CBSE Class 10 · Hindi A · board exam 2027
CBSE Class 10 Hindi A Sample Paper 2024
The board’s 2024 sample paper, set SQP-002 — all 43 questions as printed; 34 objective answers from the board’s own key. Each question names its chapter, where that chapter’s most-asked questions are.
Full marks 80 · Time 3 h
Section A · Objective questions (34)
हमारे देश में हिंदी फिल्मों के गीत अपने आरंभ से ही आम दर्शक के सुख-दुःख के साथी रहे हैं। वर्तमान समय में हिंदी फिल्मों के गीतों ने आम जन के हृदय में लोकगीतों सी आत्मीय जगह बना ली है। जिस तरह से एक जमाने में लोकगीत जनमानस के सुख-दुख, आकांक्षा, उल्लास और उम्मीद को स्वर देते थे, आज फिल्मी गीत उसी भूमिका को निभा रहे हैं। इतना ही नहीं देश की विविधता को एकता के सूत्र में बाँधने में हिंदी फिल्मों का योगदान सभी स्वीकार करते हैं। हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का जो काम राजभाषा विभाग तत्सम शब्दों की सहायता से कर रहा है वही कार्य फिल्मी गीत और संवाद लिखने वाले विविध क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। यह गाने जन-जन के गीत इसी कारण बन सके क्योंकि इनमें राजनीति के उतार-चढ़ाव की अनुगूँजों के साथ देहाती कस्बायी और नए बने शहरों का देशज जीवन दर्शन भी आत्मसात किया जाता रहा है। भारत की जिस गंगा-जमुनी संस्कृति का महिमामंडन बहुधा होता है उसकी गूंज भी इन गीतों में मिलती है। आजादी की लड़ाई के दौरान लिखे प्रदीप के गीत हों या स्वाधीनता प्राप्ति के साथ ही होनेवाले देश के विभाजन की विभीषिका, सभी को भी इन गीतों में बहुत संवेदनशील रूप से व्यक्त किया गया है। हिंदी फिल्मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका। प्रदीप, नीरज जैसे शानदार हिंदी कवियों, इंदीवर तथा शैलेंद्र जैसे श्रेष्ठ गीतकारों और साहिर, कैफी, मजरूह जैसे मशहूर शायरों को हिंदी सिनेमा में हमेशा एक ही बिरादरी का माना जाता रहा है। यह सिनेमा इस दुनिया की ही खासियत है कि एक तरफ गीतकार साहिर ने 'कहाँ हैं कहाँ हैं/मुहाफिज खुदी के/ जिन्हें नाज है हिंद पर/ वो कहाँ हैं' लिखा तो दूसरी तरफ उन्होंने ही 'संसार से भागे फिरते हो/ भगवान को तुम क्या पाओगे !/ ये भोग भी एक तपस्या है / तुम प्यार के मारे क्या जानोगे / अपमान रचयिता का होगा/ रचना को अगर ठुकराओगे!' जैसी पंक्तियाँ भी रची हैं। परवर्तियों में गुलजार ऐसे गीतकार हैं जिन्होंने उर्दू, हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी के साथ पुरबिया बोलियों में मन को मोह लेने वाले गीतों की रचना की है। बंदिनी के 'मोरा गोरा अंग लइले, मोहे श्याम रंग दइदे', 'कजरारे-कजरारे तेरे कारे-कारे नयना!', 'यारा सिली सिली रात का ढलना' और 'चप्पा चप्पा चरखा चले' जैसे गीतों को रचकर उन्होंने भारत की साझा संस्कृति को मूर्तिमान कर दिया है। वस्तुतः भारत में बनने वाली फिल्मों में आने वाले गीत उसे विश्व-सिनेमा में एक अलग पहचान देते हैं। ये गीत सही मायने में भारतीय संस्कृति की खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं। हिंदी फिल्मी गीतों और लोकगीतों में क्या समानता है?
- (A) ये जनमानस के रीति-रिवाजों और कल्पनाओं को स्वर देते हैं।
- (B) ये जनमानस के जीवन के अनुभवों और विचारों को स्वर देते हैं।
- (C) ये जनमानस के सुख-दुख, उल्लास और उम्मीद को स्वर देते हैं। ✓
- (D) ये जनमानस के जीवन के यथार्थ और कठोरताओं को स्वर देते हैं।
Answer (the board’s key): (C)
हमारे देश में हिंदी फिल्मों के गीत अपने आरंभ से ही आम दर्शक के सुख-दुःख के साथी रहे हैं। वर्तमान समय में हिंदी फिल्मों के गीतों ने आम जन के हृदय में लोकगीतों सी आत्मीय जगह बना ली है। जिस तरह से एक जमाने में लोकगीत जनमानस के सुख-दुख, आकांक्षा, उल्लास और उम्मीद को स्वर देते थे, आज फिल्मी गीत उसी भूमिका को निभा रहे हैं। इतना ही नहीं देश की विविधता को एकता के सूत्र में बाँधने में हिंदी फिल्मों का योगदान सभी स्वीकार करते हैं। हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का जो काम राजभाषा विभाग तत्सम शब्दों की सहायता से कर रहा है वही कार्य फिल्मी गीत और संवाद लिखने वाले विविध क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। यह गाने जन-जन के गीत इसी कारण बन सके क्योंकि इनमें राजनीति के उतार-चढ़ाव की अनुगूँजों के साथ देहाती कस्बायी और नए बने शहरों का देशज जीवन दर्शन भी आत्मसात किया जाता रहा है। भारत की जिस गंगा-जमुनी संस्कृति का महिमामंडन बहुधा होता है उसकी गूंज भी इन गीतों में मिलती है। आजादी की लड़ाई के दौरान लिखे प्रदीप के गीत हों या स्वाधीनता प्राप्ति के साथ ही होनेवाले देश के विभाजन की विभीषिका, सभी को भी इन गीतों में बहुत संवेदनशील रूप से व्यक्त किया गया है। हिंदी फिल्मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका। प्रदीप, नीरज जैसे शानदार हिंदी कवियों, इंदीवर तथा शैलेंद्र जैसे श्रेष्ठ गीतकारों और साहिर, कैफी, मजरूह जैसे मशहूर शायरों को हिंदी सिनेमा में हमेशा एक ही बिरादरी का माना जाता रहा है। यह सिनेमा इस दुनिया की ही खासियत है कि एक तरफ गीतकार साहिर ने 'कहाँ हैं कहाँ हैं/मुहाफिज खुदी के/ जिन्हें नाज है हिंद पर/ वो कहाँ हैं' लिखा तो दूसरी तरफ उन्होंने ही 'संसार से भागे फिरते हो/ भगवान को तुम क्या पाओगे !