CBSE Class 10 · Hindi A · board exam 2027
CBSE Class 10 Hindi A Question Paper 2025
The board’s 2025 question paper, set 3/1/1 — all 39 questions as printed; 8 objective answers from the board’s own key; full model answers for 3 written questions, how the answer begins for 27 more. Each question names its chapter, where that chapter’s most-asked questions are.
Section B · Written questions (39)
दिनकर जी ने माना है कि उन पर प्रारम्भ से ही जितना प्रभाव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रहा उतना ही मोहम्मद इकबाल का । बाद में इलियट की काव्य-शैली और विचार-दृष्टि ने उनके कवि मानस को छूकर दूर भीतर तक उन्मथित कर दिया । परिणामतः उनकी कविताओं ने एक नई भंगिमा को ग्रहण किया । दिनकर जी अपने युग के एक प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे । सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबन्ध भी दिए हैं, तो बोधकथा, डायरी-संस्मरण भी, और दर्शन-इतिहासगत तथ्यों के विवेचन भी । ‘दिनकर’ जी जीवन भर संघर्षरत रहे । साहित्य और राजनीति दोनों के बीच उनका मन रमता था और इन दोनों ही क्षेत्रों में उनको सफलता मिली । साहित्य जगत द्वारा प्रदत्त ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया । उनके अंतरंग मित्रों को यह ज्ञात है कि ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अन्तिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ । पुरस्कार प्राप्त कर ‘दिनकर’ जी अभिभूत थे क्योंकि कवि का मन अपनी रचनाओं की स्वीकृति, विशेष रूप से सुधीजनों द्वारा उनका प्रशंसित और समादृत होना, अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है । ज्ञानपीठ पुरस्कार के मिलने के बाद उन्होंने अप्रैल, 1974 में तिरुपति की यात्रा की । जब ‘दिनकर’ जी मद्रास पहुँचे तो यह एक सुखद संयोग था कि उनके सर्वाधिक स्नेही मित्र थे गंगाशरण सिंह और जयप्रकाश बाबू भी वहीं थे । उसी शाम उन्होंने मद्रास के समुद्र तट पर अपने कुछ मित्रों को अपनी सुन्दर-सुन्दर रचनाएँ सुनाईं । तब कोई नहीं जानता था कि आज 23 – 24 अप्रैल की शाम गंगा की गोद में उत्पन्न दिनकर जी के अस्ताचल जाने की शाम थी । उसी रात मद्रास में ही ‘दिनकर’ जी की जीवन लीला समाप्त हो गई और फिर उनका पार्थिव शरीर मद्रास से दिल्ली होकर पटना लाया गया । दिनकर जी के लेखन पर किन-किन कवियों का प्रभाव रहा है ?
- (A) I, III और IV
- (B) I, II और III ✓
- (C) II, III और IV
- (D) I, II और IV
Answer (the board’s key): (B)
दिनकर जी ने माना है कि उन पर प्रारम्भ से ही जितना प्रभाव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रहा उतना ही मोहम्मद इकबाल का । बाद में इलियट की काव्य-शैली और विचार-दृष्टि ने उनके कवि मानस को छूकर दूर भीतर तक उन्मथित कर दिया । परिणामतः उनकी कविताओं ने एक नई भंगिमा को ग्रहण किया । दिनकर जी अपने युग के एक प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे । सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबन्ध भी दिए हैं, तो बोधकथा, डायरी-संस्मरण भी, और दर्शन-इतिहासगत तथ्यों के विवेचन भी । ‘दिनकर’ जी जीवन भर संघर्षरत रहे । साहित्य और राजनीति दोनों के बीच उनका मन रमता था और इन दोनों ही क्षेत्रों में उनको सफलता मिली । साहित्य जगत द्वारा प्रदत्त ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया । उनके अंतरंग मित्रों को यह ज्ञात है कि ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अन्तिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ । पुरस्कार प्राप्त कर ‘दिनकर’ जी अभिभूत थे क्योंकि कवि का मन अपनी रचनाओं की स्वीकृति, विशेष रूप से सुधीजनों द्वारा उनका प्रशंसित और समादृत होना, अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है । ज्ञानपीठ पुरस्कार के मिलने के बाद उन्होंने अप्रैल, 1974 में तिरुपति की यात्रा की । जब ‘दिनकर’ जी मद्रास पहुँचे तो यह एक सुखद संयोग था कि उनके सर्वाधिक स्नेही मित्र थे गंगाशरण सिंह और जयप्रकाश बाबू भी वहीं थे । उसी शाम उन्होंने मद्रास के समुद्र तट पर अपने कुछ मित्रों को अपनी सुन्दर-सुन्दर रचनाएँ सुनाईं । तब कोई नहीं जानता था कि आज 23 – 24 अप्रैल की शाम गंगा की गोद में उत्पन्न दिनकर जी के अस्ताचल जाने की शाम थी । उसी रात मद्रास में ही ‘दिनकर’ जी की जीवन लीला समाप्त हो गई और फिर उनका पार्थिव शरीर मद्रास से दिल्ली होकर पटना लाया गया । दिनकर जी के बारे में कौन-सा तथ्य असत्य है ?
