CBSE Class 10 · Hindi B · board exam 2027
Chapter 3: मनुष्यता (मैथिलीशरण गुप्त)
This chapter’s questions from CBSE’s real papers of 2023–2026 — the 20 asked most often, 2 with the full model answer, 17 with how the answer begins — and objective questions with the board’s key.
- marks a year (about)
- 2
- questions a year (about)
- 1
- rank in Hindi B
- #14
From 4 years of papers, 2023–2026 · full chapter-wise marks
Important questions — the ones the board asked most (20)
- Q1Short answer6 marksAsked: 2023
पद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए : (i) 'तोप' कविता के आधार पर 'तोप' और 'गौरैया' की प्रतीकात्मकता स्पष्ट करते हुए बताइए कि इस कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है ? (ii) ‘‘घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी’’ - 'मनुष्यता' कविता से ली गई इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने जीवन रूपी मार्ग पर आगे बढ़ते समय क्या याद रखने को कहा है और क्यों ? (iii) 'कर चले हम फ़िदा' गीत में कवि देशवासियों से क्या अपेक्षाएँ रखता है? हम उसकी अपेक्षाओं पर किस रूप में खरा उतर रहे हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए ।
- Q2Case-based5 marksAsked: 2026
निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्पों का चयन करके लिखिए : (i) मनुष्य की वास्तविक सफलता क्या है ? (A) सिर्फ स्वयं का उत्थान (B) सिर्फ समाज का उत्थान (C) स्वयं के साथ समाज का उत्थान (D) साथ चलने वालों का उत्थान (ii) इच्छित मार्ग की ओर कैसे बढ़ना चाहिए ? (A) तेज़ी के साथ (B) शांति के साथ (C) खुशी के साथ (D) गर्व के साथ (iii) जीवन-पथ पर आगे बढ़ते हुए किस बात का ध्यान रखना चाहिए ? (A) हर तरह के लोगों के साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ना। (B) स्वयं से अधिक दूसरों के सामर्थ्य पर भरोसा करना। (C) पथ में सिर्फ समान विचारधारा वाले लोगों को साथ लेना। (D) भिन्न विचार रखने वालों से दूर रहने का प्रयास करना। (iv) ‘मानव जीवन की सार्थकता स्वयं के साथ दूसरों को भी आगे बढ़ाने में है’ - यह भाव किस पंक्ति में है ? (A) घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी (B) अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी (C) तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तेरे (D) वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे (v) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : हर तरह के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्र का विकास करना चाहिए। कारण : सम्मिलित प्रयास से हुआ विकास अस्थायी प्रकृति का होता है। विकल्प : (A) कथन और कारण दोनों गलत हैं। (B) कथन गलत है, लेकिन कारण सही है। (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है। (D) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की गलत व्याख्या करता है।

Medha Ma’am
AskMedha’s AI teacher
Model answer · Manushyata poem, comprehension MCQs
- 1.(C) स्वयं के साथ समाज का उत्थान।1 mark
- 2.(C) खुशी के साथ। कवि कहते हैं, 'चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए'।1 mark
- 3.(A) हर तरह के लोगों के साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ना, क्योंकि 'घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी'।1 mark
- 4.(C) तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे। अर्थात दूसरों को पार लगाते हुए स्वयं भी पार होना ही सच्ची सामर्थ्य है।1 mark
- 5.(D) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की गलत व्याख्या करता है, क्योंकि सम्मिलित प्रयास से हुआ विकास अस्थायी नहीं होता।1 mark
Marks split as in the board’s published marking scheme
- Q3Case-based5 marksAsked: 2024
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए : क्षुधार्त रंतिदेव ने दिया करस्थ थाल भी, तथा दधीचि ने दिया परार्थ अस्थिजाल भी। उशीनर क्षितीश ने स्वमांस दान भी किया, सहर्ष वीर कर्ण ने शरीर-चर्म भी दिया। अनित्य देह के लिए अनादि जीव क्या डरे? वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।। (i) रंतिदेव कौन थे? (ii) स्तंभ 'अ' और स्तंभ 'ब' को सुमेलित करके सही विकल्प चुनिए : (iii) कवि ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से क्या संदेश दिया है? (iv) काव्यांश में प्रयुक्त 'अनादि' शब्द का क्या अर्थ है ? (v) दधीचि ने दान में क्या दिया?