/ ये भोग भी एक तपस्या है / तुम प्यार के मारे क्या जानोगे / अपमान रचयिता का होगा/ रचना को अगर ठुकराओगे!' जैसी पंक्तियाँ भी रची हैं। परवर्तियों में गुलजार ऐसे गीतकार हैं जिन्होंने उर्दू, हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी के साथ पुरबिया बोलियों में मन को मोह लेने वाले गीतों की रचना की है। बंदिनी के 'मोरा गोरा अंग लइले, मोहे श्याम रंग दइदे', 'कजरारे-कजरारे तेरे कारे-कारे नयना!', 'यारा सिली सिली रात का ढलना' और 'चप्पा चप्पा चरखा चले' जैसे गीतों को रचकर उन्होंने भारत की साझा संस्कृति को मूर्तिमान कर दिया है। वस्तुतः भारत में बनने वाली फिल्मों में आने वाले गीत उसे विश्व-सिनेमा में एक अलग पहचान देते हैं। ये गीत सही मायने में भारतीय संस्कृति की खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं। हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का काम फिल्मी गीतों ने किस प्रकार किया?
- (A) राजभाषा विभाग के सहयोग से
- (B) विविध क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से ✓
- (C) विविध भाषाओं की फिल्मों को प्रोत्साहित करके
- (D) विविध भाषाओं की फिल्मों को हतोत्साहित करके
Answer (the board’s key): (B)
हमारे देश में हिंदी फिल्मों के गीत अपने आरंभ से ही आम दर्शक के सुख-दुःख के साथी रहे हैं। वर्तमान समय में हिंदी फिल्मों के गीतों ने आम जन के हृदय में लोकगीतों सी आत्मीय जगह बना ली है। जिस तरह से एक जमाने में लोकगीत जनमानस के सुख-दुख, आकांक्षा, उल्लास और उम्मीद को स्वर देते थे, आज फिल्मी गीत उसी भूमिका को निभा रहे हैं। इतना ही नहीं देश की विविधता को एकता के सूत्र में बाँधने में हिंदी फिल्मों का योगदान सभी स्वीकार करते हैं। हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का जो काम राजभाषा विभाग तत्सम शब्दों की सहायता से कर रहा है वही कार्य फिल्मी गीत और संवाद लिखने वाले विविध क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। यह गाने जन-जन के गीत इसी कारण बन सके क्योंकि इनमें राजनीति के उतार-चढ़ाव की अनुगूँजों के साथ देहाती कस्बायी और नए बने शहरों का देशज जीवन दर्शन भी आत्मसात किया जाता रहा है। भारत की जिस गंगा-जमुनी संस्कृति का महिमामंडन बहुधा होता है उसकी गूंज भी इन गीतों में मिलती है। आजादी की लड़ाई के दौरान लिखे प्रदीप के गीत हों या स्वाधीनता प्राप्ति के साथ ही होनेवाले देश के विभाजन की विभीषिका, सभी को भी इन गीतों में बहुत संवेदनशील रूप से व्यक्त किया गया है। हिंदी फिल्मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका। प्रदीप, नीरज जैसे शानदार हिंदी कवियों, इंदीवर तथा शैलेंद्र जैसे श्रेष्ठ गीतकारों और साहिर, कैफी, मजरूह जैसे मशहूर शायरों को हिंदी सिनेमा में हमेशा एक ही बिरादरी का माना जाता रहा है। यह सिनेमा इस दुनिया की ही खासियत है कि एक तरफ गीतकार साहिर ने 'कहाँ हैं कहाँ हैं/मुहाफिज खुदी के/ जिन्हें नाज है हिंद पर/ वो कहाँ हैं' लिखा तो दूसरी तरफ उन्होंने ही 'संसार से भागे फिरते हो/ भगवान को तुम क्या पाओगे !/ ये भोग भी एक तपस्या है / तुम प्यार के मारे क्या जानोगे / अपमान रचयिता का होगा/ रचना को अगर ठुकराओगे!' जैसी पंक्तियाँ भी रची हैं। परवर्तियों में गुलजार ऐसे गीतकार हैं जिन्होंने उर्दू, हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी के साथ पुरबिया बोलियों में मन को मोह लेने वाले गीतों की रचना की है। बंदिनी के 'मोरा गोरा अंग लइले, मोहे श्याम रंग दइदे', 'कजरारे-कजरारे तेरे कारे-कारे नयना!', 'यारा सिली सिली रात का ढलना' और 'चप्पा चप्पा चरखा चले' जैसे गीतों को रचकर उन्होंने भारत की साझा संस्कृति को मूर्तिमान कर दिया है। वस्तुतः भारत में बनने वाली फिल्मों में आने वाले गीत उसे विश्व-सिनेमा में एक अलग पहचान देते हैं। ये गीत सही मायने में भारतीय संस्कृति की खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं। कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए: कथन (A) : हिंदी फिल्मों के गाने जन जन के गीत बन गए हैं। कारण (R) : इन गीतों में राजनीति की अनुगूँजों के साथ, देहाती, कस्बायी और नए बने शहरों का जीवन दर्शन भी आत्मसात किया जाता रहा है।
