर मिटाना । कंठ-भर विषपान करना, किंतु सबको प्यार देना । मेटना मजबूरियों को; दीन को आधार देना । खाइयों को पाटना; बिछड़े दिलों को जोड़ देना । (i) (i) काव्यांश में ‘आदमी हो’ की पुनरावृत्ति क्यों की गई है ? इस प्रश्न के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए : I. मानवोचित काम करने का आग्रह करने के लिए II. पिछड़े हुए व्यक्तियों को नवशक्ति देने के लिए III. रूढ़ियों को तोड़ देने के लिए IV. आदमी होने की याद दिलाने के लिए विकल्प : (ii) (ii) ‘शूल के बदले फूल देना’ का आशय है : (iii) (iii) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : जो पिछड़ता हो उसे नवशक्ति देना, साथ देना । कारण : जीवन में किसी भी कारण से पिछड़ा व्यक्ति हताश हो जाता है । विकल्प :

    Medha Ma’am

    Medha Ma’am

    Ask Medha’s AI teacher

    Model answer · unseen poem, comprehension

    1. 1.(i) (A) कथन I सही है। अर्थात 'आदमी हो' की पुनरावृत्ति मानवोचित काम करने का आग्रह करने के लिए की गई है।1 mark
    2. 2.(ii) (C) दुखों के बदले सुख देना।1 mark
    3. 3.(iii) (C) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।1 mark
    4. 4.(iv) कवि मनुष्य से अपेक्षा करता है कि वह समाज में बदलाव लाए। पहला बिंदु : वह पुरानी रूढ़ियों को तोड़कर समाज को नई दिशा दे और नया मानव बनाए।2 marks
    5. 5.दूसरा बिंदु : वह क्रांति का संदेश देकर युग की राह मोड़े और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाए।2 marks
    • बहुविकल्पी प्रश्नों में विकल्प का अक्षर (A, C आदि) और उसका पूरा कथन दोनों लिखिए।
    • दो अंक वाले प्रश्न में काव्यांश की पंक्तियों के आधार पर दो अलग-अलग बिंदु लिखिए, जैसे रूढ़ियाँ तोड़कर नई दिशा देना और क्रांति से सकारात्मक परिवर्तन लाए।

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  4. Q4Case-based7 marksAsked: 2026

    निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर ! वह मुसाफिर क्या जिसे कुछ शूल ही पथ के थका दें ? हौसला वह क्या जिसे कुछ मुश्किलें पीछे हटा दें ? वह प्रगति भी क्या जिसे कुछ रंगीन कलियाँ तितलियाँ मुस्कुराकर गुनगुनाकर ध्येय-पथ, मंजिल भुला दें ? ज़िंदगी की राह पर केवल वही पंथी सफल है, आँधियों में, बिजलियों में जो रहे अविचल मुसाफिर ! पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर ।। जानता जब तू कि कुछ भी हो तुझे बढ़ना पड़ेगा, आँधियों से ही न खुद से भी तुझे लड़ना पड़ेगा, सामने जब तक पड़ा कर्त्तव्य-पथ तब तक मनुज ओ ! मौत भी आए अगर तो मौत से भिड़ना पड़ेगा, है अधिक अच्छा यही फिर पंथ पर चल मुस्कुराता, मुस्कुराती जाए जिससे ज़िंदगी असफल मुसाफिर ! पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर ! (i) कवि किसको मुस्कुराकर चलने के लिए कह रहे हैं ? (1) (A) सफ़ल मुसाफिर को (B) असफ़ल मुसाफिर को (C) अविचल मुसाफिर को (D) साहसी मुसाफिर को (ii) 'वह मुसाफिर क्या जिसे कुछ शूल ही पथ के थका दें ?' पंक्ति में 'पथ के शूल' का अर्थ है : (1) उचित विकल्प का चयन कीजिए - (I) पथ की बाधाएँ (II) पथ की असफ़लताएँ (III) पथ की सरलता (IV) पथ की सफ़लता विकल्प : (A) विकल्प (I) और (II) सही हैं । (B) विकल्प (I), (II) और (III) सही हैं । (C) विकल्प (I), (III) और (IV) सही हैं । (D) केवल विकल्प (IV) सही है । (iii) निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन करके लिखिए : (1) कथन : 'मौत भी आए अगर तो मौत से भिड़ना पड़ेगा' कारण : मनुष्य जब कर्त्तव्य पथ पर चलता है तो उसे हर कठिन परिस्थिति का सामना करना पड़ता है । विकल्प : (A) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है । (B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं । (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है । (D) कथन सही है, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है । (iv) 'आँधियों से ही नहीं खुद से भी तुझे लड़ना पड़ेगा' पंक्ति से क्या अभिप्राय है ? (2) (v) काव्यांश में प्रयुक्त 'मुस्कुराकर चलने' से क्या आशय है ? (2)

    How the model answer begins

    1. (B) असफल मुसाफिर को — 'है अधिक अच्छा यही फिर पंथ पर चल मुस्कुराता, मुस्कुराती जाए जिससे ज़िंदगी असफल मुसाफिर!'

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  5. Q5Short answer7 marksAsked: 2026

    निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर ! वह मुसाफिर क्या जिसे कुछ शूल ही पथ के थका दें ? हौसला वह क्या जिसे कुछ मुश्किलें पीछे हटा दें ? वह प्रगति भी क्या जिसे कुछ रंगीन कलियाँ तितलियाँ मुस्कुराकर गुनगुनाकर ध्येय-पथ, मंजिल भुला दें ? ज़िंदगी की राह पर केवल वही पंथी सफल है, आँधियों में, बिजलियों में जो रहे अविचल मुसाफिर ! पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर !! जानता जब तू कि कुछ भी हो तुझे बढ़ना पड़ेगा, आँधियों से ही न खुद से भी तुझे लड़ना पड़ेगा, सामने जब तक पड़ा कर्त्तव्य-पथ तब तक मनुज ओ ! मौत भी आए अगर तो मौत से भिड़ना पड़ेगा, है अधिक अच्छा यही फिर पंथ पर चल मुस्कुराता, मुस्कुराती जाए जिससे ज़िंदगी असफल मुसाफिर ! पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर ! (i) कवि किसको मुस्कुराकर चलने के लिए कह रहे हैं ? (A) सफल मुसाफिर को (B) असफल मुसाफिर को (C) अविचल मुसाफिर को (D) साहसी मुसाफिर को (ii) 'वह मुसाफिर क्या जिसे कुछ शूल ही पथ के थका दें ?' पंक्ति में 'पथ के शूल' का अर्थ है : उचित विकल्प का चयन कीजिए - (I) पथ की बाधाएँ (II) पथ की असफ़लताएँ (III) पथ की सरलता (IV) पथ की सफ़लता विकल्प : (A) विकल्प (I) और (II) सही हैं । (B) विकल्प (I), (II) और (III) सही हैं । (C) विकल्प (I), (III) और (IV) सही हैं । (D) केवल विकल्प (IV) सही है । (iii) निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन करके लिखिए : कथन : 'मौत भी आए अगर तो मौत से भिड़ना पड़ेगा' कारण : मनुष्य जब कर्त्तव्य पथ पर चलता है तो उसे हर कठिन परिस्थिति का सामना करना पड़ता है । विकल्प : (A) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है । (B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं । (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है । (D) कथन सही है, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है । (iv) 'आँधियों से ही नहीं खुद से भी तुझे लड़ना पड़ेगा' पंक्ति से क्या अभिप्राय है ? (v) काव्यांश में प्रयुक्त 'मुस्कुराकर चलने' से क्या आशय है ?

  6. Q6Case-based7 marksAsked: 2026

    निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : तुम्हें पता है ? धरती माँ की काया यों तो कोरा पत्थर है, माटी है । ऊँचे पर्वत जैसा माथा गहरे मन जैसी घाटी है समतल ये मैदान कि जैसे गोद हमारी माता की है दूध धार-सी नदियाँ हैं । माणिक मोती जैसे रत्नों की मंजूषा है फैला सागर । पर क्या तुमने इस काया के बंजर देखे ? भुनती तपती रेत भभकती भट्टी जैसी ? तुमने मुझे जहाँ से काटा, खोदा और उखाड़ा जड़ से वंशनाश कर मुझे मिटाया । अब बोलो, कैसे लगता है ? वहाँ कभी रहने बसने को मन करता है उस बंजर में - उस मरुस्थल में ? रुको, रुको सोचो, क्षण भर रुको । मैं अपनी धरती माता का रक्षा-कवच वृक्ष हूँ भाई ! मुझे न काटो मैं तुम्हारा वृक्षमित्र हूँ । (i) इस कविता का वर्ण्य विषय क्या है ? (A) देश-प्रेम (B) प्रकृति-प्रेम (C) मरुस्थल (D) धरती माँ (ii) उपर्युक्त कविता हमें धरती के प्रति कैसी भावना रखने के लिए प्रेरित करती है ? इस प्रश्न के उत्तर के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए : (I) सम्मान की भावना (II) कृतज्ञता की भावना (III) रक्षा की भावना (IV) परोपकार की भावना विकल्प : (A) कथन (I) और (II) सही हैं । (B) कथन (I), (II) और (III) सही हैं । (C) कथन (I), (III) और (IV) सही हैं । (D) केवल कथन (IV) सही है । (iii) निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन करके लिखिए : कथन : रत्नों की मंजूषा है फैला सागर । कारण : सागर न केवल पानी का विशाल स्रोत है, बल्कि यह भोजन, खनिज, रत्न, ऊर्जा और परिवहन का भी एक महत्वपूर्ण स्रोत है । विकल्प : (A) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है । (B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं । (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है । (D) कथन सही है, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है । (iv) 'धरती माँ की काया यों तो, कोरा पत्थर है, माटी है' - पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए । (v) धरती माँ का कवच किसे और क्यों कहा गया है ?