Medha Ma’am
AskMedha’s AI teacher
Model answer · poem comprehension, Manushyata
- 1.रंतिदेव एक क्षुधार्त राजा थे जिन्होंने अपना भोजन का थाल दान कर दिया था।1 mark
- 2.स्तंभों का सही मिलान इस प्रकार है - रंतिदेव-भोजन, दधीचि-अस्थि, उशीनर-मांस और कर्ण-चर्म। अतः इनमें से रंतिदेव एक क्षुधार्त राजा थे, यही सही विकल्प है।1 mark
- 3.कवि ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से परोपकार और त्याग की भावना का संदेश दिया है कि मनुष्य को दूसरों के लिए जीना चाहिए और मनुष्यता का यही सच्चा अर्थ है।1 mark
- 4.काव्यांश में प्रयुक्त 'अनादि' शब्द का अर्थ है जिसका कोई आदि या प्रारंभ न हो, अर्थात आरंभरहित।1 mark
- 5.दधीचि ने परोपकार के लिए अपने शरीर की अस्थियाँ अर्थात अस्थिजाल दान में दी थीं, जैसे क्षुधार्त राजा रंतिदेव ने अपना भोजन का थाल दान किया था।1 mark
- रंतिदेव के उत्तर में 'क्षुधार्त', 'राजा' और 'दान' तीनों शब्द अवश्य लिखें।
- मिलान वाले प्रश्न में चारों जोड़े रंतिदेव-भोजन, दधीचि-अस्थि, उशीनर-मांस, कर्ण-चर्म पूरे लिखें।
- 'अनादि' का अर्थ लिखते समय 'आरंभरहित' शब्द का प्रयोग करें।
Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme
- Q4Case-based5 marksAsked: 2024
(i) रंतिदेव कौन थे? (A) वीर राजा (B) परम दानी राजा (C) बुद्धिमान-शिक्षित राजा (D) कुशल-समझदार राजा (ii) स्तंभ 'अ' और स्तंभ 'ब' को सुमेलित करके सही विकल्प चुनिए : स्तंभ 'अ' | स्तंभ 'ब' I. उशीनर | 1. अपने शरीर की चमड़ी भी दान में दी II. दधीचि | 2. अपना माँस देकर कबूतर के प्राण बचाए III. कर्ण | 3. अस्थियाँ देकर देवताओं की सहायता की विकल्प : (A) I 2 II 3 III 1 (B) I 1 II 2 III 3 (C) I 2 II 1 III 3 (D) I 1 II 3 III 2 (iii) कवि ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से क्या संदेश दिया है? (A) हमें जीवन की परवाह न करके परोपकार करना चाहिए। (B) हरेक की पीड़ा को समझना चाहिए। (C) शरीर नाशवान है अतः जीव को डरना नहीं चाहिए। (D) अपनी भूख की परवाह बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। (iv) काव्यांश में प्रयुक्त 'अनादि' शब्द का क्या अर्थ है ? (A) जिसका न आदि हो न अंत (B) जिसका आदि या आरंभ न हो (C) जो सृष्टि पर सबसे पहले जन्मा हो (D) जो सदा बना चला आ रहा हो (v) दधीचि ने दान में क्या दिया? (A) कवच-कुंडल (B) हड्डियाँ (C) धन (D) माँस
How the model answer begins
1. (B) परम दानी राजा। भूख से व्याकुल होने पर भी रंतिदेव ने अपने हाथ का भोजन का थाल दान कर दिया।
The full answer from Medha Ma’am → - Q5Case-based5 marksAsked: 2024