- (A) वे एक प्रमुख कवि थे परंतु असफल गद्य लेखक भी थे । ✓
- (B) उनकी शैली प्रांजल थी तथा वे साहित्यिक निबंध लिखते थे ।
- (C) ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अंतिम अध्याय का स्वर्णिम पन्ना है ।
- (D) बोधकथा, डायरी, संस्मरण के अतिरिक्त दिनकर जी ने इतिहास के विषय में भी लिखा है ।
Answer (the board’s key): (A)
दिनकर जी ने माना है कि उन पर प्रारम्भ से ही जितना प्रभाव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रहा उतना ही मोहम्मद इकबाल का । बाद में इलियट की काव्य-शैली और विचार-दृष्टि ने उनके कवि मानस को छूकर दूर भीतर तक उन्मथित कर दिया । परिणामतः उनकी कविताओं ने एक नई भंगिमा को ग्रहण किया । दिनकर जी अपने युग के एक प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे । सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबन्ध भी दिए हैं, तो बोधकथा, डायरी-संस्मरण भी, और दर्शन-इतिहासगत तथ्यों के विवेचन भी । ‘दिनकर’ जी जीवन भर संघर्षरत रहे । साहित्य और राजनीति दोनों के बीच उनका मन रमता था और इन दोनों ही क्षेत्रों में उनको सफलता मिली । साहित्य जगत द्वारा प्रदत्त ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया । उनके अंतरंग मित्रों को यह ज्ञात है कि ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अन्तिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ । पुरस्कार प्राप्त कर ‘दिनकर’ जी अभिभूत थे क्योंकि कवि का मन अपनी रचनाओं की स्वीकृति, विशेष रूप से सुधीजनों द्वारा उनका प्रशंसित और समादृत होना, अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है । ज्ञानपीठ पुरस्कार के मिलने के बाद उन्होंने अप्रैल, 1974 में तिरुपति की यात्रा की । जब ‘दिनकर’ जी मद्रास पहुँचे तो यह एक सुखद संयोग था कि उनके सर्वाधिक स्नेही मित्र थे गंगाशरण सिंह और जयप्रकाश बाबू भी वहीं थे । उसी शाम उन्होंने मद्रास के समुद्र तट पर अपने कुछ मित्रों को अपनी सुन्दर-सुन्दर रचनाएँ सुनाईं । तब कोई नहीं जानता था कि आज 23 – 24 अप्रैल की शाम गंगा की गोद में उत्पन्न दिनकर जी के अस्ताचल जाने की शाम थी । उसी रात मद्रास में ही ‘दिनकर’ जी की जीवन लीला समाप्त हो गई और फिर उनका पार्थिव शरीर मद्रास से दिल्ली होकर पटना लाया गया । निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : पुरस्कार प्राप्त कर मन अभिभूत हो जाता है । कारण : पुरस्कार विद्वज्जनों द्वारा दी जाने वाली सराहना और सम्मान का प्रतीक है । विकल्प : (A) कथन गलत है और कारण भी पूरी तरह गलत ही है । (B) कथन सही है परंतु कारण आंशिक रूप से सही है । (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की उचित व्याख्या भी है । (D) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं है ।
- (A) कथन गलत है और कारण भी पूरी तरह गलत ही है ।
- (B) कथन सही है परंतु कारण आंशिक रूप से सही है ।
- (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की उचित व्याख्या भी है । ✓
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं है ।
Answer (the board’s key): (C)
दिनकर जी ने माना है कि उन पर प्रारम्भ से ही जितना प्रभाव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रहा उतना ही मोहम्मद इकबाल का । बाद में इलियट की काव्य-शैली और विचार-दृष्टि ने उनके कवि मानस को छूकर दूर भीतर तक उन्मथित कर दिया । परिणामतः उनकी कविताओं ने एक नई भंगिमा को ग्रहण किया । दिनकर जी अपने युग के एक प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे । सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबन्ध भी दिए हैं, तो बोधकथा, डायरी-संस्मरण भी, और दर्शन-इतिहासगत तथ्यों के विवेचन भी । ‘दिनकर’ जी जीवन भर संघर्षरत रहे । साहित्य और राजनीति दोनों के बीच उनका मन रमता था और इन दोनों ही क्षेत्रों में उनको सफलता मिली । साहित्य जगत