    How the model answer begins

    1. (i) (D) धरती माँ

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  7. Q7Case-based7 marksAsked: 2025

    निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए : संध्या ने मेघों के कितने चित्र बनाये — हाथी, घोड़े, पेड़, आदमी, जंगल, क्या-क्या नहीं रच दिया और कभी रंगों से क्रीड़ा की, आकृतियाँ नहीं बनायीं । कभी चलाए झीने से बादल जिनमें चटकीली लाली उभर उठी थी, जिनकी आभा हरियाली पर थिरक उठी थी । जाते-जाते क्षितिज-पटी पर सूरज ने सोना बरसाया । छाया काली बढ़ने लगी, रंग धीरे-धीरे फिर बदले, पेंसिल के रेखा-चित्रों से बादल छाए । विविध रूप आकार बदलते से, ज्यों न्हाए हुए प्रकाश और छाया में, अपना पद ले । रात उतर आयी, दिखलायी दिये सितारे, पेड़, गाँव अस्पष्ट दिखे, मानव-दृग हारे । (i) संध्या के आसमान के बारे में कवि का क्या कहना है ? (1) (A) आसमान को काले मेघों ने आच्छादित कर लिया है। (B) चारों तरफ रंगों और आकृतियों की भीड़ है। (C) आसमान में मेघों ने विभिन्न आकृतियाँ बनाईं। (D) पशुओं की आकृतियों को बना उनमें रंग भरा। (ii) क्षितिज-पटी का रूप बार-बार क्यों बदलता रहा ? (1) I. प्रकाश और छाया के बदलते स्वरूप के कारण II. संध्या के सूर्य की बदलती रोशनी और रंगों के कारण III. आसमान में बादलों से बनी हाथी, घोड़े, पेड़ आदि आकृतियों के कारण विकल्प : (A) केवल I और II (B) I, II और III सभी (C) केवल II और III (D) केवल I और III (iii) कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए : (1) कथन : आसमान में छाए बादलों को कवि ने पेंसिल से बनाए रेखा-चित्र कहा है। कारण : उनमें डूबते सूर्य की लाली भर गई है। विकल्प : (A) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है। (B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं। (C) कथन सही है और कारण ग़लत है। (D) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है। (iv) काव्यांश के आधार पर संध्या के सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए। (2) (v) काव्यांश के लिए एक उपयुक्त शीर्षक दीजिए और उस शीर्षक को चुनने का तर्क भी लिखिए। (2)

  8. Q8Case-based7 marksAsked: 2025

    निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए : संध्या ने मेघों के कितने चित्र बनाये — हाथी, घोड़े, पेड़, आदमी, जंगल, क्या-क्या नहीं रच दिया और कभी रंगों से क्रीड़ा की, आकृतियाँ नहीं बनायीं। कभी चलाए झीने से बादल जिनमें चटकीली लाली उभर उठी थी, जिनकी आभा हरियाली पर थिरक उठी थी। जाते-जाते क्षितिज-पटी पर सूरज ने सोना बरसाया। छाया काली बढ़ने लगी, रंग धीरे-धीरे फिर बदले, पेंसिल के रेखा-चित्रों से बादल छाए। विविध रूप आकार बदलते से, ज्यों नहाए हुए प्रकाश और छाया में, अपना पद ले। रात उतर आयी, दिखलायी दिये सितारे, पेड़, गाँव अस्पष्ट दिखे, मानव-दृग हारे। (i) संध्या के आसमान के बारे में कवि का क्या कहना है ? (A) आसमान को काले मेघों ने आच्छादित कर लिया है। (B) चारों तरफ रंगों और आकृतियों की भीड़ है। (C) आसमान में मेघों ने विभिन्न आकृतियाँ बनाईं। (D) पशुओं की आकृतियों को बना उनमें रंग भरा। (ii) क्षितिज-पटी का रूप बार-बार क्यों बदलता रहा ? I. प्रकाश और छाया के बदलते स्वरूप के कारण II. संध्या के सूर्य की बदलती रोशनी और रंगों के कारण III. आसमान में बादलों से बनी हाथी, घोड़े, पेड़ आदि आकृतियों के कारण विकल्प : (A) केवल I और II (B) I, II और III सभी (C) केवल II और III (D) केवल I और III (iii) कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए : कथन : आसमान में छाए बादलों को कवि ने पेंसिल से बनाए रेखा-चित्र कहा है। कारण : उनमें डूबते सूर्य की लाली भर गई है। विकल्प : (A) कथन गलत है, किंतु कारण सही है। (B) कथन और कारण दोनों गलत हैं। (C) कथन सही है और कारण गलत है। (D) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है। (iv) काव्यांश के लिए एक उपयुक्त शीर्षक दीजिए और उस शीर्षक को चुनने का तर्क भी लिखिए। (v) काव्यांश के आधार पर संध्या के सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

    How the model answer begins

    1. (i) (C) आसमान में मेघों ने विभिन्न आकृतियाँ बनाईं।

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  9. Q9Case-based7 marksAsked: 2025

    निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : आदमी का स्वप्न? है वह बुलबुला जल का, आज उठता और कल फिर फूट जाता है, किंतु फिर धन्य, ठहरा आदमी ही तो बुलबुलों से खेलता, कविता बनाता है। मैं न बोला, किंतु मेरी रागिनी बोली देख फिर से चाँद! मुझको जानता है तू स्वप्न मेरे बुलबुले हैं? है यही पानी आग को भी क्या नहीं पहचानता है तू? मैं न वह जो स्वप्न पर केवल सही करते, आग में उसको गला लोहा बनाती हूँ, और उस पर नींव रखती हूँ नए घर की, इस तरह दीवार फौलादी उठाती हूँ। मनु नहीं, मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी, कल्पना की जीभ में भी धार होती है, बाण ही होते विचारों के नहीं केवल, स्वप्न के भी हाथ में तलवार होती है। (i) कॉलम-1 को कॉलम-2 से सुमेलित कीजिए और उचित विकल्प छाँटकर लिखिए : (1) | कॉलम-1 | कॉलम-2 | | (1) चाँद | (I) स्वप्न | | (2) रागिनी | (II) सत्ताधारी निरंकुश शासक | | (3) बुलबुले | (III) लेखनी/कविता | विकल्प : (A) (1-II), (2-I), (3-III) (B) (1-II), (2-III), (3-I) (C) (1-III), (2-I), (3-II) (D) (1-I), (2-III), (3-II) (ii) आज का मानव अपने पूर्वजों से भिन्न कैसे है? अनुपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए : (1) (A) वह अपनी कल्पना को सच कर सकता है। (B) वह विचारों से अत्यंत विवेकशील है। (C) वह अपने सपने को साकार करना जानता है। (D) वह सिर्फ सपने देखना ही जानता है। (iii) काव्यांश में 'नए घर की नींव रखने' से क्या अभिप्राय है? (1) (A) नवीन मान्यताओं को स्वीकारना (B) नए घर का निर्माण करना (C) नए घर का आधार बनाना (D) नए समाज की रचना करना (iv) काव्यांश का मूल भाव 25-30 शब्दों में लिखिए। (2) (v) काव्यांश में मानव को धन्य क्यों कहा गया है? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए। (2)

    How the model answer begins

    1. (B) (1-II), (2-III), (3-I) — चाँद सत्ताधारी निरंकुश शासक का, रागिनी कवि की लेखनी/कविता का और बुलबुले स्वप्न के प्रतीक हैं।

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  10. Q10Short answer7 marksAsked: 2025

    निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर देखी पकी - सुनहली फसलों की मुस्कान बहुत दिनों के बाद अबकी मैं जी-भर छू पाया अपनी गँवई पगडंडी की चंदनवर्णी धूल बहुत दिनों के बाद अबकी मैं जी-भर सुन पाया धान कूटती किशोरियों की कोकिल-कंठी तान बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर सूँघे मौलसिरी के ढेर- ढेर से ताजे-टटके फूल बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर तालमखाना खाया गन्ने चूसे जी-भर

    How the model answer begins

    1. (क) (B) उसके रंग का उल्लेख करने के लिए

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  11. Q11Case-based7 marksAsked: 2025

    निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : लीक पर वे चले जिनके चरण दुर्बल और हारे हैं हमें तो जो हमारी यात्रा से बने ऐसे अनिर्मित पंथ प्यारे हैं । साक्षी हों राह रोके खड़े पीले बाँस के झुरमुट, कि उनमें गा रही है जो हवा उसी से लिपटे हुए सपने हमारे हैं । शेष जो भी हैं - वक्ष खोले डोलती अमराइयाँ गर्व से आकाश थामे खड़े ताड़ के ये पेड़ हिलती क्षितिज की झालरें, झूमती हर डाल पर बैठी फलों से मारती खिलखिलाती शोख अल्हड़ हवा गायक-मंडली-से थिरकते आते गगन में मेघ, वाद्य यंत्रों से पड़े टीले, नदी बनने की प्रतीक्षा में, कहीं नीचे शुष्क नाले में नाचता एक अँजुरी जल सभी, बन रहा है कहीं जो विश्वास जो संकल्प हममें बस उसी के सहारे हैं (क) कवि पूर्व निर्मित मार्ग का अनुसरण क्यों नहीं करना चाहता है ? (1) (A) वह किसी और का अनुचर बनकर रहना चाहता है । (B) किसी और के द्वारा निर्मित मार्ग उसे अच्छा नहीं लगता है । (C) कवि आत्मविश्वासी है और अपना मार्ग स्वयं बनाना चाहता है । (D) किसी अन्य द्वारा निर्मित मार्ग पर चलना उसे अनुचित लगता है । (ख) किस तरह के लोग दूसरों के सहारे जीवन जीते हैं ? (1) (A) जो आज्ञाकारी प्रवृत्ति के होते हैं । (B) जो अक्षम और निराश होते हैं । (C) जो जल्दी सफल होना चाहते हैं । (D) जिनके सपने बहुत बड़े होते हैं । (ग) बादलों की तुलना किससे की गई है ? (1) (A) अपनी ही धुन पर थिरकती गायक मंडली से (B) दूसरों की धुन पर थिरकती गायक मंडली से (C) अपनी ही धुन में मग्न नर्तक मंडली से (D) तीव्र गति से नृत्य करती नर्तक मंडली से (घ) "हमें तो जो हमारी यात्रा से बने ऐसे अनिर्मित पंथ प्यारे हैं ।" - का आशय स्पष्ट कीजिए । (2) (ङ) प्रकृति के विविध घटक कवि को क्या प्रेरणा देते हैं ? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए । (2)

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    1. (C) कवि आत्मविश्वासी है और अपना मार्ग स्वयं बनाना चाहता है।

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  12. Q12Case-based7 marksAsked: 2025

    निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए : चीज़ों का हूबहू दिखना अपनी ही शक्ल में कविता में मुझे पसन्द नहीं बिल्कुल मैं चाहता हूँ मेरा फटा पुराना जूता भी दिखे वहाँ पूर्णिमा के पूरे चाँद की तरह एक साबुन की तरह दिखे मेरी आत्मा छोटी-छोटी विकृतियाँ और अन्तर्विरोध भी दिखें वहाँ फूली हुई नसों वाले राक्षसों से इतने वीभत्स और दैत्याकार कि आसानी से की जा सके उनसे घृणा की जा सके नफ़रत मुझे पसन्द हैं वे विदूषक जो मंच पर आने से पहले ही रँग लेते हैं अपना पूरा चेहरा मैं चाहता हूँ बेहद थका और ऊबा हुआ फोरमैन भी जब अपने घर में घुसे तो बदल जाए तत्काल उसका चेहरा अपनी पाँच बरस की बेटी के पिता की तरह बदल जाएँ, बदल जाएँ लोगों के चेहरे जब वे मेरी कविता में आएँ हीरे की तरह चमकती हुई दिखें लोगों की बहुत छोटी-छोटी अच्छाइयाँ कि निराश आदमी पलट कर दौड़ पड़े जीवन की ओर चिल्लाता हुआ कुछ नहीं है जीवन से ज्यादा सुन्दर जीवन से ज्यादा प्यारा जीवन की तरह अमर मैं चाहता हूँ कि कविता के भीतर फैली आसमान की टेबिल पर मैं जब सूरज के साथ चाय पी रहा होऊँ एक विशाल समुद्र की तरह दिखे मेरा कप । (i) 'फटा पुराना जूता भी पूर्णिमा के पूरे चाँद की तरह दिखे' - पंक्ति का आशय है : (A) फटे पुराने जूते का भी साफ-सुथरा दिखाई देना (B) अत्यंत मामूली चीज़ों का भी सौंदर्य से परिपूर्ण दिखाई देना (C) अत्यंत मामूली चीज़ों का भी कविता में वर्णन होना (D) अतीत की चीज़ों का भी कविता में सुंदरतापूर्ण उल्लेख होना (ii) कवि किनसे नफ़रत और घृणा का बर्ताव चाहता है ? (A) फूली हुई नसों वाले राक्षस से (B) अपनी छोटी-बड़ी विकृतियों से (C) वीभत्स लगने वाले दैत्यों से (D) साबुन की तरह दिखती आत्मा से (iii) कवि की कामना में फोरमैन के बदलते चेहरे का तात्पर्य है : (A) बाहर की थकान और ऊब को छोड़ घर में स्नेह और कोमलता का भाव रखना । (B) पाँच बरस की बच्ची के पिता की तरह ज़िम्मेदारी भरा व्यवहार करना । (C) काम से उपजी थकान और ऊबे हुए मन को भूलकर प्रसन्न दिखने का नाटक करना । (D) मंच पर आने वाले विदूषक की तरह सबको प्रसन्न करने का प्रयास करना । (iv) काव्यांश के आधार पर कविता का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए । (v) क्या कवि कविता से असंभव उम्मीद पाल रहा है ? तर्कपूर्ण टिप्पणी कीजिए ।

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    1. (B) अत्यंत मामूली चीज़ों का भी सौंदर्य से परिपूर्ण दिखाई देना

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  13. Q13Case-based7 marksAsked: 2025

    निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : लीक पर वे चले जिनके चरण दुर्बल और हारे हैं हमें तो जो हमारी यात्रा से बने ऐसे अनिर्मित पंथ प्यारे हैं। साक्षी हों राह रोके खड़े पीले बाँस के झुरमुट, कि उनमें गा रही है जो हवा उसी से लिपटे हुए सपने हमारे हैं। शेष जो भी हैं - वक्ष खोले डोलती अमराइयाँ गर्व से आकाश थामे खड़े ताड़ के ये पेड़ हिलती क्षितिज की झालरें, झूमती हर डाल पर बैठी फलों से मारती खिलखिलाती शोख अल्हड़ हवा गायक-मंडली-से थिरकते आते गगन में मेघ, वाद्य यंत्रों से पड़े टीले, नदी बनने की प्रतीक्षा में, कहीं नीचे शुष्क नाले में नाचता एक अँजुरी जल सभी, बन रहा है कहीं जो विश्वास जो संकल्प हममें बस उसी के सहारे हैं (क) कवि पूर्व निर्मित मार्ग का अनुसरण क्यों नहीं करना चाहता है ? (ख) किस तरह के लोग दूसरों के सहारे जीवन जीते हैं ? (ग) बादलों की तुलना किससे की गई है ? (घ) "हमें तो जो हमारी यात्रा से बने ऐसे अनिर्मित पंथ प्यारे हैं ।" - का आशय स्पष्ट कीजिए । (ङ) प्रकृति के विविध घटक कवि को क्या प्रेरणा देते हैं ? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए ।

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    1. (क) कवि पूर्व निर्मित मार्ग पर नहीं चलना चाहता, क्योंकि वह अपनी यात्रा स्वयं तय करके अपना नया रास्ता बनाना चाहता है। उसे वे अनिर्मित पंथ प्यारे हैं जो उसकी अपनी यात्रा से बनते हैं।

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  14. Q14Case-based5 marksAsked: 2024

    निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : ये खेत तुम्हारी भरी-सृष्टि, तिल-तिलकर बोए प्राण-बीज वर्षा के दिन तुम गिनते हो, यह परिवा है, यह दूज, तीज । बादल वैसे ही चले गए, प्यासी धरती पाई न भीज, तुम अश्रु कणों से रहे सींच इन खेतों की दुख भरी खीज । बस चार अन्न के दाने ही, नैवेद्य तुम्हारा है उदार, हे ग्राम देवता ! नमस्कार ! यह नारी-शक्ति देवता की, कीचड़ है जिसका अंग-राग यह भीर हुई-सी बदली है, जिसमें साहस की भरी आग, कवियों ! भूलो उपमाएँ सब, मत कहो, कुसुम, केसर, पराग, यह जननी है, जिसके गीतों से मृत अंकुर भी उठे जाग । उसने जीवन भर सीखा है, सुख से करना दुख का दुलार ! हे ग्राम देवता ! नमस्कार ! तुम जन-मन के अधिनायक हो, तुम हँसो कि फूले-फले देश आओ, सिंहासन पर बैठो, यह राज्य तुम्हारा है अशेष ! उर्वरा भूमि के नए खेत के, नए धान्य से सजे वेश, तुम भू पर रहकर भूमि-भार धारण करते हो मनुज-शेष अपनी कविता से आज तुम्हारी विमल आरती लूँ उतार हे ग्राम देवता ! नमस्कार ! (i) कथन और कारण पर विचार करते हुए सही विकल्प चुनिए : कथन : किसान को वर्षा की प्रतीक्षा में एक-एक दिन भारी पड़ता है । कारण : किसान का परिश्रम वर्षा पाकर ही फलीभूत होता है । विकल्प : (A) कथन सही है, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है । (B) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या है । (C) कथन सही है, किंतु कारण ग़लत है । (D) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है । (ii) कवि ग्राम-देवता को कहाँ बिठाकर सम्मान देना चाहता है ? (A) ऊँचे पहाड़ पर (B) उच्च सिंहासन पर (C) हरे-भरे खेतों में (D) पेड़ों की छाँव में (iii) 'मृत अंकुर भी उठे जाग' का अभिप्राय है : (A) स्नेह-श्रम से बीज भी प्रस्फुटित हो जाते हैं (B) मृत व्यक्ति भी जीवित हो जाते हैं (C) माँ बच्चों को लोरी सुनाती है (D) कुसुम, केसर, पराग जैसी उपमाएँ व्यर्थ हैं (iv) कवि ने 'नारी-शक्ति' किसे कहा है ? (A) किसान-पत्नी को (B) किसान-माँ को (C) ग्रामीण महिला को (D) किसान को (v) काव्यांश में किसान को 'मनुज-शेष' क्यों कहा गया है ? (A) शेषनाग की भाँति मिट्टी से जुड़े रहने के कारण (B) ऊसर भूमि को उपजाऊ बनाने की क्षमता के कारण (C) शेषनाग की भाँति धरती का भार धारण करने के कारण (D) खेत-खलिहानों का भार धारण करने के कारण

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    1. (i) उत्तर - (B) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या है।

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  15. Q15Case-based5 marksAsked: 2023

    निम्नलिखित दो पद्यांशों में से किसी एक को ध्यान से पढ़कर उस पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : (I) सँभलो कि सुयोग न जाय चला, कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला समझो जग को न निरा सपना पथ आप प्रशस्त करो अपना अखिलेशवर है अवलंबन को नर हो, न निराश करो मन को । जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ तुम सत्त्व सुधा रस पान करो उठके अमरत्व विधान करो दवरूप रहो भव कानन को नर हो न निराश करो मन को । निज गौरव का नित ज्ञान रहे हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे मरणोत्तर गुंजित गान रहे सब जाय अभी पर मान रहे कुछ हो न तजो निज साधन को नर हो, न निराश करो मन को । प्रभु ने तुमको कर दान किए, सब वांछित वस्तु विधान किए तुम प्राप्त करो उनको न अहो फिर है यह किसका दोष कहो समझो न अलभ्य किसी धन को नर हो, न निराश करो मन को । (i) प्रस्तुत पद्यांश में मनुष्य को किस हेतु प्रेरित किया गया है ? (a) मन को एकाग्र करने हेतु (b) शरीर को स्वस्थ रखने हेतु (c) मन को आशान्वित रखने हेतु (d) ईश्वर के शरण में जाने हेतु (ii) 'पथ आप प्रशस्त करो अपना' का आशय है : (a) जीवन का मार्ग ईश्वर दिखाएँ (b) जीवन का मार्ग माता-पिता सुझाएँ (c) जीवन का मार्ग स्वयं बनाएँ (d) जीवन का मार्ग मित्र बताएँ

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    1. (i) (c) मन को आशान्वित रखने हेतु

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  16. Q16Case-based5 marksAsked: 2023

    निम्नलिखित दो पद्यांशों में से किसी एक को ध्यान से पढ़कर उस पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : (I) सँभलो कि सुयोग न जाय चला, कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला समझो जग को न निरा सपना पथ आप प्रशस्त करो अपना अखिलेश्वर है अवलंबन को नर हो, न निराश करो मन को । जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो उठके अमरत्व विधान करो दवरूप रहो भव कानन को नर हो न निराश करो मन को । निज गौरव का नित ज्ञान रहे हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे मरणोत्तर गुंजित गान रहे सब जाय अभी पर मान रहे कुछ हो न तजो निज साधन को नर हो, न निराश करो मन को । प्रभु ने तुमको कर दान किए, सब वांछित वस्तु विधान किए तुम प्राप्त करो उनको न अहो फिर है यह किसका दोष कहो समझो न अलभ्य किसी धन को नर हो, न निराश करो मन को । (i) प्रस्तुत पद्यांश में मनुष्य को किस हेतु प्रेरित किया गया है ? (a) मन को एकाग्र करने हेतु (b) शरीर को स्वस्थ रखने हेतु (c) मन को आशान्वित रखने हेतु (d) ईश्वर के शरण में जाने हेतु (ii) 'पथ आप प्रशस्त करो अपना' का आशय है : (a) जीवन का मार्ग ईश्वर दिखाएँ (b) जीवन का मार्ग माता-पिता सुझाएँ (c) जीवन का मार्ग स्वयं बनाएँ (d) जीवन का मार्ग मित्र बताएँ (iii) पद्यांश में 'मृत्यु के उपरांत भी कीर्ति बनी रहे' इस भाव को व्यक्त करने वाली पंक्ति है : (a) निज गौरव का नित ज्ञान रहे (b) सब जाय अभी पर मान रहे (c) हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे (d) मरणोत्तर गुंजित गान रहे (iv) पद्यांश में किन चीज़ों को प्राप्त नहीं करने के लिए मनुष्य को दोषी माना गया है ? (a) प्रकृति से उपलब्ध सुविधाओं को (b) भाग्य से प्राप्त वरदानों को (c) मनोवांछित वस्तुओं को (d) अलभ्य, परिश्रम से प्राप्त वस्तुओं को (v) 'प्रभु ने तुमको कर दान किए' पंक्ति के द्वारा कवि क्या प्रेरणा देता है ? (a) आलसी बने रहने के लिए (b) परिश्रम करने के लिए (c) भाग्य पर आश्रित रहने के लिए (d) चलने-फिरने के लिए अथवा (II) इतनी साधारण चीज़ें वहाँ थीं जिन्हें कभी का भुला दिया गया था चिड़िया के आकार की वह सीटी वहाँ थी जिसमें आधा पानी भरकर बजाओ तो बुलबुल की तरह बोलती थी कॉलेज के दिनों में मैं पेड़ों के झुरमुट में छिपकर उसे बजाता था बचपन की एक फोटो में मैं जिस तीन पहिए की साइकिल पर बैठा था वो साइकिल वहाँ पड़ी थी धूल से अटी हुई उसका एक पहिया निकल गया था और रंग उखड़ गया था जगह-जगह से घिस-घिसकर इतनी छोटी हो चुकी पेंसिलें थीं कि जिन्हें और अधिक छीला जाना संभव नहीं था वहाँ बचपन की ड्राइंग कॉपियाँ थीं जिनके हर चित्र में पेड़ हरे थे और उगता हुआ सूरज था तब शायद हमने नहीं सोचा था कि हमारी दुनिया में इतना अँधेरा भी होगा कभी बरसों पहले खो चुके खिलौने थे पतंगें थीं, उनकी घिर्रियाँ थीं माँझे और डोर से भरी हुई वहाँ कुछ पुरानी घड़ियाँ थीं जिनके बारे में कहा जाता था कि वे चोरी चली गई थीं उनमें वो समय अभी तक ठहरा हुआ था (i) प्रस्तुत पद्यांश किस विषय पर केंद्रित है ? (a) बचपन (b) स्मृतियों (c) साधारण वस्तुओं (d) इतिहास (ii) वहाँ मौजूद वस्तुओं को 'साधारण' क्यों कहा जा रहा था ? (क) वे सारी पुरानी और अनुपयोगी थीं । (ख) उन्हें आसानी से विस्मृत कर दिया गया । (ग) वे सभी बेहद कम मूल्य की थीं । उपर्युक्त विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर लिखिए : (a) केवल (क) (b) केवल (ख) (c) (क) और (ख) (d) (ख) और (ग) (iii) "तब शायद हमने नहीं सोचा था कि हमारी दुनिया में इतना अँधेरा भी होगा कभी" इन पंक्तियों में अँधेरे से आशय है : (a) निराशा (b) अन्याय (c) बुराई (d) रात (iv) कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए : कथन (A) : वहाँ कुछ पुरानी घड़ियाँ थीं जिनमें समय अभी तक ठहरा हुआ था । कारण (R) : घड़ियाँ चोरी चली गई थीं । (a) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) ग़लत है । (b) कथन (A) ग़लत है, परंतु कारण (R) सही है । (c) कथन (A) और कारण (R) दोनों ग़लत हैं । (d) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं । (v) घड़ियों में समय अभी तक ठहरा हुआ है क्योंकि : (a) घड़ियों की बैटरी खराब हो गई है, समय रुक गया है । (b) अतीत के उस कालखंड की स्मृतियाँ ठहरी हुई हैं । (c) घड़ियाँ चोरी होकर कवि के भावात्मक दायरे से बाहर हो गईं । (d) घड़ियाँ पुरानी हैं, बदलते वक्त में उनका महत्त्व है ।

