CBSE Class 10 · Hindi A · board exam 2027
Chapter 1: अपठित गद्यांश
This chapter’s questions from CBSE’s real papers of 2023–2026 — the 20 asked most often, 1 with the full model answer, 14 with how the answer begins — and objective questions with the board’s key. All 21 questions of this chapter, with answers, are in the app.
- marks a year (about)
- 6
- questions a year (about)
- 2
- rank in Hindi A
- #2
From 4 years of papers, 2023–2026 · full chapter-wise marks
Important questions — the ones the board asked most (20)
- Q1Case-based7 marksAsked: 2024, 2026
निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए : (Passage text provided) हमारी सभ्यताएँ आमतौर पर नदियों के किनारे ही फली-फूलीं, लेकिन जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ी तो उन्हें नदियों से दूर जाकर बसना पड़ा, पर वहाँ भी उन्होंने तालाब बनाए। इन तालाबों की खासियत यह रही कि ये मनुष्यों के साथ-साथ नदियों को भी पोषित करते रहे थे और मानवता को भी पोषित करते थे, क्योंकि तालाबों में भरा पानी नदी के पेट को भरकर नदी को प्रवाह देता था। इसके बाद फिर जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ी, तो हमने कुएँ बनाए, बावड़ियाँ बनाईं। इस तरह जैसे-जैसे मनुष्य को जलस्रोत से दूर जाना पड़ा तो उसने तालाब, बावड़ियाँ, कुएँ, ताल, झाल, पाल आदि बनाकर पानी का संरक्षण किया। इसी कारण हम पानीदार बने रहे, लेकिन जब भारत में अंग्रेज़ी शासक आए तो उन्होंने कहना शुरू किया कि – ‘यह तो सपेरों का देश है और ये ठहरा हुआ पानी पीते हैं। ठहरा हुआ पानी तो दूषित है।’ अंग्रेज़ यह बात नहीं जानते थे कि वर्षा जल शुद्ध और पवित्र होता है और जब वह इकट्ठा होता है तो वह सूर्य की किरणों और हवा के स्पर्श से शुद्ध होता रहता है। यह ज्ञान उन्हें नहीं था। राजस्थान में जो वर्षा का जल इकट्ठा होता था उसे हम ताज़ा पानी कहते थे और अगर किसी को पेट की बीमारी होती थी, तो हम उसी से उसका इलाज कर लिया करते थे। हमारे लिए जल सिर्फ़ जीवन देने वाला, जीवन चलाने वाला ही नहीं रहा, बल्कि उसकी एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भूमिका भी रही। हमारी कोई भी पूजा जल के बिना नहीं होती। जब कहीं घूमने या आनंद मनाने जाते हैं, तो नदी किनारे का और उसके बदलते रंगों का आनंद लेते हैं। पूरे दिन में नदी के तीन रंग बदलते हैं। सुबह का अलग, शाम का अलग और दोपहर का अलग। नदी के ये बदलते रंग हमारे जीवन के बदलते रंगों की तरह हैं जिनमें प्रवाह होता है, गति होती है। इस तरह पानी से हमें एक ‘जीवन दर्शन’ मिलता रहा जिसे हम ‘जल दर्शन’ कह सकते हैं। जब तक हमें यह मिलता रहा तब तक हम पानीदार बने रहे, लेकिन अब हमारा यह जल दर्शन शनैः शनैः मिट्टी में दबता जा रहा है।
- Q2Case-based7 marksAsked: 2026
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए- जब हम छोटे थे, हमें सिखाया गया कि होशियार बनो। अच्छे नंबर लाओ। जीत कर दिखाओ। धीरे-धीरे ये आदत तमाम सीखें आदत में बदल गई और पता भी नहीं चला कि कब ये आदत हमारे मन की एक दौड़ में बदल गई। दूसरों से आगे निकलने की दौड़। कभी कक्षा में प्रथम आने की, कभी ऑफिस में पदोन्नति की, कभी समाज में इज़्ज़त कमाने की और कभी अपने ही भाई-बहनों, दोस्तों, रिश्तेदारों से बेहतर दिखने की। परंतु इस लगातार चलने वाली दौड़ में हम भूल गए कि जिस आत्मा को लेकर निकले थे, वह कहाँ है? हर सुबह उठते हैं और सोचते हैं कि किसे पछाड़ना है। हर शाम थककर सोते हैं और गिनते हैं कि कितने पीछे रह गए। यह थकान सिर्फ शरीर की नहीं है, आत्मा की थकान भी है क्योंकि हमने अपनी गति किसी और की रफ़्तार से बाँध दी है। हम अपने फैसले किसी और की कामयाबी देखकर लेने लगे हैं। वो किताब क्यों पढ़ रहे हो? क्योंकि सब पढ़ रहे हैं। वो कोर्स क्यों कर रहे हो? क्योंकि उससे नौकरी मिलती है। शहर क्यों जा रहे हो? क्योंकि वहाँ ज़्यादा अवसर हैं। और धीरे-धीरे हमारी ज़िंदगी, हमारी नहीं रह जाती। वह एक नक़ल बन जाती है, दूसरों के रास्तों की, दूसरों के सपनों की। ऐसा नहीं है कि प्रतिस्पर्धा बुरी चीज़ है। आपको अगर किसी से आगे ही निकलना है, तो उस 'आप' से निकलिए, जो डरता है, जो टालता है, जो रोज़ कहता है 'कल से'। आपका अपना असली प्रतिद्वंद्वी कोई और नहीं, हमारा ही कल का, हमारा ही पुराना संस्करण है। आज के इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में, जहाँ सोशल मीडिया हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को चमका कर पेश करता है, वहाँ अपने ही भीतर स्थिर रहना एक साधना है। खुशी और संतोष हमेशा भीतर से आते हैं और उनका रास्ता आत्म-साक्षात्कार से होकर जाता है, ना कि तुलना और प्रतियोगिता से। (i) गद्यांश के आधार पर लगातार दूसरों से की जा रही प्रतिस्पर्धा की हानि/हानियाँ है/हैं। उचित विकल्प का चयन कर लिखिए : I. शारीरिक थकान II. आत्मा की थकान III. सामाजिक प्रतिष्ठा की हानि IV. आर्थिक नुकसान विकल्प : (A) I और II दोनों (B) I, II और III तीनों (C) I, II और IV तीनों (D) II और IV दोनों (ii) सोशल मीडिया के युग में अपने भीतर स्थिर रहना एक साधना क्यों है? (A) यह दूसरों की उपलब्धियों को नज़र-अंदाज़ करना सिखाता है। (B) इससे हम अधिक सफल और प्रसिद्ध हो सकते हैं। (C) हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को दिखा ललचाता रहता है। (D) प्रतिस्पर्धात्मक युग में इंद्रियों पर नियंत्रण कठिन है। (iii) निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन कर लिखिए : कथन : हमें अपनी ज़िंदगी में दूसरों के सपनों का अनुकरण बंद कर देना चाहिए। कारण : दूसरों की नक़ल से सच्ची खुशी मिल सकती है। (A) कथन और कारण दोनों गलत हैं। (B) कथन सही है किंतु कारण गलत है। (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या है। (D) कथन और कारण दोनों सही हैं किंतु कारण कथन की उचित व्याख्या नहीं है। (iv) हम सभी को बचपन में कौन-सी सीख दी जाती है और उसका क्या प्रभाव हमारे स्वभाव पर पड़ता है? (v) खुशी और संतुष्टि किस प्रकार मिल सकती है? आप उसे पाने के लिए क्या करेंगे?

Medha Ma’am
AskMedha’s AI teacher
Model answer · unseen passage, competition and contentment
- 1.विकल्प (A) I और II दोनों सही है, क्योंकि गद्यांश में शारीरिक थकान और आत्मा की थकान दोनों का उल्लेख है।1 mark
- 2.विकल्प (C) सही है, क्योंकि सोशल मीडिया हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को दिखाकर ललचाता रहता है, इसलिए भीतर स्थिर रहना साधना है।1 mark
- 3.विकल्प (B) सही है—कथन सही है किंतु कारण गलत है, क्योंकि दूसरों की नक़ल से सच्ची खुशी नहीं मिल सकती।1 mark
- 4.बचपन में हमें होशियार बनने, अच्छे नंबर लाने और जीतने की सीख दी जाती है, जिसका प्रभाव यह पड़ता है कि यह सीख आदत बनकर मन की एक अंतहीन दौड़ में बदल जाती है।2 marks
- 5.खुशी और संतुष्टि तुलना और प्रतियोगिता से नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार से मिलती है; इसे पाने के लिए मैं दूसरों की नकल छोड़कर अपने ही भीतर के डर और आलस्य से प्रतिस्पर्धा करूँगा।2 marks
- प्रत्येक बहुविकल्पीय प्रश्न में सही विकल्प का अक्षर (A/B/C) अवश्य लिखें, केवल उत्तर लिखना पर्याप्त नहीं।
- प्रश्न (iv) और (v) के उत्तर गद्यांश के शब्दों में ही दें, जैसे 'आत्म-साक्षात्कार', 'दौड़', 'तुलना' आदि।
- उत्तर पूर्ण वाक्यों में लिखें, न कि केवल एक शब्द में।
Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme
- Q3Case-based7 marksAsked: 2026
निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए : 20 अगस्त को राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2004 में इस दिवस को मनाने की शुरुआत की गई। इसका मुख्य उद्देश्य अक्षय ऊर्जा के प्रति आम आदमी में जागरूकता फैलाना है। आधुनिकता और भौतिकवाद की अंधी दौड़ में सबसे समझदार जीव कहे जाने वाले इंसानों ने ही प्रकृति को नज़रअंदाज करने का काम किया है। जीवाश्म ईंधन ने रही-सही कसर पूरी कर दी। आम आदमी यदि समझदारी दिखाए तो आधुनिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण को भी बचाया जा सकता है। वास्तव में हमें अक्षय ऊर्जा का अर्थ समझना होगा। यह अक्षय इसलिए है, क्योंकि इसे तैयार करने के क्रम में स्रोत का क्षय नहीं होता, बल्कि उसका नवीनीकरण होता रहता है। यह ऊर्जा पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालती क्योंकि इसे तैयार करने के क्रम में प्रदूषण नहीं फैलता। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल-विद्युत ऊर्जा, ज्वार-भाटा से प्राप्त ऊर्जा, बायोगैस, जैव ईंधन आदि अक्षय ऊर्जा के ही कुछ उदाहरण हैं। हमारा देश प्राकृतिक संपदाओं से संपन्न है इसलिए अक्षय ऊर्जा के प्रति यदि गंभीरता से काम किया जाए तो हम इस ऊर्जा को पाने की दिशा में सबसे आगे रहेंगे। इसके लिए ज़रूरी है कि प्राकृतिक संपदाओं का अनियोजित दोहन रोका जाए। आम लोगों को इसके प्रयोग के लिए जागरूक और प्रोत्साहित किया जाए। इसमें दो राय नहीं कि भारत में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। हम अक्षय ऊर्जा पाने की ओर ठोस कदम बढ़ा रहे हैं। भारत गाँवों का देश है। अक्षय ऊर्जा के प्रयोग से गाँवों की ऊर्जा संबंधी समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। अक्षय ऊर्जा देश के लिए एक अच्छा विकल्प बन सकता है। जल्द ही भारत अक्षय ऊर्जा के उत्पादन के मामले में दुनिया में सिरमौर देश सिद्ध होगा।