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए : विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी, मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी । हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए, मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए । वही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।। (i) कवि ने ऐसा क्यों कहा कि मृत्यु से नहीं डरना चाहिए ? (A) मृत्यु से यश प्राप्त होता है (B) जन्म-मरण ईश्वर के हाथ में है (C) मृत्यु के बाद नया शरीर मिलता है (D) मृत्यु तो अवश्यंभावी है (ii) कवि कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहता है ? (A) बिना किसी पीड़ा के हुई मृत्यु (B) अपनों के हित प्राप्त होने वाली मृत्यु (C) महान उद्देश्य के लिए मरने वाले की मृत्यु (D) स्वार्थ सिद्ध करते समय हुई मृत्यु (iii) कैसी मृत्यु व्यर्थ है ? (A) देश हित प्राप्त होने वाली मृत्यु (B) जिस मृत्यु को याद न किया जाए (C) दूसरों के लिए संघर्ष करते हुए प्राप्त मृत्यु (D) मृत्यु के बाद जो हमेशा याद रहे (iv) पशु प्रवृत्ति क्या है ? (A) अपने लिए जीना-खाना (B) दूसरों के लिए जीना-खाना (C) परोपकार का भाव रखना (D) दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना (v) कौन-सा/से वाक्य पद्यांश से मेल खाता है/खाते हैं ? I. उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता-मरता है । II. पशु प्रवृत्ति को समझ के साथ अपनाना चाहिए । III. मनुष्य जीवन की सार्थकता परोपकार में है । IV. जीवन में कुछ पाने के लिए स्वार्थी होना पड़ता है । विकल्प : (A) केवल I (B) II, IV (C) I, III (D) II, III
How the model answer begins
1. (i) कवि ने ऐसा कहा कि मृत्यु से नहीं डरना चाहिए, इसका सही उत्तर है (D) मृत्यु तो अवश्यंभावी है। मर्त्य प्राणी को मृत्यु अवश्यंभावी है, इसलिए उससे डरना व्यर्थ है।
The full answer from Medha Ma’am → - Q6Short answer3 marksAsked: 2023
'मनुष्यता' कविता में कवि ने वास्तविक सामर्थ्यवान किसे कहा है और क्यों ?
How the model answer begins
1. कवि मैथिलीशरण गुप्त के अनुसार सच्चा सामर्थ्यवान वह है जो दूसरों का दुःख देखकर रुकता नहीं और उनकी सहायता के लिए आगे बढ़ता है। कवि कहते हैं — "तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे।" यानी समर्थ वही है जो दूसरों को साथ लेकर…
The full answer from Medha Ma’am → - Q7Short answer3 marksAsked: 2023
'मनुष्यता' कविता के आधार पर लिखिए कि मृत्यु को सुमृत्यु कब माना जाता है ?
How the model answer begins
1. 'मनुष्यता' कविता के अनुसार मृत्यु को सुमृत्यु तब माना जाता है, जब मनुष्य इस प्रकार मरे कि उसके मरने के बाद भी सभी लोग उसे याद करें। ऐसी मृत्यु परहित, यानी दूसरों की भलाई के लिए होती है। कवि कहते हैं कि मनुष्य मर्त्य…
The full answer from Medha Ma’am → - Q8Short answer3 marksAsked: 2023
'मनुष्यता' कविता के आधार पर लिखिए कि कैसा जीवन जीने वाले लोग मरकर अमर हो जाते हैं
How the model answer begins
1. 'मनुष्यता' कविता के अनुसार वे लोग मरकर अमर हो जाते हैं, जो सहानुभूति, दया, उदारता, त्याग और परोपकार जैसे गुणों से युक्त होकर परहित में जीते और मरते हैं। कवि के शब्दों में, "वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।" ऐसे…
The full answer from Medha Ma’am → - Q9Short answer3 marksAsked: 2023
'मनुष्यता' कविता में किस तरह के जीवन को व्यर्थ कहा गया है और क्यों ?
