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CBSE Class 10 · Hindi A · board exam 2027

CBSE Class 10 Hindi A Question Paper 2023

The board’s 2023 question paper, set 3/1/2 — all 51 questions as printed; 36 objective answers from the board’s own key. Each question names its chapter, where that chapter’s most-asked questions are.

Full marks 80 · Time 3 h

Section A · Objective questions (34)

  1. काव्यांश एक पारिख के घर में नीम का पेड़ था छितराई हरियाली अहाते को लगभग घेरे हुए घर गली से ही पहचाना जाता था नीम के नीचे पारिख की चारपाई बिछती थी चारपाई पर पारिख के अलावा किताबें भी बैठतीं सुस्तातीं नीम कभी बोलकर कभी चुपके से सूखे पत्ते गिराता था पत्तों में अटका होता था उसका बचपन हवा के साथ की गई शरारतें एक दिन नहीं रहा वह नीम का पेड़ वहाँ आ गई रोड़ी और रेत आ गई ईंटें और सीमेंट वहाँ बन गया एक घेरा छह बाई आठ फुट का सजाई गई जिसमें चार कुर्सियाँ और एक मेज़ कुर्सियों पर पारिख मेज पर किताबें..... ? पारिख का मन अब कहीं नहीं जाता घूमता है उसी छह बाई आठ में उसके चेहरे पर एक परछाई डोलती है फीकी लाचार-सी किताबें देखती हैं उनकी आँखों में दुख झलकता है पारिख के घर का पता अब लोग गली में आने-जाने वालों से पूछते हैं । इस काव्यांश के केंद्रीय भाव हेतु दिए गए कथनों में सबसे सटीक विकल्प चुनिए - कथन :- (क) पेड़-पौधों की जगह आधुनिक जीवन में नहीं बची । (ख) पेड़-पौधे काटकर मकानों का निर्माण आज की सच्चाई है । (ग) भले ही जरूरतवश हम पेड़ों को काट दें लेकिन उनकी कमी हमेशा खलती है । (घ) कुर्सी और मेज़ जिंदा पेड़ से ज्यादा जरूरी हैं । विकल्प : (a) केवल कथन (ग) सही है । (b) कथन (ख) और (ग) सही हैं । (c) कथन (क), (ख) और (ग) सही हैं । (d) कथन (ख), (ग) और (घ) सही हैं ।

    • (A) केवल कथन (ग) सही है ।
    • (B) कथन (ख) और (ग) सही हैं ।
    • (C) कथन (क), (ख) और (ग) सही हैं ।
    • (D) कथन (ख), (ग) और (घ) सही हैं ।
  2. काव्यांश एक पारिख के घर में नीम का पेड़ था छितराई हरियाली अहाते को लगभग घेरे हुए घर गली से ही पहचाना जाता था नीम के नीचे पारिख की चारपाई बिछती थी चारपाई पर पारिख के अलावा किताबें भी बैठतीं सुस्तातीं नीम कभी बोलकर कभी चुपके से सूखे पत्ते गिराता था पत्तों में अटका होता था उसका बचपन हवा के साथ की गई शरारतें एक दिन नहीं रहा वह नीम का पेड़ वहाँ आ गई रोड़ी और रेत आ गई ईंटें और सीमेंट वहाँ बन गया एक घेरा छह बाई आठ फुट का सजाई गई जिसमें चार कुर्सियाँ और एक मेज़ कुर्सियों पर पारिख मेज पर किताबें..... ? पारिख का मन अब कहीं नहीं जाता घूमता है उसी छह बाई आठ में उसके चेहरे पर एक परछाई डोलती है फीकी लाचार-सी किताबें देखती हैं उनकी आँखों में दुख झलकता है पारिख के घर का पता अब लोग गली में आने-जाने वालों से पूछते हैं । ‘घर गली से ही पहचाना जाता था’ - का आशय है -

    • (A) गली में उसके घर को पहचान के रूप में जाना जाता था ।
    • (B) गली में उसका घर जाना-पहचाना लगता था ।
    • (C) पेड़ के कारण उसके घर को दूर से ही पहचान लिया जाता था । ✓
    • (D) गली में उसके घर को पहचानने वाले रहते थे ।

    Answer (the board’s key): (C)

  3. काव्यांश एक पारिख के घर में नीम का पेड़ था छितराई हरियाली अहाते को लगभग घेरे हुए घर गली से ही पहचाना जाता था नीम के नीचे पारिख की चारपाई बिछती थी चारपाई पर पारिख के अलावा किताबें भी बैठतीं सुस्तातीं नीम कभी बोलकर कभी चुपके से सूखे पत्ते गिराता था पत्तों में अटका होता था उसका बचपन हवा के साथ की गई शरारतें एक दिन नहीं रहा वह नीम का पेड़ वहाँ आ गई रोड़ी और रेत आ गई ईंटें और सीमेंट वहाँ बन गया एक घेरा छह बाई आठ फुट का सजाई गई जिसमें चार कुर्सियाँ और एक मेज़ कुर्सियों पर पारिख मेज पर किताबें..... ? पारिख का मन अब कहीं नहीं जाता घूमता है उसी छह बाई आठ में उसके चेहरे पर एक परछाई डोलती है फीकी लाचार-सी किताबें देखती हैं उनकी आँखों में दुख झलकता है पारिख के घर का पता अब लोग गली में आने-जाने वालों से पूछते हैं । नीम के पेड़ की जगह किसने ले ली ?

    • (A) रोड़ी और रेत ने
    • (B) ईंटों और सीमेंट ने
    • (C) छह बाई आठ फुट के कमरे ने ✓
    • (D) चार कुर्सियों और मेज़ ने

    Answer (the board’s key): (C)

  4. काव्यांश एक पारिख के घर में नीम का पेड़ था छितराई हरियाली अहाते को लगभग घेरे हुए घर गली से ही पहचाना जाता था नीम के नीचे पारिख की चारपाई बिछती थी चारपाई पर पारिख के अलावा किताबें भी बैठतीं सुस्तातीं नीम कभी बोलकर कभी चुपके से सूखे पत्ते गिराता था पत्तों में अटका होता था उसका बचपन हवा के साथ की गई शरारतें एक दिन नहीं रहा वह नीम का पेड़ वहाँ आ गई रोड़ी और रेत आ गई ईंटें और सीमेंट वहाँ बन गया एक घेरा छह बाई आठ फुट का सजाई गई जिसमें चार कुर्सियाँ और एक मेज़ कुर्सियों पर पारिख मेज पर किताबें..... ? पारिख का मन अब कहीं नहीं जाता घूमता है उसी छह बाई आठ में उसके चेहरे पर एक परछाई डोलती है फीकी लाचार-सी किताबें देखती हैं उनकी आँखों में दुख झलकता है पारिख के घर का पता अब लोग गली में आने-जाने वालों से पूछते हैं । ‘पारिख का मन अब कहीं नहीं जाता’ - पंक्ति का आशय है -

