CBSE Class 10 · Hindi B · board exam 2027
CBSE Class 10 Hindi B Question Paper 2026
The board’s 2026 question paper, set 4/4/1 — all 52 questions as printed; 16 objective answers from the board’s own key. Each question names its chapter, where that chapter’s most-asked questions are.
Full marks 80 · Time 3 h
Section A · Objective questions (10)
पंछी, मानव, पशु, नदी, पर्वत, समंदर आदि की इसमें बराबर की हिस्सेदारी है । यह और बात है कि इस हिस्सेदारी में मानव जाति ने अपनी बुद्धि से बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर दी हैं । पहले पूरा परिवार एक परिवार के समान था, अब टुकड़ों में बँटकर एक दूसरे से दूर हो चुका है । पहले बड़े-बड़े दालानों-आँगनों में सब मिलजुलकर रहते थे, अब छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों में जीवन सिमटने लगा है । बढ़ती हुई आबादियों ने समंदर को पीछे सरकाना शुरू कर दिया है, पेड़ों को रास्तों से हटाना शुरू कर दिया है, फैलते हुए प्रदूषण ने पंछियों को बस्तियों से भगाना शुरू कर दिया है । बारूद की विनाशलीलाओं ने वातावरण को सताना शुरू कर दिया । अब गरमी में ज़्यादा गरमी, बेवक़्त की बरसातें, ज़लज़ले, सैलाब, तूफ़ान और नित नए रोग, मानव और प्रकृति के इसी असंतुलन के परिणाम हैं । नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है । नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था और यह नमूना इतना डरावना था कि बंबई निवासी डरकर अपने-अपने पूजा-स्थल में अपने खुदाओं से प्रार्थना करने लगे थे । अपनी बुद्धि से बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर देने का आशय है -
- (A) धरती पर ऊँची-ऊँची इमारतों का निर्माण
- (B) धरती को देश की सीमाओं में बाँधना
- (C) प्रकृति के अन्य जीवों और तत्त्वों से दूरी ✓
- (D) बुद्धि-बल से प्रकृति को नियंत्रित करना
Answer (the board’s key): (C)
पंछी, मानव, पशु, नदी, पर्वत, समंदर आदि की इसमें बराबर की हिस्सेदारी है । यह और बात है कि इस हिस्सेदारी में मानव जाति ने अपनी बुद्धि से बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर दी हैं । पहले पूरा परिवार एक परिवार के समान था, अब टुकड़ों में बँटकर एक दूसरे से दूर हो चुका है । पहले बड़े-बड़े दालानों-आँगनों में सब मिलजुलकर रहते थे, अब छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों में जीवन सिमटने लगा है । बढ़ती हुई आबादियों ने समंदर को पीछे सरकाना शुरू कर दिया है, पेड़ों को रास्तों से हटाना शुरू कर दिया है, फैलते हुए प्रदूषण ने पंछियों को बस्तियों से भगाना शुरू कर दिया है । बारूद की विनाशलीलाओं ने वातावरण को सताना शुरू कर दिया । अब गरमी में ज़्यादा गरमी, बेवक़्त की बरसातें, ज़लज़ले, सैलाब, तूफ़ान और नित नए रोग, मानव और प्रकृति के इसी असंतुलन के परिणाम हैं । नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है । नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था और यह नमूना इतना डरावना था कि बंबई निवासी डरकर अपने-अपने पूजा-स्थल में अपने खुदाओं से प्रार्थना करने लगे थे । बंबई निवासी ईश्वर से प्रार्थना क्यों करने लगे ?
- (A) ईश्वर की प्रार्थना करना उनका दैनिक कर्म था ।
- (B) प्रार्थना करके वे अपने-अपने पूजा-स्थलों को बचा सकते थे ।
- (C) वे अपने तरीके से अपने प्रार्थना की शक्ति परखना चाहते थे ।
- (D) प्रकृति के कोप को देखकर उन्हें अपना अस्तित्व संकट में लगा । ✓
Answer (the board’s key): (D)
पंछी, मानव, पशु, नदी, पर्वत, समंदर आदि की इसमें बराबर की हिस्सेदारी है । यह और बात है कि इस हिस्सेदारी में मानव जाति ने अपनी बुद्धि से बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर दी हैं । पहले पूरा परिवार एक परिवार के समान था, अब टुकड़ों में बँटकर एक दूसरे से दूर हो चुका है । पहले बड़े-बड़े दालानों-आँगनों में सब मिलजुलकर रहते थे, अब छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों में जीवन सिमटने लगा है । बढ़ती हुई आबादियों ने समंदर को पीछे सरकाना शुरू कर दिया है, पेड़ों को रास्तों से हटाना शुरू कर दिया है, फैलते हुए प्रदूषण ने पंछियों को बस्तियों से भगाना शुरू कर दिया है । बारूद की विनाशलीलाओं ने वातावरण को सताना शुरू कर दिया । अब गरमी में ज़्यादा गरमी, बेवक़्त की बरसातें, ज़लज़ले, सैलाब, तूफ़ान और नित नए रोग, मानव और प्रकृति के इसी असंतुलन के परिणाम हैं । नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है । नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था और यह नमूना इतना डरावना था कि बंबई निवासी डरकर अपने-अपने पूजा-स्थल में अपने खुदाओं से प्रार्थना करने लगे थे । निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : मानव और प्रकृति के बीच बढ़ते असंतुलन का मुख्य कारण मानव की बढ़ती स्वार्थपरता है । कारण : बुद्धि के विकास ने ही मानव को अच्छे-बुरे का ज्ञान करवाया जिससे अंततः पर्यावरण सकारात्मक रूप से प्रभावित हुआ । विकल्प :