- Q4Case-based7 marksAsked: 2026
निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : आकार में छोटी, पर प्रभाव में अद्वितीय चींटी, प्रकृति के सबसे संगठित और उद्देश्यपूर्ण प्राणियों में से एक है। भागवत पुराण और कई क्षेत्रीय भारतीय ग्रंथों में चींटियों की परिश्रमशीलता और सहयोग भावना को मानव आचरण का आदर्श बताया गया है। चींटियाँ हमें सिखाती हैं कि नेतृत्व पद से नहीं, बल्कि प्रतिबद्धता, सहयोग और निरंतरता से परिभाषित होता है। अकेली चींटी असहाय हो सकती है, परंतु समूह में वे असंभव को संभव कर देती हैं। यही सहयोगात्मक नेतृत्व का सार है। एक सच्चा नेता मात्र स्वयं की सफलता की आकांक्षा नहीं रखता, अपितु वह ऐसे तंत्र का निर्माण करता है, जहाँ सभी मिलकर योगदान दें और सभी सफलता प्राप्त करें। चींटियों का जीवन अत्यंत अनुशासित होता है। बिना बाहरी निगरानी के, वे भोजन संचित करती हैं। सुरंगें बनाती हैं और चुनौतियों का सामना करती हैं। चींटी यह सिखाती है कि महान उपलब्धियाँ किसी एक विलक्षण कार्य से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे, पर नियमित उद्देश्यपूर्ण प्रयासों से बनती हैं। चींटियाँ ध्यान आकर्षित नहीं करतीं। वे मौन भाव से योगदान देती हैं। यह 'निष्काम कर्म' की भावना का प्रतिबिंब है, यानि बिना फल की आसक्ति से किया गया कर्म। चींटी हमें सिखाती है कि शक्ति आकार से मापी नहीं जाती और ध्वनि से प्रभावित नहीं होती। वे सिद्ध करती हैं कि अनुशासन, विनम्रता, सहयोग और दृष्टि से, सबसे छोटा प्राणी भी अपना प्रभाव छोड़ सकता है। आज के तेज़ी और व्यक्तिवाद से भरे युग में, चींटी हमें बताती है कि शांति से किया गया तप और सामूहिक प्रयत्न ही सच्ची संस्कृति का निर्माण करते हैं। (i) उपर्युक्त गद्यांश किस विषय-वस्तु पर आधारित है ? (A) चींटियों के लघु आकार पर (B) चींटियों के प्रेरक जीवन पर (C) निष्काम कर्म-भावना पर (D) आदर्श नेता के गुणों पर (ii) निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन करके लिखिए : कथन : आकार से शक्ति का आकलन नहीं किया जा सकता। कारण : शक्ति केवल शारीरिक आकार पर निर्भर नहीं करती। मनुष्य की बौद्धिक क्षमता भी शक्ति को प्रभावित करती है। विकल्प : (A) कथन गलत है, किंतु कारण सही है। (B) कथन और कारण दोनों गलत हैं। (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है। (D) कथन सही है, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है। (iii) चींटियों के किस गुण को मानव आचरण का आदर्श बताया गया है ? इस प्रश्न के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए : (I) सहयोग (II) असहाय (III) परिश्रमशीलता (IV) अनुशासन विकल्प : (A) कथन (I) और (II) सही हैं। (B) कथन (I), (II) और (III) सही हैं। (C) कथन (I), (III) और (IV) सही हैं। (D) केवल कथन (IV) सही है। (iv) चींटी 'निष्काम कर्म' की भावना का प्रतीक है, कैसे ? (v) सहयोगात्मक नेतृत्व क्या है ? इसके किसी एक लाभ का उल्लेख कीजिए।
- Q5Case-based7 marksAsked: 2026
2. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : भारत में कहानियों की सुदृढ़ परंपरा रही है । कहानियाँ आनंद प्रदान करने के साथ-साथ, बच्चों के चिंतन को विस्तार देती हैं, उनमें कल्पनाशीलता जगाती हैं तथा उनके समझ के क्षितिज को विस्तृत करती हैं । पंचतंत्र तथा जातक कथाएँ हज़ारों साल से हमारे समाज में लोकप्रिय रही हैं । पंडित विष्णु शर्मा रचित पंचतंत्र की गिनती दुनिया की श्रेष्ठतम बाल कथाओं में की जाती है । इन कथाओं में नैतिक मूल्य निहित हैं । आज दुनियाभर के शिक्षाशास्त्री तथा बाल-मनोवैज्ञानिक इस बात को स्वीकार करते हैं कि बच्चों के कल्पना जगत में पशु-पक्षियों का अप्रतिम स्थान होता है । वे स्वाभाविक रूप से इनकी ओर आकृष्ट रहते हैं । जानवरों की दुनिया में उनमें रुचि, कौतूहल तथा जिज्ञासा होती है । पंचतंत्र की कहानियों में पशु-पक्षियों में उसी तरह से संवाद होता है जैसे कि मानव समाज में होता है । इन कहानियों के माध्यम से सच्चाई, त्याग, क्षमा, करुणा, स्नेह जैसे मानवीय मूल्यों को संप्रेषित करने की कोशिश की गई है । ये सभी मूल्य मानव समाज के लिए नितांत ज़रूरी हैं । इन कथाओं के माध्यम से वास्तव में बालमन में जीवन मूल्यों का बीजारोपण होता है । पंचतंत्र की कहानियाँ पाँच खंडों में विभक्त हैं, जिन्हें तंत्र कहा गया है । पाँच तंत्रों के समावेश के कारण इन्हें पंचतंत्र कहा गया । आज से करीब दो हज़ार साल पहले लिखी गयी पंचतंत्र की कहानियाँ कालजयी हैं । माना जाता है कि यह दुनिया की सर्वाधिक भाषाओं में अनूदित भारतीय साहित्य है । हमारे देश में विद्यालयीन स्तर पर हिन्दी, संस्कृत तथा अंग्रेज़ी की किताबों में ये कहानियाँ हमेशा से पाठ्यक्रम का हिस्सा रही हैं । दुनिया के अन्य देशों में भी इन कहानियों को उतना ही आदर प्राप्त है, जितना हमारे देश में है । (i) पंचतंत्र और जातक कथाओं की समाज में लोकप्रियता का आधार है - (A) सहज सरल भाषा में जीवन-मूल्य संप्रेषित करना (B) पशु-पक्षियों के माध्यम से जीवन-मूल्य संप्रेषित करना (C) बच्चों और बड़ों को आनंद प्रदान करना (D) बाल मनोविज्ञान का सुंदर चित्रण करना (iv) (iv) पशु-पक्षियों की कहानियाँ बच्चों को क्यों लुभाती हैं ? (v) (v) ‘आज से करीब दो हज़ार साल पहले लिखी गयी पंचतंत्र की कहानियाँ कालजयी हैं’ - पंक्ति का क्या आशय है ?
How the model answer begins
1. (i) (B) पशु-पक्षियों के माध्यम से जीवन-मूल्य संप्रेषित करना
The full answer from Medha Ma’am → - Q6Case-based7 marksAsked: 2025
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए : दिनकर जी ने माना है कि उन पर प्रारम्भ से ही जितना प्रभाव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रहा उतना ही मोहम्मद इकबाल का। बाद में इलियट की काव्य-शैली और विचार-दृष्टि ने उनके कवि मानस को छूकर दूर भीतर तक उन्मथित कर दिया। परिणामतः उनकी कविताओं ने एक नई भंगिमा को ग्रहण किया। दिनकर जी अपने युग के एक प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे। सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबन्ध भी दिए हैं, तो बोधकथा, डायरी-संस्मरण भी, और दर्शन-इतिहासगत तथ्यों के विवेचन भी। ‘दिनकर’ जी जीवन भर संघर्षरत रहे। साहित्य और राजनीति दोनों के बीच उनका मन रमता था और इन दोनों ही क्षेत्रों में उनको सफलता मिली। साहित्य जगत द्वारा प्रदत्त ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया। उनके अंतरंग मित्रों को यह ज्ञात है कि ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अन्तिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ। पुरस्कार प्राप्त कर ‘दिनकर’ जी अभिभूत थे क्योंकि कवि का मन अपनी रचनाओं की स्वीकृति, विशेष रूप से सुधीजनों द्वारा उनका प्रशंसित और समादृत होना, अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है। ज्ञानपीठ पुरस्कार के मिलने के बाद उन्होंने अप्रैल, 1974 में तिरुपति की यात्रा की। जब ‘दिनकर’ जी मद्रास पहुँचे तो यह एक सुखद संयोग था कि उनके सर्वाधिक स्नेही मित्र थे गंगाशरण सिंह और जयप्रकाश बाबू भी वहीं थे। उसी शाम उन्होंने मद्रास के समुद्र तट पर अपने कुछ मित्रों को अपनी सुन्दर-सुन्दर रचनाएँ सुनाईं। तब कोई नहीं जानता था कि आज 23 – 24 अप्रैल की शाम गंगा की गोद में उत्पन्न दिनकर जी के अस्ताचल जाने की शाम थी। उसी रात मद्रास में ही ‘दिनकर’ जी की जीवन लीला समाप्त हो गई और फिर उनका पार्थिव शरीर मद्रास से दिल्ली होकर पटना लाया गया। (i) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : पुरस्कार प्राप्त कर मन अभिभूत हो जाता है । कारण : पुरस्कार विद्वज्जनों द्वारा दी जाने वाली सराहना और सम्मान का प्रतीक है । विकल्प : (A) कथन गलत है और कारण भी पूरी तरह गलत ही है । (B) कथन सही है परंतु कारण आंशिक रूप से सही है । (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की उचित व्याख्या भी है । (D) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं है । (ii) दिनकर जी के लेखन पर किन-किन कवियों का प्रभाव रहा है ? I. इलियट II. रवीन्द्रनाथ ठाकुर III. मोहम्मद इकबाल IV. गंगाशरण सिंह (A) I, III और IV (B) I, II और III (C) II, III और IV (D) I, II और IV (iii) दिनकर जी के बारे में कौन-सा तथ्य असत्य है ? (A) वे एक प्रमुख कवि थे परंतु असफल गद्य लेखक भी थे । (B) उनकी शैली प्रांजल थी तथा वे साहित्यिक निबंध लिखते थे । (C) ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अंतिम अध्याय का स्वर्णिम पन्ना है । (D) बोधकथा, डायरी, संस्मरण के अतिरिक्त दिनकर जी ने इतिहास के विषय में भी लिखा है । (iv) दिनकर जी की रचनाशीलता की दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए । (v) ज्ञानपीठ पुरस्कार का दिनकर जी के जीवन में क्या महत्त्व रहा है ?
