CBSE Class 10 · Hindi A · board exam 2027
CBSE Class 10 Hindi A Sample Paper 2025
The board’s 2025 sample paper, set SQP-002 — all 23 questions as printed; 8 objective answers from the board’s own key. Each question names its chapter, where that chapter’s most-asked questions are.
Section A · Objective questions (5)
ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी । अपरस रहत स्नेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी । पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी । ज्यों जल माहँ तेल की गागर, बूँद न ताकौ लागी । प्रीति-नदी में पाऊँ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी । 'सूरदास' अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यों पागी । । उपर्युक्त पद में वक्ता और श्रोता क्रमशः हैं :
- (A) उद्धव - गोपियाँ
- (B) गोपियाँ- उद्धव ✓
- (C) सूरदास - उद्धव
- (D) गोपियाँ - सूरदास
Answer (the board’s key): (B)
ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी । अपरस रहत स्नेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी । पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी । ज्यों जल माहँ तेल की गागर, बूँद न ताकौ लागी । प्रीति-नदी में पाऊँ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी । 'सूरदास' अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यों पागी । । 'पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी' - पंक्ति में किस स्थिति की ओर संकेत है ? सही विकल्प का चयन कीजिए - I. उद्धव के दुर्भाग्यशाली होने की ओर । II. उद्धव के सौभाग्यशाली होने की ओर । III. कृष्ण के प्रेम से प्रभावित होने की ओर । IV. कृष्ण के प्रेम से अप्रभावित होने की ओर । विकल्प i. कथन I सही है । ii. कथन I और II सही हैं । iii. कथन II और III सही हैं । iv. कथन I और IV सही हैं ।
- (A) कथन I सही है ।
- (B) कथन I और II सही हैं ।
- (C) कथन II और III सही हैं ।
- (D) कथन I और IV सही हैं । ✓
Answer (the board’s key): (D)
ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी । अपरस रहत स्नेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी । पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी । ज्यों जल माहँ तेल की गागर, बूँद न ताकौ लागी । प्रीति-नदी में पाऊँ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी । 'सूरदास' अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यों पागी । । कथन (A) और कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़कर सही विकल्प चुनकर लिखिए : कथन (A) : गोपियों ने व्यंग्य कसते हुए उद्धव को भाग्यशाली कहा है । कारण (R) : कृष्ण के सानिध्य में रहते हुए भी उद्धव के मन में कृष्ण के प्रति अनुराग उत्पन्न नहीं हुआ । i. कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है । ii. कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं । iii. कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है । iv. कथन (A) सही है किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है ।
- (A) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है ।
- (B) कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं ।
- (C) कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है । ✓
- (D) कथन (A) सही है किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है ।
Answer (the board’s key): (C)
ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी । अपरस रहत स्नेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी । पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी । ज्यों जल माहँ तेल की गागर, बूँद न ताकौ लागी । प्रीति-नदी में पाऊँ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी । 'सूरदास' अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यों पागी । । 'गुर चाँटी ज्यों पागी' पंक्ति में कौन किसका प्रतीक है ? i. गुर (गुड़) उद्धव का, चाँटी (चींटी) सूरदास का । ii. गुर (गुड़) उद्धव का, चाँटी (चींटी) श्रीकृष्ण का iii. गुर (गुड़) श्रीकृष्ण का, चाँटी (चींटी) उद्धव का । iv. गुर (गुड़) श्रीकृष्ण का, चाँटी (चींटी) गोपियों का ।