द्वारा प्रदत्त ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया । उनके अंतरंग मित्रों को यह ज्ञात है कि ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अन्तिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ । पुरस्कार प्राप्त कर ‘दिनकर’ जी अभिभूत थे क्योंकि कवि का मन अपनी रचनाओं की स्वीकृति, विशेष रूप से सुधीजनों द्वारा उनका प्रशंसित और समादृत होना, अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है । ज्ञानपीठ पुरस्कार के मिलने के बाद उन्होंने अप्रैल, 1974 में तिरुपति की यात्रा की । जब ‘दिनकर’ जी मद्रास पहुँचे तो यह एक सुखद संयोग था कि उनके सर्वाधिक स्नेही मित्र थे गंगाशरण सिंह और जयप्रकाश बाबू भी वहीं थे । उसी शाम उन्होंने मद्रास के समुद्र तट पर अपने कुछ मित्रों को अपनी सुन्दर-सुन्दर रचनाएँ सुनाईं । तब कोई नहीं जानता था कि आज 23 – 24 अप्रैल की शाम गंगा की गोद में उत्पन्न दिनकर जी के अस्ताचल जाने की शाम थी । उसी रात मद्रास में ही ‘दिनकर’ जी की जीवन लीला समाप्त हो गई और फिर उनका पार्थिव शरीर मद्रास से दिल्ली होकर पटना लाया गया । दिनकर जी की रचनाशीलता की दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए ।

Medha Ma’am
AskMedha’s AI teacher
Model answer · Dinkar's prose writing features
- 1.दिनकर जी एक सफल गद्य लेखक भी थे, जिन्होंने सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबन्ध लिखे।1 mark
- 2.उनकी रचनाशीलता में विविधता थी - उन्होंने निबन्ध के साथ-साथ बोधकथा, डायरी-संस्मरण तथा दर्शन-इतिहासगत तथ्यों का विवेचन भी लिखा।1 mark
- पहली विशेषता में भाषा-शैली (सीधी-सरल भाषा, प्रांजल शैली) का उल्लेख अवश्य करें।
- दूसरी विशेषता में विविधता दर्शाने हेतु निबन्ध, बोधकथा, संस्मरण और दर्शन-इतिहास से जुड़े उदाहरण अवश्य लिखें।
Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme
दिनकर जी ने माना है कि उन पर प्रारम्भ से ही जितना प्रभाव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रहा उतना ही मोहम्मद इकबाल का । बाद में इलियट की काव्य-शैली और विचार-दृष्टि ने उनके कवि मानस को छूकर दूर भीतर तक उन्मथित कर दिया । परिणामतः उनकी कविताओं ने एक नई भंगिमा को ग्रहण किया । दिनकर जी अपने युग के एक प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे । सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबन्ध भी दिए हैं, तो बोधकथा, डायरी-संस्मरण भी, और दर्शन-इतिहासगत तथ्यों के विवेचन भी । ‘दिनकर’ जी जीवन भर संघर्षरत रहे । साहित्य और राजनीति दोनों के बीच उनका मन रमता था और इन दोनों ही क्षेत्रों में उनको सफलता मिली । साहित्य जगत द्वारा प्रदत्त ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया । उनके अंतरंग मित्रों को यह ज्ञात है कि ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अन्तिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ । पुरस्कार प्राप्त कर ‘दिनकर’ जी अभिभूत थे क्योंकि कवि का मन अपनी रचनाओं की स्वीकृति, विशेष रूप से सुधीजनों द्वारा उनका प्रशंसित और समादृत होना, अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है । ज्ञानपीठ पुरस्कार के मिलने के बाद उन्होंने अप्रैल, 1974 में तिरुपति की यात्रा की । जब ‘दिनकर’ जी मद्रास पहुँचे तो यह एक सुखद संयोग था कि उनके सर्वाधिक स्नेही मित्र थे गंगाशरण सिंह और जयप्रकाश बाबू भी वहीं थे । उसी शाम उन्होंने मद्रास के समुद्र तट पर अपने कुछ मित्रों को अपनी सुन्दर-सुन्दर रचनाएँ सुनाईं । तब कोई नहीं जानता था कि आज 23 – 24 अप्रैल की शाम गंगा की गोद में उत्पन्न दिनकर जी के अस्ताचल जाने की शाम थी । उसी रात मद्रास में ही ‘दिनकर’ जी की जीवन लीला समाप्त हो गई और फिर उनका पार्थिव शरीर मद्रास से दिल्ली होकर पटना लाया गया । ज्ञानपीठ पुरस्कार का दिनकर जी के जीवन में क्या महत्व रहा ?