How the model answer begins
1. (i) विकल्प (C) सही है — कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की उचित व्याख्या है।
The full answer from Medha Ma’am → - Q7Case-based7 marksAsked: 2025
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए : उत्तरी गोलार्द्ध में पतझड़ में प्रवास में चिड़ियाँ अंडे देने के स्थान से चलती हैं। वे उत्तर से दक्षिण की ओर ऊँचे अक्षांशों से निचले अक्षांशों की ओर जाती हैं; दक्षिणी गोलार्द्ध इसका उल्टा होता है जो कि स्वाभाविक ही है। चिड़ियाँ दक्षिण की सर्दी से बचने के लिए उत्तर की ओर चल पड़ती हैं। यह बात तो समझ में आती है कि कुछ चिड़ियाँ सख्त जाड़े से घबरा कर अपेक्षाकृत कम ठंडे स्थानों की ओर भाग जाती हैं और जैसे ही गर्मी शुरू होने लगती है, लौट कर अपने देश आ जाती हैं। वे अपने देश जब आती हैं, उस समय वहाँ पेड़ों पर नई-नई कोंपलें, कलियाँ और फूल निकले होते हैं और परिवार के पोषण के लिए तमाम तरह के कीड़े-मकोड़े उपलब्ध होते हैं। गर्मी खत्म होते-होते बच्चे बड़े होकर आत्मनिर्भर हो जाते हैं और पतझड़ के बाद पहली सर्दी के पड़ते ही, चिड़ियाँ दक्षिण की ओर चल देने को तैयार हो जाती हैं। यहाँ तक तो ऐसा लगता है कि इन कठिन प्रवास यात्राओं का निश्चित महत्त्व है और शायद जो चिड़ियाँ प्रवास पर जाती हैं उनके लिए, कुछ हद तक यह आवश्यक भी है; लेकिन उलझन में डालने वाली बात यह है कि कुछ चिड़ियाँ प्रवास पर पूर्व से पश्चिम या पश्चिम से पूर्व को लगभग उसी अक्षांश पर, लगभग उसी प्रकार के जलवायु वाले प्रदेशों में अंडे देने के लिए जाती हैं। अपनी इस लंबी यात्रा पर प्रस्थान करने से पहले प्रवासी चिड़ियाँ इसके लिए बाकायदा तैयारी करती हैं। वे खाना अधिक मात्रा में खाती हैं ताकि चर्बी की एक तह सी बैठ जाए जो उनकी यात्रा में उनके शरीर को ताकत प्रदान करती रहे। कुछ चिड़ियाँ अभ्यास करना और झुंड बनाकर उड़ना सीखना शुरू कर देती हैं। प्रयोगों से पता चला है कि सूरज निकलने और डूबने से चिड़ियों को प्रस्थान के समय का संकेत मिलता है। लंबी यात्रा में सूरज ही उनको कुतुबनुमा का काम देता है। (i) पक्षी ऊँचे अक्षांशों से निचले अक्षांशों की ओर क्यों जाते हैं ? I. प्रवास के उद्देश्य से II. अधिक सर्दी से बचने के लिए III. गर्मी के मौसम की खोज में विकल्प : (A) केवल II (B) I और III (C) II और III (D) I और II (ii) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : कुछ पक्षी समान जलवायु वाले प्रदेशों में अंडे देने के लिए प्रवास करते हैं । कारण : उनके लिए पश्चिम से पूर्व या पूर्व से पश्चिम जाना अनिवार्य होता है । विकल्प : (A) कथन सही है, परंतु कारण गलत है । (B) कथन गलत है, परंतु कारण सही है । (C) कथन सही है और कारण उसकी उचित व्याख्या है । (D) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं है । (iii) चिड़ियाँ जब प्रवास से लौटती हैं तब उनके देश में कौन-सा परिवर्तन आ चुका होता है ? (A) गर्मी का मौसम खत्म हो चुका होता है । (B) पेड़ों पर नई कोंपलें, फूल आदि लग चुके होते हैं । (C) उनके बच्चे बड़े होकर अपने रास्तों पर निकल चुके होते हैं । (D) सारे कीड़े-मकोड़े अनुपलब्ध हो चुके होते हैं । (iv) पक्षी प्रवास पर जाने से पहले कौन-सी तैयारियाँ करते हैं ? किन्हीं दो का स्पष्ट उल्लेख कीजिए । (v) पक्षियों के लिए प्रवास की आवश्यकता और उसके महत्त्व को अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए ।
How the model answer begins
1. (i) विकल्प (A) केवल II सही है, क्योंकि पक्षी अधिक सर्दी से बचने के लिए ऊँचे अक्षांशों से निचले अक्षांशों की ओर जाते हैं।
The full answer from Medha Ma’am → - Q8Short answer7 marksAsked: 2025
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : भारतीय सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है, जिसमें बहुरंगी विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। इसके साथ ही यह अपने आपको बदलते समय के साथ ढालती भी आई है। इसमें प्राचीन गौरवशाली मान्यताओं एवं परंपराओं के साथ नवीनता का समावेश भी दिखाई देता है। यह विभिन्न सांस्कृतिक धारणाओं का महासंगम है। इसमें अध्यात्म एवं भौतिकता का समन्वय दिखाई देता है। अपनी पारंपरिक संस्कृति से लेकर तिब्बत, मंगोल, द्रविड़, हड़प्पाई और यूरोपीय धाराओं के समागम के बावजूद भारतीय संस्कृति ने अपना पृथक् अस्तित्व बनाए रखा और नवागत संस्कृतियों की अच्छी बातों को उदारतापूर्वक ग्रहण किया। भारतीय संस्कृति में ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ की भावना के साथ सबके कल्याण की बात कही गई है। साथ ही ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की पवित्र भावना के साथ संपूर्ण विश्व को ही एक परिवार के रूप में स्वीकार किया गया है। हमारी संस्कृति ने जीवन में ‘एकल’ को स्वीकार करने, उसका मानवर्धन करने या उसकी ओर अग्रसर होने की बात नहीं सिखाई बल्कि ‘सकल’ को स्थापित किया। ‘व्यष्टि’ के स्थान पर ‘समष्टि’ को महत्त्व और प्राथमिकता दी गई है। हमारे पूर्वजों ने सिखाया कि इस नश्वर संसार में ‘मैं’ का कोई महत्त्व नहीं है। यहाँ तो ‘हम’ के बिना मनुष्य जीवन का कुछ होने वाला नहीं है। यह सच है कि मनुष्यता का ऐसा उदात्त भाव, संस्कारों की ऐसी तरलता, सरलता और सांस्कृतिक गहराई दुनिया के किसी समाज, धर्म-संस्कृति में नहीं मिलती, जबकि हमारी संस्कृति में ये हमारी धमनियों में प्रवाहित रक्त के समान तथा हमारी श्वासों के साथ हमारी देह में प्रविष्ट करने वाली प्राण-धारा के समान है। आज आवश्यकता है कि हम अतीत की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजें-सँवारें तथा उसकी मजबूत आधारशिला पर खड़े होकर नए मूल्यों और संस्कृति को निर्मित एवं विकसित करें। (क) गद्यांश में भारतीय संस्कृति के किस तत्त्व का उल्लेख नहीं किया गया है ? (A) सबके सुख की कामना (B) सबके कल्याण की भावना (C) समस्त वसुधा एक परिवार (D) व्यष्टि उत्थान को प्राथमिकता (ख) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उचित विकल्प का चयन कीजिए : कथन : भारतीय संस्कृति 'एकल' का मानवर्धन करने के स्थान पर 'सकल' का महत्त्व स्थापित करती है। कारण : भारतीय संस्कृति की विशालता और महत्ता संपूर्ण मानव के साथ तादात्म्य संबंध स्थापित करने में है। (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं। (B) कथन सही है, लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है। (C) कारण सही है, लेकिन कथन गलत है। (D) कथन व कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है। (ग) 'इस नश्वर संसार में 'मैं' का कोई महत्त्व नहीं है' - कथन में प्रयुक्त 'मैं' का अर्थ है - (A) अहंकार (B) जीवन (C) एकल (D) मनुष्य (घ) भारतीय संस्कृति में 'मैं' की जगह किसे महत्त्व दिया गया है और क्यों ? (ङ) भारतीय संस्कृति के अक्षुण्ण बने रहने का क्या कारण है ? किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए ।
How the model answer begins
1. (क) (D) व्यष्टि उत्थान को प्राथमिकता
The full answer from Medha Ma’am → - Q9Case-based7 marksAsked: 2025
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : शिक्षकों को अपने यहाँ बहुत से विशेषणों से संबोधित किया जाता रहा है । शिक्षक को राष्ट्र-निर्माता कहा जाता है । युवा पीढ़ी का सुधारक, मशाल-वाहक और पथ-प्रदर्शक भी कहा जाता है । शिक्षक शिक्षा के साथ-साथ अपने शिष्यों को जीवन-कौशल और नैतिक मूल्यों का भी ज्ञान प्रदान करते हैं । मानव जाति के लिए नई सोच और दृष्टिकोण की अपेक्षा भी शिक्षकों से ही की जाती है । शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका समाज को सशक्त और समृद्ध बनाने में भी है । हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राचीन ग्रंथों में जगह-जगह एक आदर्श गुरु के गुणों को वर्णित किया गया है । स्कंद पुराण के गुरु-स्तोत्रम् में तो गुरुओं की तुलना ब्रह्मा, विष्णु और महेश से की गई है तथा गुरु को साक्षात् परब्रह्म माना गया है । एक अच्छे गुरु में गहन ज्ञान, विद्वत्ता, करुणा, नैतिकता व चरित्र, नवीनता, नवाचार, अनुशासनप्रियता और समानता का भाव अपेक्षित है । यही गुण एक गुरु को महान बनाते हैं और शिष्यों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालते हैं । अपनी सदी के महान कवि और संत कबीरदास जी ने भी कहा है - 'गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़े खोट' - अर्थात् गुरु कुम्हार है और शिष्य घड़ा है जो गढ़-गढ़ कर शिष्य की कमियों को दूर करता है । शिक्षक अपने सफल मार्गदर्शन द्वारा शिष्यों को उनकी शक्तियों से परिचित कराते हुए उनके विकास के मार्ग को प्रशस्त करते हैं । शिक्षक समाज के भविष्य निर्माताओं को तैयार करने में एक अहम भूमिका निभाते हैं । (क) शिक्षक शिक्षा के साथ-साथ शिष्यों को प्रदान करता है - (A) नैतिक मूल्यों का ज्ञान (B) धन-अर्जित करने का ज्ञान (C) पेशेवर विकास का ज्ञान (D) भविष्य सुनिश्चित करने का ज्ञान (ख) गुरु को ब्रह्मा क्यों कहा गया है ? (A) छात्रों के हित गुरु के भीतर छिपी कल्याण-भावना के कारण (B) समाज के भविष्य निर्माताओं को तैयार करने की भूमिका के कारण (C) छात्रों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने के कारण (D) रोज़गार हेतु विद्यार्थियों में कौशल विकास करने के कारण (ग) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कीजिए : कथन : मानव जाति के लिए नई सोच और दृष्टिकोण विकसित करना शिक्षक का दायित्व है। कारण : हमारी ज्ञान परंपरा और ग्रंथों में गुरु को महान बताया गया है। (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं। (B) कारण सही है लेकिन कथन गलत है। (C) कथन सही है लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है। (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है। (घ) शिक्षक को पथ-प्रदर्शक क्यों कहा जाता है ? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए। (ङ) कबीरदास जी ने गुरु की तुलना कुम्हार से क्यों की है ? किन्हीं दो कारणों को स्पष्ट कीजिए।