- (A) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
- (B) कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं।
- (C) कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है। ✓
- (D) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
Answer (the board’s key): (C)
हमारे देश में हिंदी फिल्मों के गीत अपने आरंभ से ही आम दर्शक के सुख-दुःख के साथी रहे हैं। वर्तमान समय में हिंदी फिल्मों के गीतों ने आम जन के हृदय में लोकगीतों सी आत्मीय जगह बना ली है। जिस तरह से एक जमाने में लोकगीत जनमानस के सुख-दुख, आकांक्षा, उल्लास और उम्मीद को स्वर देते थे, आज फिल्मी गीत उसी भूमिका को निभा रहे हैं। इतना ही नहीं देश की विविधता को एकता के सूत्र में बाँधने में हिंदी फिल्मों का योगदान सभी स्वीकार करते हैं। हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का जो काम राजभाषा विभाग तत्सम शब्दों की सहायता से कर रहा है वही कार्य फिल्मी गीत और संवाद लिखने वाले विविध क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। यह गाने जन-जन के गीत इसी कारण बन सके क्योंकि इनमें राजनीति के उतार-चढ़ाव की अनुगूँजों के साथ देहाती कस्बायी और नए बने शहरों का देशज जीवन दर्शन भी आत्मसात किया जाता रहा है। भारत की जिस गंगा-जमुनी संस्कृति का महिमामंडन बहुधा होता है उसकी गूंज भी इन गीतों में मिलती है। आजादी की लड़ाई के दौरान लिखे प्रदीप के गीत हों या स्वाधीनता प्राप्ति के साथ ही होनेवाले देश के विभाजन की विभीषिका, सभी को भी इन गीतों में बहुत संवेदनशील रूप से व्यक्त किया गया है। हिंदी फिल्मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका। प्रदीप, नीरज जैसे शानदार हिंदी कवियों, इंदीवर तथा शैलेंद्र जैसे श्रेष्ठ गीतकारों और साहिर, कैफी, मजरूह जैसे मशहूर शायरों को हिंदी सिनेमा में हमेशा एक ही बिरादरी का माना जाता रहा है। यह सिनेमा इस दुनिया की ही खासियत है कि एक तरफ गीतकार साहिर ने 'कहाँ हैं कहाँ हैं/मुहाफिज खुदी के/ जिन्हें नाज है हिंद पर/ वो कहाँ हैं' लिखा तो दूसरी तरफ उन्होंने ही 'संसार से भागे फिरते हो/ भगवान को तुम क्या पाओगे !/ ये भोग भी एक तपस्या है / तुम प्यार के मारे क्या जानोगे / अपमान रचयिता का होगा/ रचना को अगर ठुकराओगे!' जैसी पंक्तियाँ भी रची हैं। परवर्तियों में गुलजार ऐसे गीतकार हैं जिन्होंने उर्दू, हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी के साथ पुरबिया बोलियों में मन को मोह लेने वाले गीतों की रचना की है। बंदिनी के 'मोरा गोरा अंग लइले, मोहे श्याम रंग दइदे', 'कजरारे-कजरारे तेरे कारे-कारे नयना!', 'यारा सिली सिली रात का ढलना' और 'चप्पा चप्पा चरखा चले' जैसे गीतों को रचकर उन्होंने भारत की साझा संस्कृति को मूर्तिमान कर दिया है। वस्तुतः भारत में बनने वाली फिल्मों में आने वाले गीत उसे विश्व-सिनेमा में एक अलग पहचान देते हैं। ये गीत सही मायने में भारतीय संस्कृति की खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं। 'हिंदी फिल्मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका।' इस कथन के पक्ष में निम्नलिखित में से कौन- सा /कौन-से तर्क सही हैं? 1. यहाँ हिंदी कवियों और उर्दू शायरों को एक ही बिरादरी का माना जाता है। 2. ये गीतकार उर्दू, तत्सम प्रधान हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में समान रूप से गीत लिखते हैं। 3. इन गीतकारों में प्रतिस्पर्धा का भाव नहीं है।
- (A) 1 सही है। ✓
- (B) 2 सही है।
- (C) 3 सही है।
- (D) 1 और 2 सही है।
Answer (the board’s key): (A)
हमारे देश में हिंदी फिल्मों के गीत अपने आरंभ से ही आम दर्शक के सुख-दुःख के साथी रहे हैं। वर्तमान समय में हिंदी फिल्मों के गीतों ने आम जन के हृदय में लोकगीतों सी आत्मीय जगह बना ली है। जिस तरह से एक जमाने में लोकगीत जनमानस के सुख-दुख, आकांक्षा, उल्लास और उम्मीद को स्वर देते थे, आज फिल्मी गीत उसी भूमिका को निभा रहे हैं। इतना ही नहीं देश की विविधता को एकता के सूत्र में बाँधने में हिंदी फिल्मों का योगदान सभी स्वीकार करते हैं। हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का जो काम राजभाषा विभाग तत्सम शब्दों की सहायता से कर रहा है वही कार्य फिल्मी गीत और संवाद लिखने वाले विविध क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। यह गाने जन-जन के गीत इसी कारण बन सके क्योंकि इनमें राजनीति के उतार-चढ़ाव की अनुगूँजों के साथ देहाती कस्बायी और नए बने शहरों का देशज जीवन दर्शन भी आत्मसात किया जाता रहा है। भारत की जिस गंगा-जमुनी संस्कृति