- (A) गुर (गुड़) उद्धव का, चाँटी (चींटी) सूरदास का ।
- (B) गुर (गुड़) उद्धव का, चाँटी (चींटी) श्रीकृष्ण का
- (C) गुर (गुड़) श्रीकृष्ण का, चाँटी (चींटी) उद्धव का ।
- (D) गुर (गुड़) श्रीकृष्ण का, चाँटी (चींटी) गोपियों का । ✓
Answer (the board’s key): (D)
ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी । अपरस रहत स्नेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी । पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी । ज्यों जल माहँ तेल की गागर, बूँद न ताकौ लागी । प्रीति-नदी में पाऊँ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी । 'सूरदास' अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यों पागी । । उद्धव के व्यवहार की तुलना गोपियों ने किससे की है ? सही विकल्प का चयन कीजिए - I. जल में पड़े रहने वाले कमल के पत्ते से । II. जल में पड़ी रहने वाली तेल की गागर से । III. गुड़ से चिपकी रहने वाली चींटी से । IV. कृष्ण की प्रीति-नदी में पाँव डुबाने से । विकल्प : i. कथन I सही है । ii. कथन I और II सही हैं । iii. कथन II और III सही हैं । iv. कथन I और IV सही हैं ।
- (A) कथन I सही है ।
- (B) कथन I और II सही हैं । ✓
- (C) कथन II और III सही हैं ।
- (D) कथन I और IV सही हैं ।
Answer (the board’s key): (B)
Section B · Written questions (18)
आज विश्व के कई देशों में अदरक वाली भारतीय चाय का चस्का लोगों को ऐसा लग गया है कि वहाँ हर कोई भारतीय चाय का शौकीन हो गया है । इसके अलावा भारत में कुल्हड़ वाली चाय भी काफी लोकप्रिय है । मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी गई चाय का अपना विशेष महत्त्व है क्योंकि इसकी सौंधी खुशबू और लाजवाब स्वाद को इसके बिना अनुभव नहीं कर सकते हैं । भारत की सिफारिश पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस घोषित किया है । भारत ने मिलान में हुई अंतर्राष्ट्रीय खाद्य और कृषि संगठन की बैठक में यह प्रस्ताव पेश किया था । संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनी अधिसूचना में कहा कि हम विश्व की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में चाय के योगदान को लेकर दुनिया को जागरूक करना चाहते हैं, ताकि वर्ष 2030 के सतत विकास से जुड़े लक्ष्यों को पूरा किया जा सके । संयुक्त राष्ट्र को विश्वास है कि 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस घोषित करने से इसके उत्पादन और खपत बढ़ाने में मदद मिलेगी । अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में चाय के लंबे इतिहास और गहरे सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन का लक्ष्य चाय के स्थायी उत्पादन और खपत के पक्ष में गतिविधियों को लागू करने के लिए सामूहिक कार्यों को बढ़ावा देना और भूख और गरीबी से लड़ने में इसके महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने चाय के औषधीय गुणों के साथ सांस्कृतिक महत्व को भी मान्यता दी है । विश्व में चाय के प्रमुख उत्पादकों में एशिया, अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका शामिल हैं । जबकि विश्व के चार बड़े उत्पादक देशों में क्रमशः चीन, भारत, कीनिया और श्रीलंका शामिल हैं । विश्व के कुल चाय उत्पादन में इन देशों की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत है । भारत विश्व में चाय उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है । भारत में चाय का उत्पादन करने वाले राज्यों में असम, पश्चिमी बंगाल, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं । असम भारत का सर्वाधिक चाय उत्पादन करने वाला राज्य है । भारत में लगभग 13 हज़ार चाय बागान हैं, जो 60 लाख से अधिक श्रमिकों की आजीविका का प्रमुख साधन भी हैं । चाय एक श्रम आधारित उद्योग है इसलिए भारत जैसे देश में इसके विकास की अपार संभावनाएँ हैं । चाय की चुनाई के लिए अधिक मात्रा में श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि चाय की पत्तियाँ एक-एक कर तोड़ी जाती हैं, जिनसे कोमल पत्तियाँ नष्ट न हों । अपनी कोमल उंगलियों के कारण ही चाय के उद्यानों में स्त्री मज़दूर द्वारा पत्तियाँ तोड़ी जाती हैं । चाय की पत्ती तोड़ने के काम के लिए श्रमिकों को पूरे दिन खड़े रहना पड़ता है - चाहे वह चिलचिलाती धूप में हो या बारिश में । वे आम तौर पर उस हिस्से तक पहुँचने के लिए चार से पांच किलोमीटर पैदल चलते हैं जहाँ वे चाय की पत्तियाँ चुनते हैं । कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए : कथन (A): संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 मई को 'अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस' घोषित किया है। कारण (R) : विश्व की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में चाय की अहमियत को समझाना ।
