CBSE Class 10 · Hindi B · board exam 2027
CBSE Class 10 Hindi B Question Paper 2024
The board’s 2024 question paper, set 4/3/1 — all 53 questions as printed; 40 objective answers from the board’s own key; full model answers for 3 written questions, how the answer begins for 9 more. Each question names its chapter, where that chapter’s most-asked questions are.
Full marks 80 · Time 3 h
Section A · Objective questions (40)
“जब गांधीजी जीवित थे, हम अपनी गुत्थियों को सुलझाने के लिए प्राय: उनके पास पहुँचा करते थे । परन्तु आज वह स्थूल रूप में हमारे बीच विद्यमान नहीं हैं । हमको अब पथ-निर्देश के लिए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उनके सिखाए सुन्दर उसूलों का आश्रय लेना होगा ।” उपर्युक्त शब्द 30 अप्रैल, 1948 को गांधीजी के सिद्धांतों का स्मरण करते हुए श्री गोविन्दवल्लभ पंत ने रेडियो में प्रसारित एक भाषण के दौरान कहे थे । पंत जी ने कहा सत्य और अहिंसा गांधीजी के जीवन का मूल मंत्र था । उन्होंने मूलत: इन्हीं दो उसूलों पर भारत की स्वतंत्रता के महल को खड़ा करने में खून-पसीना एक किया और जो सफलता उन्हें प्राप्त हुई वह अपूर्व है । गांधीजी का यह विश्वास था कि कोई भी सरकार तब तक लोकप्रिय नहीं हो सकती जब तक कि आधारत: इन दो सिद्धांतों का पालन न करे । सत्य और अहिंसा भारत की संस्कृति की आधारशिलाएँ हैं । हमारे पूर्वजों में से महावीर व बुद्ध प्रभृति बहुत से महापुरुषों ने अपनी शिक्षाओं में इन सिद्धांतों को सर्वोपरि स्थान दिया है । इन्हीं सिद्धांतों को व्यापक रूप देने और एक वृहद् मानव समुदाय के कष्ट निवारण के लिए उनको प्रयोग करने का श्रेय महात्माजी को ही है । परन्तु उनकी अहिंसा कायर की लाचारी का अन्तिम अस्त्र नहीं थी । उनकी अहिंसा उन बलवानों की अहिंसा है, जो किसी सदुद्देश्य के लिए करने या मरने में विश्वास रखते हैं । पश्चिम देशों ने गत दो महायुद्धों से कोई पाठ ग्रहण नहीं किया, जबकि इनसे विश्व को न केवल सामान की क्षति, बल्कि करोड़ों जान का नुकसान भी उठाना पड़ा है । ये राष्ट्र अब भी एक-दूसरे के विरुद्ध घृणा और संदेह का बीजारोपण कर रहे हैं । अभी समय है कि विश्व बापू की शिक्षाओं से शांति, भाईचारे और साम्प्रदायिक ऐक्य का पाठ ग्रहण करे । ‘जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पथ-निर्देश के लिए गांधीजी के द्वारा सिखाए उसूलों का आश्रय लेना होगा ।’ – पंत जी द्वारा ऐसा क्यों कहा गया ?
- (A) गांधीजी विश्व प्रसिद्ध व्यक्ति थे ।
- (B) गांधीजी आज हमारे बीच जीवित नहीं हैं । ✓
- (C) गांधीजी की शिक्षाओं से ही विश्व में शांति संभव है ।
- (D) गांधीजी ने देश को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए मार्ग प्रशस्त किया ।
Answer (the board’s key): (B)
“जब गांधीजी जीवित थे, हम अपनी गुत्थियों को सुलझाने के लिए प्राय: उनके पास पहुँचा करते थे । परन्तु आज वह स्थूल रूप में हमारे बीच विद्यमान नहीं हैं । हमको अब पथ-निर्देश के लिए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उनके सिखाए सुन्दर उसूलों का आश्रय लेना होगा ।” उपर्युक्त शब्द 30 अप्रैल, 1948 को गांधीजी के सिद्धांतों का स्मरण करते हुए श्री गोविन्दवल्लभ पंत ने रेडियो में प्रसारित एक भाषण के दौरान कहे थे । पंत जी ने कहा सत्य और अहिंसा गांधीजी के जीवन का मूल मंत्र था । उन्होंने मूलत: इन्हीं दो उसूलों पर भारत की स्वतंत्रता के महल को खड़ा करने में खून-पसीना एक किया और जो सफलता उन्हें प्राप्त हुई वह अपूर्व है । गांधीजी का यह विश्वास था कि कोई भी सरकार तब तक लोकप्रिय नहीं हो सकती जब तक कि आधारत: इन दो सिद्धांतों का पालन न करे । सत्य और अहिंसा भारत की संस्कृति की आधारशिलाएँ हैं । हमारे पूर्वजों में से महावीर व बुद्ध प्रभृति बहुत से महापुरुषों ने अपनी शिक्षाओं में इन सिद्धांतों को सर्वोपरि स्थान दिया है । इन्हीं सिद्धांतों को व्यापक रूप देने और एक वृहद् मानव समुदाय के कष्ट निवारण के लिए उनको प्रयोग करने का श्रेय महात्माजी को ही है । परन्तु उनकी अहिंसा कायर की लाचारी का अन्तिम अस्त्र नहीं थी । उनकी अहिंसा उन बलवानों की अहिंसा है, जो किसी सदुद्देश्य के लिए करने या मरने में विश्वास रखते हैं । पश्चिम देशों ने गत दो महायुद्धों से कोई पाठ ग्रहण नहीं किया, जबकि इनसे विश्व को न केवल सामान की क्षति, बल्कि करोड़ों जान का नुकसान भी उठाना पड़ा है । ये राष्ट्र अब भी एक-दूसरे के विरुद्ध घृणा और संदेह का बीजारोपण कर रहे हैं । अभी समय है कि विश्व बापू की शिक्षाओं से शांति, भाईचारे और साम्प्रदायिक ऐक्य का पाठ ग्रहण करे । गांधीजी द्वारा स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए किन जीवन-मूल्यों को महत्त्व दिया ?