- (A) कथन और कारण दोनों गलत हैं ।
- (B) कथन गलत है, लेकिन कारण सही है ।
- (C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की गलत व्याख्या करता है । ✓
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है ।
Answer (the board’s key): (C)
पंछी, मानव, पशु, नदी, पर्वत, समंदर आदि की इसमें बराबर की हिस्सेदारी है । यह और बात है कि इस हिस्सेदारी में मानव जाति ने अपनी बुद्धि से बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर दी हैं । पहले पूरा परिवार एक परिवार के समान था, अब टुकड़ों में बँटकर एक दूसरे से दूर हो चुका है । पहले बड़े-बड़े दालानों-आँगनों में सब मिलजुलकर रहते थे, अब छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों में जीवन सिमटने लगा है । बढ़ती हुई आबादियों ने समंदर को पीछे सरकाना शुरू कर दिया है, पेड़ों को रास्तों से हटाना शुरू कर दिया है, फैलते हुए प्रदूषण ने पंछियों को बस्तियों से भगाना शुरू कर दिया है । बारूद की विनाशलीलाओं ने वातावरण को सताना शुरू कर दिया । अब गरमी में ज़्यादा गरमी, बेवक़्त की बरसातें, ज़लज़ले, सैलाब, तूफ़ान और नित नए रोग, मानव और प्रकृति के इसी असंतुलन के परिणाम हैं । नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है । नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था और यह नमूना इतना डरावना था कि बंबई निवासी डरकर अपने-अपने पूजा-स्थल में अपने खुदाओं से प्रार्थना करने लगे थे । प्रकृति के असंतुलन का परिणाम नहीं है
- (A) मौसम चक्र में परिवर्तन
- (B) विकास-दर में वृद्धि ✓
- (C) प्राकृतिक आपदाओं में बढ़ोतरी
- (D) नए-नए रोगों की उत्पत्ति
Answer (the board’s key): (B)
पंछी, मानव, पशु, नदी, पर्वत, समंदर आदि की इसमें बराबर की हिस्सेदारी है । यह और बात है कि इस हिस्सेदारी में मानव जाति ने अपनी बुद्धि से बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर दी हैं । पहले पूरा परिवार एक परिवार के समान था, अब टुकड़ों में बँटकर एक दूसरे से दूर हो चुका है । पहले बड़े-बड़े दालानों-आँगनों में सब मिलजुलकर रहते थे, अब छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों में जीवन सिमटने लगा है । बढ़ती हुई आबादियों ने समंदर को पीछे सरकाना शुरू कर दिया है, पेड़ों को रास्तों से हटाना शुरू कर दिया है, फैलते हुए प्रदूषण ने पंछियों को बस्तियों से भगाना शुरू कर दिया है । बारूद की विनाशलीलाओं ने वातावरण को सताना शुरू कर दिया । अब गरमी में ज़्यादा गरमी, बेवक़्त की बरसातें, ज़लज़ले, सैलाब, तूफ़ान और नित नए रोग, मानव और प्रकृति के इसी असंतुलन के परिणाम हैं । नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है । नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था और यह नमूना इतना डरावना था कि बंबई निवासी डरकर अपने-अपने पूजा-स्थल में अपने खुदाओं से प्रार्थना करने लगे थे । 'पहले पूरा संसार एक परिवार के समान था' - का भाव है
- (A) पहले संसार परिवार की सीमाओं में नहीं बँटा था ।
- (B) पहले संसार में अलग-अलग देश ही नहीं थे ।
- (C) पहले लोग मानव और प्रकृति के संबंधों से अनजान थे ।
- (D) पहले के लोग सह-अस्तित्व का सम्मान करते थे । ✓
Answer (the board’s key): (D)
गिरि का गौरव गाकर झर-झर मद में नस-नस उत्तेजित कर मोती की लड़ियों-से सुंदर झरते हैं झाग भरे निर्झर! गिरिवर के उर से उठ-उठकर उच्चाकांक्षाओं से तरुवर हैं झाँक रहे नीरव-नभ पर अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर । ‘अनिमेष’ का अर्थ नहीं है
- (A) एकटक
- (B) लगातार
- (C) निर्निमेष
- (D) झाँकना ✓
Answer (the board’s key): (D)
गिरि का गौरव गाकर झर-झर मद में नस-नस उत्तेजित कर मोती की लड़ियों-से सुंदर झरते हैं झाग भरे निर्झर! गिरिवर के उर से उठ-उठकर उच्चाकांक्षाओं से तरुवर हैं झाँक रहे नीरव-नभ पर अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर । पद्यांश में किसकी तुलना मोती की लड़ियों से की गई है ?