- Q10Case-based5 marksAsked: 2025
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : (i) वर्तमान समय में पड़ोस कल्चर के समाप्त होने का/के क्या कारण है/हैं ? इस प्रश्न के उत्तर में उचित विकल्प चुनकर उत्तर दीजिए : I. फ्लैट संस्कृति का जन्म लेना II. अपनी जिंदगी खुद जीने का दबाव III. संयुक्त परिवारों का विघटित होना IV. पाश्चात्य संस्कृति का बढ़ता प्रभाव विकल्प : (A) केवल I सही है (B) केवल IV सही है (C) I और II दोनों सही हैं (D) II और III दोनों सही हैं (ii) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : परंपरागत 'पड़ोस-कल्चर' से अलग होकर हम संकुचित, असहाय और असुरक्षित बन गए हैं। कारण : स्वायत्ततापूर्ण जिंदगी जीने के महानगरीय दबाव ने मनुष्य को स्वार्थी और आत्मकेन्द्रित बना दिया है। विकल्प : (A) कथन सही है, परंतु कारण गलत है। (B) कथन गलत है, परंतु कारण सही है। (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की उचित व्याख्या है। (D) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं है। (iii) लेखिका की कहानियों के पात्रों के बारे में कहा जा सकता है : I. उनकी आरंभिक कहानियों के पात्र उनके मोहल्ले के ही थे। II. अधिकांशतः पात्र उनके परिवार से ही आते हैं। III. शुरू के पात्र उनकी किशोरावस्था और युवावस्था की स्मृतियों से आते हैं। विकल्प : (A) केवल I सही है (B) I और II सही हैं (C) I और III सही हैं (D) II और III सही हैं (iv) 'घर की दीवारें घर तक ही समाप्त नहीं होने' का आशय क्या है ? (A) आस-पड़ोस के घरों से अपने घर जैसे आत्मीय संबंध। (B) आस-पड़ोस के घरों की दीवारों का आपस में मिला-जुला होना। (C) मोहल्ले के हर घर में आने-जाने पर पाबंदी लग जाना। (D) मोहल्ले के अन्य घरों से निश्चित और सीमित संबंध रखना। (v) लेखिका के लिए भी सुखद आश्चर्य का विषय क्या था ? (A) उनके पात्र एकदम जीवंत कैसे बनते रहे। (B) उनके समय में सब एक-दूसरे से खुलकर मिल पाते थे। (C) आज के फ्लैट कल्चर ने हमें किस प्रकार असहाय बना दिया है। (D) अतीत के पात्रों का भाव-भंगिमा सहित कहानी में जीवंत हो उठना।
- Q11Case-based5 marksAsked: 2024
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने पर हाइड्रोजन का विकल्प मिलने की संभावनाएँ बढ़ जाएँगी और हमारे देश में जीवाश्म ईंधन जैसे कच्चा तेल, कोयला आदि पर निर्भरता कम हो जाएगी और इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भी पाँच करोड़ टन की कमी आ सकती है । राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन का एक अहम् उद्देश्य पेट्रोल-डीज़ल जैसे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता ख़त्म करते हुए देश को स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन का केंद्र बनाना है । यह सही है कि इस समय हाइड्रोजन हमारी धरती पर उपलब्ध सबसे स्वच्छ ईंधन है । मगर समस्या यह है कि पृथ्वी पर मौजूद समस्त हाइड्रोजन किसी दूसरे तत्त्व जैसे पानी या अन्य हाइड्रोकार्बन के साथ गुँथा हुआ है । ऐसे में विलगाने की प्रक्रिया में प्रदूषण होता है । इसलिए इसे स्वच्छ या ग्रीन हाइड्रोजन नहीं कह सकते । ऐसी समस्याओं का इलाज है राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन । उल्लेखनीय है कि इलेक्ट्रोलेसिस प्रक्रिया से ईंधन तैयार होने की प्रक्रिया पूरी तरह कार्बन उत्सर्जन से मुक्त होती है । हाइड्रोजन ईंधन तैयार करने के फिलहाल दो तरीके हैं । पहला तरीका इलेक्ट्रोलेसिस यानी पानी में से बिजली गुज़ार कर हाइड्रोजन ईंधन प्राप्त करने वाला है । दूसरा तरीका प्राकृतिक गैस से हाइड्रोजन और कार्बन को तोड़कर ईंधन तैयार करने का है । इलेक्ट्रोलेसिस प्रक्रिया से तैयार होने वाले हाइड्रोजन ईंधन में स्वच्छ ऊर्जा इस्तेमाल होती है । सौर ऊर्जा या पवन ऊर्जा वाले बिजलीघरों से मिली बिजली के इस्तेमाल से पानी को इलेक्ट्रोलाइज़ कर हाइड्रोजन अलग की जाती है । ऐसे ईंधन को ‘ग्रीन’ हाइड्रोजन या जी.एच.-2 या फिर ग्रीन फ्यूल कहते हैं । इस तरह की ऊर्जा के बारे में दावा है कि इससे सबसे बड़ा लाभ तेल शोधन, खाद निर्माण, सीमेंट, स्टील और भारी उद्योगों को होगा, क्योंकि वहाँ हाइड्रोजन ईंधन को सी.एन.जी. और पी.एन.जी. के साथ मिलाकर प्रयोग करने पर ये भारी उद्योग कार्बन मुक्त हो सकेंगे । (i) कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए : कथन : इलेक्ट्रोलेसिस प्रक्रिया से ईंधन तैयार करना सर्वोत्तम है । कारण : ईंधन बनाए जाने की यह प्रक्रिया कार्बन उत्सर्जन से रहित होती है । विकल्प : (A) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है । (B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं । (C) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है । (D) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या है । (ii) ‘ग्रीन फ्यूल’ कौन-सा है ? (A) हरी वनराशि को पीसकर तैयार किया गया ईंधन (B) पानी और प्राकृतिक ऊर्जा से मिली बिजली से तैयार ईंधन (C) जीवाश्म ईंधन से इलेक्ट्रोलाइज़ करके तैयार ईंधन (D) कार्बन उत्सर्जन को नकारते हुए तैयार सस्ता ईंधन (iii) पृथ्वी पर मौजूद समस्त हाइड्रोजन को ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ क्यों नहीं कहा जा सकता ? (A) धरती पर उपलब्ध अन्य तत्वों के साथ गुँथा हुआ है । (B) पानी में मिले अन्य पदार्थ अलग करना असंभव है । (C) हाइड्रोजन को तोड़ने में प्रदूषण से बचना कठिन है । (D) आज चारों तरफ हरियाली का पर्याप्त अभाव है । (iv) जीवाश्म ईंधन से बचना क्यों ज़रूरी है ? (A) प्रदूषण-रहित पर्यावरण के लिए (B) अत्यधिक व्यय से बचने के लिए (C) अत्याधुनिक बनने के लिए (D) सभी के साथ चलने के लिए (v) गद्यांश के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों को ध्यान से पढ़िए और उचित विकल्प छाँटकर लिखिए कि हाइड्रोजन ईंधन से हमें कौन-सा/से लाभ मिलेंगे । I. जीवाश्म ईंधन, कच्चा तेल आदि पर निर्भरता कम होगी । II. सबको बहुत ही सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध होगी । III. ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में काफी कमी आ सकेगी । विकल्प : (A) I सही है । (B) I और III सही हैं । (C) III सही है । (D) I और II सही हैं ।
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1. (i) उत्तर - (D) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
The full answer from Medha Ma’am → - Q12Case-based5 marksAsked: 2023
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : छठ इस संसार में अपनी तरह का ऐसा पर्व है, जो अपनी व्यंजना में बहुआयामी है । सूर्य इस त्योहार का केंद्र है । सूर्य जीव-जगत के आधार हैं । सूर्य के बिना कोई भी भोग-उपभोग संभव नहीं है । अतः सूर्य के प्रति आभार प्रदर्शन के लिए छठ या सूर्य षष्ठी व्रत मनाया जाता है, तो कोई आश्चर्य नहीं । सूर्य उन क्षेत्रों के लिए सबसे उपयोगी है, जहाँ पानी की उपलब्धता ज्यादा है । पूर्वांचल में नदियों का जाल बिछा है, ऐसे में सूर्य का ताप लेना जीवन के लिए सबसे जरूरी हो जाता है । हमारी सूर्य-केंद्रित संस्कृति कहती है कि वही उगेगा, जो डूबेगा । अतः छठ में पहले दिन डूबते और फिर दूसरे दिन उगते सूर्य की पूजा स्वाभाविक है । नीरोग रहने के लिए भी सूर्य की बड़ी जरूरत है । सूर्य के ताप में रोगनाशक शक्ति है । अक्सर लोग छठ महापर्व के समय स्वास्थ्य को लेकर भी प्रार्थना करते हैं । जब कोरोना का उभार हुआ था, तब लोग आश्वस्त थे कि एक बार सूर्य की तपन बढ़ेगी, तो कोरोना वायरस नष्ट हो जाएगा । यह जो भ्रम था, वह सूर्य के प्रति हमारी आस्था का ही परिणाम था । यह भी सत्य है कि सूर्य के प्रति हमारी आशा का कोई विकल्प भी नहीं है । सूर्य के बिना भारत की जैव-विविधता, जीवन और स्वास्थ्य का मेल नहीं बन सकता । आधुनिक जीवन की मज़बूरी में जब अक्षय-ऊर्जा की बात होती है, तब लोगों की नजर सूर्य की ओर ही जाती है । अर्थात् किन्हीं अर्थों में सूर्य हमारा अतीत ही नहीं, भविष्य भी है । (i) सूर्य षष्ठी व्रत क्यों मनाया जाता है ? (a) भगवान सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए (b) प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए (c) नदियों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए (d) देवी-देवताओं के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए (ii) 'वही उगेगा, जो डूबेगा' पंक्ति का आशय है : (a) उदय और अस्त होना एक-दूसरे से जुड़े हैं । (b) उदय होने के लिए अस्त होना जरूरी है । (c) असफलताओं का भी सफलता में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है । (d) सफलता का महत्त्व असफल व्यक्ति ही समझ सकता है । (iii) ताप के अतिरिक्त भी सूर्य की आवश्यकता क्यों है ? (a) प्रकृति के लिए (b) लंबे जीवन के लिए (c) नीरोगी जीवन के लिए (d) प्रकाश के लिए (iv) कोरोना वायरस के नष्ट होने के संदर्भ में लोगों का क्या विश्वास था ? (a) वैज्ञानिक कोरोना वायरस की औषधि ढूँढ लेंगे । (b) सूर्य के बढ़ते ताप से कोरोना वायरस नष्ट हो जाएगा । (c) सूर्य के बढ़ते ताप से कोरोना वायरस अप्रभावित रहेगा । (d) कोरोना वायरस धीरे-धीरे स्वयं ही नष्ट हो जाएगा । (v) 'अक्षय ऊर्जा' से क्या अभिप्राय है ? (a) ऊर्जा का ऐसा स्रोत जो कभी नष्ट न हो (b) ऊर्जा का ऐसा स्रोत जो लंबे समय तक चले (c) ऊर्जा का ऐसा स्रोत जो कम खर्चीला हो (d) ऊर्जा का ऐसा स्रोत जो प्रकृति-प्रदत्त हो