- (A) सत्य और अहिंसा ✓
- (B) त्याग और बलिदान
- (C) संयम और उदारता
- (D) संघर्ष और वीरता
Answer (the board’s key): (A)
“जब गांधीजी जीवित थे, हम अपनी गुत्थियों को सुलझाने के लिए प्राय: उनके पास पहुँचा करते थे । परन्तु आज वह स्थूल रूप में हमारे बीच विद्यमान नहीं हैं । हमको अब पथ-निर्देश के लिए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उनके सिखाए सुन्दर उसूलों का आश्रय लेना होगा ।” उपर्युक्त शब्द 30 अप्रैल, 1948 को गांधीजी के सिद्धांतों का स्मरण करते हुए श्री गोविन्दवल्लभ पंत ने रेडियो में प्रसारित एक भाषण के दौरान कहे थे । पंत जी ने कहा सत्य और अहिंसा गांधीजी के जीवन का मूल मंत्र था । उन्होंने मूलत: इन्हीं दो उसूलों पर भारत की स्वतंत्रता के महल को खड़ा करने में खून-पसीना एक किया और जो सफलता उन्हें प्राप्त हुई वह अपूर्व है । गांधीजी का यह विश्वास था कि कोई भी सरकार तब तक लोकप्रिय नहीं हो सकती जब तक कि आधारत: इन दो सिद्धांतों का पालन न करे । सत्य और अहिंसा भारत की संस्कृति की आधारशिलाएँ हैं । हमारे पूर्वजों में से महावीर व बुद्ध प्रभृति बहुत से महापुरुषों ने अपनी शिक्षाओं में इन सिद्धांतों को सर्वोपरि स्थान दिया है । इन्हीं सिद्धांतों को व्यापक रूप देने और एक वृहद् मानव समुदाय के कष्ट निवारण के लिए उनको प्रयोग करने का श्रेय महात्माजी को ही है । परन्तु उनकी अहिंसा कायर की लाचारी का अन्तिम अस्त्र नहीं थी । उनकी अहिंसा उन बलवानों की अहिंसा है, जो किसी सदुद्देश्य के लिए करने या मरने में विश्वास रखते हैं । पश्चिम देशों ने गत दो महायुद्धों से कोई पाठ ग्रहण नहीं किया, जबकि इनसे विश्व को न केवल सामान की क्षति, बल्कि करोड़ों जान का नुकसान भी उठाना पड़ा है । ये राष्ट्र अब भी एक-दूसरे के विरुद्ध घृणा और संदेह का बीजारोपण कर रहे हैं । अभी समय है कि विश्व बापू की शिक्षाओं से शांति, भाईचारे और साम्प्रदायिक ऐक्य का पाठ ग्रहण करे । संदर्भ के अनुसार गद्यांश में ‘प्रभृति’ शब्द का सटीक अर्थ हो सकता है –
- (A) बड़े
- (B) बुद्धिमान
- (C) विद्वान
- (D) आदि/इत्यादि ✓
Answer (the board’s key): (D)
“जब गांधीजी जीवित थे, हम अपनी गुत्थियों को सुलझाने के लिए प्राय: उनके पास पहुँचा करते थे । परन्तु आज वह स्थूल रूप में हमारे बीच विद्यमान नहीं हैं । हमको अब पथ-निर्देश के लिए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उनके सिखाए सुन्दर उसूलों का आश्रय लेना होगा ।” उपर्युक्त शब्द 30 अप्रैल, 1948 को गांधीजी के सिद्धांतों का स्मरण करते हुए श्री गोविन्दवल्लभ पंत ने रेडियो में प्रसारित एक भाषण के दौरान कहे थे । पंत जी ने कहा सत्य और अहिंसा गांधीजी के जीवन का मूल मंत्र था । उन्होंने मूलत: इन्हीं दो उसूलों पर भारत की स्वतंत्रता के महल को खड़ा करने में खून-पसीना एक किया और जो सफलता उन्हें प्राप्त हुई वह अपूर्व है । गांधीजी का यह विश्वास था कि कोई भी सरकार तब तक लोकप्रिय नहीं हो सकती जब तक कि आधारत: इन दो सिद्धांतों का पालन न करे । सत्य और अहिंसा भारत की संस्कृति की आधारशिलाएँ हैं । हमारे पूर्वजों में से महावीर व बुद्ध प्रभृति बहुत से महापुरुषों ने अपनी शिक्षाओं में इन सिद्धांतों को सर्वोपरि स्थान दिया है । इन्हीं सिद्धांतों को व्यापक रूप देने और एक वृहद् मानव समुदाय के कष्ट निवारण के लिए उनको प्रयोग करने का श्रेय महात्माजी को ही है । परन्तु उनकी अहिंसा कायर की लाचारी का अन्तिम अस्त्र नहीं थी । उनकी अहिंसा उन बलवानों की अहिंसा है, जो किसी सदुद्देश्य के लिए करने या मरने में विश्वास रखते हैं । पश्चिम देशों ने गत दो महायुद्धों से कोई पाठ ग्रहण नहीं किया, जबकि इनसे विश्व को न केवल सामान की क्षति, बल्कि करोड़ों जान का नुकसान भी उठाना पड़ा है । ये राष्ट्र अब भी एक-दूसरे के विरुद्ध घृणा और संदेह का बीजारोपण कर रहे हैं । अभी समय है कि विश्व बापू की शिक्षाओं से शांति, भाईचारे और साम्प्रदायिक ऐक्य का पाठ ग्रहण करे । सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को व्यापक और व्यावहारिक रूप दिया –
- (A) बुद्ध ने
- (B) गांधी ने ✓
- (C) महावीर ने
- (D) पंत ने
Answer (the board’s key): (B)
“जब गांधीजी जीवित थे, हम अपनी गुत्थियों को सुलझाने के लिए प्राय: उनके पास पहुँचा करते थे । परन्तु आज वह स्थूल रूप में हमारे बीच विद्यमान नहीं हैं । हमको अब पथ-निर्देश के लिए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उनके सिखाए सुन्दर उसूलों का आश्रय लेना होगा ।” उपर्युक्त शब्द 30 अप्रैल, 1948 को गांधीजी के सिद्धांतों का स्मरण करते हुए श्री गोविन्दवल्लभ पंत ने रेडियो में प्रसारित एक भाषण के दौरान कहे थे । पंत जी ने कहा सत्य और अहिंसा गांधीजी के जीवन का मूल मंत्र था । उन्होंने मूलत: इन्हीं दो उसूलों पर भारत की स्वतंत्रता के महल को खड़ा करने में खून-पसीना एक किया और जो सफलता उन्हें प्राप्त हुई वह अपूर्व है । गांधीजी का यह विश्वास था कि कोई भी सरकार तब तक लोकप्रिय नहीं हो सकती जब तक कि आधारत: इन दो सिद्धांतों का पालन न करे । सत्य और अहिंसा भारत की संस्कृति की आधारशिलाएँ हैं । हमारे पूर्वजों में से महावीर व बुद्ध प्रभृति बहुत से महापुरुषों ने अपनी शिक्षाओं में इन सिद्धांतों को सर्वोपरि स्थान दिया है । इन्हीं सिद्धांतों को व्यापक रूप देने और एक वृहद् मानव समुदाय के कष्ट निवारण के लिए उनको प्रयोग करने का श्रेय महात्माजी को