    • (A) पारिख को नीम के पेड़ की याद आती
    • (B) बंद कमरे में पारिख को घुटन होती
    • (C) अब किताबें पढ़ने में पारिख का मन नहीं लगता
    • (D) पेड़ के साथ पारिख का बचपन भी खो गया
  5. काव्यांश एक पारिख के घर में नीम का पेड़ था छितराई हरियाली अहाते को लगभग घेरे हुए घर गली से ही पहचाना जाता था नीम के नीचे पारिख की चारपाई बिछती थी चारपाई पर पारिख के अलावा किताबें भी बैठतीं सुस्तातीं नीम कभी बोलकर कभी चुपके से सूखे पत्ते गिराता था पत्तों में अटका होता था उसका बचपन हवा के साथ की गई शरारतें एक दिन नहीं रहा वह नीम का पेड़ वहाँ आ गई रोड़ी और रेत आ गई ईंटें और सीमेंट वहाँ बन गया एक घेरा छह बाई आठ फुट का सजाई गई जिसमें चार कुर्सियाँ और एक मेज़ कुर्सियों पर पारिख मेज पर किताबें..... ? पारिख का मन अब कहीं नहीं जाता घूमता है उसी छह बाई आठ में उसके चेहरे पर एक परछाई डोलती है फीकी लाचार-सी किताबें देखती हैं उनकी आँखों में दुख झलकता है पारिख के घर का पता अब लोग गली में आने-जाने वालों से पूछते हैं । इस काव्यांश से हम सीख सकते हैं -

    • (A) पेड़ों की जगह का इस्तेमाल, किताबों से प्रेम, सपने देखना ।
    • (B) पेड़ों से प्रेम, किताबों को सजाना, जगह का उचित इस्तेमाल
    • (C) बचपन के बारे में लिखना, पेड़ों के गिर्द घूमना, किताबें पढ़ना
    • (D) पेड़ों से प्रेम, किताबों की संगति, प्रकृति का संरक्षण ✓

    Answer (the board’s key): (D)

  6. काम या पेशा खुद बुरा या छोटा-बड़ा नहीं है। कोई भी काम हो जो ईमानदारी से किया जाए और उचित लाभ के अतिरिक्त यदि एक पैसा भी बेईमानी का उसमें नहीं आया तो वह सर्वथा प्रतिष्ठित और सराहना के योग्य है। छोटे से छोटा काम भी यदि ईमानदारी के साथ किया जाए तो कभी बुरा नहीं होता। किसी ऊँची बात को लक्ष्य कर किया गया मेहनत का काम जो अपनी ईमानदारी में बट्टा न लगाता हो बुरा नहीं है। जो लेन-देन में पवित्र और शुचि है, नीतिशास्त्रों ने उसी को पवित्र माना है। हाथ-पाँव आदि अंग जल से शुद्ध और साफ होते हैं पर मन केवल सत्य से शुद्ध होता है। मन जिसका दृढ़ है और डिगा नहीं वही अपनी गाढ़ी मेहनत की कौड़ी को अपनी करके मानेगा। बेईमानी से अनुचित लाभ का सोना भी है, तो वह मिट्टी का ढेला मानता है। गाढ़ी मेहनत, ईमानदारी और मुस्तैदी ये तीन बातें रोजगारी / सफलता के लिए बहुत आवश्यक हैं। बहुधा लोग अपनी बदकिस्मती के लिए रोते हैं और पछताते हैं, पर सच पूछो तो बदकिस्मती से उनका इतना नहीं बिगड़ा जितना उनके आलस्य, बेपरवाही और जी लगा के मेहनत न करने से। कहावत है - भूकता हुआ कुत्ता ज्यादा काम का है, सोते हुए सिंह की अपेक्षा। वास्तव में जो ईमानदार हैं वे अपने जितने काम हैं सबमें स्वच्छता और स्पष्टता रखने में नहीं चूकते और समाज में सभी के विश्वास-पात्र होते हैं। कोई भी रोजगार और पेशा कब प्रतिष्ठित और सराहना के योग्य हो जाता है ?

    • (A) जब वह पूरी ईमानदारी के साथ किया जाए। ✓
    • (B) जब वह पूरी मेहनत और लगन के साथ किया जाए।
    • (C) जब समाज का धनाढ्य वर्ग उससे जुड़ा हो।
    • (D) जब किसी रोजगार से आर्थिक लाभ अधिक हो।

    Answer (the board’s key): (A)

  7. काम या पेशा खुद बुरा या छोटा-बड़ा नहीं है। कोई भी काम हो जो ईमानदारी से किया जाए और उचित लाभ के अतिरिक्त यदि एक पैसा भी बेईमानी का उसमें नहीं आया तो वह सर्वथा प्रतिष्ठित और सराहना के योग्य है। छोटे से छोटा काम भी यदि ईमानदारी के साथ किया जाए तो कभी बुरा नहीं होता। किसी ऊँची बात को लक्ष्य कर किया गया मेहनत का काम जो अपनी ईमानदारी में बट्टा न लगाता हो बुरा नहीं है। जो लेन-देन में पवित्र और शुचि है, नीतिशास्त्रों ने उसी को पवित्र माना है। हाथ-पाँव आदि अंग जल से शुद्ध और साफ होते हैं पर मन केवल सत्य से शुद्ध होता है। मन जिसका दृढ़ है और डिगा नहीं वही अपनी गाढ़ी मेहनत की कौड़ी को अपनी करके मानेगा। बेईमानी से अनुचित लाभ का सोना भी है, तो वह मिट्टी का ढेला मानता है। गाढ़ी मेहनत, ईमानदारी और मुस्तैदी ये तीन बातें रोजगारी / सफलता के लिए बहुत आवश्यक हैं। बहुधा लोग अपनी बदकिस्मती के लिए रोते हैं और पछताते हैं, पर सच पूछो तो बदकिस्मती से उनका इतना नहीं बिगड़ा जितना उनके आलस्य, बेपरवाही और जी लगा के मेहनत न करने से। कहावत है - भूकता हुआ कुत्ता ज्यादा काम का है, सोते हुए सिंह की अपेक्षा। वास्तव में जो ईमानदार हैं वे अपने जितने काम हैं सबमें स्वच्छता और स्पष्टता रखने में नहीं चूकते और समाज में सभी के विश्वास-पात्र होते हैं। 'काम या पेशा खुद बुरा नहीं है' - इसका क्या अभिप्राय है ?