- (A) महाकार पर्वत की
- (B) झाग भरे झरने की ✓
- (C) निर्मल ताल की
- (D) विशाल वृक्ष की
Answer (the board’s key): (B)
गिरि का गौरव गाकर झर-झर मद में नस-नस उत्तेजित कर मोती की लड़ियों-से सुंदर झरते हैं झाग भरे निर्झर! गिरिवर के उर से उठ-उठकर उच्चाकांक्षाओं से तरुवर हैं झाँक रहे नीरव-नभ पर अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर । ‘नीरव-नभ’ का आशय है
- (A) बिना बादल का आकाश
- (B) बादलों से भरा आकाश
- (C) बादल रहित शांत आकाश ✓
- (D) तेज़ हवा से युक्त आकाश
Answer (the board’s key): (C)
गिरि का गौरव गाकर झर-झर मद में नस-नस उत्तेजित कर मोती की लड़ियों-से सुंदर झरते हैं झाग भरे निर्झर! गिरिवर के उर से उठ-उठकर उच्चाकांक्षाओं से तरुवर हैं झाँक रहे नीरव-नभ पर अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर । पेड़ ‘चिंतापर’ क्यों दिखाई दे रहे हैं ?
- (A) वे आकाश जैसी ऊँचाई पाने के लिए विचारमग्न हैं । ✓
- (B) पर्वतों की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर पा रहे हैं ।
- (C) पर्वतों से झरने वाले झरनों की गति से भयभीत हैं ।
- (D) नीरव-नभ का रूप उन्हें आश्चर्यचकित कर रहा है ।
Answer (the board’s key): (A)
गिरि का गौरव गाकर झर-झर मद में नस-नस उत्तेजित कर मोती की लड़ियों-से सुंदर झरते हैं झाग भरे निर्झर! गिरिवर के उर से उठ-उठकर उच्चाकांक्षाओं से तरुवर हैं झाँक रहे नीरव-नभ पर अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर । निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों के सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : एकाग्रता, अटल विश्वास और लक्ष्य पर दृष्टि सफल होने के सहायक तत्त्व हैं । कारण : जीवन में सफलता बिना प्रयास के भाग्य से स्वयं ही प्राप्त हो जाती है । विकल्प : (A) कथन और कारण दोनों गलत हैं । (B) कथन और कारण दोनों सही हैं । (C) कथन गलत है, परंतु कारण सही है । (D) कथन सही है, किंतु कारण गलत है ।
- (A) कथन और कारण दोनों गलत हैं ।
- (B) कथन और कारण दोनों सही हैं ।
- (C) कथन गलत है, परंतु कारण सही है ।
- (D) कथन सही है, किंतु कारण गलत है । ✓
Answer (the board’s key): (D)
Section B · Written questions (42)
विश्व में जल-संकट बड़ी समस्या बन चुकी है । इससे हर साल करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं । गर्मियों में यह संकट और बढ़ जाता है । गाँवों से महानगरों तक पानी के लिए त्राहि-त्राहि मचने लगती है । यह संकट न केवल ग्रामीण और शहरी आबादी के लिए गंभीर चुनौती है बल्कि कृषि पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ रहा है । लगातार गिरता भू-जल स्तर, जल संसाधनों की बर्बादी, बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन इस संकट को और विकराल बना रहे हैं । अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है । जल-संकट गहराने के कई कारण हैं । हमें पता है कि पानी सीमित है, फिर भी उसे बूँद-बूँद बचाने के बजाए हम उसे व्यर्थ बहा रहे हैं । विश्व की तेजी से बढ़ती आबादी के कारण पानी की माँग बढ़ती जा रही है लेकिन जल संसाधनों का उतनी ही अधिक तेजी से क्षय हो रहा है । कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए भू-जल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है, जिससे भू-जल का स्तर गिरता जा रहा है । नदियों, झीलों और भू-जल में औद्योगिक कचरे, रसायनों और प्लास्टिक के बढ़ते स्तर के कारण पीने योग्य पानी की लगातार कमी आ रही है । निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यान से पढ़िए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :
- (A) कथन और कारण दोनों गलत हैं ।
- (B) कथन सही है, किंतु कारण गलत है । ✓
- (C) कथन गलत है, किंतु कारण सही है ।
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है ।
Answer (the board’s key): (B)
विश्व में जल-संकट बड़ी समस्या बन चुकी है । इससे हर साल करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं । गर्मियों में यह संकट और बढ़ जाता है । गाँवों से महानगरों तक पानी के लिए त्राहि-त्राहि मचने लगती है । यह संकट न केवल ग्रामीण और शहरी आबादी के लिए गंभीर चुनौती है बल्कि कृषि पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ रहा है । लगातार गिरता भू-जल स्तर, जल संसाधनों की बर्बादी, बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन इस संकट को और विकराल बना रहे हैं । अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है । जल-संकट गहराने के कई कारण हैं । हमें पता है कि पानी सीमित है, फिर भी उसे बूँद-बूँद बचाने के बजाए हम उसे व्यर्थ बहा रहे हैं । विश्व की तेजी से बढ़ती आबादी के कारण पानी की माँग बढ़ती जा रही है लेकिन जल संसाधनों का उतनी ही अधिक तेजी से क्षय हो रहा है । कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए भू-जल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है, जिससे भू-जल का स्तर गिरता जा रहा है । नदियों, झीलों और भू-जल में औद्योगिक कचरे, रसायनों और प्लास्टिक के बढ़ते स्तर के कारण पीने योग्य पानी की लगातार कमी आ रही है । विश्व में पानी की माँग दिनोंदिन क्यों बढ़ रही है