Medha Ma’am
AskMedha’s AI teacher
Model answer · unseen passage, Dinkar
- 1.ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया और यह पुरस्कार उनके जीवन के अंतिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ।1 mark
- 2.पुरस्कार पाकर दिनकर जी अभिभूत थे क्योंकि कवि का मन अपनी रचनाओं की स्वीकृति और सुधीजनों द्वारा प्रशंसित होने को ही अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है।1 mark
- उत्तर में 'स्वर्णिम क्षण' और 'अंतिम अध्याय' दोनों शब्द अवश्य लिखें।
- यह बताना न भूलें कि रचनाओं की स्वीकृति और सुधीजनों की प्रशंसा ही कवि की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए : संध्या ने मेघों के कितने चित्र बनाये — हाथी, घोड़े, पेड़, आदमी, जंगल, क्या-क्या नहीं रच दिया और कभी रंगों से क्रीड़ा की, आकृतियाँ नहीं बनायीं । कभी चलाए झीने से बादल जिनमें चटकीली लाली उभर उठी थी, जिनकी आभा हरियाली पर थिरक उठी थी । जाते-जाते क्षितिज-पटी पर सूरज ने सोना बरसाया । छाया काली बढ़ने लगी, रंग धीरे-धीरे फिर बदले, पेंसिल के रेखा-चित्रों से बादल छाए । विविध रूप आकार बदलते से, ज्यों न्हाए हुए प्रकाश और छाया में, अपना पद ले । रात उतर आयी, दिखलायी दिये सितारे, पेड़, गाँव अस्पष्ट दिखे, मानव-दृग हारे । (i) संध्या के आसमान के बारे में कवि का क्या कहना है ? (1) (A) आसमान को काले मेघों ने आच्छादित कर लिया है। (B) चारों तरफ रंगों और आकृतियों की भीड़ है। (C) आसमान में मेघों ने विभिन्न आकृतियाँ बनाईं। (D) पशुओं की आकृतियों को बना उनमें रंग भरा। (ii) क्षितिज-पटी का रूप बार-बार क्यों बदलता रहा ? (1) I. प्रकाश और छाया के बदलते स्वरूप के कारण II. संध्या के सूर्य की बदलती रोशनी और रंगों के कारण III. आसमान में बादलों से बनी हाथी, घोड़े, पेड़ आदि आकृतियों के कारण विकल्प : (A) केवल I और II (B) I, II और III सभी (C) केवल II और III (D) केवल I और III (iii) कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए : (1) कथन : आसमान में छाए बादलों को कवि ने पेंसिल से बनाए रेखा-चित्र कहा है। कारण : उनमें डूबते सूर्य की लाली भर गई है। विकल्प : (A) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है। (B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं। (C) कथन सही है और कारण ग़लत है। (D) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है। (iv) काव्यांश के आधार पर संध्या के सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए। (2) (v) काव्यांश के लिए एक उपयुक्त शीर्षक दीजिए और उस शीर्षक को चुनने का तर्क भी लिखिए। (2)
मुक्तेश्वर की यात्रा में हमने हिमालय की अभिराम छवि को देखा। (मिश्र वाक्य में बदलिए)

Medha Ma’am
AskMedha’s AI teacher
Model answer · complex sentence conversion
- 1.जब हमने मुक्तेश्वर की यात्रा की, तब हमने हिमालय की अभिराम छवि को देखा।1 mark
- मिश्र वाक्य बनाने के लिए 'जब...तब' जैसे योजक शब्दों का जोड़ा प्रयोग करें।
- 'यात्रा में' को 'जब हमने यात्रा की' जैसे आश्रित उपवाक्य में बदलें, अर्थ वही रहे।
- दोनों उपवाक्यों में 'ने' के साथ क्रिया का लिंग और काल सही रखें।
Marks split as in the board’s published marking scheme
जब अधिक बारिश होती है तब सड़कों पर पानी भर जाता है। (सरल वाक्य में बदलिए)
How the model answer begins
1. सरल वाक्य: अधिक बारिश होने पर सड़कों पर पानी भर जाता है।
The full answer from Medha Ma’am →कल सोते समय मैंने एक सुंदर सपना देखा। (संयुक्त वाक्य में बदलिए)
How the model answer begins
1. कल मैं सोया और मैंने एक सुंदर सपना देखा।
The full answer from Medha Ma’am →रेखा दीदी ने कहा कि शोर मत मचाओ। (आश्रित उपवाक्य पहचानिए और उसका भेद भी लिखिए)
How the model answer begins
1. आश्रित उपवाक्य – (कि) शोर मत मचाओ। भेद – संज्ञा आश्रित उपवाक्य (यह उपवाक्य मुख्य उपवाक्य की क्रिया 'कहा' के कर्म के रूप में आया है।)
The full answer from Medha Ma’am →श्री लाल बहादुर शास्त्री ने 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया था। (रचना की दृष्टि से वाक्य का भेद पहचानकर लिखिए)
How the model answer begins
1. सरल वाक्य (इस वाक्य में एक ही उद्देश्य 'श्री लाल बहादुर शास्त्री' और एक ही मुख्य क्रिया 'दिया था' है।)
The full answer from Medha Ma’am →निर्देशानुसार 'वाच्य' पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लिखिए : (क) ड्राइवर ने ज़ोर से ब्रेक मारे। (कर्मवाच्य में बदलिए) (ख) वे कबीर के आदेशों पर चलते। (भाववाच्य में बदलिए) (ग) नवाब साहब द्वारा दृढ़ निश्चय कर खीरों को उठाया गया। (कर्तृवाच्य में बदलिए) (घ) लेखक ने आत्मसम्मान निभाना ही उचित समझा। (वाच्य को पहचानकर उसका भेद लिखिए) (ङ) कर्मवाच्य और भाववाच्य में मुख्य अंतर क्या है ?
How the model answer begins
1. (क) ड्राइवर द्वारा ज़ोर से ब्रेक मारी गईं (कर्म के लिंग और वचन से क्रिया का सामंजस्य पर यह रूप सही है परंतु कर्मवाच्य में क्रिया को कर्म के साथ सहमत होना चाहिए।
The full answer from Medha Ma’am →निर्देशानुसार 'पद-परिचय' पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (क) उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। (ख) मैं अक्सर बाग में घूमता हूँ। (ग) अध्यापक ने बताया कि कल अवकाश है। (घ) वह बी.ए. के अंतिम वर्ष का छात्र है। (ङ) संन्यासी को भोजन दो।
How the model answer begins
1. (क) उन्हें – सर्वनाम, पुरुषवाचक, अन्यपुरुष, पुल्लिंग/स्त्रीलिंग, बहुवचन, कर्म कारक।
The full answer from Medha Ma’am →कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा । व्यर्थ धरहु धनु बान कुठारा ।। - (रेखांकित में कौन-सा अलंकार है ?)