    • (A) काम अच्छा-बुरा नहीं होता, उसे करने वाले अच्छे-बुरे होते हैं।
    • (B) काम अच्छा-बुरा नहीं होता, लोग बेईमानी से उसे बुरा बना देते हैं। ✓
    • (C) काम तब तक बुरा नहीं जब तक उसमें आर्थिक लाभ हो रहा हो।
    • (D) काम तब तक बुरा नहीं जब तक वह परिश्रम से किया जाए।

    Answer (the board’s key): (B)

  8. काम या पेशा खुद बुरा या छोटा-बड़ा नहीं है। कोई भी काम हो जो ईमानदारी से किया जाए और उचित लाभ के अतिरिक्त यदि एक पैसा भी बेईमानी का उसमें नहीं आया तो वह सर्वथा प्रतिष्ठित और सराहना के योग्य है। छोटे से छोटा काम भी यदि ईमानदारी के साथ किया जाए तो कभी बुरा नहीं होता। किसी ऊँची बात को लक्ष्य कर किया गया मेहनत का काम जो अपनी ईमानदारी में बट्टा न लगाता हो बुरा नहीं है। जो लेन-देन में पवित्र और शुचि है, नीतिशास्त्रों ने उसी को पवित्र माना है। हाथ-पाँव आदि अंग जल से शुद्ध और साफ होते हैं पर मन केवल सत्य से शुद्ध होता है। मन जिसका दृढ़ है और डिगा नहीं वही अपनी गाढ़ी मेहनत की कौड़ी को अपनी करके मानेगा। बेईमानी से अनुचित लाभ का सोना भी है, तो वह मिट्टी का ढेला मानता है। गाढ़ी मेहनत, ईमानदारी और मुस्तैदी ये तीन बातें रोजगारी / सफलता के लिए बहुत आवश्यक हैं। बहुधा लोग अपनी बदकिस्मती के लिए रोते हैं और पछताते हैं, पर सच पूछो तो बदकिस्मती से उनका इतना नहीं बिगड़ा जितना उनके आलस्य, बेपरवाही और जी लगा के मेहनत न करने से। कहावत है - भूकता हुआ कुत्ता ज्यादा काम का है, सोते हुए सिंह की अपेक्षा। वास्तव में जो ईमानदार हैं वे अपने जितने काम हैं सबमें स्वच्छता और स्पष्टता रखने में नहीं चूकते और समाज में सभी के विश्वास-पात्र होते हैं। हाथ-पाँव की पवित्रता का संबंध यदि जल से है तो मन की पवित्रता का संबंध है -

    • (A) ईमानदारी से
    • (B) गंगाजल से
    • (C) गाढ़ी मेहनत से
    • (D) सत्य से ✓

    Answer (the board’s key): (D)

  9. काम या पेशा खुद बुरा या छोटा-बड़ा नहीं है। कोई भी काम हो जो ईमानदारी से किया जाए और उचित लाभ के अतिरिक्त यदि एक पैसा भी बेईमानी का उसमें नहीं आया तो वह सर्वथा प्रतिष्ठित और सराहना के योग्य है। छोटे से छोटा काम भी यदि ईमानदारी के साथ किया जाए तो कभी बुरा नहीं होता। किसी ऊँची बात को लक्ष्य कर किया गया मेहनत का काम जो अपनी ईमानदारी में बट्टा न लगाता हो बुरा नहीं है। जो लेन-देन में पवित्र और शुचि है, नीतिशास्त्रों ने उसी को पवित्र माना है। हाथ-पाँव आदि अंग जल से शुद्ध और साफ होते हैं पर मन केवल सत्य से शुद्ध होता है। मन जिसका दृढ़ है और डिगा नहीं वही अपनी गाढ़ी मेहनत की कौड़ी को अपनी करके मानेगा। बेईमानी से अनुचित लाभ का सोना भी है, तो वह मिट्टी का ढेला मानता है। गाढ़ी मेहनत, ईमानदारी और मुस्तैदी ये तीन बातें रोजगारी / सफलता के लिए बहुत आवश्यक हैं। बहुधा लोग अपनी बदकिस्मती के लिए रोते हैं और पछताते हैं, पर सच पूछो तो बदकिस्मती से उनका इतना नहीं बिगड़ा जितना उनके आलस्य, बेपरवाही और जी लगा के मेहनत न करने से। कहावत है - भूकता हुआ कुत्ता ज्यादा काम का है, सोते हुए सिंह की अपेक्षा। वास्तव में जो ईमानदार हैं वे अपने जितने काम हैं सबमें स्वच्छता और स्पष्टता रखने में नहीं चूकते और समाज में सभी के विश्वास-पात्र होते हैं। कैसे व्यक्ति बेईमानी से प्राप्त मूल्यवान वस्तु को भी मिट्टी सदृश मानते हैं ?

    • (A) दृढ़चित्त ✓
    • (B) दृढ़ निश्चयी
    • (C) सत्यनिष्ठ
    • (D) पवित्र हृदय

    Answer (the board’s key): (A)