- (A) जलवायु परिवर्तन के कारण
- (B) भू-जल के गिरते स्तर के कारण
- (C) कृषि योग्य भूमि के विस्तार के कारण
- (D) बढ़ती हुई आबादी के कारण ✓
Answer (the board’s key): (D)
विश्व में जल-संकट बड़ी समस्या बन चुकी है । इससे हर साल करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं । गर्मियों में यह संकट और बढ़ जाता है । गाँवों से महानगरों तक पानी के लिए त्राहि-त्राहि मचने लगती है । यह संकट न केवल ग्रामीण और शहरी आबादी के लिए गंभीर चुनौती है बल्कि कृषि पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ रहा है । लगातार गिरता भू-जल स्तर, जल संसाधनों की बर्बादी, बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन इस संकट को और विकराल बना रहे हैं । अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है । जल-संकट गहराने के कई कारण हैं । हमें पता है कि पानी सीमित है, फिर भी उसे बूँद-बूँद बचाने के बजाए हम उसे व्यर्थ बहा रहे हैं । विश्व की तेजी से बढ़ती आबादी के कारण पानी की माँग बढ़ती जा रही है लेकिन जल संसाधनों का उतनी ही अधिक तेजी से क्षय हो रहा है । कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए भू-जल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है, जिससे भू-जल का स्तर गिरता जा रहा है । नदियों, झीलों और भू-जल में औद्योगिक कचरे, रसायनों और प्लास्टिक के बढ़ते स्तर के कारण पीने योग्य पानी की लगातार कमी आ रही है । जल-संकट गहराने के प्रमुख कारण नहीं हैं ।
- (A) लगातार गिरता भू-जल स्तर
- (B) लगातार बढ़ती जनसंख्या
- (C) जल स्रोतों का सुनियोजित उपयोग ✓
- (D) जल संरक्षण के अनुपयुक्त उपाय
Answer (the board’s key): (C)
विश्व में जल-संकट बड़ी समस्या बन चुकी है । इससे हर साल करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं । गर्मियों में यह संकट और बढ़ जाता है । गाँवों से महानगरों तक पानी के लिए त्राहि-त्राहि मचने लगती है । यह संकट न केवल ग्रामीण और शहरी आबादी के लिए गंभीर चुनौती है बल्कि कृषि पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ रहा है । लगातार गिरता भू-जल स्तर, जल संसाधनों की बर्बादी, बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन इस संकट को और विकराल बना रहे हैं । अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है । जल-संकट गहराने के कई कारण हैं । हमें पता है कि पानी सीमित है, फिर भी उसे बूँद-बूँद बचाने के बजाए हम उसे व्यर्थ बहा रहे हैं । विश्व की तेजी से बढ़ती आबादी के कारण पानी की माँग बढ़ती जा रही है लेकिन जल संसाधनों का उतनी ही अधिक तेजी से क्षय हो रहा है । कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए भू-जल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है, जिससे भू-जल का स्तर गिरता जा रहा है । नदियों, झीलों और भू-जल में औद्योगिक कचरे, रसायनों और प्लास्टिक के बढ़ते स्तर के कारण पीने योग्य पानी की लगातार कमी आ रही है । ‘पानी को बूँद-बूँद बचाने के बजाए हम उसे व्यर्थ कर रहे हैं ।’ कथन - का आशय स्पष्ट कीजिए ।
विश्व में जल-संकट बड़ी समस्या बन चुकी है । इससे हर साल करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं । गर्मियों में यह संकट और बढ़ जाता है । गाँवों से महानगरों तक पानी के लिए त्राहि-त्राहि मचने लगती है । यह संकट न केवल ग्रामीण और शहरी आबादी के लिए गंभीर चुनौती है बल्कि कृषि पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ रहा है । लगातार गिरता भू-जल स्तर, जल संसाधनों की बर्बादी, बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन इस संकट को और विकराल बना रहे हैं । अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है । जल-संकट गहराने के कई कारण हैं । हमें पता है कि पानी सीमित है, फिर भी उसे बूँद-बूँद बचाने के बजाए हम उसे व्यर्थ बहा रहे हैं । विश्व की तेजी से बढ़ती आबादी के कारण पानी की माँग बढ़ती जा रही है लेकिन जल संसाधनों का उतनी ही अधिक तेजी से क्षय हो रहा है । कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए भू-जल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है, जिससे भू-जल का स्तर गिरता जा रहा है । नदियों, झीलों और भू-जल में औद्योगिक कचरे, रसायनों और प्लास्टिक के बढ़ते स्तर के कारण पीने योग्य पानी की लगातार कमी आ रही है । पेय जल की उपलब्धता में निरंतर गिरावट क्यों आ रही है ?