How the model answer begins
1. (क) रेखांकित पंक्ति में उपमा अलंकार है, क्योंकि यहाँ परशुराम के वचनों (उपमेय) की तुलना करोड़ों वज्रों (उपमान) से 'सम' वाचक शब्द द्वारा की गई है।
The full answer from Medha Ma’am →चरण-कमल बंदौ हरि राई । - (पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार की पहचान कीजिए)
How the model answer begins
1. रूपक अलंकार — यहाँ हरि के चरणों (उपमेय) पर कमल (उपमान) का अभेद आरोप किया गया है।
The full answer from Medha Ma’am →मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के । - (पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार की पहचान कीजिए)
How the model answer begins
1. (ग) मानवीकरण अलंकार — इस पंक्ति में मेघों को मनुष्य की तरह बन-ठन कर और सँवर कर आते हुए दिखाया गया है।
The full answer from Medha Ma’am →अतिशयोक्ति अलंकार का एक उपयुक्त उदाहरण किसी काव्य पंक्ति के द्वारा दीजिए
How the model answer begins
1. अतिशयोक्ति अलंकार का उदाहरण — "आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार। राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार॥" यहाँ चेतक की गति का वर्णन बढ़ा-चढ़ाकर किया गया है। राणा के सोचते ही वह नदी के पार पहुँच गया। इसलिए…
The full answer from Medha Ma’am →उत्प्रेक्षा अलंकार का एक उपयुक्त उदाहरण कविता की पंक्तियों द्वारा समझाइए
How the model answer begins
1. "उस काल मारे क्रोध के तनु काँपने उसका लगा, मानो हवा के वेग से सोता हुआ सागर जगा।" यहाँ क्रोध से काँपते शरीर में जागे हुए सागर की संभावना 'मानो' शब्द से की गई है, अतः उत्प्रेक्षा अलंकार है।
The full answer from Medha Ma’am →निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : ऊपर की तसवीर से यह नहीं माना जाए कि बालगोबिन भगत साधु थे । नहीं, बिल्कुल गृहस्थ ! उनकी गृहिणी की तो मुझे याद नहीं, उनके बेटे और पतोहू को तो मैंने देखा था । थोड़ी खेती-बारी भी थी, एक अच्छा साफ़-सुथरा मकान भी था । किंतु, खेती-बारी करते, परिवार रखते भी, बालगोबिन भगत साधु थे - साधु की सब परिभाषाओं में खरे उतरने वाले । कबीर को 'साहब' मानते थे, उन्हीं के गीतों को गाते, उन्हीं के आदेशों पर चलते । कभी झूठ नहीं बोलते, खरा व्यवहार रखते । किसी से भी दो-टूक बात करने में संकोच नहीं करते, न किसी से खामखाह झगड़ा मोल लेते । किसी की चीज़ नहीं छूते, न बिना पूछे व्यवहार में लाते । इस नियम को कभी-कभी इतनी बारीकी तक ले जाते कि लोगों को कुतूहल होता ! - कभी वह दूसरे के खेत में शौच के लिए भी नहीं बैठते ! वह गृहस्थ थे; लेकिन उनकी सब चीज़ 'साहब' की थी । जो कुछ खेत में पैदा होता, सिर पर लादकर पहले उसे साहब के दरबार में ले जाते - जो उनके घर से चार कोस दूरी पर था - एक कबीरपंथी मठ से मतलब ! वह दरबार में 'भेंट' रूप रख लिया जाकर 'प्रसाद' रूप में जो उन्हें मिलता, उसे घर लाते और उसी से गुज़र चलाते । (i) लेखक के अनुसार बालगोबिन भगत 'बिल्कुल गृहस्थ' कैसे थे ? I. उनके पास खेती-बारी थी । II. उनका एक अच्छा और साफ़-सुथरा मकान था । III. उनके परिवार में बेटे और बहू के साथ-साथ उनकी गृहिणी भी मौजूद थी । IV. वे एक पारिवारिक व्यक्ति थे । विकल्प : (A) I, II और III (B) II, III और IV (C) III, IV और I (D) I, II और IV (ii) कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए : कथन : गृहस्थ होते हुए भी बालगोबिन भगत साधु थे । कारण : क्योंकि वे अपनी पारिवारिक भूमिका नहीं निभाते थे । विकल्प : (A) कथन सही है, परंतु कारण ग़लत है । (B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं । (C) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है । (D) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है । (iii) बालगोबिन भगत कबीर को 'साहब' मानते थे - पंक्ति का आशय है : (A) बालगोबिन भगत कबीर को बड़ा संत मानते थे । (B) बालगोबिन भगत कबीर को ईश्वर-तुल्य