  10. काम या पेशा खुद बुरा या छोटा-बड़ा नहीं है। कोई भी काम हो जो ईमानदारी से किया जाए और उचित लाभ के अतिरिक्त यदि एक पैसा भी बेईमानी का उसमें नहीं आया तो वह सर्वथा प्रतिष्ठित और सराहना के योग्य है। छोटे से छोटा काम भी यदि ईमानदारी के साथ किया जाए तो कभी बुरा नहीं होता। किसी ऊँची बात को लक्ष्य कर किया गया मेहनत का काम जो अपनी ईमानदारी में बट्टा न लगाता हो बुरा नहीं है। जो लेन-देन में पवित्र और शुचि है, नीतिशास्त्रों ने उसी को पवित्र माना है। हाथ-पाँव आदि अंग जल से शुद्ध और साफ होते हैं पर मन केवल सत्य से शुद्ध होता है। मन जिसका दृढ़ है और डिगा नहीं वही अपनी गाढ़ी मेहनत की कौड़ी को अपनी करके मानेगा। बेईमानी से अनुचित लाभ का सोना भी है, तो वह मिट्टी का ढेला मानता है। गाढ़ी मेहनत, ईमानदारी और मुस्तैदी ये तीन बातें रोजगारी / सफलता के लिए बहुत आवश्यक हैं। बहुधा लोग अपनी बदकिस्मती के लिए रोते हैं और पछताते हैं, पर सच पूछो तो बदकिस्मती से उनका इतना नहीं बिगड़ा जितना उनके आलस्य, बेपरवाही और जी लगा के मेहनत न करने से। कहावत है - भूकता हुआ कुत्ता ज्यादा काम का है, सोते हुए सिंह की अपेक्षा। वास्तव में जो ईमानदार हैं वे अपने जितने काम हैं सबमें स्वच्छता और स्पष्टता रखने में नहीं चूकते और समाज में सभी के विश्वास-पात्र होते हैं। 'भूकता हुआ कुत्ता ज्यादा काम का है, सोते हुए सिंह की अपेक्षा' - कहावत का अर्थ है -

    • (A) सोते हुए शेर से जागा हुआ कुत्ता श्रेयस्कर है।
    • (B) सोते हुए शेर से भौंकने वाला कुत्ता श्रेयस्कर है।
    • (C) सोये हुए योग्य व्यक्ति से जागा हुआ अयोग्य व्यक्ति श्रेयस्कर है। ✓
    • (D) सोये हुए योग्य व्यक्ति से धीमी गति से काम करने वाला व्यक्ति श्रेयस्कर है।

    Answer (the board’s key): (C)

  11. निम्नलिखित वाक्यों में से कौन-सा सरल वाक्य है ?

    • (A) उसने कल आने को कहा था, आया नहीं।
    • (B) रानी दिल्ली आई पर मैं मुम्बई में थी।
    • (C) उसने मुझसे फिल्म देखने का अनुरोध किया तो था। ✓
    • (D) जब उसने मुझसे कहा, मैं सोच में पड़ गई।

    Answer (the board’s key): (C)

  12. ‘विदेश जाने पर बच्चे अच्छी जगहों पर पढ़ सकें ।’ - प्रस्तुत वाक्य का मिश्र वाक्य होगा -

    • (A) बच्चे विदेश जाकर अच्छी जगहों पर रह और पढ़ सकें।
    • (B) जब बच्चे विदेश जाएँ तब अच्छी जगहों पर पढ़ सकें। ✓
    • (C) बच्चों को विदेश जाना है इसलिए वे अच्छी जगहों पर पढ़ें।
    • (D) बच्चे अच्छी जगह पर पढ़ते हैं क्योंकि उन्हें विदेश जाना है।

    Answer (the board’s key): (B)

  13. ‘जब देश आज़ाद हुआ तब संविधान बनाया गया ।’ - इसे संयुक्त वाक्य में बदला जाए तो होगा -

    • (A) जैसे ही देश आज़ाद हुआ वैसे संविधान बनाया गया।
    • (B) क्योंकि देश आज़ाद हुआ इसलिए संविधान बनाया गया।
    • (C) देश के आज़ाद होने पर संविधान बनाया गया।
    • (D) देश आज़ाद हुआ और संविधान बनाया गया। ✓

    Answer (the board’s key): (D)

  14. स्तंभ I और स्तंभ II को सुमेलित करके सही विकल्प चुनकर लिखिए -

    • (A) (I) - अ; (II) - ब; (III) - स
    • (B) (I) - ब; (II) - अ; (III) - स
    • (C) (I) - ब; (II) - स; (III) - अ
    • (D) (I) - स; (II) - अ; (III) - ब
  15. निम्नलिखित वाक्यों में सरल वाक्य पहचानकर नीचे दिए सबसे सही विकल्प को चुनकर लिखिए -

    • (A) केवल कथन (ख) सरल वाक्य है।
    • (B) कथन (क) और (घ) सरल वाक्य हैं।
    • (C) कथन (क) और (ग) सरल वाक्य हैं।
    • (D) कथन (क), (ग) और (घ) सरल वाक्य हैं।
  16. Q 4(i)Objective1 markCh. 2: वाच्य

    'हम सभी सैलानी आगे चलने में असमर्थ थे ।' प्रस्तुत वाक्य का वाच्य पहचानिए -

    • (A) कर्मवाच्य
    • (B) कर्तृवाच्य ✓
    • (C) भाववाच्य
    • (D) अकर्तृवाच्य

    Answer (the board’s key): (B)

  17. Q 4(ii)Objective1 markCh. 2: वाच्य

    'उसने नेपाली बोली सीखी' - वाक्य का कर्मवाच्य होगा -

    • (A) उसके द्वारा नेपाली बोली सीखी गई । ✓
    • (B) उसने नेपाली बोली सीख ली ।
    • (C) उससे नेपाली बोली सीख ली जाएगी ।
    • (D) उससे नेपाली नहीं सीखी जाती है ।

    Answer (the board’s key): (A)

  18. Q 4(iii)Objective1 markCh. 2: वाच्य

    निम्नलिखित में से भाववाच्य का उदाहरण नहीं है :

    • (A) उससे तो दौड़ा भी नहीं जाता ।
    • (B) बूढ़ी काकी से उठा भी नहीं जाता ।
    • (C) बूढ़े दादू से रोटी भी नहीं खाई जाती ।
    • (D) रमेश से सोया भी नहीं जाता ।
  19. Q 4(iv)Objective1 markCh. 2: वाच्य

    निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य कर्तृवाच्य का उदाहरण है ?