ही है । परन्तु उनकी अहिंसा कायर की लाचारी का अन्तिम अस्त्र नहीं थी । उनकी अहिंसा उन बलवानों की अहिंसा है, जो किसी सदुद्देश्य के लिए करने या मरने में विश्वास रखते हैं । पश्चिम देशों ने गत दो महायुद्धों से कोई पाठ ग्रहण नहीं किया, जबकि इनसे विश्व को न केवल सामान की क्षति, बल्कि करोड़ों जान का नुकसान भी उठाना पड़ा है । ये राष्ट्र अब भी एक-दूसरे के विरुद्ध घृणा और संदेह का बीजारोपण कर रहे हैं । अभी समय है कि विश्व बापू की शिक्षाओं से शांति, भाईचारे और साम्प्रदायिक ऐक्य का पाठ ग्रहण करे । गद्यांश के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं, सही उत्तर के लिए उचित विकल्प चुनकर लिखिए : (i) सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही सरकार लोकप्रियता प्राप्त कर सकती है । (ii) युद्ध जन-धन की क्षति का कारक है । (iii) अहिंसा कायर की विवशता का अस्त्र है । विकल्प :
- (A) केवल कथन (i) सही है ।
- (B) कथन (i) और (ii) सही हैं । ✓
- (C) कथन (ii) और (iii) सही हैं ।
- (D) कथन (i), (ii) और (iii) सही हैं ।
Answer (the board’s key): (B)
गरमियों के दिन ‘छुट्टी और यात्रा’ पर जाने के दिन होते हैं। ‘छुट्टी पर जाने’ का यह अनुराग काफी आधुनिक है, क्योंकि लोग ‘कर्मोन्मत्त’ बन गए हैं और वे जो कुछ भी करते हैं या नहीं करते हैं, वह उनके लिए तनाव पैदा करता है। पहले ‘छुट्टी’ शब्द मूल रूप से धार्मिक दिनों के लिए इस्तेमाल होता था; आजकल इसका मतलब सामान्य दिनों के विपरीत आराम या विश्राम का कोई विशेष दिन है। लेकिन असली सवाल है कि छुट्टी पर जाने से पहले क्या आपका मन और शरीर नई जगह का आनंद लेने की स्थिति में है ? यात्रा की सारी तैयारी बाहरी होती है, लोग विश्राम की भाषा पूरी तरह भूल चुके हैं। जब आप कुछ नहीं करते, तो यह मत सोचना कि समय बर्बाद हो रहा है। कुछ न करने के दौरान आपकी ऊर्जा खुद को स्वस्थ करती है। सतत काम करते रहने का जुनून ही आपको छुट्टी का आनंद नहीं लेने देता। आप जहाँ हैं, वहाँ मौजूद रहना सीखें, इसका अर्थ है – अभी और यहीं होना। बाहरी दुनिया के बिना जीवित रहना सीखें। इसका स्पष्ट मतलब है, अपने साथ रहना शुरू करें, खुद को जानना सीखें। छुट्टी का मतलब यह कदापि नहीं कि आप सिर्फ कामकाज से दूरी बनाएँ, बल्कि अपने मन, उसके दबावों और उलझनों से भी दूरी बनाइए। ‘छुट्टी पर जाने का यह अनुराग काफी आधुनिक है’ – पंक्ति का आशय है –
- (A) प्राचीन समय में लोग छुट्टियों का आनंद घर पर ही लेते थे।
- (B) छुट्टियों में घर से बाहर जाने का प्रचलन वर्तमान समय की देन है। ✓
- (C) वर्तमान समय में छुट्टियों के प्रति प्रेम बढ़ा है।
- (D) कार्यस्थलों/शिक्षा केन्द्रों में छुट्टी पर जाने का प्रचलन बढ़ा है।
Answer (the board’s key): (B)
गरमियों के दिन ‘छुट्टी और यात्रा’ पर जाने के दिन होते हैं। ‘छुट्टी पर जाने’ का यह अनुराग काफी आधुनिक है, क्योंकि लोग ‘कर्मोन्मत्त’ बन गए हैं और वे जो कुछ भी करते हैं या नहीं करते हैं, वह उनके लिए तनाव पैदा करता है। पहले ‘छुट्टी’ शब्द मूल रूप से धार्मिक दिनों के लिए इस्तेमाल होता था; आजकल इसका मतलब सामान्य दिनों के विपरीत आराम या विश्राम का कोई विशेष दिन है। लेकिन असली सवाल है कि छुट्टी पर जाने से पहले क्या आपका मन और शरीर नई जगह का आनंद लेने की स्थिति में है ? यात्रा की सारी तैयारी बाहरी होती है, लोग विश्राम की भाषा पूरी तरह भूल चुके हैं। जब आप कुछ नहीं करते, तो यह मत सोचना कि समय बर्बाद हो रहा है। कुछ न करने के दौरान आपकी ऊर्जा खुद को स्वस्थ करती है। सतत काम करते रहने का जुनून ही आपको छुट्टी का आनंद नहीं लेने देता। आप जहाँ हैं, वहाँ मौजूद रहना सीखें, इसका अर्थ है – अभी और यहीं होना। बाहरी दुनिया के बिना जीवित रहना सीखें। इसका स्पष्ट मतलब है, अपने साथ रहना शुरू करें, खुद को जानना सीखें। छुट्टी का मतलब यह कदापि नहीं कि आप सिर्फ कामकाज से दूरी बनाएँ, बल्कि अपने मन, उसके दबावों और उलझनों से भी दूरी बनाइए। ‘कर्मोन्मत्त’ शब्द का अर्थ है –
- (A) कार्य से विमुख
- (B) कार्य करने का आदी ✓
- (C) कार्य न करने का आदी
- (D) आराम करने का आदी
Answer (the board’s key): (B)
गरमियों के दिन ‘छुट्टी और यात्रा’ पर जाने के दिन होते हैं। ‘छुट्टी पर जाने’ का यह अनुराग काफी आधुनिक है, क्योंकि लोग ‘कर्मोन्मत्त’ बन गए हैं और वे जो कुछ भी करते हैं या नहीं करते हैं, वह उनके लिए तनाव पैदा करता है। पहले ‘छुट्टी’ शब्द मूल रूप से धार्मिक दिनों के लिए इस्तेमाल होता था; आजकल इसका मतलब सामान्य दिनों के विपरीत आराम या विश्राम का कोई विशेष दिन है। लेकिन असली सवाल है कि छुट्टी पर जाने से पहले क्या आपका मन और शरीर नई जगह का आनंद लेने की स्थिति में है ? यात्रा की सारी तैयारी बाहरी होती है, लोग विश्राम की भाषा पूरी तरह भूल चुके हैं। जब आप कुछ नहीं करते, तो यह मत सोचना कि समय बर्बाद हो रहा है। कुछ न करने के दौरान आपकी ऊर्जा खुद को स्वस्थ करती है। सतत काम करते रहने का जुनून ही आपको छुट्टी का आनंद नहीं लेने देता। आप जहाँ हैं, वहाँ मौजूद रहना सीखें, इसका अर्थ है – अभी और यहीं होना। बाहरी दुनिया के बिना जीवित रहना सीखें। इसका स्पष्ट मतलब है, अपने साथ रहना शुरू करें, खुद को जानना सीखें। छुट्टी का मतलब यह कदापि नहीं कि आप सिर्फ कामकाज से दूरी बनाएँ, बल्कि अपने मन, उसके दबावों और उलझनों से भी दूरी बनाइए। यात्रा पर निकलने से पहले क्या आवश्यक है ?