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    1. पद्यांश (I): (c) मन को आशान्वित रखने हेतु — 'नर हो, न निराश करो मन को।' अथवा पद्यांश (II): (b) स्मृतियों।

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  17. Q17Case-based5 marksAsked: 2023

    निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : छठ इस संसार में अपनी तरह का ऐसा पर्व है, जो अपनी व्यंजना में बहुआयामी है । सूर्य इस त्योहार का केंद्र है । सूर्य जीव-जगत के आधार हैं । सूर्य के बिना कोई भी भोग-उपभोग संभव नहीं है । अतः सूर्य के प्रति आभार प्रदर्शन के लिए छठ या सूर्य षष्ठी व्रत मनाया जाता है, तो कोई आश्चर्य नहीं । सूर्य उन क्षेत्रों के लिए सबसे उपयोगी है, जहाँ पानी की उपलब्धता ज्यादा है । पूर्वांचल में नदियों का जाल बिछा है, ऐसे में सूर्य का ताप लेना जीवन के लिए सबसे जरूरी हो जाता है । हमारी सूर्य-केंद्रित संस्कृति कहती है कि वही उगेगा, जो डूबेगा । अतः छठ में पहले दिन डूबते और फिर दूसरे दिन उगते सूर्य की पूजा स्वाभाविक है । नीरोग रहने के लिए भी सूर्य की बड़ी जरूरत है । सूर्य के ताप में रोगनाशक शक्ति है । अक्सर लोग छठ महापर्व के समय स्वास्थ्य को लेकर भी प्रार्थना करते हैं । जब कोरोना का उभार हुआ था, तब लोग आश्वस्त थे कि एक बार सूर्य की तपन बढ़ेगी, तो कोरोना वायरस नष्ट हो जाएगा । यह जो भ्रम था, वह सूर्य के प्रति हमारी आस्था का ही परिणाम था । यह भी सत्य है कि सूर्य के प्रति हमारी आशा का कोई विकल्प भी नहीं है । सूर्य के बिना भारत की जैव-विविधता, जीवन और स्वास्थ्य का मेल नहीं बन सकता । आधुनिक जीवन की मज़बूरी में जब अक्षय-ऊर्जा की बात होती है, तब लोगों की नजर सूर्य की ओर ही जाती है । अर्थात् किन्हीं अर्थों में सूर्य हमारा अतीत ही नहीं, भविष्य भी है । (i) सूर्य षष्ठी व्रत क्यों मनाया जाता है ? (a) भगवान सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए (b) प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए (c) नदियों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए (d) देवी-देवताओं के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए (ii) 'वही उगेगा, जो डूबेगा' पंक्ति का आशय है : (a) उदय और अस्त होना एक-दूसरे से जुड़े हैं । (b) उदय होने के लिए अस्त होना जरूरी है । (c) असफलताओं का भी सफलता में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है । (d) सफलता का महत्त्व असफल व्यक्ति ही समझ सकता है । (iii) ताप के अतिरिक्त भी सूर्य की आवश्यकता क्यों है ? (a) प्रकृति के लिए (b) लंबे जीवन के लिए (c) नीरोगी जीवन के लिए (d) प्रकाश के लिए (iv) कोरोना वायरस के नष्ट होने के संदर्भ में लोगों का क्या विश्वास था ? (a) वैज्ञानिक कोरोना वायरस की औषधि ढूँढ़ लेंगे । (b) सूर्य के बढ़ते ताप से कोरोना वायरस नष्ट हो जाएगा । (c) सूर्य के बढ़ते ताप से कोरोना वायरस अप्रभावित रहेगा । (d) कोरोना वायरस धीरे-धीरे स्वयं ही नष्ट हो जाएगा । (v) 'अक्षय ऊर्जा' से क्या अभिप्राय है ? (a) ऊर्जा का ऐसा स्रोत जो कभी नष्ट न हो (b) ऊर्जा का ऐसा स्रोत जो लंबे समय तक चले (c) ऊर्जा का ऐसा स्रोत जो कम खर्चीला हो (d) ऊर्जा का ऐसा स्रोत जो प्रकृति-प्रदत्त हो

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    1. (a) भगवान सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए — 'सूर्य के प्रति आभार प्रदर्शन के लिए छठ या सूर्य षष्ठी व्रत मनाया जाता है।'

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  18. Q18Case-based5 marksAsked: 2023

    निम्नलिखित दो पद्यांशों में से किसी एक को ध्यान से पढ़कर उस पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : (I) सँभलो कि सुयोग न जाय चला, कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला समझो जग को न निरा सपना पथ आप प्रशस्त करो अपना अखिलेश्वर है अवलंबन को नर हो, न निराश करो मन को । जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो उठके अमरत्व विधान करो दवरूप रहो भव कानन को नर हो न निराश करो मन को । निज गौरव का नित ज्ञान रहे हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे मरणोत्तर गुंजित गान रहे सब जाय अभी पर मान रहे कुछ हो न तजो निज साधन को नर हो, न निराश करो मन को । प्रभु ने तुमको कर दान किए, सब वांछित वस्तु विधान किए तुम प्राप्त करो उनको न अहो फिर है यह किसका दोष कहो समझो न अलभ्य किसी धन को नर हो, न निराश करो मन को । (i) प्रस्तुत पद्यांश में मनुष्य को किस हेतु प्रेरित किया गया है ? (a) मन को एकाग्र करने हेतु (b) शरीर को स्वस्थ रखने हेतु (c) मन को आशान्वित रखने हेतु (d) ईश्वर के शरण में जाने हेतु (ii) 'पथ आप प्रशस्त करो अपना' का आशय है : (a) जीवन का मार्ग ईश्वर दिखाएँ (b) जीवन का मार्ग माता-पिता सुझाएँ (c) जीवन का मार्ग स्वयं बनाएँ (d) जीवन का मार्ग मित्र बताएँ (iii) पद्यांश में 'मृत्यु के उपरांत भी कीर्ति बनी रहे' इस भाव को व्यक्त करने वाली पंक्ति है : (a) निज गौरव का नित ज्ञान रहे (b) सब जाय अभी पर मान रहे (c) हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे (d) मरणोत्तर गुंजित गान रहे (iv) पद्यांश में किन चीज़ों को प्राप्त नहीं करने के लिए मनुष्य को दोषी माना गया है ? (a) प्रकृति से उपलब्ध सुविधाओं को (b) भाग्य से प्राप्त वरदानों को (c) मनोवांछित वस्तुओं को (d) अलभ्य, परिश्रम से प्राप्त वस्तुओं को (v) 'प्रभु ने तुमको कर दान किए' पंक्ति के द्वारा कवि क्या प्रेरणा देता है ? (a) आलसी बने रहने के लिए (b) परिश्रम करने के लिए (c) भाग्य पर आश्रित रहने के लिए (d) चलने-फिरने के लिए अथवा (II) इतनी साधारण चीज़ें वहाँ थीं जिन्हें कभी का भुला दिया गया था चिड़िया के आकार की वह सीटी वहाँ थी जिसमें आधा पानी भरकर बजाओ तो बुलबुल की तरह बोलती थी कॉलेज के दिनों में मैं पेड़ों के झुरमुट में छिपकर उसे बजाता था बचपन की एक फोटो में मैं जिस तीन पहिए की साइकिल पर बैठा था वो साइकिल वहाँ पड़ी थी धूल से अटी हुई उसका एक पहिया निकल गया था और रंग उखड़ गया था जगह-जगह से घिस-घिसकर इतनी छोटी हो चुकी पेंसिलें थीं कि जिन्हें और अधिक छीला जाना संभव नहीं था वहाँ बचपन की ड्राइंग कॉपियाँ थीं जिनके हर चित्र में पेड़ हरे थे और उगता हुआ सूरज था तब शायद हमने नहीं सोचा था कि हमारी दुनिया में इतना अँधेरा भी होगा कभी बरसों पहले खो चुके खिलौने थे पतंगें थीं, उनकी घिर्रियाँ थीं माँझे और डोर से भरी हुई वहाँ कुछ पुरानी घड़ियाँ थीं जिनके बारे में कहा जाता था कि वे चोरी चली गई थीं उनमें वो समय अभी तक ठहरा हुआ था (i) प्रस्तुत पद्यांश किस विषय पर केंद्रित है ? (a) बचपन (b) स्मृतियों (c) साधारण वस्तुओं (d) इतिहास (ii) वहाँ मौजूद वस्तुओं को 'साधारण' क्यों कहा जा रहा था ? (क) वे सारी पुरानी और अनुपयोगी थीं । (ख) उन्हें आसानी से विस्मृत कर दिया गया । (ग) वे सभी बेहद कम मूल्य की थीं । उपर्युक्त विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर लिखिए : (a) केवल (क) (b) केवल (ख) (c) (क) और (ख) (d) (ख) और (ग) (iii) "तब शायद हमने नहीं सोचा था कि हमारी दुनिया में इतना अँधेरा भी होगा कभी" इन पंक्तियों में अँधेरे से आशय है : (a) निराशा (b) अन्याय (c) बुराई (d) रात