फ्रेंकलिन का प्रसिद्ध कथन है - 'वक्त को बरबाद न करो क्योंकि जीवन इसी से बना है ।' समय ही जीवन है । जो अवसरों और संभावनाओं से भरा हुआ है । जो बुद्धिमानी से इसका उपयोग करते हैं, वे सफलता की नींव रखते हैं, जबकि समय को व्यर्थ करने वाले अधूरे कार्यों और अपूर्ण लक्ष्यों के साथ रह जाते हैं । शास्त्रों में कहा गया है, 'एक-एक पैसे को जोड़कर कोई धनी बनता है, और एक-एक क्षण का उपयोग करके कोई विद्वान ।' समय वास्तव में सीमित संसाधन है । जब हम किसी एक चीज के लिए 'हाँ' कहते हैं, तो किसी दूसरी चीज के लिए 'ना' कह रहे होते हैं । प्राचीन ज्ञान भी यही सिखाता है । अवसर को समय रहते पहचानो और उसका सदुपयोग करो । मानव जीवन एक दुर्लभ उपहार है । यही जीवन हमें विवेक देता है, जो लाभकारी और सुखद के बीच अंतर करने में सक्षम बनाता है । इसलिए हर क्षण का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है । जैसे विद्यार्थी परीक्षा के आने के ठीक पहले समय को अच्छी तरह समझकर पूरी निष्ठा से पढ़ाई करते हैं, वैसे ही हमें भी जीवन के हर क्षण को उद्देश्यपूर्ण बनाना चाहिए । हम अक्सर कहते हैं, 'काश मेरे पास और समय होता ।' यह सोच हमें थकान और असंतोष की ओर ले जाती है । साथ ही, हम एक तरह की नकारात्मकता से घिर जाते हैं । सच यह है कि हम सबको समान 24 घंटे मिलते हैं । फ़र्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि हम उनका उपयोग कैसे करते हैं । विद्वानों ने सिखाया कि सफलता उन्हीं को मिलती है, जो अपने समय को केवल सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में निवेश करते हैं । प्रकृति हमें हर दिन समय का समान उपहार देती है । समय की कद्र कीजिए, घड़ी की सूइयों की फुसफुसाहट को सुनिए और उसके संकेतों को समझिए । जो लोग हर क्षण को सार्थक बनाते हैं, वे ही जीवन में संतोष और सफलता का सच्चा संतुलन पाते हैं । निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प चुनिए :
- (A) कथन सही है, लेकिन कारण गलत है ।
- (B) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है । ✓
- (C) कथन गलत है और कारण सही है ।
- (D) कथन और कारण दोनों गलत हैं ।
Answer (the board’s key): (B)
फ्रेंकलिन का प्रसिद्ध कथन है - 'वक्त को बरबाद न करो क्योंकि जीवन इसी से बना है ।' समय ही जीवन है । जो अवसरों और संभावनाओं से भरा हुआ है । जो बुद्धिमानी से इसका उपयोग करते हैं, वे सफलता की नींव रखते हैं, जबकि समय को व्यर्थ करने वाले अधूरे कार्यों और अपूर्ण लक्ष्यों के साथ रह जाते हैं । शास्त्रों में कहा गया है, 'एक-एक पैसे को जोड़कर कोई धनी बनता है, और एक-एक क्षण का उपयोग करके कोई विद्वान ।' समय वास्तव में सीमित संसाधन है । जब हम किसी एक चीज के लिए 'हाँ' कहते हैं, तो किसी दूसरी चीज के लिए 'ना' कह रहे होते हैं । प्राचीन ज्ञान भी यही सिखाता है । अवसर को समय रहते पहचानो और उसका सदुपयोग करो । मानव जीवन एक दुर्लभ उपहार है । यही जीवन हमें विवेक देता है, जो लाभकारी और सुखद के बीच अंतर करने में सक्षम बनाता है । इसलिए हर क्षण का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है । जैसे विद्यार्थी परीक्षा के आने के ठीक पहले समय को अच्छी तरह समझकर पूरी निष्ठा से पढ़ाई करते हैं, वैसे ही हमें भी जीवन के हर क्षण को उद्देश्यपूर्ण बनाना चाहिए । हम अक्सर कहते हैं, 'काश मेरे पास और समय होता ।' यह सोच हमें थकान और असंतोष की ओर ले जाती है । साथ ही, हम एक तरह की नकारात्मकता से घिर जाते हैं । सच यह है कि हम सबको समान 24 घंटे मिलते हैं । फ़र्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि हम उनका उपयोग कैसे करते हैं । विद्वानों ने सिखाया कि सफलता उन्हीं को मिलती है, जो अपने समय को केवल सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में निवेश करते हैं । प्रकृति हमें हर दिन समय का समान उपहार देती है । समय की कद्र कीजिए, घड़ी की सूइयों की फुसफुसाहट को सुनिए और उसके संकेतों को समझिए । जो लोग हर क्षण को सार्थक बनाते हैं, वे ही जीवन में संतोष और सफलता का सच्चा संतुलन पाते हैं । गद्यांश के आधार पर लिखिए कि जो व्यक्ति समय का सदुपयोग करते हैं, उनका जीवन कैसा होता है ? (I) सफल (II) व्यस्त (III) सार्थक (IV) अनियमित विकल्प :