How the model answer begins
1. 'मनुष्यता' कविता में उस जीवन को व्यर्थ कहा गया है जिसमें मनुष्य केवल अपने स्वार्थ के लिए जीता है। ऐसा व्यक्ति केवल अपने लिए खाता-कमाता है और दूसरों की भलाई के लिए कुछ नहीं करता। कवि कहते हैं कि ऐसा मनुष्य 'वृथा मरे,…
The full answer from Medha Ma’am → - Q10Short answer3 marksAsked: 2023
'मनुष्यता' कविता में 'विचार लो कि मर्त्य हो' कहकर कवि पाठकों को क्या संदेश देना चाहता है ?
How the model answer begins
1. 'विचार लो कि मर्त्य हो' कहकर कवि मैथिलीशरण गुप्त पाठकों को याद दिलाते हैं कि मनुष्य मर्त्य अर्थात् मरणशील (नश्वर) है। एक दिन उसकी मृत्यु निश्चित है, इसलिए उसे मृत्यु से कभी डरना नहीं चाहिए — 'न मृत्यु से डरो कभी'।
The full answer from Medha Ma’am → - Q11Short answer3 marksAsked: 2023
मानव जीवन का सबसे बड़ा भय मृत्यु ही है, फिर भी 'मनुष्यता' कविता में कवि ने मृत्यु से भयभीत न होने की बात क्यों कही है ?
How the model answer begins
1. कवि के अनुसार मृत्यु एक अटल सत्य है, जो भी इस संसार में जन्म लेता है, उसे एक-न-एक दिन अवश्य मरना है। मनुष्य मर्त्य अर्थात् मरणशील है, इसलिए मृत्यु निश्चित है और इससे कभी भी डरना व्यर्थ है।
The full answer from Medha Ma’am → - Q12Short answer3 marksAsked: 2023
'मनुष्यता' कविता में भाग्यहीन किसे और क्यों कहा गया है ? अपने शब्दों में लिखिए
How the model answer begins
1. 'मनुष्यता' कविता में कवि ने उस व्यक्ति को अत्यंत भाग्यहीन कहा है जो अधीर हो जाता है, यानी धैर्य खो बैठता है।
The full answer from Medha Ma’am → - Q13Short answer2 marksAsked: 2026
‘मनुष्यता’ कविता में कवि मनुष्य को मृत्यु से भयभीत न होने की सलाह क्यों दे रहा है ?
How the model answer begins
1. कवि मनुष्य को मृत्यु से न डरने की सलाह इसलिए देता है कि मनुष्य मर्त्य (मरणशील) है। जब मृत्यु निश्चित ही है, तो उससे भयभीत क्यों होना? कवि चाहता है कि मनुष्य ऐसी सुमृत्यु मरे कि सभी उसे याद करें। जो मनुष्य मानवता और…
The full answer from Medha Ma’am → - Q14Short answer2 marksAsked: 2026
'मनुष्यता' कविता में कवि ने गर्व रहित जीवन जीने की सलाह क्यों दी है ?
How the model answer begins
1. कवि ने गर्व रहित जीवन जीने की सलाह इसलिए दी है क्योंकि गर्वरहित होने पर ही मनुष्यों में परस्पर प्रेम और मेल-मिलाप संभव है। धन-संपत्ति (वित्त) तुच्छ है और मनुष्य की सारी उपलब्धियाँ क्षणिक और नश्वर हैं, इसलिए उनके मद में…
The full answer from Medha Ma’am → - Q15Short answer2 marksAsked: 2025
'मनुष्यता' कविता के संदर्भ में लिखिए कि पशु-प्रवृत्ति क्या है । पशु-प्रवृत्ति मानव के लिए निंदनीय क्यों है ?