    • (A) मूर्तिकार द्वारा सबको सूचना दी गई ।
    • (B) अफसरों से कुछ-का-कुछ बहाना बनाया गया ।
    • (C) चेयरमैन द्वारा आदेश पारित किया गया ।
    • (D) मूर्तिकार पहाड़ों के दौरे पर निकल पड़ा । ✓

    Answer (the board’s key): (D)

  20. Q 4(v)Objective1 markCh. 2: वाच्य

    स्तंभ-I और स्तंभ-II को सुमेलित कर उचित विकल्प चुनकर लिखिए -

    • (A) (अ) - (I); (ब) - (III); (स) - (II)
    • (B) (अ) - (I); (ब) - (II); (स) - (III)
    • (C) (अ) - (II); (ब) - (I); (स) - (III)
    • (D) (अ) - (III); (ब) - (II); (स) - (I)
  21. Q 5(i)Objective1 markCh. 3: पद परिचय

    ‘जब वे कक्षा में पहुँचे, सभी बच्चे शोर मचा रहे थे ।’ रेखांकित पद (वे) का परिचय होगा –

    • (A) पुरुषवाचक सर्वनाम, अन्य पुरुष, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्त्ताकारक ✓
    • (B) पुरुषवाचक सर्वनाम, प्रथम पुरुष, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्त्ताकारक
    • (C) पुरुषवाचक सर्वनाम, अन्य पुरुष, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्मकारक
    • (D) निश्चयवाचक सर्वनाम, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्त्ताकारक

    Answer (the board’s key): (A)

  22. Q 5(ii)Objective1 markCh. 3: पद परिचय

    बालक हँस रहा है । – रेखांकित पद (हँस रहा है) का परिचय होगा –

    • (A) सकर्मक क्रिया, पुल्लिंग, एकवचन, वर्तमानकाल, कर्तृवाच्य
    • (B) अकर्मक क्रिया, पुल्लिंग, एकवचन, भूतकाल, कर्तृवाच्य
    • (C) अकर्मक क्रिया, पुल्लिंग, एकवचन, वर्तमानकाल, कर्तृवाच्य ✓
    • (D) सकर्मक क्रिया, पुल्लिंग, एकवचन, वर्तमानकाल, कर्मवाच्य

    Answer (the board’s key): (C)

  23. Q 5(iii)Objective1 markCh. 3: पद परिचय

    निम्नलिखित में से किस वाक्य में रीतिवाचक क्रिया-विशेषण का प्रयोग नहीं है ?

    • (A) मैं इस किताब से भली-भाँति परिचित हूँ ।
    • (B) पहाड़ों से पत्थर गेंद की तरह लुढ़ककर नीचे आ रहे थे ।
    • (C) छात्र धीरे-धीरे बातें कर रहे थे ।
    • (D) थोड़ा बोलो, अधिक सुनो । ✓

    Answer (the board’s key): (D)

  24. Q 5(iv)Objective1 markCh. 3: पद परिचय

    ‘जाड़े में चारों ओर कुहरा छा जाता है ।’ रेखांकित शब्द का पद-परिचय है –

    • (A) जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन
    • (B) भाववाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन
    • (C) जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन
    • (D) भाववाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन
  25. Q 5(v)Objective1 markCh. 3: पद परिचय

    आज के समय में कम लोगों को ही नौकरी मिलती है पर वे भी इस विषय में कम बोलते हैं । दोनों वाक्यों के कम का सामान्य पद-परिचय होगा –

    • (A) पहला कम – सार्वनामिक विशेषण, दूसरा कम – अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण
    • (B) पहला कम – अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण, दूसरा कम – अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण
    • (C) पहला कम – अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण, दूसरा कम – अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण
    • (D) पहला कम – अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण, दूसरा कम – अनिश्चित परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण ✓

    Answer (the board’s key): (D)

  26. Q 6(i)Objective1 markCh. 4: अलंकार

    स्तंभ-I और स्तंभ-II का मिलान करते हुए सही विकल्प चुनकर लिखिए -

    • (A) (I) – अ; (II) – ब; (III) – स
    • (B) (I) – स; (II) – अ; (III) – ब ✓
    • (C) (I) – ब; (II) – स; (III) – अ
    • (D) (I) – अ; (II) – स; (III) – ब

    Answer (the board’s key): (B)

  27. Q 6(ii)Objective1 markCh. 4: अलंकार

    निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों में से कौन-सी काव्य-पंक्ति मानवीकरण अलंकार का उदाहरण है ?

    • (A) चरणकमल बंदौ हरि राई ।
    • (B) कनक-कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय ।
    • (C) दुख है जीवन-तरु के फूल
    • (D) मेघ आए बड़े बन ठन के, सँवर के । ✓

    Answer (the board’s key): (D)

  28. Q 6(iii)Objective1 markCh. 4: अलंकार

    'अंबर में तारे मानो मोती अनगिनत ।' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?

    • (A) उत्प्रेक्षा अलंकार ✓
    • (B) मानवीकरण अलंकार
    • (C) श्लेष अलंकार
    • (D) अतिशयोक्ति अलंकार

    Answer (the board’s key): (A)

  29. Q 6(iv)Objective1 markCh. 4: अलंकार

    'चंचला स्नान कर आए, चंद्रिका पर्व में जैसे । उस पावन तन की शोभा, आलोक मधुर थी ऐसे ।।' इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -

    • (A) श्लेष अलंकार
    • (B) उत्प्रेक्षा अलंकार ✓
    • (C) मानवीकरण अलंकार
    • (D) अतिशयोक्ति अलंकार

    Answer (the board’s key): (B)

  30. Q 6(v)Objective1 markCh. 4: अलंकार

    'पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून ।' काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -

    • (A) श्लेष अलंकार ✓
    • (B) उत्प्रेक्षा अलंकार
    • (C) मानवीकरण अलंकार
    • (D) अतिशयोक्ति अलंकार

    Answer (the board’s key): (A)

  31. बालगोबिन भगत द्वारा अपने बेटे को अधिक मानने के कारणों को पढ़कर नीचे दिए गए सबसे सही विकल्प को चुनकर लिखिए -

    • (A) केवल (ग)
    • (B) (क) और (ग)
    • (C) (ख) और (ग)
    • (D) (क), (ख) और (ग) ✓

    Answer (the board’s key): (D)

  32. ‘एक कहानी यह भी’ की लेखिका अपनी माँ से लगाव के बावजूद उनकी तरह क्यों नहीं बनना चाहती थीं ?

    • (A) माँ जितना धैर्य, त्याग और सहनशीलता लेखिका के पास नहीं था ।
    • (B) माँ के पास आर्थिक संबल नहीं था ।
    • (C) माँ धरती की तरह विशाल हृदय की थी पर उसे सब सहना भी पड़ता था । ✓
    • (D) माँ की समाज में कोई विशिष्ट पहचान नहीं थी ।

    Answer (the board’s key): (C)

  33. लक्ष्मण के द्वारा शिव धनुष के टूटने के लिए दिए गए तर्कों में कौन-सा तर्क सम्मिलित नहीं है ?