- (A) i. कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है ।
- (B) ii. कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं ।
- (C) iii. कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है । ✓
- (D) iv. कथन (A) सही है किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है ।
Answer (the board’s key): (C)
आज विश्व के कई देशों में अदरक वाली भारतीय चाय का चस्का लोगों को ऐसा लग गया है कि वहाँ हर कोई भारतीय चाय का शौकीन हो गया है । इसके अलावा भारत में कुल्हड़ वाली चाय भी काफी लोकप्रिय है । मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी गई चाय का अपना विशेष महत्त्व है क्योंकि इसकी सौंधी खुशबू और लाजवाब स्वाद को इसके बिना अनुभव नहीं कर सकते हैं । भारत की सिफारिश पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस घोषित किया है । भारत ने मिलान में हुई अंतर्राष्ट्रीय खाद्य और कृषि संगठन की बैठक में यह प्रस्ताव पेश किया था । संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनी अधिसूचना में कहा कि हम विश्व की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में चाय के योगदान को लेकर दुनिया को जागरूक करना चाहते हैं, ताकि वर्ष 2030 के सतत विकास से जुड़े लक्ष्यों को पूरा किया जा सके । संयुक्त राष्ट्र को विश्वास है कि 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस घोषित करने से इसके उत्पादन और खपत बढ़ाने में मदद मिलेगी । अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में चाय के लंबे इतिहास और गहरे सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन का लक्ष्य चाय के स्थायी उत्पादन और खपत के पक्ष में गतिविधियों को लागू करने के लिए सामूहिक कार्यों को बढ़ावा देना और भूख और गरीबी से लड़ने में इसके महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने चाय के औषधीय गुणों के साथ सांस्कृतिक महत्व को भी मान्यता दी है । विश्व में चाय के प्रमुख उत्पादकों में एशिया, अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका शामिल हैं । जबकि विश्व के चार बड़े उत्पादक देशों में क्रमशः चीन, भारत, कीनिया और श्रीलंका शामिल हैं । विश्व के कुल चाय उत्पादन में इन देशों की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत है । भारत विश्व में चाय उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है । भारत में चाय का उत्पादन करने वाले राज्यों में असम, पश्चिमी बंगाल, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं । असम भारत का सर्वाधिक चाय उत्पादन करने वाला राज्य है । भारत में लगभग 13 हज़ार चाय बागान हैं, जो 60 लाख से अधिक श्रमिकों की आजीविका का प्रमुख साधन भी हैं । चाय एक श्रम आधारित उद्योग है इसलिए भारत जैसे देश में इसके विकास की अपार संभावनाएँ हैं । चाय की चुनाई के लिए अधिक मात्रा में श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि चाय की पत्तियाँ एक-एक कर तोड़ी जाती हैं, जिनसे कोमल पत्तियाँ नष्ट न हों । अपनी कोमल उंगलियों के कारण ही चाय के उद्यानों में स्त्री मज़दूर द्वारा पत्तियाँ तोड़ी जाती हैं । चाय की पत्ती तोड़ने के काम के लिए श्रमिकों को पूरे दिन खड़े रहना पड़ता है - चाहे वह चिलचिलाती धूप में हो या बारिश में । वे आम तौर पर उस हिस्से तक पहुँचने के लिए चार से पांच किलोमीटर पैदल चलते हैं जहाँ वे चाय की पत्तियाँ चुनते हैं । भारत में कुल्हड़ वाली चाय काफी लोकप्रिय है क्योंकि - कथन के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए - I. सौंधी खुशबू होती है । II. लाजवाब स्वाद होता है । III. बहुत महँगी होती है । IV. आसानी से उपलब्ध है । विकल्प - i. कथन I और II सही हैं । ii. कथन I, III और IV सही हैं । iii. केवल कथन III सही है । iv. कथन I, II और IV सही हैं ।