- (A) गंतव्य स्थल की जानकारी हासिल करना
- (B) गंतव्य स्थल की टिकट बुक कराना
- (C) आवश्यक सामान को बैग में डालना
- (D) तन और मन को आनंद लेने के लिए तैयार करना ✓
Answer (the board’s key): (D)
गरमियों के दिन ‘छुट्टी और यात्रा’ पर जाने के दिन होते हैं। ‘छुट्टी पर जाने’ का यह अनुराग काफी आधुनिक है, क्योंकि लोग ‘कर्मोन्मत्त’ बन गए हैं और वे जो कुछ भी करते हैं या नहीं करते हैं, वह उनके लिए तनाव पैदा करता है। पहले ‘छुट्टी’ शब्द मूल रूप से धार्मिक दिनों के लिए इस्तेमाल होता था; आजकल इसका मतलब सामान्य दिनों के विपरीत आराम या विश्राम का कोई विशेष दिन है। लेकिन असली सवाल है कि छुट्टी पर जाने से पहले क्या आपका मन और शरीर नई जगह का आनंद लेने की स्थिति में है ? यात्रा की सारी तैयारी बाहरी होती है, लोग विश्राम की भाषा पूरी तरह भूल चुके हैं। जब आप कुछ नहीं करते, तो यह मत सोचना कि समय बर्बाद हो रहा है। कुछ न करने के दौरान आपकी ऊर्जा खुद को स्वस्थ करती है। सतत काम करते रहने का जुनून ही आपको छुट्टी का आनंद नहीं लेने देता। आप जहाँ हैं, वहाँ मौजूद रहना सीखें, इसका अर्थ है – अभी और यहीं होना। बाहरी दुनिया के बिना जीवित रहना सीखें। इसका स्पष्ट मतलब है, अपने साथ रहना शुरू करें, खुद को जानना सीखें। छुट्टी का मतलब यह कदापि नहीं कि आप सिर्फ कामकाज से दूरी बनाएँ, बल्कि अपने मन, उसके दबावों और उलझनों से भी दूरी बनाइए। गद्यांश के अनुसार कुछ न करने से भी समय बर्बाद नहीं होता, क्यों ?
- (A) शरीर की ऊर्जा नष्ट नहीं होती।
- (B) शरीर की ऊर्जा खुद को स्वस्थ करती है। ✓
- (C) हम आत्मावलोकन करते हैं।
- (D) तन और मन को विश्राम मिलता है।
Answer (the board’s key): (B)
गरमियों के दिन ‘छुट्टी और यात्रा’ पर जाने के दिन होते हैं। ‘छुट्टी पर जाने’ का यह अनुराग काफी आधुनिक है, क्योंकि लोग ‘कर्मोन्मत्त’ बन गए हैं और वे जो कुछ भी करते हैं या नहीं करते हैं, वह उनके लिए तनाव पैदा करता है। पहले ‘छुट्टी’ शब्द मूल रूप से धार्मिक दिनों के लिए इस्तेमाल होता था; आजकल इसका मतलब सामान्य दिनों के विपरीत आराम या विश्राम का कोई विशेष दिन है। लेकिन असली सवाल है कि छुट्टी पर जाने से पहले क्या आपका मन और शरीर नई जगह का आनंद लेने की स्थिति में है ? यात्रा की सारी तैयारी बाहरी होती है, लोग विश्राम की भाषा पूरी तरह भूल चुके हैं। जब आप कुछ नहीं करते, तो यह मत सोचना कि समय बर्बाद हो रहा है। कुछ न करने के दौरान आपकी ऊर्जा खुद को स्वस्थ करती है। सतत काम करते रहने का जुनून ही आपको छुट्टी का आनंद नहीं लेने देता। आप जहाँ हैं, वहाँ मौजूद रहना सीखें, इसका अर्थ है – अभी और यहीं होना। बाहरी दुनिया के बिना जीवित रहना सीखें। इसका स्पष्ट मतलब है, अपने साथ रहना शुरू करें, खुद को जानना सीखें। छुट्टी का मतलब यह कदापि नहीं कि आप सिर्फ कामकाज से दूरी बनाएँ, बल्कि अपने मन, उसके दबावों और उलझनों से भी दूरी बनाइए। ‘जहाँ हैं, वहाँ मौजूद रहना’ का अभिप्राय है –
- (A) निर्धारित स्थल पर उपस्थित रहना।
- (B) बिना हिले-डुले एक स्थान पर बने रहना।
- (C) एक ही स्थान पर लंबे समय तक बने रहना।
- (D) शारीरिक उपस्थिति के साथ मानसिक उपस्थिति का होना। ✓
Answer (the board’s key): (D)
निम्नलिखित में से क्रिया-विशेषण पदबंध का उदाहरण छाँटकर लिखिए :
- (A) मैं तो खेलते-कूदते दरजे में अव्वल आ गया ।
- (B) मैं तो खेलते-कूदते दरजे में अव्वल आ गया ।
- (C) मैं तो खेलते-कूदते दरजे में अव्वल आ गया । ✓
- (D) मैं तो खेलते-कूदते दरजे में अव्वल आ गया ।
Answer (the board’s key): (C)
किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों, बिल्लियों की तस्वीरें बनाया करते थे । - रेखांकित पदबंध का भेद होगा -
- (A) संज्ञा पदबंध ✓
- (B) सर्वनाम पदबंध
- (C) विशेषण पदबंध
- (D) क्रिया पदबंध
Answer (the board’s key): (A)
किसी तरह आँचरहित एक ठंडा और उबाऊ दिन गुजरने लगा । - इस वाक्य में विशेषण पदबंध है -
- (A) किसी तरह आँचरहित
- (B) ठंडा और उबाऊ दिन
- (C) दिन गुजरने लगा
- (D) आँचरहित एक ठंडा और उबाऊ ✓
Answer (the board’s key): (D)
रोने की आवाज लगातार ऊँची होती जा रही थी । रेखांकित पदबंध का भेद है -
- (A) संज्ञा पदबंध
- (B) सर्वनाम पदबंध
- (C) क्रिया पदबंध ✓
- (D) क्रिया-विशेषण पदबंध
Answer (the board’s key): (C)
'सूरज की अंतिम रंग-बिरंगी किरणों को समुद्र पर निहारने लगा ।' इस वाक्य में संज्ञा पदबंध का उदाहरण है -
- (A) सूरज की अंतिम
- (B) अंतिम रंग-बिरंगी
- (C) सूरज की अंतिम रंग-बिरंगी किरणों ✓
- (D) रंग-बिरंगी किरणों को समुद्र पर
Answer (the board’s key): (C)
निम्नलिखित में से उपयुक्त सरल वाक्य छाँटकर लिखिए :
- (A) गायन इतना प्रभावी था कि वह अपनी सुध-बुध खोने लगा।
- (B) लहरों के एक प्रबल वेग ने उसकी तंद्रा भंग की। ✓
- (C) लोग मुसीबत में उसे स्मरण करते और वह वहाँ पहुँच जाता।
- (D) जो सभ्यता जितनी पुरानी होती है उसके किस्से ज्यादा सुनने को मिलते हैं।
Answer (the board’s key): (B)
‘वामीरो और तताँरा को समझाने-बुझाने के कई प्रयास हुए किंतु दोनों अडिग रहे ।’ - रचना के आधार पर वाक्य-भेद है -
- (A) सरल वाक्य
- (B) संयुक्त वाक्य ✓