- (A) केवल विकल्प (I) सही है ।
- (B) (II) और (III) सही हैं ।
- (C) (I), (II) और (III) सही हैं ।
- (D) (I) और (III) सही हैं । ✓
Answer (the board’s key): (D)
फ्रेंकलिन का प्रसिद्ध कथन है - 'वक्त को बरबाद न करो क्योंकि जीवन इसी से बना है ।' समय ही जीवन है । जो अवसरों और संभावनाओं से भरा हुआ है । जो बुद्धिमानी से इसका उपयोग करते हैं, वे सफलता की नींव रखते हैं, जबकि समय को व्यर्थ करने वाले अधूरे कार्यों और अपूर्ण लक्ष्यों के साथ रह जाते हैं । शास्त्रों में कहा गया है, 'एक-एक पैसे को जोड़कर कोई धनी बनता है, और एक-एक क्षण का उपयोग करके कोई विद्वान ।' समय वास्तव में सीमित संसाधन है । जब हम किसी एक चीज के लिए 'हाँ' कहते हैं, तो किसी दूसरी चीज के लिए 'ना' कह रहे होते हैं । प्राचीन ज्ञान भी यही सिखाता है । अवसर को समय रहते पहचानो और उसका सदुपयोग करो । मानव जीवन एक दुर्लभ उपहार है । यही जीवन हमें विवेक देता है, जो लाभकारी और सुखद के बीच अंतर करने में सक्षम बनाता है । इसलिए हर क्षण का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है । जैसे विद्यार्थी परीक्षा के आने के ठीक पहले समय को अच्छी तरह समझकर पूरी निष्ठा से पढ़ाई करते हैं, वैसे ही हमें भी जीवन के हर क्षण को उद्देश्यपूर्ण बनाना चाहिए । हम अक्सर कहते हैं, 'काश मेरे पास और समय होता ।' यह सोच हमें थकान और असंतोष की ओर ले जाती है । साथ ही, हम एक तरह की नकारात्मकता से घिर जाते हैं । सच यह है कि हम सबको समान 24 घंटे मिलते हैं । फ़र्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि हम उनका उपयोग कैसे करते हैं । विद्वानों ने सिखाया कि सफलता उन्हीं को मिलती है, जो अपने समय को केवल सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में निवेश करते हैं । प्रकृति हमें हर दिन समय का समान उपहार देती है । समय की कद्र कीजिए, घड़ी की सूइयों की फुसफुसाहट को सुनिए और उसके संकेतों को समझिए । जो लोग हर क्षण को सार्थक बनाते हैं, वे ही जीवन में संतोष और सफलता का सच्चा संतुलन पाते हैं । 'काश मेरे पास और समय होता ।' ऐसी सोच किस प्रकार के व्यक्तियों की होती है ?
- (A) अकर्मण्य और आलसी लोगों की ✓
- (B) भाग्यवादी लोगों की
- (C) समय की कद्र करने वालों की
- (D) परिश्रमी लोगों की
Answer (the board’s key): (A)
फ्रेंकलिन का प्रसिद्ध कथन है - 'वक्त को बरबाद न करो क्योंकि जीवन इसी से बना है ।' समय ही जीवन है । जो अवसरों और संभावनाओं से भरा हुआ है । जो बुद्धिमानी से इसका उपयोग करते हैं, वे सफलता की नींव रखते हैं, जबकि समय को व्यर्थ करने वाले अधूरे कार्यों और अपूर्ण लक्ष्यों के साथ रह जाते हैं । शास्त्रों में कहा गया है, 'एक-एक पैसे को जोड़कर कोई धनी बनता है, और एक-एक क्षण का उपयोग करके कोई विद्वान ।' समय वास्तव में सीमित संसाधन है । जब हम किसी एक चीज के लिए 'हाँ' कहते हैं, तो किसी दूसरी चीज के लिए 'ना' कह रहे होते हैं । प्राचीन ज्ञान भी यही सिखाता है । अवसर को समय रहते पहचानो और उसका सदुपयोग करो । मानव जीवन एक दुर्लभ उपहार है । यही जीवन हमें विवेक देता है, जो लाभकारी और सुखद के बीच अंतर करने में सक्षम बनाता है । इसलिए हर क्षण का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है । जैसे विद्यार्थी परीक्षा के आने के ठीक पहले समय को अच्छी तरह समझकर पूरी निष्ठा से पढ़ाई करते हैं, वैसे ही हमें भी जीवन के हर क्षण को उद्देश्यपूर्ण बनाना चाहिए । हम अक्सर कहते हैं, 'काश मेरे पास और समय होता ।' यह सोच हमें थकान और असंतोष की ओर ले जाती है । साथ ही, हम एक तरह की नकारात्मकता से घिर जाते हैं । सच यह है कि हम सबको समान 24 घंटे मिलते हैं । फ़र्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि हम उनका उपयोग कैसे करते हैं । विद्वानों ने सिखाया कि सफलता उन्हीं को मिलती है, जो अपने समय को केवल सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में निवेश करते हैं । प्रकृति हमें हर दिन समय का समान उपहार देती है । समय की कद्र कीजिए, घड़ी की सूइयों की फुसफुसाहट को सुनिए और उसके संकेतों को समझिए । जो लोग हर क्षण को सार्थक बनाते हैं, वे ही जीवन में संतोष और सफलता का सच्चा संतुलन पाते हैं । समय को व्यर्थ गँवाने के क्या परिणाम होते हैं ?