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    1. (I)(i) (c) मन को आशान्वित रखने हेतु

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  19. Q19Case-based5 marksAsked: 2023

    निम्नलिखित दो गद्यांशों में से किसी एक पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : पद्यांश - एक भले ही अँधेरा घिरे हर दिशा से, मगर हम नया भोर लाकर रहेंगे। घृणा-स्वार्थ के इस कठिन संक्रमण में, सुनो हम नया दौर लाकर रहेंगे। प्रगति और विज्ञान का नाम लेकर, मनुज को मनुज आज ठगने लगे हैं। नई आर्थिक दौड़ की रोशनी में, हमें मूल्य सब झूठ लगने लगे हैं। मगर बात इतनी सुनो विश्व वालो, इसी रोशनी में कभी हम बहेंगे। सही या ग़लत रह गया क्या कहीं कुछ, ज़रा भी उचित और अनुचित नहीं कुछ। सुनो इस क़दर स्वार्थ टकरा रहे हैं, पतन की नहीं और सीमा रही कुछ। मगर हम उठेंगे प्रलय मेघ बनकर, कठिन दुर्ग पाखंड के सब ढहेंगे। बताना हमें सत्य सारे जगत को, जगाना हमें सुप्त इंसानियत को। करेगा ज़माना सदा गर्व हम पर, हमें खोजना एकता के अमृत को। भले ही किसी राह जाए ज़माना, मगर हम सही राह थामे रहेंगे। (i) कवि को विश्वास है कि (a) वह अंधकार को उजाले में बदलेगा । (b) वह पुराने को नए में बदलेगा । (c) वह रात को शाम में बदलेगा । (d) वह दुःख को सुख में बदलेगा । (ii) जीवन-मूल्यों के कमज़ोर पड़ने का कारण है (a) अंधी दौड़ । (b) वैज्ञानिक दौड़ । (c) विदेश की दौड़ । (d) आर्थिक दौड़ । (iii) भारत की किस विशेषता पर पूरा विश्व गर्व करेगा? (a) अहिंसक प्रवृत्ति (b) वैज्ञानिक प्रगति (c) ऐतिहासिक ज्ञान (d) एकता की भावना (iv) 'किसी का अंधानुकरण न करके अपने लिए सही मार्ग का चयन करेंगे' - यह भाव कविता की किन पंक्तियों में आया है? (a) भले ही अँधेरा घिरे हर दिशा से, मगर हम नया भोर लाकर रहेंगे (b) घृणा-स्वार्थ के इस कठिन संक्रमण में, सुनो हम नया दौर लाकर रहेंगे (c) भले ही किसी राह जाए ज़माना, मगर हम सही राह थामे रहेंगे (d) मगर बात इतनी सुनो विश्व वालो, इसी रोशनी में कभी हम बहेंगे (v) 'कठिन दुर्ग पाखंड के सब ढहेंगे' - काव्य पंक्ति का आशय है : (a) समाज से भेदभाव का नाश होगा (b) लोगों में स्वार्थ भावना का अंत होगा (c) समाज से आडंबरों का नाश होगा (d) अंधविश्वास रूपी किलों का पतन होगा

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    1. (i) उत्तर - (a) वह अंधकार को उजाले में बदलेगा।

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  20. Q20Case-based5 marksAsked: 2023

    निम्नलिखित दो पद्यांशों में से किसी एक पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : पद्यांश - एक सुनता हूँ, मैंने भी देखा, काले बादल में रहती चाँदी की रेखा। काले बादल जाति द्वेष के, काले बादल विश्व क्लेश के, काले बादल उठते पथ पर नव स्वतंत्रता के प्रवेश के! सुनता आया हूँ, है देखा, काले बादल में हँसती चाँदी की रेखा! आज दिशा है घोर अँधेरी नभ में गरज रही रणभेरी, चमक रही चपला क्षण-क्षण पर झनक रही झिल्ली झन-झन कर, नाच-नाच आँगन में गाते केकी-केका काले बादल में लहरी चाँदी की रेखा! काले बादल, काले बादल, मन भय से हो उठता चंचल। कौन हृदय में कहता पल-पल मृत्यु आ रही साजे दल बल! आग लग रही, घात चल रहे, विधि का लेखा! काले बादल में छिपती चाँदी की रेखा! मुझे मृत्यु की भीति नहीं है, पर अनीति से प्रीति नहीं है, यह मनुजोचित रीति नहीं है, जन में प्रीति प्रतीति नहीं है! देश जातियों का कब होगा, नव मानवता में रे एका, काले बादल में कल की सोने की रेखा! (i) 'काले बादल' और 'चाँदी की रेखा' किनका प्रतीक हैं? इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए नीचे दिए प्रतीकों को पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए। (a) विपत्तियाँ (b) कालिमा (c) आशा की किरण (d) बिजली विकल्प - I. (a, b) II. (c, d) III. (a, c) IV. (b, d) (ii) स्वतंत्रता प्राप्ति के मार्ग में किस प्रकार के बादल छाए हुए हैं? नीचे दिए गए कारकों को पढ़कर इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए उचित विकल्प का चयन कर लिखिए । (a) जाति द्वेष के (b) घनघोर घटाओं के (c) परस्पर वैमनस्य के (d) वैश्विक अशांति के विकल्प - I. (a, b) II. (b, c) III. (c, d) IV. (a, d) (iii) कैसे वातावरण में आशा की किरण छिप जाती है? नीचे दिए कारकों को पढ़कर इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए उचित विकल्प का चयन कर लिखिए । (a) जब तेज़ वर्षा हो (b) जब मन निराशा से भयभीत हो (c) जब षड्यंत्र रचे जा रहे हों (d) जब बादल न छाए हों विकल्प - I. (a, b) II. (b, c) III. (c, d) IV. (a, d) (iv) मोर-मोरनी द्वारा आँगन में नृत्य प्रस्तुत करने से क्या अभिप्राय है? (a) उन दोनों का प्रसन्न होकर नृत्य करना। (b) निराशा के बादल छँटने लगे, खुशियों ने दस्तक दे दी है। (c) दोनों नृत्य कर बादलों को बरसने के लिए मज़बूर कर रहे हैं। (d) मोर सुहावने मौसम का आनंद ले रहे हैं। (v) 'चाँदी की रेखा' को 'सोने की रेखा' में कब बदला जा सकता है? (a) देश-जातियों की एकता होने पर (b) काले बादलों के दूर होने पर (c) बादलों में सूर्य के छिपने पर (d) मृत्यु से भयभीत न होने पर अथवा पद्यांश - दो भले ही अँधेरा घिरे हर दिशा से, मगर हम नया भोर लाकर रहेंगे। घृणा-स्वार्थ के इस कठिन संक्रमण में, सुनो हम नया दौर लाकर रहेंगे। प्रगति और विज्ञान का नाम लेकर, मनुज को मनुज आज ठगने लगे हैं। नई आर्थिक दौड़ की रोशनी में, हमें मूल्य सब झूठ लगने लगे हैं। मगर बात इतनी सुनो विश्व वालो, इसी रोशनी में कभी हम बहेंगे। सही या ग़लत रह गया क्या कहीं कुछ, ज़रा भी उचित और अनुचित नहीं कुछ । सुनो इस क़दर स्वार्थ टकरा रहे हैं, पतन की नहीं और सीमा रही कुछ। मगर हम उठेंगे प्रलय मेघ बनकर, कठिन दुर्ग पाखंड के सब ढहेंगे। बताना हमें सत्य सारे जगत को, जगाना हमें सुप्त इंसानियत को। करेगा ज़माना सदा गर्व हम पर, हमें खोजना एकता के अमृत को। भले ही किसी राह जाए ज़माना, मगर हम सही राह थामे रहेंगे। (i) कवि को विश्वास है कि (a) वह अंधकार को उजाले में बदलेगा । (b) वह पुराने को नए में बदलेगा । (c) वह रात को शाम में बदलेगा । (d) वह दुःख को सुख में बदलेगा । (ii) जीवन-मूल्यों के कमज़ोर पड़ने का कारण है (a) अंधी दौड़ । (b) वैज्ञानिक दौड़ । (c) विदेश की दौड़ । (d) आर्थिक दौड़ । (iii) भारत की किस विशेषता पर पूरा विश्व गर्व करेगा? (a) अहिंसक प्रवृत्ति (b) वैज्ञानिक प्रगति (c) ऐतिहासिक ज्ञान (d) एकता की भावना (iv) 'किसी का अंधानुकरण न करके अपने लिए सही मार्ग का चयन करेंगे' - यह भाव कविता की किन पंक्तियों में आया है? (a) भले ही अँधेरा घिरे हर दिशा से, मगर हम नया भोर लाकर रहेंगे (b) घृणा-स्वार्थ के इस कठिन संक्रमण में, सुनो हम नया दौर लाकर रहेंगे (c) भले ही किसी राह जाए ज़माना, मगर हम सही राह थामे रहेंगे (d) मगर बात इतनी सुनो विश्व वालो, इसी रोशनी में कभी हम बहेंगे (v) 'कठिन दुर्ग पाखंड के सब ढहेंगे' - काव्य पंक्ति का आशय है : (a) समाज से भेदभाव का नाश होगा (b) लोगों में स्वार्थ भावना का अंत होगा (c) समाज से आडंबरों का नाश होगा (d) अंधविश्वास रूपी किलों का पतन होगा