का महिमामंडन बहुधा होता है उसकी गूंज भी इन गीतों में मिलती है। आजादी की लड़ाई के दौरान लिखे प्रदीप के गीत हों या स्वाधीनता प्राप्ति के साथ ही होनेवाले देश के विभाजन की विभीषिका, सभी को भी इन गीतों में बहुत संवेदनशील रूप से व्यक्त किया गया है। हिंदी फिल्मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका। प्रदीप, नीरज जैसे शानदार हिंदी कवियों, इंदीवर तथा शैलेंद्र जैसे श्रेष्ठ गीतकारों और साहिर, कैफी, मजरूह जैसे मशहूर शायरों को हिंदी सिनेमा में हमेशा एक ही बिरादरी का माना जाता रहा है। यह सिनेमा इस दुनिया की ही खासियत है कि एक तरफ गीतकार साहिर ने 'कहाँ हैं कहाँ हैं/मुहाफिज खुदी के/ जिन्हें नाज है हिंद पर/ वो कहाँ हैं' लिखा तो दूसरी तरफ उन्होंने ही 'संसार से भागे फिरते हो/ भगवान को तुम क्या पाओगे !/ ये भोग भी एक तपस्या है / तुम प्यार के मारे क्या जानोगे / अपमान रचयिता का होगा/ रचना को अगर ठुकराओगे!' जैसी पंक्तियाँ भी रची हैं। परवर्तियों में गुलजार ऐसे गीतकार हैं जिन्होंने उर्दू, हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी के साथ पुरबिया बोलियों में मन को मोह लेने वाले गीतों की रचना की है। बंदिनी के 'मोरा गोरा अंग लइले, मोहे श्याम रंग दइदे', 'कजरारे-कजरारे तेरे कारे-कारे नयना!', 'यारा सिली सिली रात का ढलना' और 'चप्पा चप्पा चरखा चले' जैसे गीतों को रचकर उन्होंने भारत की साझा संस्कृति को मूर्तिमान कर दिया है। वस्तुतः भारत में बनने वाली फिल्मों में आने वाले गीत उसे विश्व-सिनेमा में एक अलग पहचान देते हैं। ये गीत सही मायने में भारतीय संस्कृति की खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं। उपर्युक्त गद्यांश में हिंदी फिल्मी गीतों की किस विशेषता पर सर्वाधिक बल दिया गया है?
- (A) ये गीत कलात्मक श्रेष्ठता को अभिव्यक्त करते हैं।
- (B) ये गीत सांप्रदायिक सद्भाव को अभिव्यक्त करते हैं।
- (C) ये गीत पारस्परिक प्रेम को अभिव्यक्त करते हैं।
- (D) ये गीत सांस्कृतिक खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं। ✓
Answer (the board’s key): (D)
हम धरती के बेटे बड़े कमेरे हैं। भरी थकान में सोते फिर भी — उठते बड़े सवेरे हैं।। धरती की सेवा करते हैं कभी न मेहनत से डरते हैं लू हो चाहे ठण्ड सयानी चाहे झर-झर बरसे पानी ये तो मौसम हैं हमने तूफानों के मुँह फेरे हैं। खेत लगे हैं अपने घर से हमको गरज नहीं दफ़्तर से दूर शहर से रहने वाले सीधे-सादे, भोले-भाले रखवाले अपने खेतों के जिनमें बीज बिखेरे हैं। हाथों में लेकर हल-हँसिया गाते नई फ़सल के रसिया धरती को साड़ी पहनाते दूर-दूर तक भूख मिटाते मुट्ठी पर दानों को रखकर कहते हैं बहुतेरे हैं हम धरती के बेटे बड़े कमेरे हैं। भरी थकान में सोते फिर भी — उठते बड़े सवेरे हैं।। 'हम धरती के बेटे बड़े कमेरे हैं!' से आशय है?
- (A) हम धरती के बहुत परिश्रमी बेटे हैं। ✓
- (B) हम धरती के बहुत आलसी बेटे हैं।
- (C) हम धरती के बहुत बुद्धिमान बेटे हैं।
- (D) हम धरती के बहुत अज्ञानी बेटे हैं।
Answer (the board’s key): (A)
हम धरती के बेटे बड़े कमेरे हैं। भरी थकान में सोते फिर भी — उठते बड़े सवेरे हैं।। धरती की सेवा करते हैं कभी न मेहनत से डरते हैं लू हो चाहे ठण्ड सयानी चाहे झर-झर बरसे पानी ये तो मौसम हैं हमने तूफानों के मुँह फेरे हैं। खेत लगे हैं अपने घर से हमको गरज नहीं दफ़्तर से दूर शहर से रहने वाले सीधे-सादे, भोले-भाले रखवाले अपने खेतों के जिनमें बीज बिखेरे हैं। हाथों में लेकर हल-हँसिया गाते नई फ़सल के रसिया धरती को साड़ी पहनाते दूर-दूर तक भूख मिटाते मुट्ठी पर दानों को रखकर कहते हैं बहुतेरे हैं हम धरती के बेटे बड़े कमेरे हैं। भरी थकान में सोते फिर भी — उठते बड़े सवेरे हैं।। कवि ने किसानों को 'फसलों का रसिया' क्यों कहा है?
- (A) किसान फसलों को उगाते हैं।
- (B) किसान फसलों को काटते है।
- (C) किसान फसलों से प्रेम करते हैं। ✓
- (D) किसान फसलों को बेच देते हैं।
Answer (the board’s key): (C)
हम धरती के बेटे बड़े कमेरे हैं। भरी थकान में सोते फिर भी — उठते बड़े सवेरे हैं।। धरती की सेवा करते हैं कभी न मेहनत से डरते हैं लू हो चाहे ठण्ड सयानी चाहे झर-झर बरसे पानी ये तो मौसम हैं हमने तूफानों के मुँह फेरे हैं। खेत लगे हैं अपने घर से हमको गरज नहीं दफ़्तर से दूर शहर से रहने वाले सीधे-सादे, भोले-भाले रखवाले अपने खेतों के जिनमें बीज बिखेरे हैं। हाथों में लेकर हल-हँसिया गाते नई फ़सल के रसिया धरती को साड़ी पहनाते दूर-दूर तक भूख मिटाते मुट्ठी पर दानों को रखकर कहते हैं बहुतेरे हैं हम धरती के बेटे बड़े कमेरे हैं। भरी थकान में सोते फिर भी — उठते बड़े सवेरे हैं।। किसान 'धरती की सेवा' _______________ करते हैं?