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1. (i) (a) भगवान सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए
The full answer from Medha Ma’am → - Q13Case-based5 marksAsked: 2023
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनियाभर में बढ़ते पर्यावरण संकट को कम करने में जैविक खेती एक उपचारक भूमिका निभा सकती है। गौरतलब है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में प्राकृतिक खेती बड़े पैमाने पर अपनाई जा रही है। धीरे-धीरे दक्षिण, मध्य भारत और उत्तर भारत में भी यह किसानों में लोकप्रिय हो रही है। अब किसानों ने जैविक खेती को एक सशक्त विकल्प के रूप में अपना लिया है। गौरतलब है कि जैविक या प्राकृतिक खेती की तरफ भारतीय किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। धीरे-धीरे जैविक खेती का प्रचलन बढ़ रहा है। जैविक बीज, जैविक खाद, पानी, किसानी के यंत्रों आदि की आसानी से उपलब्धता जैविक खेती की लोकप्रियता को और अधिक बढ़ा सकती है। प्राकृतिक खेती को लेकर अनुसंधान भी बहुत हो रहे हैं। किसान नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। इससे कृषि वैज्ञानिक भी प्राकृतिक खेती को लेकर अधिक उत्साहित हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जैविक या प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से पर्यावरण, खाद्यान्न, भूमि, इंसान की सेहत, पानी की शुद्धता को और बेहतर बनाने में मदद मिलती है। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से होने वाली बीमारियों और समस्याओं की जानकारी न होने की वजह से किसान इनका प्रयोग काफी ज्यादा करने लगे हैं। वहीं दूसरी तरफ सिक्किम में प्राकृतिक खेती से पर्यावरण को जितनी मदद मिली है उससे साफ़ हो गया है कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर कई समस्याओं का समाधान हो सकता है। (i) आज जैविक खेती की माँग क्यों बढ़ती जा रही है? (a) सस्ती होने के कारण (b) अधिक उत्पादन के कारण (c) स्वच्छ पर्यावरण के कारण (d) सरकारी मदद मिलने के कारण (ii) सही कथन का चयन कीजिए - (a) उत्तर भारत में जैविक खेती के लिए प्रेरणा की जरूरत है। (b) पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती के प्रति अधिक उत्साह है। (c) लोगों में प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी का अभाव है। (d) प्राकृतिक खेती के लिए विश्वविद्यालय से शिक्षित होना जरूरी है। (iii) जैविक खेती को किसानों की पहली पसंद बनाने के लिए क्या करना चाहिए ? (a) रासायनिक खेती निषिद्ध की जानी चाहिए। (b) बाज़ार में केवल जैविक उत्पादों की बिक्री होनी चाहिए। (c) युवकों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करना चाहिए। (d) जैविक बीज, खाद, किसानी के यंत्र आदि सुविधाएँ उपलब्ध करवानी चाहिए। (iv) वर्तमान समय में खेती के लिए, अनुसंधानों में बढ़ोत्तरी किसके बारे में हुई है? (a) जैविक खेती (b) रासायनिक खाद (c) नई-नई दवाइयाँ (d) नए बीज (v) किसान कीटनाशकों और रासायनिक खाद का अधिक प्रयोग क्यों करने लगे हैं? (a) सहज उपलब्धता के कारण (b) दुष्प्रभावों की जानकारी न होने के कारण (c) अधिक प्रचार-प्रसार के कारण (d) सस्ती होने के कारण
- Q14Case-based5 marksAsked: 2023
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : एशिया के उच्च पर्वतीय क्षेत्र को सेंट्रल एशियन माउंटेन रीजन भी कहा जाता है । इसमें हिमालय, कराकोरम और हिंदूकुश पर्वत श्रृंखलाएँ आती हैं जो चीन से लेकर अफगानिस्तान तक फैली हैं । इस क्षेत्र में करीब 55 हज़ार हिमनद हैं, जिनमें पेयजल का जितना भंडार है उतना उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के अतिरिक्त पृथ्वी पर एक साथ पेयजल कहीं नहीं है । इन हिमनदों से पिघला हुआ जल एशिया की दस सबसे बड़ी नदियों को जीवन देता है, जिन पर करीब दो करोड़ लोगों की आबादी निर्भर रहती है । बढ़ते तापमान की वजह से इन सभी पर ख़तरा मंडरा रहा है । संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यानी यूएनडीपी के मुताबिक शेष दुनिया के मुकाबले हिमालयी क्षेत्र में तापमान करीब दोगुनी रफ़्तार से बढ़ रहा है जिसकी वजह से पर्वतों पर जमी बर्फ पिघल रही है और बर्फबारी हो रही है । यदि समय रहते वैश्विक तापमान में लगभग 1.5 फीसदी की कमी नहीं की गई तो इस शताब्दी के अंत तक दक्षिण एशिया के पहाड़ों पर जो बर्फ जमा है, उसका आधा या फिर दो-तिहाई हिस्सा गायब हो जाएगा । पिघलते हिमनदों की वजह से बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है । पिछले साल भारत ने गंगा नदी पर नए पनबिजली संयंत्रों के निर्माण पर रोक लगा दी थी, ताकि निचले इलाकों में नदियों के पानी के बहाव को बनाए रखा जा सके और नदियाँ सूखने न पाएँ । ग्लेशियरों के पिघलने की दर को कम करने के तरीके ढूँढने के बावजूद तमाम वैज्ञानिक भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हैं । जीवाश्म-ईंधनों के जरिए लोग उन गैसों को वायुमंडल में छोड़ते हैं जो पृथ्वी के चारों ओर ग्रीनहाउस की तरह काम करती है और धरती गर्म होने लगती है । कोयला, तेल और गैस जलाने पर कालिख और पार्टिकुलेट मैटर छोड़ते हैं । हवा के जरिए ये प्रदूषक बर्फ पर जम जाते हैं और बर्फ तेजी से गर्म होकर पिघलने लगती है । (i) सेंट्रल एशियन माउंटेन रीजन कहाँ है ? (a) ऑस्ट्रेलिया में (b) अफ्रीका में (c) साऊथ अमेरिका में (d) एशिया में (ii) विश्व में सर्वाधिक पीने योग्य जल का भंडार कहाँ उपलब्ध है ? (a) नदियों में (b) दोनों ध्रुवों पर (c) हिमालय पर (d) हिंदूकुश पर्वत पर (iii) जीवनदायिनी नदियों पर ख़तरे के बादल क्यों मंडरा रहे हैं ? (a) तापमान में वृद्धि के कारण (b) जनसंख्या वृद्धि के कारण (c) अज्ञानता के कारण (d) वैमनस्यता के कारण (iv) गंगा नदी पर नए पनबिजली संयंत्रों के निर्माण पर प्रतिबंध क्यों लगाना पड़ा ? (a) नदियाँ प्रदूषित न हों (b) वर्षा समय पर हो (c) बाढ़ को रोका जा सके (d) नदियों का प्रवाह बना रहे (v) गद्यांश के आधार पर ग्लेशियरों को पिघलने से कैसे रोका जा सकता है ? (a) जल प्रदूषण में कमी लाकर (b) जीवाश्म ईंधनों का सीमित प्रयोग कर (c) प्लास्टिक पर रोक लगाकर (d) विकास कार्यों पर लगाम लगा कर
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1. (d) एशिया में - सेंट्रल एशियन माउंटेन रीजन एशिया में स्थित है।
The full answer from Medha Ma’am → - Q15Case-based5 marksAsked: 2024
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : (i) गद्यांश के आधार पर परंपरागत टेलीविजन के वजूद खोने का कारण है - (A) क्षेत्रीय भाषाओं में प्रसारण की सुविधा का न होना । (B) अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रसारण की सुविधा का न होना । (C) सीमित चैनलों पर आने वाले सीमित कार्यक्रम । (D) सीमित चैनलों पर निश्चित समय पर आने वाले कार्यक्रम । (ii) गद्यांश के अनुसार, भविष्य की कल्पना का आधार क्या होता है ? (A) अतीत की उपलब्धि (B) वर्तमान की उपलब्धि (C) विकसित देशों की उपलब्धि (D) विकासशील देशों की उपलब्धि (iii) 'स्मार्ट टी.वी.' कहा जाता है - (A) सुंदर, सजीले, शोभनीय टी.वी. को (B) पारंपरिक टी.वी. से भिन्न आधुनिक टी.वी. को (C) आधुनिक तकनीकी सुविधा से युक्त टी.वी. को (D) स्मार्टफोन की तकनीक उपलब्ध कराने वाले टी.वी. को
- Q16Case-based5 marksAsked: 2024
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : [passage] (i) कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए : कथन : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी है । कारण : भविष्य की ज़रूरतों को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी है । (ii) कौन-सा कथन अनुच्छेद के अनुरूप नहीं है ? (iii) भारत अपने ऊर्जा-व्यय को किस प्रकार सीमित कर सकता है ? (iv) भारत को स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता क्यों है ? (v) राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का/के मुख्य उद्देश्य है/हैं, भारत को : I. ऊर्जा क्षेत्र में स्वतंत्र बनाना II. सर्वोच्च स्थान तक पहुँचाना III. वैकल्पिक ईंधन का उत्पादन करना विकल्प :
- Q17Very short answer2 marksAsked: 2025
दिनकर जी ने माना है कि उन पर प्रारम्भ से ही जितना प्रभाव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रहा उतना ही मोहम्मद इकबाल का । बाद में इलियट की काव्य-शैली और विचार-दृष्टि ने उनके कवि मानस को छूकर दूर भीतर तक उन्मथित कर दिया । परिणामतः उनकी कविताओं ने एक नई भंगिमा को ग्रहण किया । दिनकर जी अपने युग के एक प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे । सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबन्ध भी दिए हैं, तो बोधकथा, डायरी-संस्मरण भी, और दर्शन-इतिहासगत तथ्यों के विवेचन भी । ‘दिनकर’ जी जीवन भर संघर्षरत रहे । साहित्य और राजनीति दोनों के बीच उनका मन रमता था और इन दोनों ही क्षेत्रों में उनको सफलता मिली । साहित्य जगत द्वारा प्रदत्त ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया । उनके अंतरंग मित्रों को यह ज्ञात है कि ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अन्तिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ । पुरस्कार प्राप्त कर ‘दिनकर’ जी अभिभूत थे क्योंकि कवि का मन अपनी रचनाओं की स्वीकृति, विशेष रूप से सुधीजनों द्वारा उनका प्रशंसित और समादृत होना, अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है । ज्ञानपीठ पुरस्कार के मिलने के बाद उन्होंने अप्रैल, 1974 में तिरुपति की यात्रा की । जब ‘दिनकर’ जी मद्रास पहुँचे तो यह एक सुखद संयोग था कि उनके सर्वाधिक स्नेही मित्र थे गंगाशरण सिंह और जयप्रकाश बाबू भी वहीं थे । उसी शाम उन्होंने मद्रास के समुद्र तट पर अपने कुछ मित्रों को अपनी सुन्दर-सुन्दर रचनाएँ सुनाईं । तब कोई नहीं जानता था कि आज 23 – 24 अप्रैल की शाम गंगा की गोद में उत्पन्न दिनकर जी के अस्ताचल जाने की शाम थी । उसी रात मद्रास में ही ‘दिनकर’ जी की जीवन लीला समाप्त हो गई और फिर उनका पार्थिव शरीर मद्रास से दिल्ली होकर पटना लाया गया । दिनकर जी की रचनाशीलता की दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए ।