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    1. पद्यांश-एक: विकल्प III. (a, c) — 'काले बादल' विपत्तियों के और 'चाँदी की रेखा' आशा की किरण के प्रतीक हैं। अथवा पद्यांश-दो: (a) वह अंधकार को उजाले में बदलेगा — 'भले ही अँधेरा घिरे हर दिशा से, मगर हम नया भोर लाकर रहेंगे।'

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Objective questions with the board’s key (10)

  1. 1. CBSE 2026

    आदमी हो, स्नेह-बाती बन नया दीपक जलाना । दर्द की परछाइयों के दानवी बंधन हटाना । छटपटाती ज़िंदगी को चेतना संगीत देना । विश्व को नवपंथ देना; हारते को जीत देना । आदमी हो, बुझ रहे ईमान को विश्वास देना । मुस्कुराकर वाटिका में मधुभरा मधुमास देना । शूल के बदले जगत को फूल की सौगात देना । जो पिछड़ता हो उसे नवशक्ति देना, साथ देना । आदमी हो, डूबते मँझधार में पतवार देना । थक चला विश्वास साथी, आस्था आधार देना । क्रांति का संदेश देकर राह युग की मोड़ देना । फिर नया मानव बनाना, रूढ़ियों को तोड़ देना । आदमी हो, द्वेष के तूफ़ान को हँसकर मिटाना । कंठ-भर विषपान करना, किंतु सबको प्यार देना । मेटना मजबूरियों को; दीन को आधार देना । खाइयों को पाटना; बिछड़े दिलों को जोड़ देना । काव्यांश में ‘आदमी हो’ की पुनरावृत्ति क्यों की गई है ? इस प्रश्न के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए : I. मानवोचित काम करने का आग्रह करने के लिए II. पिछड़े हुए व्यक्तियों को नवशक्ति देने के लिए III. रूढ़ियों को तोड़ देने के लिए IV. आदमी होने की याद दिलाने के लिए विकल्प : (A) कथन I सही है। (B) कथन I और II सही हैं। (C) कथन I, II और III सही हैं। (D) कथन I, II, III और IV सही हैं।

    • (A) कथन I सही है। ✓
    • (B) कथन I और II सही हैं।
    • (C) कथन I, II और III सही हैं।
    • (D) कथन I, II, III और IV सही हैं।

    Answer: (A)

  2. 2. CBSE 2026

    आदमी हो, स्नेह-बाती बन नया दीपक जलाना । दर्द की परछाइयों के दानवी बंधन हटाना । छटपटाती ज़िंदगी को चेतना संगीत देना । विश्व को नवपंथ देना; हारते को जीत देना । आदमी हो, बुझ रहे ईमान को विश्वास देना । मुस्कुराकर वाटिका में मधुभरा मधुमास देना । शूल के बदले जगत को फूल की सौगात देना । जो पिछड़ता हो उसे नवशक्ति देना, साथ देना । आदमी हो, डूबते मँझधार में पतवार देना । थक चला विश्वास साथी, आस्था आधार देना । क्रांति का संदेश देकर राह युग की मोड़ देना । फिर नया मानव बनाना, रूढ़ियों को तोड़ देना । आदमी हो, द्वेष के तूफ़ान को हँसकर मिटाना । कंठ-भर विषपान करना, किंतु सबको प्यार देना । मेटना मजबूरियों को; दीन को आधार देना । खाइयों को पाटना; बिछड़े दिलों को जोड़ देना । ‘शूल के बदले फूल देना’ का आशय है : (A) मिटते ईमान को विश्वास देना (B) दुर्बल को नई शक्ति देना (C) दुखों के बदले सुख देना (D) जीवन को आनंद से भर देना

    • (A) मिटते ईमान को विश्वास देना
    • (B) दुर्बल को नई शक्ति देना
    • (C) दुखों के बदले सुख देना ✓
    • (D) जीवन को आनंद से भर देना

    Answer: (C)

  3. 3. CBSE 2026

    आदमी हो, स्नेह-बाती बन नया दीपक जलाना । दर्द की परछाइयों के दानवी बंधन हटाना । छटपटाती ज़िंदगी को चेतना संगीत देना । विश्व को नवपंथ देना; हारते को जीत देना । आदमी हो, बुझ रहे ईमान को विश्वास देना । मुस्कुराकर वाटिका में मधुभरा मधुमास देना । शूल के बदले जगत को फूल की सौगात देना । जो पिछड़ता हो उसे नवशक्ति देना, साथ देना । आदमी हो, डूबते मँझधार में पतवार देना । थक चला विश्वास साथी, आस्था आधार देना । क्रांति का संदेश देकर राह युग की मोड़ देना । फिर नया मानव बनाना, रूढ़ियों को तोड़ देना । आदमी हो, द्वेष के तूफ़ान को हँसकर मिटाना । कंठ-भर विषपान करना, किंतु सबको प्यार देना । मेटना मजबूरियों को; दीन को आधार देना । खाइयों को पाटना; बिछड़े दिलों को जोड़ देना । निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : जो पिछड़ता हो उसे नवशक्ति देना, साथ देना। कारण : जीवन में किसी भी कारण से पिछड़ा व्यक्ति हताश हो जाता है। विकल्प : (A) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है। (B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं। (C) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है। (D) कथन सही हैं, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।

    • (A) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है।
    • (B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
    • (C) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है। ✓
    • (D) कथन सही हैं, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।

    Answer: (C)

  4. 4. CBSE 2026

    गाँव में वो दिन था इतवार। मैं नन्हीं पीढ़ी का हाथ थाम निकल गई बाज़ार। सूखे दरख़्तों के बीच देख एक पतली पगडंडी मैंने नन्हीं पीढ़ी से कहा देखो, यही थी कभी गाँव की नदी। आगे देख ज़मीन पर बड़ी सी दरार मैंने कहा, इसी में समा गए सारे पहाड़। नन्हीं पीढ़ी दौड़ी : हम आ गए बाज़ार ! क्या-क्या लेना है? पूछने लगा दुकानदार। भैया ! थोड़ी बारिश, थोड़ी गीली मिट्टी, एक बोतल नदी, वो डिब्बाबंद पहाड़ उधर दीवार पर टँगी एक प्रकृति भी दे दो, और ये बारिश इतनी महँगी क्यों? दुकानदार बोला : यह नमी यहाँ की नहीं ! दूसरे ग्रह से आई है, मंदी है, छटाँक भर मँगाई है। पैसे निकालने को साड़ी की कोर टटोली चौंकी! देखा आँचल की गाँठ में रुपयों की जगह पूरा वजूद मुड़ा पड़ा था... नदी के बोतल में और पहाड़ के डिब्बाबंद होने का क्या अर्थ है?