- (A) i. कथन I और II सही हैं । ✓
- (B) ii. कथन I, III और IV सही हैं ।
- (C) iii. केवल कथन III सही है ।
- (D) iv. कथन I, II और IV सही हैं ।
Answer (the board’s key): (A)
आज विश्व के कई देशों में अदरक वाली भारतीय चाय का चस्का लोगों को ऐसा लग गया है कि वहाँ हर कोई भारतीय चाय का शौकीन हो गया है । इसके अलावा भारत में कुल्हड़ वाली चाय भी काफी लोकप्रिय है । मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी गई चाय का अपना विशेष महत्त्व है क्योंकि इसकी सौंधी खुशबू और लाजवाब स्वाद को इसके बिना अनुभव नहीं कर सकते हैं । भारत की सिफारिश पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस घोषित किया है । भारत ने मिलान में हुई अंतर्राष्ट्रीय खाद्य और कृषि संगठन की बैठक में यह प्रस्ताव पेश किया था । संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनी अधिसूचना में कहा कि हम विश्व की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में चाय के योगदान को लेकर दुनिया को जागरूक करना चाहते हैं, ताकि वर्ष 2030 के सतत विकास से जुड़े लक्ष्यों को पूरा किया जा सके । संयुक्त राष्ट्र को विश्वास है कि 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस घोषित करने से इसके उत्पादन और खपत बढ़ाने में मदद मिलेगी । अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में चाय के लंबे इतिहास और गहरे सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन का लक्ष्य चाय के स्थायी उत्पादन और खपत के पक्ष में गतिविधियों को लागू करने के लिए सामूहिक कार्यों को बढ़ावा देना और भूख और गरीबी से लड़ने में इसके महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने चाय के औषधीय गुणों के साथ सांस्कृतिक महत्व को भी मान्यता दी है । विश्व में चाय के प्रमुख उत्पादकों में एशिया, अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका शामिल हैं । जबकि विश्व के चार बड़े उत्पादक देशों में क्रमशः चीन, भारत, कीनिया और श्रीलंका शामिल हैं । विश्व के कुल चाय उत्पादन में इन देशों की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत है । भारत विश्व में चाय उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है । भारत में चाय का उत्पादन करने वाले राज्यों में असम, पश्चिमी बंगाल, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं । असम भारत का सर्वाधिक चाय उत्पादन करने वाला राज्य है । भारत में लगभग 13 हज़ार चाय बागान हैं, जो 60 लाख से अधिक श्रमिकों की आजीविका का प्रमुख साधन भी हैं । चाय एक श्रम आधारित उद्योग है इसलिए भारत जैसे देश में इसके विकास की अपार संभावनाएँ हैं । चाय की चुनाई के लिए अधिक मात्रा में श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि चाय की पत्तियाँ एक-एक कर तोड़ी जाती हैं, जिनसे कोमल पत्तियाँ नष्ट न हों । अपनी कोमल उंगलियों के कारण ही चाय के उद्यानों में स्त्री मज़दूर द्वारा पत्तियाँ तोड़ी जाती हैं । चाय की पत्ती तोड़ने के काम के लिए श्रमिकों को पूरे दिन खड़े रहना पड़ता है - चाहे वह चिलचिलाती धूप में हो या बारिश में । वे आम तौर पर उस हिस्से तक पहुँचने के लिए चार से पांच किलोमीटर पैदल चलते हैं जहाँ वे चाय की पत्तियाँ चुनते हैं । नीचे दिए हुए कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कर सही विकल्प का चयन कीजिए - कॉलम 1 I विश्व में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक देश II भारत में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य III विश्व में चाय का दूसरा बड़ा उत्पादक देश कॉलम 2 1 - भारत 2 - चीन 3 - असम विकल्प i. I (1) II (2) III (3) ii. I (2) II (3) III (1) iii. I (3) II (1) III (2) iv. I (1) II (3) III (2)
- (A) i. I (1) II (2) III (3)
- (B) ii. I (2) II (3) III (1) ✓
- (C) iii. I (3) II (1) III (2)
- (D) iv. I (1) II (3) III (2)
Answer (the board’s key): (B)