    • (A) धनुष छूते ही टूट गया ।
    • (B) जीर्ण-शीर्ण धनुष तोड़कर किसी को क्या लाभ हानि ?
    • (C) सभी धनुष तो एकसमान ही होते हैं ।
    • (D) हँसी - खेल में रघुपति से टूट गया । ✓

    Answer (the board’s key): (D)

  34. संगतकार की आवश्यकता है -

    • (A) मुख्य गायक की अनुपस्थिति में उसकी जगह लेने के लिए ।
    • (B) मुख्य गायक के पीछे छूटे सामान को समेटने के लिए ।
    • (C) प्रत्येक परिस्थिति में मुख्य गायक के साथ देने के लिए । ✓
    • (D) बीच-बीच में अपनी गायकी से एकरसता भंग करने के लिए ।

    Answer (the board’s key): (C)

Section B · Written questions (17)

  1. सचमुच हैरान करती है काशी - पक्का महाल से जैसे मलाई बर्फ गया, संगीत, साहित्य और अदब की बहुत सारी परंपराएँ लुप्त हो गई । एक सच्चे सुर साधक और सामाजिक की भाँति बिस्मिल्ला खाँ साहब को इन सबकी कमी खलती है । काशी में जिस तरह बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ एक-दूसरे के पूरक रहे हैं, उसी तरह मुहर्रम-ताजिया और होली-अबीर, गुलाल की गंगा-जमुनी संस्कृति भी एक-दूसरे के पूरक रहे हैं । अभी जल्दी ही बहुत कुछ इतिहास बन चुका है । अभी आगे बहुत कुछ इतिहास बन जाएगा । फिर भी कुछ बचा है जो सिर्फ़ काशी में है । काशी आज भी संगीत के स्वर पर जगती और उसी की थापों पर सोती है । काशी में मरण भी मंगल माना गया है । काशी आनंदकानन है । सबसे बड़ी बात है कि काशी के पास उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ जैसा लय और सुर की तमीज सिखाने वाला नायाब हीरा रहा है जो हमेशा से दो कौमों को एक होने व आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा । गद्यांश के अनुसार काशी में कौन एक-दूसरे के पूरक रहे हैं ?

    • (A) गंगा और बाबा विश्वनाथ
    • (B) बाबा विश्वनाथ और त्रिशूल
    • (C) बिस्मिल्ला खाँ और गंगा
    • (D) बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ ✓

    Answer (the board’s key): (D)

  2. सचमुच हैरान करती है काशी - पक्का महाल से जैसे मलाई बर्फ गया, संगीत, साहित्य और अदब की बहुत सारी परंपराएँ लुप्त हो गई । एक सच्चे सुर साधक और सामाजिक की भाँति बिस्मिल्ला खाँ साहब को इन सबकी कमी खलती है । काशी में जिस तरह बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ एक-दूसरे के पूरक रहे हैं, उसी तरह मुहर्रम-ताजिया और होली-अबीर, गुलाल की गंगा-जमुनी संस्कृति भी एक-दूसरे के पूरक रहे हैं । अभी जल्दी ही बहुत कुछ इतिहास बन चुका है । अभी आगे बहुत कुछ इतिहास बन जाएगा । फिर भी कुछ बचा है जो सिर्फ़ काशी में है । काशी आज भी संगीत के स्वर पर जगती और उसी की थापों पर सोती है । काशी में मरण भी मंगल माना गया है । काशी आनंदकानन है । सबसे बड़ी बात है कि काशी के पास उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ जैसा लय और सुर की तमीज सिखाने वाला नायाब हीरा रहा है जो हमेशा से दो कौमों को एक होने व आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा । ‘काशी में मरण भी मंगल माना गया है’ – का आशय है –

    • (A) काशी में मृत्यु का उत्सव मनाया जाता है ।
    • (B) पुराणों के अनुसार काशी मृत्यु नगरी है ।
    • (C) मान्यता है कि काशी में मृत्यु मोक्ष-दायिनी है । ✓
    • (D) काशी में मृत्यु के अवसर पर मंगलगीत गाए जाते हैं ।

    Answer (the board’s key): (C)

  3. सचमुच हैरान करती है काशी - पक्का महाल से जैसे मलाई बर्फ गया, संगीत, साहित्य और अदब की बहुत सारी परंपराएँ लुप्त हो गई । एक सच्चे सुर साधक और सामाजिक की भाँति बिस्मिल्ला खाँ साहब को इन सबकी कमी खलती है । काशी में जिस तरह बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ एक-दूसरे के पूरक रहे हैं, उसी तरह मुहर्रम-ताजिया और होली-अबीर, गुलाल की गंगा-जमुनी संस्कृति भी एक-दूसरे के पूरक रहे हैं । अभी जल्दी ही बहुत कुछ इतिहास बन चुका है । अभी आगे बहुत कुछ इतिहास बन जाएगा । फिर भी कुछ बचा है जो सिर्फ़ काशी में है । काशी आज भी संगीत के स्वर पर जगती और उसी की थापों पर सोती है । काशी में मरण भी मंगल माना गया है । काशी आनंदकानन है । सबसे बड़ी बात है कि काशी के पास उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ जैसा लय और सुर की तमीज सिखाने वाला नायाब हीरा रहा है जो हमेशा से दो कौमों को एक होने व आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा । निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सबसे सही विकल्प चुनकर लिखिए । कथन : (क) बिस्मिल्ला खाँ धार्मिक सौहार्द के प्रतीक थे । (ख) काशी में गंगा-जमुनी संस्कृति के दर्शन होते हैं । (ग) काशी में खान-पान की सारी परंपराएँ लुप्त हो गई हैं । विकल्प :

    • (A) कथन (क) सही है ।
    • (B) कथन (ख) और (ग) सही हैं ।
    • (C) कथन (क) और (ख) सही हैं । ✓
    • (D) कथन (क) और (ग) सही हैं ।

    Answer (the board’s key): (C)

  4. सचमुच हैरान करती है काशी - पक्का महाल से जैसे मलाई बर्फ गया, संगीत, साहित्य और अदब की बहुत सारी परंपराएँ लुप्त हो गई । एक सच्चे सुर साधक और सामाजिक की भाँति बिस्मिल्ला खाँ साहब को इन सबकी कमी खलती है । काशी में जिस तरह बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ एक-दूसरे के पूरक रहे हैं, उसी तरह मुहर्रम-ताजिया और होली-अबीर, गुलाल की गंगा-जमुनी संस्कृति भी एक-दूसरे के पूरक रहे हैं । अभी जल्दी ही बहुत कुछ इतिहास बन चुका है । अभी आगे बहुत कुछ इतिहास बन जाएगा । फिर भी कुछ बचा है जो सिर्फ़ काशी में है । काशी आज भी संगीत के स्वर पर जगती और उसी की थापों पर सोती है । काशी में मरण भी मंगल माना गया है । काशी आनंदकानन है । सबसे बड़ी बात है कि काशी के पास उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ जैसा लय और सुर की तमीज सिखाने वाला नायाब हीरा रहा है जो हमेशा से दो कौमों को एक होने व आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा । ‘गंगा-जमुनी संस्कृति’ से आप क्या समझते हैं ?