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1. दिनकर जी एक सफल गद्य लेखक भी थे, जिन्होंने सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबन्ध लिखे।
The full answer from Medha Ma’am → - Q18Very short answer2 marksAsked: 2025
दिनकर जी ने माना है कि उन पर प्रारम्भ से ही जितना प्रभाव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रहा उतना ही मोहम्मद इकबाल का । बाद में इलियट की काव्य-शैली और विचार-दृष्टि ने उनके कवि मानस को छूकर दूर भीतर तक उन्मथित कर दिया । परिणामतः उनकी कविताओं ने एक नई भंगिमा को ग्रहण किया । दिनकर जी अपने युग के एक प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे । सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबन्ध भी दिए हैं, तो बोधकथा, डायरी-संस्मरण भी, और दर्शन-इतिहासगत तथ्यों के विवेचन भी । ‘दिनकर’ जी जीवन भर संघर्षरत रहे । साहित्य और राजनीति दोनों के बीच उनका मन रमता था और इन दोनों ही क्षेत्रों में उनको सफलता मिली । साहित्य जगत द्वारा प्रदत्त ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया । उनके अंतरंग मित्रों को यह ज्ञात है कि ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अन्तिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ । पुरस्कार प्राप्त कर ‘दिनकर’ जी अभिभूत थे क्योंकि कवि का मन अपनी रचनाओं की स्वीकृति, विशेष रूप से सुधीजनों द्वारा उनका प्रशंसित और समादृत होना, अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है । ज्ञानपीठ पुरस्कार के मिलने के बाद उन्होंने अप्रैल, 1974 में तिरुपति की यात्रा की । जब ‘दिनकर’ जी मद्रास पहुँचे तो यह एक सुखद संयोग था कि उनके सर्वाधिक स्नेही मित्र थे गंगाशरण सिंह और जयप्रकाश बाबू भी वहीं थे । उसी शाम उन्होंने मद्रास के समुद्र तट पर अपने कुछ मित्रों को अपनी सुन्दर-सुन्दर रचनाएँ सुनाईं । तब कोई नहीं जानता था कि आज 23 – 24 अप्रैल की शाम गंगा की गोद में उत्पन्न दिनकर जी के अस्ताचल जाने की शाम थी । उसी रात मद्रास में ही ‘दिनकर’ जी की जीवन लीला समाप्त हो गई और फिर उनका पार्थिव शरीर मद्रास से दिल्ली होकर पटना लाया गया । ज्ञानपीठ पुरस्कार का दिनकर जी के जीवन में क्या महत्व रहा ?
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1. ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया और यह पुरस्कार उनके जीवन के अंतिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ।
The full answer from Medha Ma’am → - Q19Very short answer2 marksAsked: 2025
लोक साहित्य का सृजक लोक ही है इसीलिए उसमें लोकजीवन की आत्मगाथा समाहित होती है। लोक साहित्य मानव जीवन जितना ही प्राचीन है। अपने जन्म के साथ ही मनुष्य ने कथाएँ कहनी शुरू कर दी थीं- यथार्थपरक भी और काल्पनिक भी। इन कथाओं में उसके अपने अनुभव की कथाएँ हैं। साथ ही अपने तत्कालीन समय और समाज की घटनाओं तथा कथाओं का समावेश है। समय के साथ-साथ समाज में बदलाव की बयार चलती रहती है और समय के साथ कदमताल करते हुए लोक साहित्य में भी बदलाव होता रहा है। लोक साहित्य समय के साथ यात्रा करता आया है और परिवर्तनों को स्वीकारता रहा है। लोक साहित्य की यह सबसे बड़ी खूबसूरती है कि वह परंपराओं का ध्यान रखते हुए भी रूढ़ियों को पकड़कर एक जगह ठहरता नहीं। वह समय के साथ चलता है और समय के सच से साक्षात्कार कराते हुए कभी-कभी समय से आगे चलता भी दिखता है। तभी कहा जाता है कि किसी संस्कृति के संबंध में गहराई से जानने के लिए वहाँ के लोक साहित्य को जानना आवश्यक है। क्योंकि उसमें संस्कृति का सच्चा स्वरूप दृष्टिगोचर होता है। लोक साहित्य में लोकगीत, लोककथा, लोकगाथा, लोकनाट्य आदि सभी रूप शामिल हैं। इनकी भाषा इतनी सहज-सरल-सरस होती है कि वे लोककंठों में बस जाती हैं। आज के आत्ममुग्ध और आत्म-प्रचार के समय में हम लोक साहित्य सृजकों के आत्म-प्रचार से दूर रहने की मन:स्थिति पर विस्मय ही कर सकते हैं। अपनी प्रसिद्धि, मान-सम्मान या अपने नाम के प्रचार की लालसा का भाव उनमें लेशमात्र भी नहीं था। अपनी रचनाओं में भी वे ऐसा संकेत करने से बचते रहे, जिससे उनकी पहचान की जा सके। अपने नाम के प्रचार के मोह से वे पूरी तरह मुक्त थे। लोक साहित्य और संस्कृति को अंतर्संबंधित क्यों बताया गया है? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।
- Q20Very short answer2 marksAsked: 2025
दिनकर जी ने माना है कि उन पर प्रारम्भ से ही जितना प्रभाव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रहा उतना ही मोहम्मद इकबाल का। बाद में इलियट की काव्य-शैली और विचार-दृष्टि ने उनके कवि मानस को छूकर दूर भीतर तक उन्मथित कर दिया। परिणामतः उनकी कविताओं ने एक नई भंगिमा को ग्रहण किया। दिनकर जी अपने युग के एक प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावशाली गद्य लेखक भी थे। सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबंध भी दिए हैं, तो बोधकथा, डायरी-संस्मरण भी, और दर्शन-इतिहासगत तथ्यों के विवेचन भी। 'दिनकर' जी जीवन भर संघर्षरत रहे। साहित्य और राजनीति दोनों के बीच उनका मन रमता था और इन दोनों ही क्षेत्रों में उनको सफलता मिली। साहित्य जगत द्वारा प्रदत्त ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया। उनके अंतरंग मित्रों को यह ज्ञात है ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अंतिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ। पुरस्कार प्राप्त कर 'दिनकर' जी अभिभूत थे क्योंकि कवि का मन अपनी रचनाओं की स्वीकृति, विशेष रूप से सुधीजनों द्वारा उनका प्रशंसित और समादृत होना, अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है। ज्ञानपीठ पुरस्कार के मिलने के बाद उन्होंने अप्रैल, 1974 में तिरुपति की यात्रा की। जब 'दिनकर' जी मद्रास पहुँचे तो यह एक सुखद संयोग था कि उनके सर्वाधिक स्नेही मित्र थे गंगाशरण सिंह और जयप्रकाश बाबू भी वहीं थे। उसी शाम उन्होंने मद्रास के समुद्र तट पर अपने कुछ मित्रों को अपनी सुन्दर-सुन्दर रचनाएँ सुनाईं। तब कोई नहीं जानता था कि आज 23 - 24 अप्रैल की शाम गंगा की गोद में उत्पन्न दिनकर जी के अस्ताचल जाने की शाम थी। उसी रात मद्रास में ही 'दिनकर' जी की जीवन लीला समाप्त हो गई और फिर उनका पार्थिव शरीर मद्रास से दिल्ली होकर पटना लाया गया। दिनकर जी की रचनाशीलता की दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।
How the model answer begins
1. दिनकर जी बहुमुखी रचनाकार थे। वे अपने युग के प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावशाली गद्य लेखक भी थे। उदाहरण के लिए, उन्होंने साहित्यिक विषयों पर निबंध, बोधकथाएँ, डायरी-संस्मरण तथा दर्शन और इतिहास से जुड़े तथ्यों के विवेचन…
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Objective questions with the board’s key (10)
- 1. CBSE 2026
हमारी सभ्यताएँ आमतौर पर नदियों के किनारे ही फली-फूलीं, लेकिन जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ी तो उन्हें नदियों से दूर जाकर बसना पड़ा, पर वहाँ भी उन्होंने तालाब बनाए। इन तालाबों की खासियत यह रही कि ये मनुष्यों के साथ-साथ नदियों को भी पोषित करते रहे थे और मानवता को भी पोषित करते थे, क्योंकि तालाबों में भरा पानी नदी के पेट को भरकर नदी को प्रवाह देता था। इसके बाद फिर जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ी, तो हमने कुएँ बनाए, बावड़ियाँ बनाईं। इस तरह जैसे-जैसे मनुष्य को जलस्रोत से दूर जाना पड़ा तो उसने तालाब, बावड़ियाँ, कुएँ, ताल, झाल, पाल आदि बनाकर पानी का संरक्षण किया। इसी कारण हम पानीदार बने रहे, लेकिन जब भारत में अंग्रेज़ी शासक आए तो उन्होंने कहना शुरू किया कि - 'यह तो सपेरों का देश है और ये ठहरा हुआ पानी पीते हैं। ठहरा हुआ पानी तो दूषित है।' अंग्रेज़ यह बात नहीं जानते थे कि वर्षा जल शुद्ध और पवित्र होता है और जब वह इकट्ठा होता है तो वह सूर्य की किरणों और हवा के स्पर्श से शुद्ध होता रहता है। यह ज्ञान उन्हें नहीं था। राजस्थान में जो वर्षा का जल इकट्ठा होता था उसे हम ताज़ा पानी कहते थे और अगर किसी को पेट की बीमारी होती थी, तो हम उसी से उसका इलाज कर लिया करते थे। हमारे लिए जल सिर्फ़ जीवन देने वाला, जीवन चलाने वाला ही नहीं रहा, बल्कि उसकी एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भूमिका भी रही। हमारी कोई भी पूजा जल के बिना नहीं होती। जब कहीं घूमने या आनंद मनाने जाते हैं, तो नदी किनारे का और उसके बदलते रंगों का आनंद लेते हैं। पूरे दिन में नदी के तीन रंग बदलते हैं। सुबह का अलग, शाम का अलग और दोपहर का अलग। नदी के ये बदलते रंग हमारे जीवन के बदलते रंगों की तरह हैं जिनमें प्रवाह होता है, गति होती है। इस तरह पानी से हमें एक 'जीवन दर्शन' मिलता रहा जिसे हम 'जल दर्शन' कह सकते हैं। जब तक हमें यह मिलता रहा तब तक हम पानीदार बने रहे, लेकिन अब हमारा यह जल दर्शन शनै: शनै: मिट्टी में दबता जा रहा है। हमारी सभ्यताएँ नदियों के किनारे ही क्यों विकसित हुईं?