आज विश्व के कई देशों में अदरक वाली भारतीय चाय का चस्का लोगों को ऐसा लग गया है कि वहाँ हर कोई भारतीय चाय का शौकीन हो गया है । इसके अलावा भारत में कुल्हड़ वाली चाय भी काफी लोकप्रिय है । मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी गई चाय का अपना विशेष महत्त्व है क्योंकि इसकी सौंधी खुशबू और लाजवाब स्वाद को इसके बिना अनुभव नहीं कर सकते हैं । भारत की सिफारिश पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस घोषित किया है । भारत ने मिलान में हुई अंतर्राष्ट्रीय खाद्य और कृषि संगठन की बैठक में यह प्रस्ताव पेश किया था । संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनी अधिसूचना में कहा कि हम विश्व की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में चाय के योगदान को लेकर दुनिया को जागरूक करना चाहते हैं, ताकि वर्ष 2030 के सतत विकास से जुड़े लक्ष्यों को पूरा किया जा सके । संयुक्त राष्ट्र को विश्वास है कि 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस घोषित करने से इसके उत्पादन और खपत बढ़ाने में मदद मिलेगी । अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में चाय के लंबे इतिहास और गहरे सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन का लक्ष्य चाय के स्थायी उत्पादन और खपत के पक्ष में गतिविधियों को लागू करने के लिए सामूहिक कार्यों को बढ़ावा देना और भूख और गरीबी से लड़ने में इसके महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने चाय के औषधीय गुणों के साथ सांस्कृतिक महत्व को भी मान्यता दी है । विश्व में चाय के प्रमुख उत्पादकों में एशिया, अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका शामिल हैं । जबकि विश्व के चार बड़े उत्पादक देशों में क्रमशः चीन, भारत, कीनिया और श्रीलंका शामिल हैं । विश्व के कुल चाय उत्पादन में इन देशों की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत है । भारत विश्व में चाय उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है । भारत में चाय का उत्पादन करने वाले राज्यों में असम, पश्चिमी बंगाल, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं । असम भारत का सर्वाधिक चाय उत्पादन करने वाला राज्य है । भारत में लगभग 13 हज़ार चाय बागान हैं, जो 60 लाख से अधिक श्रमिकों की आजीविका का प्रमुख साधन भी हैं । चाय एक श्रम आधारित उद्योग है इसलिए भारत जैसे देश में इसके विकास की अपार संभावनाएँ हैं । चाय की चुनाई के लिए अधिक मात्रा में श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि चाय की पत्तियाँ एक-एक कर तोड़ी जाती हैं, जिनसे कोमल पत्तियाँ नष्ट न हों । अपनी कोमल उंगलियों के कारण ही चाय के उद्यानों में स्त्री मज़दूर द्वारा पत्तियाँ तोड़ी जाती हैं । चाय की पत्ती तोड़ने के काम के लिए श्रमिकों को पूरे दिन खड़े रहना पड़ता है - चाहे वह चिलचिलाती धूप में हो या बारिश में । वे आम तौर पर उस हिस्से तक पहुँचने के लिए चार से पांच किलोमीटर पैदल चलते हैं जहाँ वे चाय की पत्तियाँ चुनते हैं । चाय के उत्पादन और खपत बढ़ाने में 'अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस' की क्या भूमिका है ?
आज विश्व के कई देशों में अदरक वाली भारतीय चाय का चस्का लोगों को ऐसा लग गया है कि वहाँ हर कोई भारतीय चाय का शौकीन हो गया है । इसके अलावा भारत में कुल्हड़ वाली चाय भी काफी लोकप्रिय है । मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी गई चाय का अपना विशेष महत्त्व है क्योंकि इसकी सौंधी खुशबू और लाजवाब स्वाद को इसके बिना अनुभव नहीं कर सकते हैं । भारत की सिफारिश पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस घोषित किया है । भारत ने मिलान में हुई अंतर्राष्ट्रीय खाद्य और कृषि संगठन की बैठक में यह प्रस्ताव पेश किया था । संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनी अधिसूचना में कहा कि हम विश्व की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में चाय के योगदान को लेकर दुनिया को जागरूक करना चाहते हैं, ताकि वर्ष 2030 के सतत विकास से जुड़े लक्ष्यों को पूरा किया जा सके । संयुक्त राष्ट्र को विश्वास है कि 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस घोषित करने से इसके उत्पादन और खपत बढ़ाने में मदद मिलेगी । अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में चाय के लंबे इतिहास और गहरे सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन का लक्ष्य चाय के स्थायी उत्पादन और खपत के पक्ष में गतिविधियों को लागू करने के लिए सामूहिक कार्यों को बढ़ावा देना और भूख और गरीबी से लड़ने