- (C) मिश्र वाक्य
- (D) साधारण वाक्य
Answer (the board’s key): (B)
स्तंभ-1 और स्तंभ-2 को सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए :
- (A) (1-III), (2-I), (3-II) ✓
- (B) (1-II), (2-III), (3-I)
- (C) (1-I), (2-III), (3-II)
- (D) (1-III), (2-II), (3-I)
Answer (the board’s key): (A)
निम्नलिखित वाक्यों में संयुक्त वाक्य है :
- (A) तताँरा को जैसे ही होश आया वह छटपटाने लगा।
- (B) रीति अनुसार दोनों को एक ही गाँव का होना आवश्यक था।
- (C) धीरे-धीरे विभिन्न कार्यक्रम शुरू हुए।
- (D) लोगों ने उसे ढूँढने की बहुत कोशिश की किंतु उसका कोई पता नहीं चला। ✓
Answer (the board’s key): (D)
‘तताँरा की तलवार लोगों के लिए विलक्षण रहस्य थी ।’ - इस वाक्य का मिश्र वाक्य होगा -
- (A) तताँरा के पास एक तलवार थी और वह लोगों के लिए विलक्षण रहस्य थी।
- (B) तताँरा की तलवार विलक्षण थी इसलिए वह लोगों के लिए रहस्य थी।
- (C) तताँरा के पास जो तलवार थी वह लोगों के लिए विलक्षण रहस्य थी। ✓
- (D) तताँरा की विलक्षण तलवार लोगों के लिए एक रहस्य थी।
Answer (the board’s key): (C)
‘आत्मकथा’ समस्तपद कौन-से समास का उदाहरण है ?
- (A) अव्ययीभाव समास
- (B) द्विगु समास
- (C) तत्पुरुष समास ✓
- (D) कर्मधारय समास
Answer (the board’s key): (C)
‘मनोरोग’ समस्तपद का विग्रह होगा -
- (A) मन का रोग ✓
- (B) मन पर रोग
- (C) मन में रोगी
- (D) मन के समान रोगी
Answer (the board’s key): (A)
निम्नलिखित में से अव्ययीभाव समास का उदाहरण है :
- (A) पराधीन
- (B) चतुर्भुज
- (C) महाशय
- (D) आजीवन ✓
Answer (the board’s key): (D)
‘शिरोवेदना’ समस्तपद के लिए सही समास-विग्रह और समास का चयन कर लिखिए ।
- (A) शिर में वेदना - तत्पुरुष ✓
- (B) शिर के लिए वेदना - कर्मधारय
- (C) शिर और वेदना - बहुव्रीहि
- (D) शिर है जो वेदना - द्वन्द्व
Answer (the board’s key): (A)
निम्नलिखित में कौन-सा समस्तपद कर्मधारय समास का उदाहरण नहीं है ?
- (A) कापुरुष
- (B) श्वेतकमल
- (C) विद्यापति ✓
- (D) क्रोधाग्नि
Answer (the board’s key): (C)
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए :
- (A) (1) और (2) ✓
- (B) (2) और (3)
- (C) (1) और (3)
- (D) (2) और (4)
Answer (the board’s key): (A)
मुहावरे और अर्थ के उचित मेल वाले विकल्प का चयन कर लिखिए ।
- (A) तू-तू, मैं-मैं - लड़ाई झगड़ा ✓
- (B) तारे गिनना - समय का हिसाब लगाना
- (C) दाँतों तले उँगली दबाना - बूते से बाहर होना
- (D) बाल-बाल बचना - गंजे होने से बचना
Answer (the board’s key): (A)
‘बुरी तरह पीड़ा पहुँचाना’ अर्थ के लिए उपयुक्त मुहावरा है -
- (A) हेकड़ी जताना
- (B) छुट्टी करना
- (C) हाथ तोड़ना
- (D) खाल खींचना ✓
Answer (the board’s key): (D)
“मास्टर जी को धोखा देना आसान नहीं वे तो ________ लेते हैं ।” वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति उचित मुहावरे द्वारा कीजिए ।
- (A) आग-बबूला होना
- (B) उड़ती चिड़िया के पर गिनना ✓
- (C) जमीन आसमान एक करना
- (D) तिल का ताड़ बनाना
Answer (the board’s key): (B)
“महँगाई इतनी है कि बहुत परिश्रम करने के बाद भी घर का गुजारा नहीं चलता ।” वाक्य में रेखांकित अंश (बहुत परिश्रम करने) के लिए कौन-सा मुहावरा प्रयुक्त करना उचित रहेगा ?
- (A) खाक छानना
- (B) सिर पर कफन बाँधना
- (C) नक्शा बनाना
- (D) दिन-रात एक करना ✓
Answer (the board’s key): (D)
‘जरा भी अच्छा न लगना’ अर्थ के लिए उचित मुहावरा है -
- (A) आस्तीन का साँप
- (B) फूटी आँख न सुहाना ✓
- (C) दूध की मक्खी
- (D) सिर चकराना
Answer (the board’s key): (B)
सुखिया सब संसार है, खाये अरू सोवै। दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ। राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ।। पहले दोहे में 'सोना' और 'जागना' प्रतीकअर्थ है -
- (A) अज्ञानता और ज्ञान का ✓
- (B) निष्क्रियता और सक्रियता का
- (C) अचेतनता और चेतनता का
- (D) निर्जीवता और सजीवता का
Answer (the board’s key): (A)
सुखिया सब संसार है, खाये अरू सोवै। दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ। राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ।। कबीर दुखी हैं क्योंकि वे -
- (A) एकाकी जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
- (B) ईश्वर से वियोग के कारण व्यथित हैं। ✓
- (C) सांसारिक सुखों का भोग नहीं कर पा रहे हैं।
- (D) ईश्वरीय सत्य से लोगों को परिचित नहीं करवा पा रहे हैं।
Answer (the board’s key): (B)
सुखिया सब संसार है, खाये अरू सोवै। दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ। राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ।। 'मंत्र न लगना' का आशय है -
- (A) मंत्रों का निष्फल होना
- (B) पूजा-पाठ का काम न आना
- (C) कोई उपाय काम न आना ✓
- (D) मंत्रोच्चार की विधि न जानना
Answer (the board’s key): (C)
सुखिया सब संसार है, खाये अरू सोवै। दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ। राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ।। राम वियोगी व्यक्ति की तुलना किससे की गई है ?