- (A) खेतों में फसल उगाकर
- (B) सर्दी, गर्मी, बरसात सहकर ✓
- (C) बिना विश्राम परिश्रम कर
- (D) खेतों के पास घर बनाकर
Answer (the board’s key): (B)
हम धरती के बेटे बड़े कमेरे हैं। भरी थकान में सोते फिर भी — उठते बड़े सवेरे हैं।। धरती की सेवा करते हैं कभी न मेहनत से डरते हैं लू हो चाहे ठण्ड सयानी चाहे झर-झर बरसे पानी ये तो मौसम हैं हमने तूफानों के मुँह फेरे हैं। खेत लगे हैं अपने घर से हमको गरज नहीं दफ़्तर से दूर शहर से रहने वाले सीधे-सादे, भोले-भाले रखवाले अपने खेतों के जिनमें बीज बिखेरे हैं। हाथों में लेकर हल-हँसिया गाते नई फ़सल के रसिया धरती को साड़ी पहनाते दूर-दूर तक भूख मिटाते मुट्ठी पर दानों को रखकर कहते हैं बहुतेरे हैं हम धरती के बेटे बड़े कमेरे हैं। भरी थकान में सोते फिर भी — उठते बड़े सवेरे हैं।। कथन (A) और कारण (R) पर विचार करते हुए सही विकल्प चुनिए: (A) हमारे घर खेतों के पास स्थित होते हैं। (R) हमारे घर शहरों से दूर होते हैं।
- (A) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
- (B) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
- (C) कथन (A) व (R) सही हैं और कथन (A), (R) की सही व्याख्या है। ✓
- (D) कथन (A) व (R) सही हैं और कथन (A), (R) की सही व्याख्या नहीं है।
Answer (the board’s key): (C)
हम धरती के बेटे बड़े कमेरे हैं। भरी थकान में सोते फिर भी — उठते बड़े सवेरे हैं।। धरती की सेवा करते हैं कभी न मेहनत से डरते हैं लू हो चाहे ठण्ड सयानी चाहे झर-झर बरसे पानी ये तो मौसम हैं हमने तूफानों के मुँह फेरे हैं। खेत लगे हैं अपने घर से हमको गरज नहीं दफ़्तर से दूर शहर से रहने वाले सीधे-सादे, भोले-भाले रखवाले अपने खेतों के जिनमें बीज बिखेरे हैं। हाथों में लेकर हल-हँसिया गाते नई फ़सल के रसिया धरती को साड़ी पहनाते दूर-दूर तक भूख मिटाते मुट्ठी पर दानों को रखकर कहते हैं बहुतेरे हैं हम धरती के बेटे बड़े कमेरे हैं। भरी थकान में सोते फिर भी — उठते बड़े सवेरे हैं।। 'हम किसानों ने धरती को फसलों के आवरण से ढक दिया है।' कविता की पंक्ति _______________ का आशय है -
- (A) तूफानों के मुँह फेरे हैं
- (B) रखवाले अपने खेतों के
- (C) धरती को साड़ी पहनाते ✓
- (D) दूर-दूर तक भूख मिटाते
Answer (the board’s key): (C)
‘रूलन और बतूलन जब गाती हैं तब अमीरूद्दीन को खुशी मिलती है।’ इस वाक्य का सरल वाक्य होगा -
- (A) रूलन और बतूलन के गायन से अमीरूद्दीन को खुशी मिलती है। ✓
- (B) रूलन और बतूलन जैसे ही गाती हैं अमीरूद्दीन को खुशी मिलती है।
- (C) रूलन और बतूलन गाती हैं और अमीरूद्दीन को खुशी मिलती है।
- (D) रूलन और बतूलन के गीतों से अमीरूद्दीन को खुशी मिलती है।
Answer (the board’s key): (A)
‘दूसरी बार जब हालदार साहब उधर से गुज़रे तो उन्हें मूर्ति में कुछ अंतर दिखाई दिया।’ इस मिश्रित वाक्य का संयुक्त वाक्य होगा -
- (A) जैसे ही दूसरी बार हालदार साहब उधर से गुज़रे, उन्हें मूर्ति में कुछ अंतर दिखाई दिया।
- (B) दूसरी बार उधर से गुज़रते समय हालदार साहब को मूर्ति में कुछ अंतर दिखाई दिया।
- (C) दूसरी बार हालदार साहब उधर से गुज़रे और उनको मूर्ति में कुछ अंतर दिखाई दिया। ✓
- (D) जब भी हालदार साहब उधर से गुज़रते हैं मूर्ति में अंतर दिखाई देता है।
Answer (the board’s key): (C)
निम्नलिखित वाक्यों में से मिश्र वाक्य का उदाहरण है :
- (A) अजमेर से पहले पिता जी इंदौर में थे।
- (B) हुड़दंग तो इतना मचाया कि कॉलेज वालों को थर्ड इयर भी खोलना पड़ा। ✓
- (C) हमने हुड़दंग मचाया और कॉलेज वालों ने थर्ड इयर खोल दिया।
- (D) हमारे हुड़दंग मचाने के कारण कॉलेज वालों को थर्ड इयर भी खोलना पड़ा।
Answer (the board’s key): (B)
निम्नलिखित वाक्यों में संयुक्त वाक्य पहचानकर नीचे दिए गए विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाला विकल्प चुनकर लिखिए । 1. असफल होने पर शोक करना व्यर्थ है। 2. मैं एक दिन अमेरिका जाऊँगी तथा अपना शेष जीवन वहीं बिताऊँगी। 3. जैसे ही रमेश आया, वैसे ही मोहन चल दिया। 4. विद्यार्थी परिश्रमी है, वह अवश्य सफल होगा।