    • (A) भविष्य की आशंकाओं के चित्र खींचना
    • (B) पर्यावरण के प्रति मनुष्य की उपेक्षा दिखाना
    • (C) बाज़ारीकरण की भयावहता स्पष्ट करना
    • (D) जीवन से प्रकृति और उसका साहचर्य गायब होना ✓

    Answer: (D)

  5. 5. CBSE 2026

    तुम्हें पता है ? धरती माँ की काया यों तो कोरा पत्थर है, माटी है । ऊँचे पर्वत जैसा माथा गहरे मन जैसी घाटी है समतल ये मैदान कि जैसे गोद हमारी माता की है दूध धार-सी नदियाँ हैं । माणिक मोती जैसे रत्नों की मंजूषा है फैला सागर । पर क्या तुमने इस काया के बंजर देखे ? भुनती तपती रेत भभकती भट्टी जैसी ? तुमने मुझे जहाँ से काटा, खोदा और उखाड़ा जड़ से वंशनाश कर मुझे मिटाया । अब बोलो, कैसे लगता है ? वहाँ कभी रहने बसने को मन करता है उस बंजर में - उस मरुस्थल में ? रुको, रुको सोचो, क्षण भर रुको । मैं अपनी धरती माता का रक्षा-कवच वृक्ष हूँ भाई ! मुझे न काटो मैं तुम्हारा वृक्षमित्र हूँ । इस कविता का वर्ण्य विषय क्या है ?

    • (A) देश-प्रेम
    • (B) प्रकृति-प्रेम
    • (C) मरुस्थल
    • (D) धरती माँ ✓

    Answer: (D)

  6. 6. CBSE 2026

    तुम्हें पता है ? धरती माँ की काया यों तो कोरा पत्थर है, माटी है । ऊँचे पर्वत जैसा माथा गहरे मन जैसी घाटी है समतल ये मैदान कि जैसे गोद हमारी माता की है दूध धार-सी नदियाँ हैं । माणिक मोती जैसे रत्नों की मंजूषा है फैला सागर । पर क्या तुमने इस काया के बंजर देखे ? भुनती तपती रेत भभकती भट्टी जैसी ? तुमने मुझे जहाँ से काटा, खोदा और उखाड़ा जड़ से वंशनाश कर मुझे मिटाया । अब बोलो, कैसे लगता है ? वहाँ कभी रहने बसने को मन करता है उस बंजर में - उस मरुस्थल में ? रुको, रुको सोचो, क्षण भर रुको । मैं अपनी धरती माता का रक्षा-कवच वृक्ष हूँ भाई ! मुझे न काटो मैं तुम्हारा वृक्षमित्र हूँ । उपर्युक्त कविता हमें धरती के प्रति कैसी भावना रखने के लिए प्रेरित करती है ? इस प्रश्न के उत्तर के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए :

    • (A) कथन (I) और (II) सही हैं ।
    • (B) कथन (I), (II) और (III) सही हैं । ✓
    • (C) कथन (I), (III) और (IV) सही हैं ।
    • (D) केवल कथन (IV) सही है ।

    Answer: (B)

  7. 7. CBSE 2026

    तुम्हें पता है ? धरती माँ की काया यों तो कोरा पत्थर है, माटी है । ऊँचे पर्वत जैसा माथा गहरे मन जैसी घाटी है समतल ये मैदान कि जैसे गोद हमारी माता की है दूध धार-सी नदियाँ हैं । माणिक मोती जैसे रत्नों की मंजूषा है फैला सागर । पर क्या तुमने इस काया के बंजर देखे ? भुनती तपती रेत भभकती भट्टी जैसी ? तुमने मुझे जहाँ से काटा, खोदा और उखाड़ा जड़ से वंशनाश कर मुझे मिटाया । अब बोलो, कैसे लगता है ? वहाँ कभी रहने बसने को मन करता है उस बंजर में - उस मरुस्थल में ? रुको, रुको सोचो, क्षण भर रुको । मैं अपनी धरती माता का रक्षा-कवच वृक्ष हूँ भाई ! मुझे न काटो मैं तुम्हारा वृक्षमित्र हूँ । निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन करके लिखिए : कथन : रत्नों की मंजूषा है फैला सागर । कारण : सागर न केवल पानी का विशाल स्रोत है, बल्कि यह भोजन, खनिज, रत्न, ऊर्जा और परिवहन का भी एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है । विकल्प :

    • (A) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है ।
    • (B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं ।
    • (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है । ✓
    • (D) कथन सही है, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है ।

    Answer: (C)

  8. 8. CBSE 2025

    बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर देखी पकी - सुनहली फसलों की मुस्कान बहुत दिनों के बाद अबकी मैं जी-भर छू पाया अपनी गाँव की पगडंडी की चंदनवर्णी धूल बहुत दिनों के बाद अबकी मैं जी-भर सुन पाया धान कूटती किशोरियों की कोकिल-कंठी तान बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर सूँघे मौलसिरी के ढेर-ढेर से ताजे-टटके फूल बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर तालमखाना खाया गन्ने चूसे जी-भर बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर भोगे गंध - रूप - रस - शब्द - स्पर्श सब साथ भू पर बहुत दिनों के बाद काव्यांश में धूल के लिए ‘चंदन’ विशेषण का प्रयोग क्यों किया गया है ?

    • (A) उसके गुणों का उल्लेख करने के लिए
    • (B) उसके रंग का उल्लेख करने के लिए ✓
    • (C) उसकी पवित्रता का उल्लेख करने के लिए
    • (D) उसकी कोमलता का उल्लेख करने के लिए

    Answer: (B)

  9. 9. CBSE 2025

    बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर देखी पकी - सुनहली फसलों की मुस्कान बहुत दिनों के बाद अबकी मैं जी-भर छू पाया अपनी गाँव की पगडंडी की चंदनवर्णी धूल बहुत दिनों के बाद अबकी मैं जी-भर सुन पाया धान कूटती किशोरियों की कोकिल-कंठी तान बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर सूँघे मौलसिरी के ढेर-ढेर से ताजे-टटके फूल बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर तालमखाना खाया गन्ने चूसे जी-भर बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर भोगे गंध - रूप - रस - शब्द - स्पर्श सब साथ भू पर बहुत दिनों के बाद ‘किशोरियों की कोकिल कंठी तान’ से क्या अभिप्राय है ?

    • (A) किशोरियों का कंठ कोकिल के समान है ।
    • (B) किशोरियों की तान कोकिल के समान है ।
    • (C) किशोरियों का स्वर कोकिल के समान है ।
    • (D) किशोरियों का गायन कर्ण प्रिय और मधुर है । ✓

    Answer: (D)

  10. 10. CBSE 2025

    बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर देखी पकी - सुनहली फसलों की मुस्कान बहुत दिनों के बाद अबकी मैं जी-भर छू पाया अपनी गाँव की पगडंडी की चंदनवर्णी धूल बहुत दिनों के बाद अबकी मैं जी-भर सुन पाया धान कूटती किशोरियों की कोकिल-कंठी तान बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर सूँघे मौलसिरी के ढेर-ढेर से ताजे-टटके फूल बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर तालमखाना खाया गन्ने चूसे जी-भर बहुत दिनों के बाद अबकी मैंने जी-भर भोगे गंध - रूप - रस - शब्द - स्पर्श सब साथ भू पर बहुत दिनों के बाद कवि ने जी-भर क्या भोगा ?

    • (A) फसलों की मुस्कान
    • (B) किशोरियों का गान
    • (C) ऐन्द्रिक सुख ✓
    • (D) तालमखानों का स्वाद

    Answer: (C)

Questions parents and students ask

How many marks does "अपठित काव्यांश" carry in CBSE Class 10 Hindi A?
In the CBSE papers of 2023–2026, this chapter carried about 6 marks and about 2 questions a year; by marks it ranks 3 in Hindi A.
Which are the most important (VVI) questions of "अपठित काव्यांश"?
The 20 questions above are from the board’s real papers, each with the years it was asked; the most-asked come first with their full model answers. All 28 written questions of this chapter, with answers, are in the Ask Medha app.
Do the answers follow the board’s marking scheme?
Yes. CBSE publishes its marking schemes; every model answer here is written point by point to the marks the board’s own scheme gives, and checked by a second, independent model.

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