मानते थे । (C) बालगोबिन भगत कबीर को पिता-तुल्य मानते थे । (D) बालगोबिन भगत कबीर को समाज-सुधारक मानते थे । (iv) गद्यांश में वर्णित उदाहरणों में से किस उदाहरण को हम सबसे बड़ा प्रमाण बता सकते हैं, जिससे यह साबित हो कि बालगोबिन भगत कबीर को सबसे अधिक मानते थे ? (A) सुबह-शाम, खेती-किसानी के समय भी कबीर के पदों को गाते रहना । (B) कभी झूठ न बोलना और सबसे खरा व्यवहार करना । (C) दूसरे के खेत में निवृत्त होने के लिए भी न जाना और सबसे दो-टूक व्यवहार करना । (D) अपनी पूरी फ़सल को कबीर-दरबार में चढ़ाना और प्रसाद स्वरूप जो मिले उसे स्वयं के लिए लाना । (v) अनुच्छेद में भगत के विषय में जो जानकारियाँ हैं, उस आधार पर वे हैं : I. सत्यवादी II. स्पष्टावादी III. सच्चे भक्त विकल्प : (A) I, II और III तीनों (B) केवल III (C) केवल I और III (D) केवल II और III
How the model answer begins
1. (i) उत्तर : (D) I, II और IV — बालगोबिन भगत के पास थोड़ी खेती-बारी थी, एक अच्छा साफ़-सुथरा मकान था और वे बेटे-पतोहू वाले पारिवारिक व्यक्ति थे; लेखक को उनकी गृहिणी की याद नहीं है, इसलिए कथन III सही नहीं है। (ii) उत्तर :…
The full answer from Medha Ma’am →'नेताजी का चश्मा' पाठ में कैप्टन को देखकर हालदार साहब को धक्का क्यों लगा ? हालदार साहब के व्यक्तित्व, पाठ के घटना-क्रम और अपने विचारों के आधार पर किन्हीं दो कारणों को लिखिए
How the model answer begins
1. कैप्टन को देखकर हालदार साहब को धक्का इसलिए लगा क्योंकि वह उनके अनुमान के बिलकुल विपरीत निकला। नाम सुनकर उन्होंने सोचा था कि वह नेताजी का साथी या आज़ाद हिंद फ़ौज का भूतपूर्व सिपाही होगा, पर सामने एक बेहद बूढ़ा, मरियल-सा,…
The full answer from Medha Ma’am →'एक कहानी यह भी' पाठ की लेखिका के जीवन के प्रसंगों के आधार पर सोदाहरण स्पष्ट कीजिए कि किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण में उसके बचपन की घटनाओं की बड़ी भूमिका होती है
How the model answer begins
1. मन्नू भंडारी के जीवन से साफ़ है कि बचपन की घटनाएँ ही व्यक्ति के व्यक्तित्व की नींव बनती हैं। पहला उदाहरण उनकी माँ का है। लेखिका ने अपनी बेपढ़ी-लिखी, व्यक्तित्वविहीन माँ को सवेरे से शाम तक सबकी इच्छाओं और पिता जी की…
The full answer from Medha Ma’am →'बिस्मिल्ला खाँ का जीवन, प्रतिभा और परिश्रम का अनूठा सम्मिश्रण है, कैसे ?' 'नौबतखाने में इबादत' पाठ के संदर्भ में उत्तर दीजिए
How the model answer begins
1. बिस्मिल्ला खाँ के जीवन में विशिष्ट प्रतिभा और परिश्रम साथ-साथ दिखते हैं। विशिष्ट प्रतिभा के कारण उन्हें बचपन से ही सुरों की समझ थी। चौदह साल की उम्र में भी वे काशी के पुराने बालाजी के मंदिर के नौबतखाने में रियाज़ के लिए…
The full answer from Medha Ma’am →'सभ्यता' और 'संस्कृति' के बीच के अंतर को 'संस्कृति' पाठ के आधार पर समझाइए
How the model answer begins
1. 'संस्कृति' पाठ के अनुसार संस्कृति व्यक्ति विशेष की वह योग्यता, प्रवृत्ति अथवा प्रेरणा है, जिसके बल पर वह कुछ नया आविष्कार, त्याग और परोपकार करता है। सभ्यता संस्कृति का परिणाम है। उस संस्कृति द्वारा जो आविष्कार हुआ, जो…
The full answer from Medha Ma’am →मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी, मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी। इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास तब भी कहते हो – कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती। तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे – यह गागर रीती। किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले – अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले। यह विडंबना ! अरी सरलता तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं। भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं। कवि ने इन पंक्तियों में ‘मधुप’ का प्रयोग किस अर्थ में किया है ?