फ्रेंकलिन का प्रसिद्ध कथन है - 'वक्त को बरबाद न करो क्योंकि जीवन इसी से बना है ।' समय ही जीवन है । जो अवसरों और संभावनाओं से भरा हुआ है । जो बुद्धिमानी से इसका उपयोग करते हैं, वे सफलता की नींव रखते हैं, जबकि समय को व्यर्थ करने वाले अधूरे कार्यों और अपूर्ण लक्ष्यों के साथ रह जाते हैं । शास्त्रों में कहा गया है, 'एक-एक पैसे को जोड़कर कोई धनी बनता है, और एक-एक क्षण का उपयोग करके कोई विद्वान ।' समय वास्तव में सीमित संसाधन है । जब हम किसी एक चीज के लिए 'हाँ' कहते हैं, तो किसी दूसरी चीज के लिए 'ना' कह रहे होते हैं । प्राचीन ज्ञान भी यही सिखाता है । अवसर को समय रहते पहचानो और उसका सदुपयोग करो । मानव जीवन एक दुर्लभ उपहार है । यही जीवन हमें विवेक देता है, जो लाभकारी और सुखद के बीच अंतर करने में सक्षम बनाता है । इसलिए हर क्षण का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है । जैसे विद्यार्थी परीक्षा के आने के ठीक पहले समय को अच्छी तरह समझकर पूरी निष्ठा से पढ़ाई करते हैं, वैसे ही हमें भी जीवन के हर क्षण को उद्देश्यपूर्ण बनाना चाहिए । हम अक्सर कहते हैं, 'काश मेरे पास और समय होता ।' यह सोच हमें थकान और असंतोष की ओर ले जाती है । साथ ही, हम एक तरह की नकारात्मकता से घिर जाते हैं । सच यह है कि हम सबको समान 24 घंटे मिलते हैं । फ़र्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि हम उनका उपयोग कैसे करते हैं । विद्वानों ने सिखाया कि सफलता उन्हीं को मिलती है, जो अपने समय को केवल सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में निवेश करते हैं । प्रकृति हमें हर दिन समय का समान उपहार देती है । समय की कद्र कीजिए, घड़ी की सूइयों की फुसफुसाहट को सुनिए और उसके संकेतों को समझिए । जो लोग हर क्षण को सार्थक बनाते हैं, वे ही जीवन में संतोष और सफलता का सच्चा संतुलन पाते हैं । हर क्षण का विवेकपूर्ण उपयोग क्यों आवश्यक है ?
दूसरों की सहायता करने वाला वह अति विनम्र है । - वाक्य में रेखांकित पदबंध का भेद लिखिए
हमारी नाभा रियासत का राजा 1923 में गिरफ़्तार कर लिया गया था । - वाक्य में से संज्ञा पदबंध छाँटकर लिखिए
एक शाम तताँरा समुद्र किनारे टहलने निकल पड़ा । - वाक्य में रेखांकित पदबंध का भेद लिखिए
उनके सरल और सहज स्वभाव से सब प्रभावित थे । वाक्य में रेखांकित पदबंध का भेद लिखिए
लिटिल अंडमान और कार निकोबार आपस में जुड़े हुए थे । - वाक्य में से क्रिया पदबंध छाँटकर लिखिए और कारण भी स्पष्ट कीजिए
निर्देशानुसार ‘रचना के आधार पर वाक्य रूपांतरण’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लिखिए : (i) साआदत अली हमारा दोस्त है और बहुत ऐश-पसंद आदमी है । - रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद का नाम लिखिए । (ii) उनको दुखी देखकर मेरी माँ की आँखों में भी आँसू आ गए । - मिश्र वाक्य में रूपांतरित करके लिखिए । (iii) कंपनी का हुक्म है कि वजीर अली को गिरफ़्तार किया जाए । - सरल वाक्य में रूपांतरित करके लिखिए । (iv) जब कार-निकोबार आपस में जुड़े हुए थे तब वहाँ एक सुंदर सा गाँव था । - संयुक्त वाक्य में रूपांतरित करके लिखिए । (v) व्यवहारवादी लोगों ने तो समाज को गिराया ही है । रचना की दृष्टि से भेद का नाम लिखिए ।
कर्मधारय समास में कौन सा पद प्रधान होता है ? एक उदाहरण भी लिखिए
‘बारूदों की विनाशलीलाओं ने वातावरण को सताना शुरू कर दिया ।’ - रेखांकित समस्तपद का विग्रह कीजिए और भेद का नाम लिखिए
‘प्रतिक्षण’ समास के किस भेद का उदाहरण है ?
चक्र है पाणि में जिसके, उन्हें प्रणाम । - रेखांकित पदों के उपयुक्त समस्तपद लिखिए और समास के भेद का नाम भी लिखिए
द्विगु समास की पहचान बताते हुए एक उदाहरण लिखिए
'चिकनी-चुपड़ी बातें करना' - मुहावरे का अर्थ लिखिए और मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए
'कमरे में हरिहर काका जिस स्थिति में मिले उसे देखकर उनके भाइयों का ______ उठा ।' रिक्त स्थान की पूर्ति उपयुक्त मुहावरे से कीजिए
'दिन गिनना' - मुहावरे का वाक्य में इस तरह प्रयोग कीजिए कि अर्थ स्पष्ट हो जाए
'भाग्यवश अच्छी वस्तु मिलना' - अर्थ को व्यक्त करने वाला एक उपयुक्त मुहावरा लिखिए
'बातें बनाना' और 'बातों में आना' - इन दोनों मुहावरों के बीच का अंतर स्पष्ट कीजिए
सबके प्रति अपने नेक व्यवहार के कारण द्वीपवासियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय होने पर भी, जब तताँरा को ज़रूरत पड़ी तो किसी ने भी उसका साथ क्यों नहीं दिया ? 'तताँरा-वामीरो कथा' पाठ के आधार पर लिखिए
'गिन्नी का सोना' के आधार पर लिखिए कि किस तरह के लोग समाज के पतन का कारण बनते हैं और क्यों ?