- (A) जल संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के कारण ✓
- (B) बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण
- (C) आवागमन की सुविधा के कारण
- (D) प्राकृतिक सौंदर्य के कारण
Answer: (A)
- 2. CBSE 2026
यों खेलने को हमने भाइयों के साथ गिल्ली-डंडा भी खेला और पतंग उड़ाने, काँच पीसकर माँजा सूतने का काम भी किया, लेकिन उनकी गतिविधियों का दायरा घर के बाहर ही अधिक रहता था और हमारी सीमा थी घर । हाँ, इतना ज़रूर था कि उस ज़माने में घर की दीवारें घर तक ही समाप्त नहीं हो जाती थीं, बल्कि पूरे मोहल्ले तक फैली रहती थीं । इसलिए मोहल्ले के किसी भी घर में जाने पर कोई पाबंदी नहीं थी, बल्कि कुछ घर तो परिवार का हिस्सा ही थे । आज तो मुझे बड़ी शिद्दत के साथ यह महसूस होता है कि अपनी ज़िंदगी खुद जीने के इस आधुनिक दबाव ने महानगरों के फ़्लैट में रहने वालों को हमारे इस परंपरागत ‘पड़ोस कल्चर’ से विच्छिन्न करके हमें कितना संकुचित, असहाय और असुरक्षित बना दिया है । लेखिका के भाइयों की गतिविधियों का दायरा घर के बाहर था, क्योंकि -
- (A) उनकी गतिविधियाँ घर में संपन्न नहीं हो सकती थीं।
- (B) पतंग और गिल्ली-डंडा का खेल घर से बाहर का था।
- (C) घर से बाहर उनकी गतिविधियों पर कोई नियंत्रण नहीं था।
- (D) पारिवारिक परंपरा के अनुसार लड़कों को बाहर खेलने की स्वतंत्रता थी। ✓
Answer: (D)
- 3. CBSE 2026
यों खेलने को हमने भाइयों के साथ गिल्ली-डंडा भी खेला और पतंग उड़ाने, काँच पीसकर माँजा सूतने का काम भी किया, लेकिन उनकी गतिविधियों का दायरा घर के बाहर ही अधिक रहता था और हमारी सीमा थी घर । हाँ, इतना ज़रूर था कि उस ज़माने में घर की दीवारें घर तक ही समाप्त नहीं हो जाती थीं, बल्कि पूरे मोहल्ले तक फैली रहती थीं । इसलिए मोहल्ले के किसी भी घर में जाने पर कोई पाबंदी नहीं थी, बल्कि कुछ घर तो परिवार का हिस्सा ही थे । आज तो मुझे बड़ी शिद्दत के साथ यह महसूस होता है कि अपनी ज़िंदगी खुद जीने के इस आधुनिक दबाव ने महानगरों के फ़्लैट में रहने वालों को हमारे इस परंपरागत ‘पड़ोस कल्चर’ से विच्छिन्न करके हमें कितना संकुचित, असहाय और असुरक्षित बना दिया है । लेखिका की गतिविधियों की सीमा घर तक ही क्यों थी ?
- (A) वे डरपोक स्वभाव के कारण घर की सीमा में ही रहती थीं।
- (B) घर से बाहर के खेल उन्हें पसंद नहीं थे।
- (C) पिताजी को लड़कियों का घर से बाहर निकलना नापसंद था।
- (D) लड़कियों के लिए उस समय घर के बाहर की दुनिया सीमित थी। ✓
Answer: (D)
- 4. CBSE 2026
यों खेलने को हमने भाइयों के साथ गिल्ली-डंडा भी खेला और पतंग उड़ाने, काँच पीसकर माँजा सूतने का काम भी किया, लेकिन उनकी गतिविधियों का दायरा घर के बाहर ही अधिक रहता था और हमारी सीमा थी घर । हाँ, इतना ज़रूर था कि उस ज़माने में घर की दीवारें घर तक ही समाप्त नहीं हो जाती थीं, बल्कि पूरे मोहल्ले तक फैली रहती थीं । इसलिए मोहल्ले के किसी भी घर में जाने पर कोई पाबंदी नहीं थी, बल्कि कुछ घर तो परिवार का हिस्सा ही थे । आज तो मुझे बड़ी शिद्दत के साथ यह महसूस होता है कि अपनी ज़िंदगी खुद जीने के इस आधुनिक दबाव ने महानगरों के फ़्लैट में रहने वालों को हमारे इस परंपरागत ‘पड़ोस कल्चर’ से विच्छिन्न करके हमें कितना संकुचित, असहाय और असुरक्षित बना दिया है । ‘पड़ोस कल्चर’ के न पनपने का कारण है -इस कथन के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए - (I) अपनी ज़िंदगी खुद जीने का आधुनिक दबाव (II) फ़्लैटों में रहने की विवशता (III) स्वार्थी मनोवृत्ति का प्रभुत्व (IV) बौद्धिकता की प्रबलता विकल्प :
- (A) कथन (I) और (II) सही हैं। ✓
- (B) कथन (I), (II) और (III) सही हैं।
- (C) कथन (I), (III) और (IV) सही हैं।
- (D) केवल कथन (IV) सही है।
Answer: (A)
- 5. CBSE 2026
यों खेलने को हमने भाइयों के साथ गिल्ली-डंडा भी खेला और पतंग उड़ाने, काँच पीसकर माँजा सूतने का काम भी किया, लेकिन उनकी गतिविधियों का दायरा घर के बाहर ही अधिक रहता था और हमारी सीमा थी घर । हाँ, इतना ज़रूर था कि उस ज़माने में घर की दीवारें घर तक ही समाप्त नहीं हो जाती थीं, बल्कि पूरे मोहल्ले तक फैली रहती थीं । इसलिए मोहल्ले के किसी भी घर में जाने पर कोई पाबंदी नहीं थी, बल्कि कुछ घर तो परिवार का हिस्सा ही थे । आज तो मुझे बड़ी शिद्दत के साथ यह महसूस होता है कि अपनी ज़िंदगी खुद जीने के इस आधुनिक दबाव ने महानगरों के फ़्लैट में रहने वालों को हमारे इस परंपरागत ‘पड़ोस कल्चर’ से विच्छिन्न करके हमें कितना संकुचित, असहाय और असुरक्षित बना दिया है । परंपरागत ‘पड़ोस कल्चर’ के विच्छिन्न होने के दुष्परिणाम हैं -
- (A) स्वार्थ भाव प्रबल हो गया है।
- (B) हम संकुचित और असहाय हो गए हैं। ✓
- (C) पारस्परिक प्रेमभाव कमज़ोर पड़ रहा है।
- (D) हम फ़्लैटों में रहने लगे हैं।
Answer: (B)
- 6. CBSE 2026
यों खेलने को हमने भाइयों के साथ गिल्ली-डंडा भी खेला और पतंग उड़ाने, काँच पीसकर माँजा सूतने का काम भी किया, लेकिन उनकी गतिविधियों का दायरा घर के बाहर ही अधिक रहता था और हमारी सीमा थी घर । हाँ, इतना ज़रूर था कि उस ज़माने में घर की दीवारें घर तक ही समाप्त नहीं हो जाती थीं, बल्कि पूरे मोहल्ले तक फैली रहती थीं । इसलिए मोहल्ले के किसी भी घर में जाने पर कोई पाबंदी नहीं थी, बल्कि कुछ घर तो परिवार का हिस्सा ही थे । आज तो मुझे बड़ी शिद्दत के साथ यह महसूस होता है कि अपनी ज़िंदगी खुद जीने के इस आधुनिक दबाव ने महानगरों के फ़्लैट में रहने वालों को हमारे इस परंपरागत ‘पड़ोस कल्चर’ से विच्छिन्न करके हमें कितना संकुचित, असहाय और असुरक्षित बना दिया है । निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन करके लिखिए : कथन : उस जमाने में घर की दीवारें घर तक ही समाप्त नहीं हो जाती थीं, बल्कि पूरे मोहल्ले तक फैली रहती थीं । कारण : आपसी प्रेमभाव के कारण पूरे मोहल्ले में पारिवारिक संबंध थे । विकल्प :
- (A) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है।
- (B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
- (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है। ✓
- (D) कथन सही है, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है।
Answer: (C)
- 7. CBSE 2025
दिनकर जी ने माना है कि उन पर प्रारम्भ से ही जितना प्रभाव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रहा उतना ही मोहम्मद इकबाल का । बाद में इलियट की काव्य-शैली और विचार-दृष्टि ने उनके कवि मानस को छूकर दूर भीतर तक उन्मथित कर दिया । परिणामतः उनकी कविताओं ने एक नई भंगिमा को ग्रहण किया । दिनकर जी अपने युग के एक प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे । सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबन्ध भी दिए हैं, तो बोधकथा, डायरी-संस्मरण भी, और दर्शन-इतिहासगत तथ्यों के विवेचन भी । ‘दिनकर’ जी जीवन भर संघर्षरत रहे । साहित्य और राजनीति दोनों के बीच उनका मन रमता था और इन दोनों ही क्षेत्रों में उनको सफलता मिली । साहित्य जगत द्वारा प्रदत्त ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया । उनके अंतरंग मित्रों को यह ज्ञात है कि ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अन्तिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ । पुरस्कार प्राप्त कर ‘दिनकर’ जी अभिभूत थे क्योंकि कवि का मन अपनी रचनाओं की स्वीकृति, विशेष रूप से सुधीजनों द्वारा उनका प्रशंसित और समादृत होना, अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है । ज्ञानपीठ पुरस्कार के मिलने के बाद उन्होंने अप्रैल, 1974 में तिरुपति की यात्रा की । जब ‘दिनकर’ जी मद्रास पहुँचे तो यह एक सुखद संयोग था कि उनके सर्वाधिक स्नेही मित्र थे गंगाशरण सिंह और जयप्रकाश बाबू भी वहीं थे । उसी शाम उन्होंने मद्रास के समुद्र तट पर अपने कुछ मित्रों को अपनी सुन्दर-सुन्दर रचनाएँ सुनाईं । तब कोई नहीं जानता था कि आज 23 – 24 अप्रैल की शाम गंगा की गोद में उत्पन्न दिनकर जी के अस्ताचल जाने की शाम थी । उसी रात मद्रास में ही ‘दिनकर’ जी की जीवन लीला समाप्त हो गई और फिर उनका पार्थिव शरीर मद्रास से दिल्ली होकर पटना लाया गया । दिनकर जी के लेखन पर किन-किन कवियों का प्रभाव रहा है ?