- (A) संसार रूपी भ्रमर
- (B) मन रूपी भ्रमर ✓
- (C) लोलुप मित्रगण
- (D) कविता के पाठक
Answer (the board’s key): (B)
मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी, मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी। इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास तब भी कहते हो – कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती। तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे – यह गागर रीती। किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले – अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले। यह विडंबना ! अरी सरलता तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं। भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं। ‘मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो’ – के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
- (A) केवल II सही है।
- (B) I, II और III तीनों सही हैं।
- (C) I और II सही हैं। ✓
- (D) I और III सही हैं।
Answer (the board’s key): (C)
मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी, मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी। इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास तब भी कहते हो – कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती। तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे – यह गागर रीती। किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले – अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले। यह विडंबना ! अरी सरलता तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं। भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं। कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए : कथन : कवि अपनी आत्मकथा नहीं लिखना चाहता है। कारण : महान लोगों की असंख्य आत्मकथाएँ इस साहित्य संसार में पहले से ही मौजूद है।
- (A) कथन सही है, परंतु कारण गलत है।
- (B) कथन और कारण दोनों गलत हैं।
- (C) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है। ✓
Answer (the board’s key): (D)
मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी, मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी। इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास तब भी कहते हो – कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती। तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे – यह गागर रीती। किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले – अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले। यह विडंबना ! अरी सरलता तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं। भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं। कवि ने अपने मित्रों/पाठकों से क्या-क्या सवाल किए हैं ?
- (A) I, II और III तीनों ✓
- (B) केवल I और III
- (C) केवल I और II
- (D) केवल II और III
Answer (the board’s key): (A)
मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी, मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी। इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास तब भी कहते हो – कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती। तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे – यह गागर रीती। किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले – अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले। यह विडंबना ! अरी सरलता तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं। भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं। कवि विडंबना किसे कह रहा है ?
- (A) इस संसार में सीधेपन का मज़ाक उड़ाया जाता है। ✓
- (B) दोस्त-मित्र ही अक्सर छल करते हैं।
- (C) सच्ची आत्मकथाओं का भी उपहास उड़ाया जाता है।
- (D) जीवन अपनी भूलों और दूसरों की प्रवंचनाओं का मिश्रण मात्र होता है।
Answer (the board’s key): (A)
'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' में राम की उपस्थिति शब्दों में कम परंतु प्रभाव में अधिक है, कैसे ? दो बिंदुओं में उनके प्रभाव को स्पष्ट कीजिए
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1. इस संवाद में राम बहुत कम बोलते हैं, परंतु उनके थोड़े-से शब्दों का प्रभाव सबसे अधिक है। (क) राम का मृदु, शांत और शीतल व्यक्तित्व परशुराम के क्रोध को शांत करने वाला है। क्रोधित परशुराम से वे नम्रता से कहते हैं — "होइहि…
The full answer from Medha Ma’am →'संगतकार' का मुख्य काम क्या होता है ? क्या कविता में वर्णित 'संगतकार' अपने काम में सफल है ? सोदाहरण लिखिए
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1. संगतकार का मुख्य काम मुख्य गायक का साथ देना होता है। वह मुख्य गायक के साथ गायन करने वाला या कोई वाद्य बजाने वाला कलाकार, यानी सहयोगी होता है। हाँ, कविता का संगतकार अपने काम में सफल है। वह मुख्य गायक की गरज में अपनी…
The full answer from Medha Ma’am →'उत्साह' कविता का कवि परिवर्तन की कामना किन कारणों से कर रहा है ? किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए
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1. 'उत्साह' कविता में कवि निराला बादल को गरजने का आह्वान करके इन दो कारणों से परिवर्तन चाहते हैं। पहला, शोषित-पीड़ित जनता का कल्याण: निदाघ (गर्मी) से विकल और उन्मन सकल जन के लिए कवि चाहता है कि बादल तप्त धरा को जल से शीतल…
The full answer from Medha Ma’am →'फ़सल' के लिए आवश्यक कारकों का उल्लेख अपने शब्दों में कीजिए
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1. फसल के लिए ढेर सारी नदियों का पानी और हज़ारों खेतों की भूरी, काली, संदली मिट्टी का गुण-धर्म आवश्यक है।
The full answer from Medha Ma’am →'माता का अंचल' पाठ में बच्चों का पशु-पक्षियों के प्रति कैसा व्यवहार दिखता है ? उदाहरण सहित लिखिए। पशु-पक्षियों के प्रति हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए ? अपने विचारों के आधार पर लिखिए
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1. 'माता का अंचल' पाठ में बच्चे पशु-पक्षियों को अपना परिवारजन व खेल-साथी मानते हैं और उनसे गहरा आत्मीय लगाव रखते हैं। वे उनके साथ इस तरह घुल-मिलकर रहते हैं जैसे वे भी घर के ही सदस्य हों।
The full answer from Medha Ma’am →'पत्थर तोड़ती मज़दूर पहाड़ी महिलाओं के भीतर जीवन का उल्लास मौजूद था' - यह कथन किस आधार पर कहा जा सकता है ? उन स्त्रियों और उनकी जीवन स्थितियों का वर्णन करते हुए बताइए कि आप उनसे क्या सीख सकते हैं
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1. पहाड़ी महिलाओं का कठिन परिश्रम के बावजूद गीत गाना और हँसते-मुस्कुराते काम करना उनके भीतर के जीवन उल्लास को दर्शाता है। वे पत्थर तोड़ने जैसे कठोर कार्य को करते हुए भी हँसती-गाती रहती हैं, जिससे प्रतीत होता है कि इतने…
The full answer from Medha Ma’am →'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर प्रत्यक्ष अनुभव और अनुभूति का अंतर स्पष्ट करते हुए बताइए कि अगर आप कभी लेखन के क्षेत्र में गए तो दोनों में से किसे महत्त्व देंगे और क्यों ?