    • (A) मुहर्रम - ताजिया, होली-दीवाली जैसे अवसरों पर सामूहिकता
    • (B) विभिन्न धार्मिक समुदायों की आपसी सामंजस्य ✓
    • (C) अलग-अलग संप्रदायों की उत्सवधर्मिता
    • (D) संगीत, कलाओं एवं साहित्य का ताना-बाना

    Answer (the board’s key): (B)

  5. सचमुच हैरान करती है काशी - पक्का महाल से जैसे मलाई बर्फ गया, संगीत, साहित्य और अदब की बहुत सारी परंपराएँ लुप्त हो गई । एक सच्चे सुर साधक और सामाजिक की भाँति बिस्मिल्ला खाँ साहब को इन सबकी कमी खलती है । काशी में जिस तरह बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ एक-दूसरे के पूरक रहे हैं, उसी तरह मुहर्रम-ताजिया और होली-अबीर, गुलाल की गंगा-जमुनी संस्कृति भी एक-दूसरे के पूरक रहे हैं । अभी जल्दी ही बहुत कुछ इतिहास बन चुका है । अभी आगे बहुत कुछ इतिहास बन जाएगा । फिर भी कुछ बचा है जो सिर्फ़ काशी में है । काशी आज भी संगीत के स्वर पर जगती और उसी की थापों पर सोती है । काशी में मरण भी मंगल माना गया है । काशी आनंदकानन है । सबसे बड़ी बात है कि काशी के पास उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ जैसा लय और सुर की तमीज सिखाने वाला नायाब हीरा रहा है जो हमेशा से दो कौमों को एक होने व आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा । उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर काशी के विषय में कौन-सा कथन असत्य है ?

    • (A) वहाँ की साहित्य, संगीत, संस्कृति की हर परंपरा अब लुप्त हो चुकी है । ✓
    • (B) काशी की आत्मा संगीत में बसती है ।
    • (C) वहाँ के हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सदा से भाईचारे की भावना रही है ।
    • (D) बिस्मिल्ला खाँ को काशी से अगाध प्रेम था, उन्होंने उसकी शान बढ़ाई ।

    Answer (the board’s key): (A)

  6. तब भी कहते हो – कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती। तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे – यह गागर रीती। किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले – अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले। यह विडंबना ! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं। भूले अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं। उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ; मधुर चाँदनी रातों की। अरे खिल-खिलाकर हँसते होने वाली उन बातों की। मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया। आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया। अपने बीते हुए जीवन को कवि किस रूप में देख रहा है ?

    • (A) विशद और विस्तृत
    • (B) सरल और सामान्य
    • (C) समृद्ध और सबल
    • (D) दुखद और करुण ✓

    Answer (the board’s key): (D)

  7. तब भी कहते हो – कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती। तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे – यह गागर रीती। किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले – अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले। यह विडंबना ! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं। भूले अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं। उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ; मधुर चाँदनी रातों की। अरे खिल-खिलाकर हँसते होने वाली उन बातों की। मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया। आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया। जीवन-गाथा नहीं सुनाने के पीछे कौन-सा कारण मुख्य है ?

    • (A) उनको भय है कि लोग उनकी कमज़ोरियों पर हँसेंगे ।
    • (B) विनम्र स्वभाववश अपनी जीवन-कथा को आम आदमी की कथा मानना । ✓
    • (C) उनके जीवन के खालीपन से दूसरे सुख पाएँगे ।
    • (D) उनके जीवन की व्यथा सबको भावुक बना देगी ।

    Answer (the board’s key): (B)

  8. तब भी कहते हो – कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती। तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे – यह गागर रीती। किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले – अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले। यह विडंबना ! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं। भूले अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं। उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ; मधुर चाँदनी रातों की। अरे खिल-खिलाकर हँसते होने वाली उन बातों की। मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया। आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया। ‘उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ’ – पंक्ति के संदर्भ में लिखिए कि किस गाथा को उज्ज्वल कहा गया है ?

    • (A) विगत जीवन की स्मृतियों को
    • (B) मित्रों के साथ व्यतीत समय-गाथा को
    • (C) प्रेयसी / पत्नी के साथ व्यतीत मधुर स्मृतियों को ✓
    • (D) साहित्यिक गोष्ठियों में की जाने वाली चर्चा को

    Answer (the board’s key): (C)

  9. तब भी कहते हो – कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती। तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे – यह गागर रीती। किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले – अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले। यह विडंबना ! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं। भूले अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं। उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ; मधुर चाँदनी रातों की। अरे खिल-खिलाकर हँसते होने वाली उन बातों की। मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया। आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया। ‘देखोगे – यह गागर रीती’ – पंक्ति में प्रयुक्त ‘गागर रीती’ से क्या अभिप्राय है ?