में इसके महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने चाय के औषधीय गुणों के साथ सांस्कृतिक महत्व को भी मान्यता दी है । विश्व में चाय के प्रमुख उत्पादकों में एशिया, अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका शामिल हैं । जबकि विश्व के चार बड़े उत्पादक देशों में क्रमशः चीन, भारत, कीनिया और श्रीलंका शामिल हैं । विश्व के कुल चाय उत्पादन में इन देशों की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत है । भारत विश्व में चाय उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है । भारत में चाय का उत्पादन करने वाले राज्यों में असम, पश्चिमी बंगाल, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं । असम भारत का सर्वाधिक चाय उत्पादन करने वाला राज्य है । भारत में लगभग 13 हज़ार चाय बागान हैं, जो 60 लाख से अधिक श्रमिकों की आजीविका का प्रमुख साधन भी हैं । चाय एक श्रम आधारित उद्योग है इसलिए भारत जैसे देश में इसके विकास की अपार संभावनाएँ हैं । चाय की चुनाई के लिए अधिक मात्रा में श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि चाय की पत्तियाँ एक-एक कर तोड़ी जाती हैं, जिनसे कोमल पत्तियाँ नष्ट न हों । अपनी कोमल उंगलियों के कारण ही चाय के उद्यानों में स्त्री मज़दूर द्वारा पत्तियाँ तोड़ी जाती हैं । चाय की पत्ती तोड़ने के काम के लिए श्रमिकों को पूरे दिन खड़े रहना पड़ता है - चाहे वह चिलचिलाती धूप में हो या बारिश में । वे आम तौर पर उस हिस्से तक पहुँचने के लिए चार से पांच किलोमीटर पैदल चलते हैं जहाँ वे चाय की पत्तियाँ चुनते हैं । चाय एक श्रम आधारित उद्योग है - कैसे ?
2. निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (क) कृष्ण अर्जुन की | ii. कृष्ण कर्ण की | iii. कर्ण कृष्ण की | iv. अर्जुन कर्ण की | (ख) कवि ने कर्ण के युद्ध-कौशल की प्रशंसा में क्या कहा है ? उचित विकल्प का चयन कीजिए - I. पांडव सेना के पुरुषार्थ को चुनौती दे रहा था | II. पांडव सेना ने उसे चारों ओर से घेर लिया था | III. समर क्षेत्र में केवल उसके बाण दिखाई दे रहे थे | IV. समर क्षेत्र में केवल उसकी हुंकार सुनाई दे रही थी | विकल्प - i. कथन I और II सही हैं | ii. कथन I, II और IV सही हैं | iii. केवल कथन III सही है | iv. कथन I, III और IV सही हैं | (ग) कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए : कथन (A) : कर्ण की गर्जना से पाण्डव सेना में भगदड़ मच गई | कारण (R) : कर्ण ने पाण्डवों की सेना पर भीषण आक्रमण कर दिया था | i. कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है | ii. कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं | iii. कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है | iv. कथन (A) सही है किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है | (घ) श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कौनसा गूढ़ वचन बताया ? (ङ) कर्ण के युद्ध-कौशल को देखकर कृष्ण उसके बारे में क्या सोच रहे थे ?
3. निर्देशानुसार 'रचना के आधार पर वाक्य भेद' पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लिखिए : (क) हालदार साहब चौराहे पर रुकते थे और मूर्ति को देखते थे | (सरल वाक्य में बदलिए) (ख) जब जाड़ा आता तब बालगोबिन भगत एक काली कमली ऊपर से ओढ़े रहते | (संयुक्त वाक्य में बदलिए) (ग) रीड नरकट से बनाई जाती है जो डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है | (आश्रित उपवाक्य छाँटकर उसका भेद भी लिखिए) (घ) खीर के स्वाद के आनंद में नवाब साहब की पलकें मुँद गईं | (मिश्र वाक्य में बदलिए) (ङ) काशी आज भी संगीत के स्वर पर जगती है और उसी की थापों पर सोती है | (रचना की दृष्टि से वाक्य का भेद लिखिए)
4. निर्देशानुसार 'वाच्य' पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लिखिए : (क) वह गिने-चुने फ्रेमों को नेताजी की मूर्ति पर फिट कर देता है | (कर्म वाच्य में बदलिए) (ख) नवाब साहब द्वारा जेब से चाकू निकाला गया और खीरे छिलने शुरू कर दिए गए | (कर्तृवाच्य में बदलिए) (ग) बिना सहारे दादाजी अब चल नहीं पाते हैं | (भाववाच्य में बदलिए) (घ) स्वयं प्रकाश जी ने 'नेताजी का चश्मा' कहानी की रचना की | (वाच्य पहचानकर भेद बताइए) (ङ) कर्म की प्रधानता वाले वाक्य में कौन-सा वाच्य होता है ?