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1. प्रत्यक्ष अनुभव वह है जो बाहर की दुनिया में हमारे सामने घटित होता है और जिसे हम स्वयं देखते और भोगते हैं; लेखक के अनुसार अनुभव तो घटित का होता है।
The full answer from Medha Ma’am →निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए : (क) डिजिटल दौर में मानवीय संपर्क संकेत-बिंदु • मानवीय संपर्कों और संबंधों की आवश्यकता • बढ़ते डिजिटल दौर में वास्तविक संबंधों में कमी और वायवीय (वर्चुअल) संबंधों के रूप • वर्तमान समय की माँग (ख) पारंपरिक खान-पान के लाभ संकेत-बिंदु • पारंपरिक खान-पान क्या है ? • भोजन में स्थानीय पदार्थों का महत्त्व क्यों होता है ? • स्वास्थ्य की दृष्टि से इसका महत्त्व (ग) पुस्तकें आज भी हमारी सबसे अच्छी मित्र हैं संकेत-बिंदु • अच्छी पुस्तकें कैसे एक अच्छे मित्र की तरह होती हैं । • वर्तमान समय में भी पुस्तकों की जगह बची हुई है । • उम्र के हर मोड़ पर अलग-अलग तरह की पुस्तकें मददगार होती हैं ।
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1. पहला वाक्य भूमिका है। इसमें विषय को सीधे रखा गया है कि पुस्तकें मनुष्य की सबसे सच्ची और अच्छी मित्र हैं।
The full answer from Medha Ma’am →(क) आपका नाम हिमानी/हेमराज है । आपने अपने माता-पिता को बातचीत करते सुना कि वे आपकी मोबाइल फोन में डूबे रहने और गेमिंग की दुनिया में खोने की आदतों से परेशान होकर आपको एक आवासीय विद्यालय (बोर्डिंग स्कूल) में भेजना चाह रहे हैं । अपने पिता को लगभग 100 शब्दों में एक पत्र लिखकर अनुरोध कीजिए कि वे ऐसा न करें । तर्कपूर्ण बिंदुओं में यह भी स्पष्ट कीजिए कि आप स्वयं में किस प्रकार सुधार लाएँगे । अथवा (ख) आपका नाम हिमानी/हेमराज है । नगर-निगम ने आपके मोहल्ले में स्थित पार्क का सौंदर्यीकरण करवाया है साथ ही बच्चों के लिए झूलों की व्यवस्था की है । इस संदर्भ में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए नगर-निगम अध्यक्ष को लगभग 100 शब्दों में एक पत्र लिखिए ।
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1. पत्र के आरंभ में प्रेषक का पता (परीक्षा भवन, क ख ग नगर), दिनांक की खाली पंक्ति, संबोधन 'पूज्य पिताजी' और अभिवादन 'सादर चरण स्पर्श' है। अंत में 'आपका आज्ञाकारी पुत्र' और नाम 'हेमराज' लिखा है।
The full answer from Medha Ma’am →(क) आप अमन/आमना हैं और अभी-अभी आपने 'पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल' से एम.बी.बी.एस. की डिग्री पूरी की है । वहीं पर इंटर्न डॉक्टर के पद पर आवेदन करने के लिए लगभग 80 शब्दों में एक स्ववृत्त तैयार कीजिए । अथवा (ख) आप आमना/अमन हैं । अ.ब.स. बैंक के प्रबंधक को, एक शहर से दूसरे शहर में बचत खाता स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जानने हेतु लगभग 80 शब्दों में एक ई-मेल लिखिए ।
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1. ई-मेल में प्रेषक, प्रति, विषय, संबोधन 'महोदय', छोटे अनुच्छेदों में मुख्य भाग, 'धन्यवाद', 'भवदीया' और नाम सही क्रम में लिखे गए हैं।
The full answer from Medha Ma’am →(क) आपकी बहन ने 'दियारा' नाम से पॉल्ट्री (मुर्गीपालन) का व्यवसाय ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से शुरू किया है । इस कंपनी की खूबियों को दर्शाने वाला एक आकर्षक विज्ञापन लगभग 40 शब्दों में बनाइए । अथवा (ख) आपका नाम सोमा/सोमप्रभ है । अपने मामा-मामी को नए घर की बधाई देते हुए गृहप्रवेश के अवसर पर शुभकामना संदेश लगभग 40 शब्दों में लिखिए ।
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1. शीर्षक 'दियारा पॉल्ट्री फ़ार्म', नारा 'अब ताज़गी आपके द्वार!' और अलग-अलग पंक्तियों में लिखी खूबियों से विज्ञापन आकर्षक बना है।
The full answer from Medha Ma’am →
The same preparation, with Medha Ma’am — on your phone
Every question of every chapter with its model answer, practice questions in the board’s own shapes, 60 minutes of class a day, written answers marked, a test every Sunday and a WhatsApp report to parents.
Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.