How the model answer begins
1. 'मनुष्यता' कविता के अनुसार पशु-प्रवृत्ति का अर्थ है पशु जैसा स्वभाव, अर्थात् केवल अपने स्वार्थ के विषय में सोचना। कवि कहते हैं, "वही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे", यानी पशु की तरह केवल अपना पेट भरना और दूसरों की…
The full answer from Medha Ma’am → - Q16Short answer2 marksAsked: 2025
'अनित्य देह के लिए अनादि जीव क्या डरे' - पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए
How the model answer begins
1. इस पंक्ति में कवि मैथिलीशरण गुप्त कहते हैं कि अनादि जीव अर्थात् सनातन और अविनाशी जीवात्मा का कभी नाश नहीं होता। वह नाशरहित आत्मा है, अमर आत्मा है। केवल अनित्य देह अर्थात् नश्वर शरीर ही नष्ट होता है।
The full answer from Medha Ma’am → - Q17Short answer2 marksAsked: 2025
'विनम्र होकर ही दूसरों के हृदय को जीता जा सकता है।' 'मनुष्यता' कविता से उदाहरण देते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए
How the model answer begins
1. विनम्रता मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है। 'मनुष्यता' में कवि कहते हैं कि तुच्छ धन के मद में अंधे होकर गर्व मत करो ('करो न गर्व चित्त में'), क्योंकि मनुष्य मात्र बंधु है; ऐसे उदार और विनम्र व्यक्ति को ही समस्त सृष्टि पूजती है।
The full answer from Medha Ma’am → - Q18Short answer2 marksAsked: 2025
'मनुष्यता' कविता में 'अभीष्ट मार्ग' पर आगे बढ़ते हुए कवि ने किस बात का ध्यान रखने की बात कही है ?
How the model answer begins
1. कवि ने कहा है कि मनुष्य को अभीष्ट मार्ग पर आगे बढ़ते हुए अकेले नहीं चलना चाहिए, बल्कि अपने साथ-साथ दूसरों को भी साथ लेकर चलना चाहिए। उसे न तो रुकना चाहिए और न ही किसी बाधा से घबराना चाहिए।
The full answer from Medha Ma’am → - Q19Short answer2 marksAsked: 2025
किसी भी देश के विकास के लिए उदार व्यक्तियों की आवश्यकता होती है, कैसे? ‘मनुष्यता’ कविता के आधार पर लिखिए
How the model answer begins
1. किसी भी देश के विकास के लिए उदार व्यक्तियों की आवश्यकता होती है, क्योंकि परस्पर सहयोग, मेल-मिलाप और परोपकार जैसे उदार व्यक्ति के गुण देश के विकास के लिए आवश्यक हैं। 'मनुष्यता' कविता कहती है — 'वही मनुष्य है कि जो मनुष्य…
The full answer from Medha Ma’am → - Q20Very short answer1 markAsked: 2026
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए, विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए । घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी, अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी । तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तेरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे । निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : हर तरह के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्र का विकास करना चाहिए । कारण : सम्मिलित प्रयास से हुआ विकास अस्थाई प्रकृति का होता है । विकल्प : (A) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं । (B) कथन ग़लत है, लेकिन कारण सही है । (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है । (D) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है ।
How the model answer begins
1. (D) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है। कवि 'घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी' कहकर भेदभाव मिटाकर साथ बढ़ने की बात करता है; सम्मिलित प्रयास से हुआ विकास अस्थायी नहीं होता।
The full answer from Medha Ma’am →
Objective questions with the board’s key (10)
- 1. CBSE 2026
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए, विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए । घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी, अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी । तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तेरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे । मनुष्य की वास्तविक सफलता क्या है ?
- (A) सिर्फ स्वयं का उत्थान
- (B) सिर्फ समाज का उत्थान
- (C) स्वयं के साथ समाज का उत्थान ✓
- (D) साथ चलने वालों का उत्थान
Answer: (C)
- 2. CBSE 2026
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए, विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए । घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी, अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी । तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तेरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे । निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : हर तरह के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्र का विकास करना चाहिए । कारण : सम्मिलित प्रयास से हुआ विकास अस्थायी प्रकृति का होता है । विकल्प :
- (A) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं ।
- (B) कथन ग़लत है, लेकिन कारण सही है ।
- (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है ।
- (D) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है । ✓
Answer: (D)
- 3. CBSE 2024
‘मनुष्यता’ कविता से उद्धृत - “तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तेरे” - पंक्ति का भाव है -
- (A) सामर्थ्य के अनुसार दूसरों की रक्षा करनी चाहिए।
- (B) मानव जीवन की सबको साथ लेकर चलने में है। ✓
- (C) अपनी ही उन्नति में संतुष्ट नहीं रहना चाहिए।
- (D) सामर्थ्य के अनुसार तैरने वाले व्यक्ति की रक्षा करनी चाहिए।
Answer: (B)
- 4. CBSE 2024
‘कर चले हम फिदा’ कविता में किसका हाथ तोड़ने की बात कही गई है ?