- (A) 1 और 2 सही है।
- (B) 2 और 3 सही है।
- (C) 1 और 4 सही है।
- (D) 2 और 4 सही है। ✓
Answer (the board’s key): (D)
कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प का चयन कीजिए ? कॉलम 1: 1. सुरेश के आ जाने से सब प्रसन्न हो गए। 2. मैं युवा थी और शीला अग्रवाल की जोशीली बातों ने रगों में बहते खून को लावे में बदल दिया था। 3. कुछ लोग इसलिए दान करते हैं कि उनका नाम हो। कॉलम 2: i. मिश्र वाक्य ii. सरल वाक्य iii. संयुक्त वाक्य
- (A) 1 i , 2 ii , 3 iii
- (B) 1 ii , 2 iii , 3 i ✓
- (C) 1 i , 2 iii, 3 ii
- (D) 1 ii, 2 i , 3 iii
Answer (the board’s key): (B)
बालगोबिन भगत कबीर को 'साहब' मानते थे। (कर्म वाच्य में बदलिए)
- (A) बालगोबिन भगत द्वारा कबीर को 'साहब' माना था।
- (B) बालगोबिन भगत द्वारा कबीर को 'साहब' माना जाता है। ✓
- (C) बालगोबिन भगत कबीर को 'साहब' मानते हैं।
- (D) बालगोबिन भगत से कबीर को 'साहब' माना जाता है।
Answer (the board’s key): (B)
भोर में लोगों से बालगोबिन भगत का गीत नहीं सुना गया। वाक्य में वाच्य है -
- (A) कर्म वाच्य ✓
- (B) भाव वाच्य
- (C) कर्तृ वाच्य
- (D) कर्तृ और कर्म वाच्य दोनों
Answer (the board’s key): (A)
'धान के पानी-भरे खेतों में बच्चे उछल रहे हैं।' उदाहरण है--
- (A) भाव वाच्य
- (B) कर्तृ वाच्य ✓
- (C) कर्म वाच्य
- (D) विचार वाच्य
Answer (the board’s key): (B)
निम्नलिखित वाक्यों में भाव वाच्य का उदाहरण है: 1. माता जी मिठाई बना सकती हैं। 2. मुझसे बैठा नहीं जाता। 3. भगवान द्वारा हमारी रक्षा की जाती है। 4. गर्मियों में छत पर सोया जाता है।
- (A) 1 और 2 सही है।
- (B) 2 और 3 सही है।
- (C) 1 और 4 सही है।
- (D) 2 और 4 सही है। ✓
Answer (the board’s key): (D)
कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प का चयन कीजिए ? कॉलम 1: 1. गर्मियों में लोग खूब नहाते हैं। 2. गोपाल से पत्र लिखा जाता है। 3. धूप में चला नहीं जाता। कॉलम 2: i. भाव वाच्य ii. कर्तृ वाच्य iii. कर्म वाच्य
- (A) 1. i , 2. ii , 3. iii
- (B) 1.ii , 2. iii , 3. i ✓
- (C) 1. i , 2. iii, 3.ii
- (D) 1. ii, 2. i , 3. iii
Answer (the board’s key): (B)
हम देहरादून घूमने गए। -- रेखांकित पद (हम) का परिचय है?
- (A) संज्ञा, प्रथम पुरुष, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्ता
- (B) सर्वनाम, प्रथम पुरुष, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्ता ✓
- (C) सर्वनाम, प्रथम पुरुष, पुल्लिंग, एक वचन, कर्ता
- (D) सर्वनामिक विशेषण, प्रथम पुरुष, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्ता
Answer (the board’s key): (B)
शशि दसवीं कक्षा में पढ़ती है। -- रेखांकित पद (दसवीं) का परिचय है?
- (A) विशेषण, संख्यावाचक, स्त्रीलिंग, एकवचन, 'कक्षा' विशेष्य ✓
- (B) क्रियाविशेषण, परिमाणवाचक, 'पढ़ना' क्रिया
- (C) विशेषण, गुणवाचक, स्त्रीलिंग, एकवचन, 'कक्षा' विशेष्य
- (D) विशेषण, संख्यावाचक, स्त्रीलिंग, बहुवचन, 'कक्षा' विशेष्य
Answer (the board’s key): (A)
वह स्कूल से अभी-अभी आया है। -- रेखांकित पद (स्कूल) का परिचय है?
- (A) संज्ञा, जातिवाचक, एकवचन, पुल्लिंग, करण कारक
- (B) संज्ञा, व्यक्तिवाचक, एकवचन, पुल्लिंग, अपादान कारक
- (C) संज्ञा, जातिवाचक, बहुवचन, पुल्लिंग, अपादान कारक
- (D) संज्ञा, जातिवाचक, एकवचन, पुल्लिंग, अपादान कारक ✓
Answer (the board’s key): (D)
वह मेरी बात पर बहुत हँसा। -- रेखांकित पद (बहुत) का परिचय है?
- (A) परिमाणवाचक क्रियाविशेषण, हँसना क्रिया का विशेषण ✓
- (B) विशेषण, संख्यावाचक, स्त्रीलिंग, एकवचन, 'हँसना' विशेष्य
- (C) विशेषण, परिमाण वाचक, स्त्रीलिंग, एकवचन, 'हँसना' विशेष्य
- (D) विशेषण, परिमाण वाचक, पुल्लिंग, एकवचन, 'हँसना' विशेष्य
Answer (the board’s key): (A)
योग्य पिता की संतान भी योग्य होती है।-- रेखांकित पद (संतान) का परिचय है?