5. निर्देशानुसार 'पद परिचय' पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के रेखांकित पदों का पद-परिचय लिखिए : (क) पानवाला नया पान खा रहा था | (ख) वक्त काटने के लिए खीरे खरीदे होंगे | (ग) विद्यालय के साथ ही एक डाकघर है | (घ) वाह ! भई खूब ! क्या आईडिया है | (ङ) वे बहुत कोमल और संवेदनशील व्यक्ति थे |
6. निर्देशानुसार 'अलंकार' पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों की रेखांकित काव्य पंक्तियों में अलंकार पहचान कर लिखिए : (क) सहसबाहु सम सो रिपु मोरा | (ख) छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू | (ग) बूढ़े पीपल ने आगे बढ़कर जुहार की | (घ) तुम्ह तौ कालू हाँक जनु लावा | बार बार मोहि लागि बोलावा | (ङ) बढ़त देखि जल सम वचन बोले रघुकुलभानु |
7. निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है | यह आयोजन पिछले कई बरसों से संकटमोचन मंदिर में होता आया है | यह मंदिर शहर के दक्षिण में लंका पर स्थित है व हनुमान जयंती के अवसर पर यहाँ पाँच दिनों तक शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गायन-वादन की उत्कृष्ट सभा होती है | इसमें बिस्मिल्ला खाँ अवश्य रहते हैं | अपने मजहब के प्रति अत्यधिक समर्पित उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की श्रद्धा काशी विश्वनाथ जी के प्रति भी अपार है | वे जब भी काशी से बाहर रहते हैं तब विश्वनाथ व बालाजी मंदिर की दिशा की ओर मुँह करके बैठते हैं, थोड़ी देर ही सही, मगर उसी ओर शहनाई का प्याला घुमा दिया जाता है और भीतर की आस्था रीड के माध्यम से बजती है | (क) काशी के संकटमोचन मंदिर में आयोजित संगीत आयोजन की विशेषता है - कथन के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए - I. यह आयोजन हनुमान जयंती के अवसर पर होता है | II. यह आयोजन पाँच दिनों तक चलता है | III. यह प्राचीन संस्कृति है | IV. शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गायन-वादन होता है | विकल्प - i. कथन I और II सही हैं | ii. कथन I, III और IV सही हैं | iii. केवल कथन III सही है | iv. कथन I, II और IV सही हैं | (ख) कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए : कथन (A) : बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे | कारण (R) : अपने मजहब के प्रति अत्यधिक समर्पित उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की श्रद्धा काशी विश्वनाथ जी के प्रति भी अपार थी | i. कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है | ii. कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं | iii. कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है | iv. कथन (A) सही है किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है | (ग) काशी से बाहर के कार्यक्रमों में बिस्मिल्ला खाँ किनके प्रति अपनी आस्था प्रकट करते थे ? i. काशी विश्वनाथ के प्रति ii. काशी विश्वनाथ और बालाजी के प्रति iii. अपने माता-पिता के प्रति iv. अपने गुरु के प्रति (घ) काशी की अद्भुत और प्राचीन परंपरा कौन-सी है ? i. संगीत आयोजन की ii. पर्वों के आयोजन की | iii. गंगा-मेले के आयोजन की | iv. पशु-मेले के आयोजन की | (ङ) इस गद्यांश का मूल भाव क्या है ? उचित विकल्प का चयन कीजिए - I. काशी की सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाना | II. बिस्मिल्ला खाँ के सांप्रदायिक सद्भाव को दर्शाना | III. बिस्मिल्ला खाँ की संगीत के प्रति आसक्ति को दर्शाना | IV. बिस्मिल्ला खाँ के काशी के प्रति प्रेम को दर्शाना | विकल्प - i. कथन I और II सही हैं | ii. कथन I, III और IV सही हैं | iii. केवल कथन III सही है | iv. कथन I, II और IV सही हैं |
8. निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए : (क) कैप्टन के प्रति पानवाले ने क्या व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी ? इस व्यंग्यात्मक टिप्पणी पर आप अपनी प्रतिक्रिया लिखिए | (ख) बालगोबिन भगत ने महिलाओं की सामाजिक स्थिति सुधारने के लिए क्या किया ? (ग) लेखिका मन्नू भंडारी को साधारण से असाधारण बनाने में उनकी प्राध्यापिका 'शीला अग्रवाल' की भूमिका पर प्रकाश डालिए | (घ) 'आज का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के समान सुसंस्कृत नहीं है |' 'संस्कृति' पाठ के आधार पर स्पष्ट करें कि लेखक ने ऐसा क्यों कहा ?