'व्यावसायिक दृष्टि से एक असफल फ़िल्म होते हुए भी 'तीसरी कसम' एक सफल फ़िल्म थी ।' पाठ के संदर्भ में सिद्ध कीजिए
'एक संगठित समाज कृत संकल्प हो तो ऐसा कुछ भी नहीं जो वह न कर सके ।' - 'डायरी का एक पन्ना' पाठ के आधार पर इस कथन को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए
'मनुष्यता' कविता के आधार पर लिखिए कि 'अखंड आत्म भाव' रखने के क्या लाभ हैं ?
'साखी' में कबीर ने प्रभु प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा किसे और क्यों बताया है ?
'आत्म त्राण' कविता के संदर्भ में लिखिए कि संकट में अपनों का साथ न मिलने तथा उनसे छले जाने पर भी कवि संकट का सामना कैसे करना चाहता है ?
'कर चले हम फ़िदा' कविता से उद्धृत 'राम भी तुम, तुम्हें लक्ष्मण साथियों' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए
'जिनसे अपनापन मिले, अपने वे ही होते हैं फिर चाहे वे अलग परिवार, जाति, धर्म के ही क्यों न हों ।' - 'टोपी शुक्ला' पाठ के आधार पर इस कथन के पक्ष में अपने विचार व्यक्त कीजिए
'सपनों के से दिन' पाठ में लेखक और उन जैसे परिवारों की अपने बच्चों को पढ़वाने में अरुचि के क्या कारण रहे होंगे ? क्या वर्तमान में भी बच्चों की पढ़ाई को लेकर समान दृष्टिकोण है ? अपने विचार के पक्ष में तर्कपूर्ण उत्तर लिखिए
ठाकुरबारी में महंत जी की नियुक्ति अस्थायी थी फिर भी उन्होंने हरिहर काका की ज़मीन को ठाकुर जी के नाम करवाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए । उनके द्वारा किए जाने वाले इन कृत्यों के पीछे के संभावित कारणों का उल्लेख कीजिए
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए : (i) परिश्रम सफलता की कुंजी है संकेत बिंदु : सूक्ति का अर्थ, विद्यार्थी जीवन में महत्त्व, वर्तमान में इसकी आवश्यकता क्यों (ii) भीड़ भरे बाज़ार का दृश्य संकेत बिंदु : चारों तरफ़ लोगों की गरमागरमी, दुकानदारों की आवाज़, खरीद-फरोख्त करते लोग (iii) ऑनलाइन भुगतान की सुविधा संकेत बिंदु : भुगतान करने का नया तरीका, देश की अर्थव्यवस्था में सहायक, सावधानी अपेक्षित
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में औपचारिक पत्र लिखिए : (i) आप दसवीं कक्षा के विद्यार्थी शोभा/शोभित हैं । विद्यालय में योग की कक्षाओं की नियमित व्यवस्था हेतु प्रधानाचार्य को एक पत्र लिखिए । अथवा (ii) आप शोभा/शोभित हैं । अपने क्षेत्र में पेय जल के बढ़ते संकट की ओर ध्यान दिलाने के लिए किसी दैनिक समाचार-पत्र के संपादक को पत्र लिखिए ।
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 60 शब्दों में सूचना लिखिए : (i) आप स्वयंसेवी संस्था 'रोशनी' की/के अध्यक्ष प्रणीति/प्रणीष हैं । 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' के अवसर पर मादक द्रव्यों से होने वाले नुकसान के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के लिए संस्था द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है । जन साधारण को इस बात की जानकारी देने के लिए एक सूचना तैयार कीजिए । अथवा (ii) आप अ.ब.स. विद्यालय के वरिष्ठ विज्ञान अध्यापिका/अध्यापक प्रणीति/प्रणीष हैं । आपके विद्यालय में 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस' के अवसर पर विज्ञान मेले का आयोजन होने वाला है । इस बारे में सभी विद्यार्थियों को जानकारी देने के लिए एक सूचना तैयार कीजिए ।
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 40 शब्दों में विज्ञापन लिखिए : (i) श्रीअन्न से नमकीन और मिष्ठान्न बनाने वाली कंपनी 'सेहत' की ओर से अपने उत्पादों की जानकारी देने तथा बिक्री बढ़ाने के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए । अथवा (ii) 'हरित धरा, स्वस्थ धरा' - वन संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय की ओर से एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए ।
(i) आप उत्कर्ष/प्रगति हैं । वर्तमान में तेज़ी से बदलते परिप्रेक्ष्य में किशोरों को आजीविका (करियर) संबंधी मार्गदर्शन की नितांत आवश्यकता है । इस विषय पर आधारित श्रृंखला शुरू किए जाने का निवेदन करते हुए दूरदर्शन निदेशालय को लगभग 80 शब्दों में एक ई-मेल लिखिए । अथवा (ii) 'जाड़े की शाम थी । आज रोज़ की तुलना में कोहरा अधिक ही घना था । मैं अपनी नृत्य-कक्षा से लौट रहा था ।' ...... - पंक्ति को आधार बनाकर लगभग 100 शब्दों में एक लघुकथा लिखिए ।
The same preparation, with Medha Ma’am — on your phone
Every question of every chapter with its model answer, practice questions in the board’s own shapes, 60 minutes of class a day, written answers marked, a test every Sunday and a WhatsApp report to parents.
Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.