- (A) सीता का दामन छूने वाले पापियों की
- (B) धरती माता की पवित्रता नष्ट करने वालों की ✓
- (C) सीता का अपहरण करने वाले रावण की
- (D) देश सेवा से पीछे हटने वाले कायरों की
Answer: (B)
- 5. CBSE 2024
‘एक दूसरे का सहारा बनते हुए निरंतर आगे बढ़ो’ इस भाव को व्यक्त करने वाली पंक्ति है –
- (A) रहो न यों कि एक से न काम और का सरे
- (B) अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हो सभी
- (C) परस्परावलंब से उठो तथा बढ़ो सभी ✓
- (D) तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे
Answer: (C)
- 6. CBSE 2024
‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता के आधार पर लिखिए कि जल में बार-बार कौन झाँक रहा है ।
- (A) पर्वत ✓
- (B) झरना
- (C) तरुवर
- (D) पुष्प
Answer: (A)
- 7. CBSE 2024
‘एक-दूसरे की सहायता न करना, संसार में सबसे बड़ा अनर्थ है ।’ इस भाव को व्यक्त करने वाली पंक्ति है –
- (A) ‘मनुष्य मात्र बंधु है’, यही बड़ा विवेक है ।
- (B) तभी समर्थ भाव है कि तारता हुए तरे ।
- (C) अनर्थ है कि बंधु ही न बंधु की व्यथा हरे । ✓
- (D) वशीकृता सदैव ही बनी हुई स्वयं मही ।
Answer: (C)
- 8. CBSE 2024
‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता के आधार पर लिखिए कि झरने क्या कर रहे हैं ?
- (A) आकाश की ऊँचाई की ओर झाँक रहे हैं ।
- (B) पर्वतों के यश का गुणगान कर रहे हैं । ✓
- (C) पर्वतों की सुषमा में अभिवृद्धि कर रहे हैं ।
- (D) तालाबों में अपना प्रतिबिंब निहार रहे हैं ।
Answer: (B)
- 9. CBSE 2024
‘मनुष्यता’ कविता के अनुसार संसार में मनुष्यों की स्थिति में भिन्नता का कारण है -
- (A) भौगोलिक परिस्थितियाँ
- (B) आर्थिक परिस्थितियाँ
- (C) मनुष्य द्वारा किए गए उसके कर्म ✓
- (D) मनुष्य द्वारा प्राप्त किया गया ज्ञान
Answer: (C)
- 10. CBSE 2024
‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’ - पंक्ति का आशय है -
- (A) देश के आत्मसम्मान और गौरव पर आँच न आने देना। ✓
- (B) हिमालय की ओर से शत्रुओं को देश में प्रवेश न करने देना।
- (C) देश की आन-बान-शान हिमालय की रक्षा करना।
- (D) हिमालय की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान करना।
Answer: (A)
Questions parents and students ask
- How many marks does "मनुष्यता (मैथिलीशरण गुप्त)" carry in CBSE Class 10 Hindi B?
- In the CBSE papers of 2023–2026, this chapter carried about 2 marks and about 1 questions a year; by marks it ranks 14 in Hindi B.
- Which are the most important (VVI) questions of "मनुष्यता (मैथिलीशरण गुप्त)"?
- The 20 questions above are from the board’s real papers, each with the years it was asked; the most-asked come first with their full model answers. All 20 written questions of this chapter, with answers, are in the AskMedha app.
- Do the answers follow the board’s marking scheme?
- Yes. CBSE publishes its marking schemes; every model answer here is written point by point to the marks the board’s own scheme gives, and checked by a second, independent model.
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Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.