- (A) विक्षिप्त व्यक्ति से
- (B) विरह रूपी व्यक्ति से
- (C) विष युक्त सर्प के तन से
- (D) विरह रूपी सर्प से ग्रसित व्यक्ति से ✓
Answer (the board’s key): (D)
सुखिया सब संसार है, खाये अरू सोवै। दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ। राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ।। निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए : कथन : सांसारिक मनुष्य सुख-पूर्वक जीवन यापन कर रहे हैं। कारण : वह भौतिक सुखों को ही सच्चा सुख मानते हैं।
- (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
- (B) कारण सही है, किंतु कथन गलत है।
- (C) कथन सही है, लेकिन कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
- (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है। ✓
Answer (the board’s key): (D)
‘मनुष्यता’ कविता के अनुसार संसार में मनुष्यों की स्थिति में भिन्नता का कारण है -
- (A) भौगोलिक परिस्थितियाँ
- (B) आर्थिक परिस्थितियाँ
- (C) मनुष्य द्वारा किए गए उसके कर्म ✓
- (D) मनुष्य द्वारा प्राप्त किया गया ज्ञान
Answer (the board’s key): (C)
‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’ - पंक्ति का आशय है -
- (A) देश के आत्मसम्मान और गौरव पर आँच न आने देना। ✓
- (B) हिमालय की ओर से शत्रुओं को देश में प्रवेश न करने देना।
- (C) देश की आन-बान-शान हिमालय की रक्षा करना।
- (D) हिमालय की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान करना।
Answer (the board’s key): (A)
'व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।' - पंक्ति का भाव है -
- (A) जीवन की प्रत्येक घटना किसी उद्देश्य को लेकर घटित होती है।
- (B) सुख-दुख का सम्मिश्रण ही जीवन का आधार है।
- (C) विपरीत परिस्थितियाँ मनुष्य को सक्षम बनाने में सहायक हैं। ✓
- (D) विपरीत परिस्थितियाँ मनुष्य को सुखों की ओर अग्रसर करती हैं।
Answer (the board’s key): (C)
बड़े भाई साहब को लेखक की निगरानी का पूरा और जन्मसिद्ध अधिकार क्यों था ?
- (A) आयु में बड़े होने के कारण ✓
- (B) बड़ी जमात में पढ़ने के कारण
- (C) अधिक गुणी होने के कारण
- (D) पारिवारिक संस्कारों के कारण
Answer (the board’s key): (A)
Section B · Written questions (13)
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : गद्यांश (गद्यांश का पाठ यहाँ दिया गया है) ग्वालियर से बंबई की दूरी ने संसार को काफ़ी कुछ बदल दिया है । वर्सोवा में आज जहाँ मेरा घर है, पहले यहाँ दूर तक जंगल था । पेड़ थे, परिंदे थे और दूसरे जानवर थे । अब यहाँ समंदर के किनारे लंबी-चौड़ी बस्ती बन गई है । इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया है । इनमें से कुछ शहर छोड़कर चले गए हैं । जो नहीं जा सके हैं उन्होंने यहाँ-वहाँ डेरा डाल लिया है । इनमें से दो कबूतरों ने मेरे फ्लैट के एक मचान में घोंसला बना लिया है । बच्चे अभी छोटे हैं । उनके खिलाने-पिलाने की जिम्मेदारी अभी बड़े कबूतरों की है । वे दिन में कई-कई बार आते-जाते हैं । और क्यों न आएँ-जाएँ आखिर उनका भी घर है । लेकिन उनके आने-जाने से हमें परेशानी भी होती हैं । वे कभी किसी चीज को गिराकर तोड़ देते हैं । कभी मेरी लाइब्रेरी में घुसकर कबीर या मिर्ज़ा ग़ालिब को सताने लगते हैं । इस रोज़-रोज़ की परेशानी से तंग आकर मेरी पत्नी ने उस जगह जहाँ उनका आशियाना था, एक जाली लगा दी है, उनके बच्चों को दूसरी जगह कर दिया है । उनके आने की खिड़की को भी बंद किया जाने लगा है । खिड़की के बाहर अब दोनों कबूतर रातभर खामोश और उदास बैठे रहते हैं । (i) पहले वर्सोवा की क्या स्थिति थी ? (A) दूर तक सुनसान था । (B) समुद्र किनारे बस्ती थी । (C) आवागमन के साधन नहीं थे । (D) प्राकृतिक परिवेश था । (ii) ‘इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया’ - पंक्ति संकेत करती है - (A) बढ़ते शहरीकरण के दुष्प्रभावों की ओर (B) बढ़ते शहरीकरण से जीव-जंतुओं के बेघर होने की ओर (C) जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आशियानों से चले जाने की ओर (D) जीव-जंतुओं की प्रजातियाँ विलुप्त हो जाने की ओर (iii) ‘जो नहीं जा सके हैं उन्होंने यहाँ-वहाँ डेरा डाल लिया है’ - पंक्ति में ‘डेरा डालना’ का आशय है - (A) स्थायी पड़ाव बनाना । (B) अस्थायी पड़ाव बनाना । (C) जबरदस्ती घर बनाना । (D) किसी भी प्रकार से रहना ।

Medha Ma’am
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Model answer · comprehension passage, pigeons and urbanization
- 1.पहले वर्सोवा की स्थिति यह थी कि वहाँ प्राकृतिक परिवेश था। सही विकल्प (D) प्राकृतिक परिवेश था है, क्योंकि पहले वहाँ दूर तक जंगल था, पेड़ थे, परिंदे थे और दूसरे जानवर थे।1.5 marks
- 2.'इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया' पंक्ति बढ़ते शहरीकरण से जीव-जंतुओं के बेघर होने की ओर संकेत करती है। सही विकल्प (B) बढ़ते शहरीकरण से जीव-जंतुओं के बेघर होने की ओर है, क्योंकि समंदर के किनारे बनी लंबी-चौड़ी बस्ती ने अनेक परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया है, जिससे वे बेघर हो गए हैं।2 marks
- 3.'जो नहीं जा सके हैं उन्होंने यहाँ-वहाँ डेरा डाल लिया है' पंक्ति में 'डेरा डालना' का आशय अस्थायी पड़ाव बनाना है। सही विकल्प (B) अस्थायी पड़ाव बनाना है, क्योंकि शहरीकरण के कारण बेघर हुए जो जीव-जंतु शहर नहीं छोड़ पाए, उन्होंने स्थायी घर के अभाव में इधर-उधर केवल अस्थायी पड़ाव बना लिया है।1.5 marks