- (A) I, III और IV
- (B) I, II और III ✓
- (C) II, III और IV
- (D) I, II और IV
Answer: (B)
- 8. CBSE 2025
दिनकर जी ने माना है कि उन पर प्रारम्भ से ही जितना प्रभाव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रहा उतना ही मोहम्मद इकबाल का । बाद में इलियट की काव्य-शैली और विचार-दृष्टि ने उनके कवि मानस को छूकर दूर भीतर तक उन्मथित कर दिया । परिणामतः उनकी कविताओं ने एक नई भंगिमा को ग्रहण किया । दिनकर जी अपने युग के एक प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे । सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबन्ध भी दिए हैं, तो बोधकथा, डायरी-संस्मरण भी, और दर्शन-इतिहासगत तथ्यों के विवेचन भी । ‘दिनकर’ जी जीवन भर संघर्षरत रहे । साहित्य और राजनीति दोनों के बीच उनका मन रमता था और इन दोनों ही क्षेत्रों में उनको सफलता मिली । साहित्य जगत द्वारा प्रदत्त ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया । उनके अंतरंग मित्रों को यह ज्ञात है कि ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अन्तिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ । पुरस्कार प्राप्त कर ‘दिनकर’ जी अभिभूत थे क्योंकि कवि का मन अपनी रचनाओं की स्वीकृति, विशेष रूप से सुधीजनों द्वारा उनका प्रशंसित और समादृत होना, अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है । ज्ञानपीठ पुरस्कार के मिलने के बाद उन्होंने अप्रैल, 1974 में तिरुपति की यात्रा की । जब ‘दिनकर’ जी मद्रास पहुँचे तो यह एक सुखद संयोग था कि उनके सर्वाधिक स्नेही मित्र थे गंगाशरण सिंह और जयप्रकाश बाबू भी वहीं थे । उसी शाम उन्होंने मद्रास के समुद्र तट पर अपने कुछ मित्रों को अपनी सुन्दर-सुन्दर रचनाएँ सुनाईं । तब कोई नहीं जानता था कि आज 23 – 24 अप्रैल की शाम गंगा की गोद में उत्पन्न दिनकर जी के अस्ताचल जाने की शाम थी । उसी रात मद्रास में ही ‘दिनकर’ जी की जीवन लीला समाप्त हो गई और फिर उनका पार्थिव शरीर मद्रास से दिल्ली होकर पटना लाया गया । दिनकर जी के बारे में कौन-सा तथ्य असत्य है ?
- (A) वे एक प्रमुख कवि थे परंतु असफल गद्य लेखक भी थे । ✓
- (B) उनकी शैली प्रांजल थी तथा वे साहित्यिक निबंध लिखते थे ।
- (C) ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अंतिम अध्याय का स्वर्णिम पन्ना है ।
- (D) बोधकथा, डायरी, संस्मरण के अतिरिक्त दिनकर जी ने इतिहास के विषय में भी लिखा है ।
Answer: (A)
- 9. CBSE 2025
दिनकर जी ने माना है कि उन पर प्रारम्भ से ही जितना प्रभाव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रहा उतना ही मोहम्मद इकबाल का । बाद में इलियट की काव्य-शैली और विचार-दृष्टि ने उनके कवि मानस को छूकर दूर भीतर तक उन्मथित कर दिया । परिणामतः उनकी कविताओं ने एक नई भंगिमा को ग्रहण किया । दिनकर जी अपने युग के एक प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे । सीधी-सरल भाषा और अत्यन्त प्रांजल शैली में उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विषयों पर निबन्ध भी दिए हैं, तो बोधकथा, डायरी-संस्मरण भी, और दर्शन-इतिहासगत तथ्यों के विवेचन भी । ‘दिनकर’ जी जीवन भर संघर्षरत रहे । साहित्य और राजनीति दोनों के बीच उनका मन रमता था और इन दोनों ही क्षेत्रों में उनको सफलता मिली । साहित्य जगत द्वारा प्रदत्त ज्ञानपीठ पुरस्कार ने दिनकर जी को प्रफुल्लित कर दिया । उनके अंतरंग मित्रों को यह ज्ञात है कि ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अन्तिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ । पुरस्कार प्राप्त कर ‘दिनकर’ जी अभिभूत थे क्योंकि कवि का मन अपनी रचनाओं की स्वीकृति, विशेष रूप से सुधीजनों द्वारा उनका प्रशंसित और समादृत होना, अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है । ज्ञानपीठ पुरस्कार के मिलने के बाद उन्होंने अप्रैल, 1974 में तिरुपति की यात्रा की । जब ‘दिनकर’ जी मद्रास पहुँचे तो यह एक सुखद संयोग था कि उनके सर्वाधिक स्नेही मित्र थे गंगाशरण सिंह और जयप्रकाश बाबू भी वहीं थे । उसी शाम उन्होंने मद्रास के समुद्र तट पर अपने कुछ मित्रों को अपनी सुन्दर-सुन्दर रचनाएँ सुनाईं । तब कोई नहीं जानता था कि आज 23 – 24 अप्रैल की शाम गंगा की गोद में उत्पन्न दिनकर जी के अस्ताचल जाने की शाम थी । उसी रात मद्रास में ही ‘दिनकर’ जी की जीवन लीला समाप्त हो गई और फिर उनका पार्थिव शरीर मद्रास से दिल्ली होकर पटना लाया गया । निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : पुरस्कार प्राप्त कर मन अभिभूत हो जाता है । कारण : पुरस्कार विद्वज्जनों द्वारा दी जाने वाली सराहना और सम्मान का प्रतीक है । विकल्प : (A) कथन गलत है और कारण भी पूरी तरह गलत ही है । (B) कथन सही है परंतु कारण आंशिक रूप से सही है । (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की उचित व्याख्या भी है । (D) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं है ।
- (A) कथन गलत है और कारण भी पूरी तरह गलत ही है ।
- (B) कथन सही है परंतु कारण आंशिक रूप से सही है ।
- (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की उचित व्याख्या भी है । ✓
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं है ।
Answer: (C)
- 10. CBSE 2025
लोक साहित्य का सृजक लोक ही है इसीलिए उसमें लोकजीवन की आत्मगाथा समाहित होती है। लोक साहित्य मानव जीवन जितना ही प्राचीन है। अपने जन्म के साथ ही मनुष्य ने कथाएँ कहनी शुरू कर दी थीं- यथार्थपरक भी और काल्पनिक भी। इन कथाओं में उसके अपने अनुभव की कथाएँ हैं। साथ ही अपने तत्कालीन समय और समाज की घटनाओं तथा कथाओं का समावेश है। समय के साथ-साथ समाज में बदलाव की बयार चलती रहती है और समय के साथ कदमताल करते हुए लोक साहित्य में भी बदलाव होता रहा है। लोक साहित्य समय के साथ यात्रा करता आया है और परिवर्तनों को स्वीकारता रहा है। लोक साहित्य की यह सबसे बड़ी खूबसूरती है कि वह परंपराओं का ध्यान रखते हुए भी रूढ़ियों को पकड़कर एक जगह ठहरता नहीं। वह समय के साथ चलता है और समय के सच से साक्षात्कार कराते हुए कभी-कभी समय से आगे चलता भी दिखता है। तभी कहा जाता है कि किसी संस्कृति के संबंध में गहराई से जानने के लिए वहाँ के लोक साहित्य को जानना आवश्यक है। क्योंकि उसमें संस्कृति का सच्चा स्वरूप दृष्टिगोचर होता है। लोक साहित्य में लोकगीत, लोककथा, लोकगाथा, लोकनाट्य आदि सभी रूप शामिल हैं। इनकी भाषा इतनी सहज-सरल-सरस होती है कि वे लोककंठों में बस जाती हैं। आज के आत्ममुग्ध और आत्म-प्रचार के समय में हम लोक साहित्य सृजकों के आत्म-प्रचार से दूर रहने की मन:स्थिति पर विस्मय ही कर सकते हैं। अपनी प्रसिद्धि, मान-सम्मान या अपने नाम के प्रचार की लालसा का भाव उनमें लेशमात्र भी नहीं था। अपनी रचनाओं में भी वे ऐसा संकेत करने से बचते रहे, जिससे उनकी पहचान की जा सके। अपने नाम के प्रचार के मोह से वे पूरी तरह मुक्त थे। लोक साहित्य में बदलाव क्यों होते रहते हैं?
- (A) बदलाव से इनमें नवीनता बनी रहती है
- (B) इसके आधार, समाज में बदलाव होते रहते हैं ✓
- (C) मनुष्य की कल्पनाएँ नए-नए रूप धारण करती हैं
- (D) एक ही तरह का साहित्य नीरसता पैदा करता है
Answer: (B)
Questions parents and students ask
- How many marks does "अपठित गद्यांश" carry in CBSE Class 10 Hindi A?
- In the CBSE papers of 2023–2026, this chapter carried about 6 marks and about 2 questions a year; by marks it ranks 2 in Hindi A.
- Which are the most important (VVI) questions of "अपठित गद्यांश"?
- The 20 questions above are from the board’s real papers, each with the years it was asked; the most-asked come first with their full model answers. All 21 written questions of this chapter, with answers, are in the AskMedha app.
- Do the answers follow the board’s marking scheme?
- Yes. CBSE publishes its marking schemes; every model answer here is written point by point to the marks the board’s own scheme gives, and checked by a second, independent model.
The same preparation, with Medha Ma’am — on your phone
Every question of every chapter with its model answer, practice questions in the board’s own shapes, 60 minutes of class a day, written answers marked, a test every Sunday and a WhatsApp report to parents.
Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.