    • (A) गागर का रिक्त होना
    • (B) विशिष्ट उपलब्धियों का न होना
    • (C) साहित्यिक रचनाओं का न होना
    • (D) विगत जीवन में सुख का न होना ✓

    Answer (the board’s key): (D)

  10. तब भी कहते हो – कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती। तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे – यह गागर रीती। किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले – अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले। यह विडंबना ! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं। भूले अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं। उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ; मधुर चाँदनी रातों की। अरे खिल-खिलाकर हँसते होने वाली उन बातों की। मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया। आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया। उपर्युक्त काव्यांश का मुख्य भाव है –

    • (A) जीवन के यथार्थ एवं अभाव पक्ष की मार्मिक अभिव्यक्ति
    • (B) आत्मकथा न लिखने के कारणों का उल्लेख
    • (C) मित्रों के मधुर – कटु व्यवहार का उल्लेख
    • (D) प्रेयसी / पत्नी के साथ व्यतीत मधुर पलों की अभिव्यक्ति
  11. 11. गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए : 3 x 2 = 6 (क) 'एक कहानी यह भी' के आधार पर स्वतंत्रता आंदोलन के आखिरी चरण के परिदृश्य का वर्णन कीजिए जिनमें कोई दो बिंदु अवश्य शामिल हों । (ख) 'नेताजी का चश्मा' पाठ के आधार पर लिखिए कि नेताजी की मूर्ति पर लगे असली चश्मे को देख हालदार साहब के मन में क्या विचार आया ? (ग) बालगोबिन भगत के प्रति लेखक क्यों आकृष्ट था ? - पाठ के आधार पर किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए । (घ) 'संस्कृति' पाठ के आधार पर बताइए कि 'संस्कृत व्यक्ति' कौन होता है ? उसकी खूबियों पर टिप्पणी कीजिए ।

  12. Q 12Short answer6 marksCh. 1: पद (सूरदास)

    12. पद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए : 3 x 2 = 6 (क) सूरदास की गोपियाँ व्यंग्यपूर्वक उद्धव को 'बड़भागी' क्यों कहती हैं ? 'पद' में आए दो दृष्टांतों से स्पष्ट कीजिए । (ख) 'अट नहीं रही' कविता में प्रकृति में आए जिन परिवर्तनों का वर्णन है उनमें से किन्हीं दो का संक्षेप में उल्लेख करते हुए बताइए कि उनका कवि पर क्या प्रभाव पड़ा है ? (ग) 'यह दंतुरित मुस्कान' में शिशु कवि को 'अनिमेष' देख रहा है । 'अनिमेष' का अर्थ लिखते हुए बताइए कि बच्चे ऐसा क्यों करते हैं ? (घ) कवि की दृष्टि में 'संगतकार' की मनुष्यता क्या है ? तर्क सहित बताइए कि क्या आप उससे सहमत हैं ?

  13. 13. पूरक पाठ्यपुस्तक के पाठों पर आधारित निम्नलिखित तीन में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए : 2 x 4 = 8 (क) 'भोलानाथ का बचपन सरल, सहज और सामाजिक था जबकि हमारा बचपन जटिल, उलझाऊ और एकांतिक बन चुका है ।' - इस कथन के आलोक में 'माता का अंचल' पाठ से दो उदाहरण लेते हुए अपने जीवन के दो उदाहरणों के साथ तुलनात्मक टिप्पणी कीजिए । (ख) 'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ के आधार पर पर्वतीय जीवन की दुरूहता को पाठ के किन्हीं दो प्रसंगों के आधार पर स्पष्ट कीजिए । (ग) "मैं क्यों लिखता हूँ" पाठ से हम एक लेखक की रचना-प्रक्रिया से परिचित होते हैं और लेखन के गुर सीखते हैं ।" - पाठ के संदर्भ में कथन की व्याख्या कीजिए ।

  14. 14. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में सारगर्भित अनुच्छेद लिखिए : 1 x 6 = 6 (क) बुजुर्गों के प्रति हमारी जिम्मेदारी संकेत बिंदु - • हमारे समाज में बुजुर्गों की वर्तमान स्थिति • बुजुर्गों के प्रति वर्तमान स्थिति के कारण • बतौर समुदाय हमारी जवाबदेही • आपके द्वारा बदलाव के कुछ सुझाव (ख) उम्मीद पर दुनिया कायम संकेत बिंदु - • जीवन में कठिन दौर और उसका सामना • पराजय और संघर्ष की अनिवार्यता • हार के बाद भी आशा की किरण बने रहना • जब तक उम्मीद है तब तक अंत नहीं (ग) 'परहित सरिस धर्म नहीं' संकेत बिंदु - • दूसरों का हित करना • परहित में क्या-क्या शामिल ? • परहित क्यों धर्म है ? • परहित से लाभ और सुझाव

  15. 15. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में पत्र लिखिए : 1 x 5 = 5 (क) आपका नाम रमैया / रौशन है । आप अपने विद्यालय की तरफ से किसी बड़े शहर की शैक्षणिक यात्रा पर गए हैं । यात्रा से लौटकर उसकी जानकारी देते हुए अपनी बड़ी बहन को पत्र लिखिए । अथवा (ख) आप 27/6-बी, क.ख.ग. नगर के निवासी राधेश्याम/रुक्मिणी हैं । आपके मोहल्ले में बहुत से आवारा पशु घूमते रहते हैं । उनकी वजह से न सिर्फ मोहल्लेवासियों को कई तकलीफों का सामना करना पड़ता है बल्कि वे पशु भी कई समस्याओं से ग्रस्त रहते हैं । नगरपालिका के अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस समस्या की जानकारी दीजिए और उचित कदम उठाने का अनुरोध कीजिए ।

  16. 16. (क) जड़ी-बूटियों से दंत-मंजन बनाने वाली कंपनी 'अ.ब.स.' को अपने उत्पाद के प्रचार-प्रसार और बिक्री को बढ़ाने हेतु घर-घर जाकर संपर्क करने वाले कुछ नवयुवकों और नवयुवतियों की आवश्यकता है । अपनी शैक्षणिक योग्यता, रुचि और अनुभव का विवरण देते हुए लगभग 80 शब्दों में एक स्ववृत्त तैयार कीजिए । 1 x 5 = 5 अथवा (ख) आप जुबैर आलम / जोया मलिक हैं । हाल ही में आपने एक प्रतिष्ठित वेबसाइट से कुछ कपड़े मँगाए थे । उन कपड़ों में कई समस्याएँ हैं पर अब वह वेबसाइट उसे वापस नहीं ले रही । इस पूरी समस्या को स्पष्ट करते हुए उस वेबसाइट के उपभोक्ता संपर्क विभाग को लगभग 80 शब्दों में ईमेल लिखिए ।

  17. 17. (क) जल संकट के प्रति जनता को जागरूक करने के लिए लगभग 60 शब्दों में एक जनहित विज्ञापन तैयार कीजिए । 1 x 4 = 4 अथवा (ख) आप अनन्य देव / मीना मोहनी हैं और जल्द ही आपके पिताजी की लिखी हुई दसवीं किताब प्रकाशित होने वाली है । उन्हें बधाई और शुभकामना का संदेश 60 शब्दों में लिखिए ।

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