- (A) संज्ञा, जातिवाचक, स्त्रीलिंग, एकवचन ✓
- (B) संज्ञा, व्यक्तिवाचक, स्त्रीलिंग, एकवचन
- (C) संज्ञा, जातिवाचक, पुल्लिंग, एकवचन
- (D) विशेषण, गुणवाचक, स्त्रीलिंग, एकवचन, 'पिता' विशेष्य
Answer (the board’s key): (A)
'सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यों करई ककरी' में अलंकार है-
- (A) उत्प्रेक्षा ✓
- (B) श्लेष
- (C) यमक
- (D) अनुप्रास
Answer (the board’s key): (A)
'कहीं साँस लेते हो घर- घर भर देते हो' पंक्ति में निहित अलंकार है-
- (A) उपमा
- (B) रूपक
- (C) यमक
- (D) मानवीकरण ✓
Answer (the board’s key): (D)
'उस काल मारे क्रोध के, तन काँपने उसका लगा। मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा।' में अलंकार है-
- (A) उत्प्रेक्षा ✓
- (B) रूपक
- (C) श्लेष
- (D) उपमा
Answer (the board’s key): (A)
निम्नलिखित में उत्प्रेक्षा अलंकार है-
- (A) बादल, गरजो!-
- (B) घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!
- (C) ललित ललित, काले घुँघराल
- (D) चित्रकूट जनु अचल अहेरी। ✓
Answer (the board’s key): (D)
'सुबरन को खोजत फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर।' में अलंकार है-
- (A) उपमा
- (B) रूपक
- (C) यमक
- (D) श्लेष ✓
Answer (the board’s key): (D)
'बालगोविन भगत के जीवन से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
- (A) आडंबर से दूर रहकर ईश्वर भक्ति करने की ✓
- (B) कृषि आधारित जीवन व्यतीत करने की
- (C) सामाजिक रूढ़ियों का समर्थन करने की
- (D) पूजा-पाठ और यज्ञ आदि करने की
Answer (the board’s key): (A)
अमीरउद्दीन को रसूूलनबाई और बातूलनबाई के घरवाला रास्ता क्यों पसंद था?
- (A) संगीत के प्रति असीम रुचि के कारण। ✓
- (B) संगीत के प्रति अरुचि के कारण।
- (C) वह छोटा रास्ता था।
- (D) वह रास्ता साफ-सुथरा था।
Answer (the board’s key): (A)
'दंतुरित मुस्कान' कविता में कवि को शिशु का धूल-धूसरित शरीर प्रतीत होता है?
- (A) स्नान करवाने योग्य।
- (B) वस्त्र-आभूषण से सजाने योग्य।
- (C) खिले हुए सुंदर कमल के समान। ✓
- (D) मिट्टी से सने हुए पौधे के समान।
Answer (the board’s key): (C)
संगतकार पाठ के अनुसार संगतकार की मुख्य विशेषता क्या होती है?
- (A) उसकी मानवीयता ✓
- (B) उसकी कलात्मक श्रेष्ठता
- (C) उसकी प्रतिभा प्रदर्शन की आकांक्षा
- (D) उसकी आत्म मुग्धता
Answer (the board’s key): (A)
Section B · Written questions (9)
प्रश्न 7. निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए- (1x5 =5) [Text of passage] क. 'जीप कस्बा छोड़कर आगे बढ़ गई' अर्थात A. जीप कस्बे से आगे की ओर बढ़ गई। B. जीप कस्बे में रुक कर आगे बढ़ गई। C. जीप कस्बे में रुक गई। D. जीप कस्बे में नहीं गई। ख. हालदार साहब किसके विषय में सोचते रहे ? A. नेताजी के बारे में B. मूर्ति के बारे में C. चौराहे के बारे में D. कस्बे के बारे में ग. 'वरना तो देशभक्ति भी आजकल मजाक की चीज़ होती जा रही है।' से आशय है... A. आजकल देशभक्त होना संभव नहीं है। B. आजकल देशभक्त होना हास्यास्पद हो गया है। C. आजकल सभी देशभक्त हो गए हैं। D. आजकल देशभक्ति की प्रासंगिकता नहीं है। घ. दूसरी बार जब हालदार साहब उधर से गुजरे तो उन्हें मूर्ति में क्या अंतर दिखाई दिया? A. मूर्ति पर कोई चश्मा नहीं था। B. मूर्ति पर पुराना चश्मा था। C. मूर्ति पर एक नया चश्मा था। D. मूर्ति क्षतिग्रस्त थी। ङ. 'नेताजी का चश्मा' पाठ.. A. देशभक्ति के भाव पर व्यंग्य करता है। B. देशभक्ति की प्रासंगिकता पर सवाल उठाता है। C. देशभक्ति के महत्व को स्थापित करता है। D. देशभक्ति के प्रति उम्मीद जगाता है।
प्रश्न 9. निम्नलिखित पठित पद्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए- (1x5=5) बिहसि लखन बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी ॥ पुनि पुनि मोहि देखि कुठारु। चहत उड़ावन फूँकि पहारू ॥ इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं ॥ देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना ॥ भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सह रिस रोकी ॥ सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरे कुल इन पर न सुराई ॥ बधे पापु अपकीरति हारें। मारतहूँ पा परिअ तुम्हारे ॥ क. परशुराम बार-बार अपना कुठार किसे और क्यों दिखा रहे हैं? A. राम को भयभीत करने के लिए B. लक्ष्मण को भयभीत करने के लिए C. विश्वामित्र को भयभीत करने के लिए D. महाराज जनक को भयभीत करने के लिए ख. निम्नलिखित पंक्तियों में से किस पंक्ति से लक्ष्मण की शक्तिशाली होने का पता चलता है: A. बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी।। B. पुनि पुनि मोहि देखि कुठारु। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।। C. देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।। D. इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।। ग. रघुकुल में किन-किन के प्रति अपनी वीरता का प्रदर्शन नहीं किया जाता है? A. देवता, ब्राह्मण, ईश्वर भक्त और गाय पर B. स्त्रियों, बच्चों, ईश्वर भक्त और गाय पर C. देवता, राजा, वीर योद्धा और स्त्रियों पर D. स्त्रियों, बच्चों, राजा और गाय पर घ. 'बिहसि लखन बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी' यह कथन__________का उदाहरण है। A. व्यंग्य का B. हास्य का C. क्रोध का D. वैराग्य का ङ. उपर्युक्त पद्यांश में लक्ष्मण के चरित्र की कौन सी विशेषता उजागर होती है ? A. वीरता B. धैर्य C. शिष्टता D. विनम्रता