- हर उत्तर में सही विकल्प का अक्षर जैसे (D), (B), (B) अवश्य लिखें।
- पहले प्रश्न में 'प्राकृतिक परिवेश' शब्द अवश्य लिखें।
- दूसरे प्रश्न में 'शहरीकरण' और 'बेघर' दोनों शब्द तथा तीसरे में 'अस्थायी पड़ाव' शब्द अवश्य लिखें।
Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए : (क) ‘बड़े भाई साहब’ कहानी के अनुसार एक जमाना था कि लोग आठवाँ दरजा पास करके नायक तहसीलदार हो जाते थे, वर्तमान में क्या स्थिति है और इसके क्या कारण हैं ? (ख) ‘डायरी का पन्ना’ पाठ से उद्धृत पंक्ति ‘आज जो बात थी वह निराली थी ।’ - का आशय स्पष्ट कीजिए । (ग) ‘झेन की देन’ पाठ में दिमाग को आराम देने के लिए ‘टी. सेरेमनी’ का उल्लेख किया गया है, टी. सेरेमनी का वर्णन करते हुए लिखिए कि क्या हमारे देश में भी इस प्रकार का कोई उत्सव या विधि अपनाई जाती है ? स्पष्ट कीजिए ।

Medha Ma’am
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Model answer · Education then and now
- 1.(क) आज की स्थिति बिलकुल बदल गई है। ‘बड़े भाई साहब’ कहानी में भाई साहब बताते हैं कि एक ज़माना था जब लोग आठवाँ दरजा पास करके नायब तहसीलदार हो जाते थे। कितने ही मिडिलची आगे चलकर अव्वल दरजे के डिप्टी मैजिस्ट्रेट, सुपरिटेंडेंट, लीडर और समाचारपत्रों के संपादक बने। आज आठवीं पास व्यक्ति को ऐसा कोई पद नहीं मिलता। आज तो स्नातक और स्नातकोत्तर पढ़े युवा भी अच्छी नौकरी के लिए भटकते हैं।1 mark
- 2.इसके कई कारण हैं। पहला, जनसंख्या बढ़ी है और पढ़े-लिखे लोगों की संख्या भी बहुत बढ़ गई है, पर नौकरियाँ उतनी नहीं बढ़ीं। दूसरा, हर पद के लिए कड़ी प्रतियोगिता होती है, इसलिए ऊँची डिग्री और प्रतियोगी परीक्षा पास करना ज़रूरी हो गया है। तीसरा, आज के काम के लिए विशेष योग्यता और तकनीकी कौशल चाहिए, जो केवल किताबी पढ़ाई से नहीं आता।2 marks
- 3.(ख) ‘आज जो बात थी वह निराली थी’ का आशय यह है कि स्वतंत्रता दिवस मनाने का वह दिन कलकत्ता के लोगों के लिए साधारण नहीं था। पुलिस कमिश्नर ने नोटिस निकाला था कि सभा आयोजित नहीं की जा सकती और जो कर्मचारी सभा में भाग लेंगे, वे दोषी समझे जाएँगे। इस नोटिस के बाद भी लोग डरे नहीं, उन्होंने इसकी परवाह नहीं की और भारी संख्या में सभा में पहुँचे। सरकारी आदेश को खुली चुनौती देने वाला लोगों का यही जोश और साहस उस दिन को निराला बनाता था।3 marks
- (क) में पहले कहानी की बात लिखिए कि ‘आठवाँ दरजा पास करके नायब तहसीलदार हो जाते थे’, फिर आज की स्थिति और उसके कारण अलग-अलग लिखिए।
- (क) के कारणों में बढ़ती जनसंख्या, कड़ी प्रतियोगिता और विशेष योग्यता की ज़रूरत तीनों लिखिए।
- (ख) में पुलिस कमिश्नर के नोटिस की दोनों बातें लिखिए: सभा आयोजित न की जा सकने की बात और भाग लेने वाले कर्मचारियों को दोषी समझे जाने की बात।
Marks split as in the board’s published marking scheme
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में वर्णित पर्वतीय प्रदेश की सुंदरता का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए

Medha Ma’am
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Model answer · mountain beauty in monsoon
- 1.'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में सुमित्रानंदन पंत ने पावस (वर्षा ऋतु) में पर्वतीय प्रदेश के पल-पल बदलते प्रकृति-वेश का बहुत सुंदर वर्णन किया है। वर्षा से पहले मेखलाकार (करधनी के आकार का) विशाल पर्वत अपने सहस्र दृग-सुमन, यानी फूलों रूपी हज़ारों आँखों से, अपनी तलहटी में फैले दर्पण जैसे बड़े ताल में अपनी छवि देखता है और उस पर मुग्ध होता है। पर्वत की चोटियों से झाग भरकर गिरते झरने मोती की लड़ियों जैसे सुंदर लगते हैं और पर्वत के गौरव का गान करते लगते हैं। पर्वत के उर से उठे ऊँचे शाल के वृक्ष शांत आकाश की ओर एकटक झाँकते दिखते हैं। वर्षा के समय अचानक बादलों से घिरकर पर्वत अदृश्य हो जाता है और मूसलाधार वर्षा होती है, मानो अंबर भू पर टूट पड़ा हो। पूरा पर्वतीय दृश्य छिप जाता है और झरनों की केवल आवाज़ बचती है। शाल भयभीत होकर धरती में धँसे लगते हैं और ताल से उठते धुएँ के कारण चारों ओर धुआँ-धुआँ सा दिखाई देता है, मानो इंद्र जलद-यान में घूमता हुआ इंद्रजाल खेल रहा हो।3 marks
- वर्षा से पहले का सौंदर्य और वर्षा के समय का सौंदर्य, दोनों का वर्णन लिखें।
- झरनों की तुलना 'मोती की लड़ियों' से करें और अंत में बादलों में पर्वत का अदृश्य होना तथा 'धुआँ-धुआँ' दृश्य लिखें।
Marks split as in the board’s published marking scheme
'तोप' कविता के आधार पर तोप और चिड़िया की प्रतीकात्मकता स्पष्ट करते हुए लिखिए कि इस कविता के माध्यम से कवि ने क्या संदेश दिया है ?
How the model answer begins
1. प्रतीक – 'तोप' कविता में तोप आतातायी सत्ता का प्रतीक है। कंपनी बाग के मुहाने पर रखी 1857 की यह तोप उस अंग्रेज़ी शासन की याद दिलाती है जिसने इसी तोप से अच्छे-अच्छे सूरमाओं के धज्जे उड़ा दिए थे। चिड़िया आम जनता का प्रतीक…
The full answer from Medha Ma’am →'कर चले हम फ़िदा' कविता से उद्धृत 'तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे' पंक्ति के संदर्भ में लिखिए कि सैनिक देशवासियों से क्या अपेक्षा रखता है ?