निर्धारित कविताओं के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए : (क) 'शक्ति और साहस' के साथ विनम्रता हो तो अच्छा प्रभाव पड़ता है' - इस कथन पर अपने विचार 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' पाठ के आलोक में लिखिए । (ख) 'आत्मकथ्य' कविता के आधार पर उन तथ्यों का उल्लेख कीजिए जिनका उल्लेख कवि अपनी आत्मकथा में नहीं करना चाहता है ? (ग) 'चिर प्रवासी मैं इतर, मैं अन्य !' कवि ने स्वयं को 'चिर प्रवासी', 'इतर' और 'अन्य' क्यों कहा है ? 'यह दंतुरित मुस्कान' कविता के आधार पर लिखिए । (घ) वर्तमान में संगतकार जैसे व्यक्तियों की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए ।
पूरक पाठ्य पुस्तक के निर्धारित पाठों पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए : (क) 'माता का अंचल' नामक पाठ में लेखक ने तत्कालीन समाज के पारिवारिक परिवेश का जो चित्रण किया है, उसे अपने शब्दों में लिखिए । (ख) ऊँचाई की ओर बढ़ते जाने पर लेखिका को परिदृश्य में क्या अंतर नज़र आए ? 'साना-साना हाथ जोड़ि' यात्रा वृत्तांत के आधार पर लिखिए । (ग) हिरोशिमा के बम विस्फोट में हुई क्षति को देखकर लेखक को कौन-सी घटना याद आई ? 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर लिखिए ।
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए : (क) जल बचाओ, पृथ्वी बचाओ • जल के बिना जीवन असम्भव • जल संरक्षण का महत्त्व • जल संरक्षण के उपाय (ख) जंक फूड और युवा पीढ़ी • जंक फूड क्या है ? • जंक फूड का बढ़ता चलन • स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव (ग) समाचार पत्र के नियमित पठन का महत्त्व • ज्ञान का भंडार • पढ़ने की आदत का विकास • जागरूकता
(क) आप अनुपमा / अनुपम हैं । आपके क्षेत्र को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली सड़क पर लाइटें ख़राब हो गई हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है । इस ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए सार्वजनिक लोक निर्माण विभाग को लगभग 100 शब्दों में पत्र लिखिए । अथवा (ख) आप अनुपमा / अनुपम हैं । आपने विद्यालय की भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है । अपने दादाजी को विद्यालय की भाषण प्रतियोगिता की संपूर्ण जानकारी देते हुए लगभग 100 शब्दों में पत्र लिखिए ।
(क) आप मेधावी / माधव हैं । आपने पत्रकारिता में अपना अध्ययन पूरा कर लिया है । किसी प्रसिद्ध दैनिक समाचार पत्र में पत्रकार का पद रिक्त है । आप उक्त पद की योग्यता (पत्रकारिता में स्नातक) को धारण करते हैं । उक्त रिक्त पद हेतु समाचार पत्र के प्रमुख को आवेदन भेजने के लिए लगभग 80 शब्दों में अपना एक स्ववृत्त तैयार कीजिए । अथवा (ख) आप मेधावी / माधव हैं । ए.टी.एम. कार्ड न मिलने की सूचना देते हुए संबंधित बैंक शाखा प्रबंधक को लगभग 80 शब्दों में एक ई-मेल लिखिए ।
(क) प्रदूषण से बचने के लिए पर्यावरण विभाग की ओर से जनहित में जारी एक आकर्षक विज्ञापन लगभग 40 शब्दों में तैयार कीजिए । अथवा (ख) आपके कक्षा अध्यापक को 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है । उन्हें बधाई देते हुए लगभग 40 शब्दों में संदेश लिखिए ।
The same preparation, with Medha Ma’am — on your phone
Every question of every chapter with its model answer, practice questions in the board’s own shapes, 60 minutes of class a day, written answers marked, a test every Sunday and a WhatsApp report to parents.
Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.