प्रश्न 11. गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित 4 प्रश्नों में से किन्ही तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए: (2x3=6) क. क्या आपको नवाब साहब का व्यवहार सामान्य लगा? क्यों? युक्तियुक्त उत्तर दीजिए। ख. महानगरों की 'फ्लैट-कल्चर' और लेखिका मन्नू भंडारी के 'पड़ोस-कल्चर' में क्या अंतर दिखाई देता है? विचार करते हुए लिखिए। ग. 'मंगल ध्वनि' का क्या अभिप्राय है? बिस्मिल्लाह खान की 'शहनाई की मंगल ध्वनि का नायक' क्यों कहा गया है? स्पष्ट कीजिए। घ. सच्चे अर्थों में 'संस्कृत व्यक्ति' किसे कहा जाता है? संस्कृति पाठ के आधार पर तर्क सहित लिखिए।
प्रश्न 12. निर्धारित कविताओं के आधार पर निम्नलिखित 4 प्रश्नों में से किन्ही तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए: (2x3=6) क. गोपियों ने श्री कृष्ण के प्रति अपने एकनिष्ठ प्रेम को किन उदाहरणों के द्वारा स्पष्ट किया है? ख. 'साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है।' इस कथन पर 'राम लक्ष्मण परशुराम संवाद' पाठ के आधार पर अपने विचार व्यक्त कीजिए। ग. आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में 'अभी समय भी नहीं' कवि ऐसा क्यों कहता है? घ. फसल 'हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा' किस प्रकार है? विचार कीजिए।
प्रश्न 13. पूरक पाठ्यपुस्तक के पाठों पर आधारित निम्नलिखित 3 प्रश्नों में से किन्ही दो के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए- (4x2=8) क. 'माता का प्रेम, पिता के प्रेम की अपेक्षा अधिक गहन होता है।' 'माता के अंचल' पाठ के आधार पर पर विचार कीजिए। ख. 'मैं क्यों लिखता हूं' प्रश्न के उत्तर में लेखक क्या कारण बताता है? ग. 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' किस शहर को कहा गया है और क्यों?
प्रश्न 14. निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए - (6x1=6) क. स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव भूमिका, अमृत महोत्सव का अर्थ, इस महोत्सव में होने वाले समारोह, इस महोत्सव का महत्व, निष्कर्ष ख. भाग्य और पुरुषार्थ भूमिका, आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है, भाग्यवादी व्यक्ति उदासीन रहता है, परिश्रमी व्यक्ति अपने भाग्य को बदल लेता है, निष्कर्ष ग. पर्वतीय स्थल की यात्रा भूमिका, प्राकृतिक सौंदर्य, यात्रा वर्णन, सांस्कृतिक महत्व
प्रश्न 15. किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में पत्र लिखिए: (5x1=5) क. आपका नाम दिशा/दक्ष है। आपकी आयु मतदान करने योग्य हो गई है। आपने मतदाता पहचान पत्र बनवाने के लिए गरुण ऐप के द्वारा आवेदन कर दिया है। किन्तु काफी समय के बाद भी आपका मतदाता पहचान पत्र आपको नहीं मिला। मतदाता पहचान पत्र के वितरण में देरी की शिकायत करते हुए अपने क्षेत्र के बी. एल. ओ. (ब्लॉक लेवल ऑफिसर) को पत्र लिखिए। अथवा ख. आपका नाम दिशा/दक्ष है। आप अपने आसपास अनेक अशिक्षित प्रौढ़ो को देखते हैं और उन्हें साक्षर बनाने हेतु कुछ प्रयास करते हैं। इस विषय में जानकारी देते हुए अपने मित्र मानव को पत्र लिखिए।
प्रश्न 16. क. आपका नाम सुनीता/सुरेश है। आप राजेन्द्र नगर के निवासी हैं। दैनिक समाचार पत्र से पता चला है कि स्थानीय राजकीय माध्यमिक विद्यालय में पुस्तकालय अध्यक्ष का पद रिक्त है। आप उक्त पद की योग्यता (बी. लिब. /पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक) को धारण करते हैं। उक्त रिक्त पद हेतु राजकीय माध्यमिक विद्यालय के विद्यालय प्रमुख को आवेदन भेजने हेतु लगभग 80 शब्दों में अपना एक संक्षिप्त स्ववृत्त लिखिए। (5x1=5) अथवा ख. आपका नाम सुनीता/सुरेश है। आप राजेन्द्र नगर के निवासी हैं। पिछले कुछ दिनों से आपके क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति अव्यवस्थित है। अपने क्षेत्र में अनियमित विद्युत आपूर्ति की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए राज्य विद्युत आपूर्ति निगम के महानिदेशक के नाम एक शिकायती ई-मेल लिखिए।
प्रश्न 17. क. आप अपना पुराना स्मार्टफोन बेचना चाहते हैं, उससे संबंधित एक आकर्षक विज्ञापन लिखिए। (4x1=4) अथवा ख.आप वीणा/विकास हैं। आपके छोटी बहन ने विद्यालय की वार्षिक परीक्षा में पूरे विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उसे बधाई देते हुए 60 शब्दों में एक संदेश लिखिए।
The same preparation, with Medha Ma’am — on your phone
Every question of every chapter with its model answer, practice questions in the board’s own shapes, 60 minutes of class a day, written answers marked, a test every Sunday and a WhatsApp report to parents.
Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.