How the model answer begins
1. 'तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे' पंक्ति में सैनिक देशवासियों से यह अपेक्षा रखता है कि यदि कोई शत्रु देश की अस्मिता (मान-सम्मान) पर हमला करने के लिए हाथ उठाए, तो वे उसे मुँहतोड़ जवाब दें। देशवासी स्वयं राम और लक्ष्मण बनकर…
The full answer from Medha Ma’am →‘हरिहर काका’ कहानी समाज के किन पहलुओं की ओर ध्यान आकर्षित करती है ? आप अपने आस-पास रह रहे अकेले व्यक्ति की मदद कैसे करेंगे ?
How the model answer begins
1. ‘हरिहर काका’ कहानी समाज के कई कड़वे पहलुओं की ओर ध्यान खींचती है। पहला, पारिवारिक रिश्तों में स्वार्थ और संवेदनहीनता — हरिहर काका के भाई और उनकी पत्नियाँ तभी तक उनका आदर करते हैं जब तक उन्हें उनकी ज़मीन मिलने की आशा है।…
The full answer from Medha Ma’am →‘भरे-पूरे परिवार में रहता हुआ भी व्यक्ति अकेला हो सकता है ।’ ‘हरिहर काका’ और ‘टोपी शुक्ला’ कहानी के आधार पर इस कथन को सिद्ध कीजिए
How the model answer begins
1. भरे-पूरे परिवार में रहकर भी व्यक्ति अकेला हो सकता है, क्योंकि पारिवारिक प्रेम के अभाव में हरिहर काका और टोपी शुक्ला दोनों अकेलेपन के शिकार हुए। हरिहर काका भाइयों के बड़े परिवार में रहते थे, पर किसी के पास उनसे बात करने…
The full answer from Medha Ma’am →‘सपनों के से दिन’ पाठ में अंग्रेजों द्वारा गाँव के लोगों को सेना में भर्ती करने के लिए नौटंकी का सहारा लिया गया । वर्तमान समय में प्रचार-प्रसार के साधनों में, तरीकों में क्या अंतर आया है ?
How the model answer begins
1. वर्तमान समय में तकनीक की मदद से प्रचार-प्रसार के साधनों में अप्रत्याशित प्रगति हुई है। पाठ में अंग्रेज़ अफसर नौटंकी वालों के साथ गाँव आते थे। वे रात को खुले मैदान में फ़ौज के सुख-आराम और बहादुरी के दृश्य दिखाते थे, पर…
The full answer from Medha Ma’am →निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए : (क) कृत्रिम बौद्धिकता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के बढ़ते कदम संकेत बिंदु • क्या है कृत्रिम बौद्धिकता • बढ़ता प्रभाव • संभावित खतरा (ख) जब मुझे मेरा निजी स्मार्ट फोन मिला संकेत बिंदु • कब और क्यों मिला ? • अवर्णनीय खुशी का अनुभव • मित्रों और संबंधियों के साथ खुशी बाँटना (ग) दैव-दैव आलसी पुकारा संकेत बिंदु • कथन का अर्थ • आलस्य सबसे बड़ा शत्रु • कर्म से ही सफलता
How the model answer begins
1. अनुच्छेद में तीनों संकेत-बिंदु क्रम से आए हैं: पहले कथन का अर्थ (आलसी भाग्य के भरोसे रहता है), फिर 'आलस्य सबसे बड़ा शत्रु' और अंत में 'कर्म से ही सफलता'।
The full answer from Medha Ma’am →(क) प्रधानाचार्य, क.ख.ग. उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की ओर से जिला के मुख्य चिकित्साधिकारी को लगभग 100 शब्दों में एक पत्र लिखिए जिसमें विद्यालय के छात्रों के स्वास्थ्य परीक्षण का निवेदन किया गया हो। अथवा (ख) आप अपने विद्यालय के रसायन विज्ञान के अध्यापक हैं। रसायन विज्ञान की प्रयोगशाला के लिए आवश्यक उपकरण मँगवाने हेतु उपकरण विक्रेता को लगभग 100 शब्दों में पत्र लिखिए।
How the model answer begins
1. पत्र के आरंभ में प्रेषक का पता, 'दिनांक: ........', 'सेवा में' के साथ मुख्य चिकित्साधिकारी का पद और पता, विषय और संबोधन 'महोदय' दिए गए हैं। अंत में 'सधन्यवाद', 'भवदीय', नाम और पद लिखे गए हैं।
The full answer from Medha Ma’am →(क) आपके विद्यालय में ग्रीष्मावकाश के दौरान 'व्यक्तित्व-विकास (पर्सनैलिटी डेवलपमेंट) शिविर' का आयोजन किया जा रहा है। छात्र कल्याण संगठन के सचिव होने के नाते कक्षा नवीं से बारहवीं तक के सभी छात्रों तक इस शिविर की जानकारी प्रदान करने हेतु लगभग 60 शब्दों में एक सूचना तैयार कीजिए। अथवा (ख) आपकी सोसायटी में गणतंत्र दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। रेजिडेंट वेलफेयर संगठन के सचिव होने के नाते सोसायटी निवासियों को इसकी जानकारी देने हेतु लगभग 60 शब्दों में एक सूचना पत्र तैयार कीजिए।
How the model answer begins
1. सूचना में शिविर का नाम, कौन भाग ले सकता है (कक्षा नवीं से बारहवीं), तिथि, समय, स्थान, प्रशिक्षण के विषय और नाम लिखवाने की अंतिम तिथि दी गई है। इसलिए विषय-वस्तु पूरी है।
The full answer from Medha Ma’am →(क) किसी दैनिक समाचार-पत्र में प्रकाशित करने के लिए लगभग 40 शब्दों में एक विज्ञापन का प्रारूप तैयार कीजिए जिसमें आवश्यक दस्तावेज यात्रा के समय मार्ग में खो जाने का उल्लेख हो। अथवा (ख) आर्थिक दृष्टि से कमजोर छात्रों को निःशुल्क शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराने हेतु क.ख.ग. स्कूल की ओर से एक आकर्षक विज्ञापन लगभग 40 शब्दों में तैयार कीजिए।
(क) 'सच्चा मित्र' विषय पर लगभग 100 शब्दों में एक लघुकथा लिखिए। अथवा (ख) बड़ी बहन के विवाह में सपरिवार सम्मिलित होने के लिए अपने मित्र को लगभग 100 शब्दों में ई-मेल द्वारा निमंत्रण पत्र भेजिए।
How the model answer begins
1. शीर्षक 'सच्चा मित्र' के बाद कहानी के तीन भाग क्रम से हैं: आरंभ में अमन की कठिनाई, मध्य में रोहन का रोज़ उसे पढ़ाना और अंत में अमन का उत्तीर्ण होना। इससे विषय-वस्तु पूरी होती है।
The full answer from Medha Ma’am →
The same preparation, with Medha Ma’am — on your phone
Every question of every chapter with its model answer, practice questions in the board’s own shapes, 60 minutes of class a day, written answers marked, a test every Sunday and a WhatsApp report to parents.
Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.