CBSE Class 10 · Hindi B · board exam 2027
Chapter 4: पर्वत प्रदेश में पावस (सुमित्रानंदन पंत)
This chapter’s questions from CBSE’s real papers of 2023–2026 — the 17 asked most often, 1 with the full model answer, 14 with how the answer begins — and objective questions with the board’s key.
- marks a year (about)
- 2
- questions a year (about)
- 1
- rank in Hindi B
- #17
From 4 years of papers, 2023–2026 · full chapter-wise marks
Important questions — the ones the board asked most (17)
- Q1Short answer6 marksAsked: 2026
निर्धारित कविताओं के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25 - 30 शब्दों में लिखिए : (i) 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर 'अवलोक रहा है बार-बार' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए । (ii) 'तोप' कविता में तोप के साल में दो बार चमकाने का उल्लेख हुआ है । आपकी दृष्टि में इन्हें चमकाने के संभावित कारणों का उल्लेख कीजिए । (iii) 'कर चले हम फ़िदा' कविता के आधार पर लिखिए कि सीमा पर देश की रक्षा करने वाले सैनिकों को किन संकटों से गुजरना पड़ता है । (iv) श्रीकृष्ण की सेवा करने से मीरा को कौन-कौन से लाभ प्राप्त होंगे ? पठित कविता के आधार पर लिखिए ।

Medha Ma’am
AskMedha’s AI teacher
Model answer · Poetry section short answers
- 1.(i) 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में मेखलाकार पर्वत अपने सहस्र दृग-सुमन, अर्थात हज़ारों पुष्प रूपी आँखों से, नीचे फैले ताल रूपी दर्पण में अपने महाकार (विशाल आकार) को बार-बार अवलोक रहा है, यानी निहार रहा है। इसका आशय यह है कि पर्वत अपने ही रूप-सौंदर्य पर मोहित और चकित है। इसीलिए वह बार-बार स्वयं को देखता है।2 marks
- 2.(ii) 'तोप' कविता की कंपनी बाग वाली तोप साल में दो बार, पंद्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी को, चमकाई जाती है। मेरी दृष्टि में इसका पहला कारण यह है कि तोप हमारी विरासत और इतिहास की निशानी है, इसलिए उसे संरक्षित और सुरक्षित रखने का भाव इसमें छिपा है। दूसरा कारण यह है कि चमकती तोप वर्तमान पीढ़ी को अंग्रेजी सत्ता की क्रूरता और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग तथा बलिदान का स्मरण कराती है।2 marks
- 3.(iii) 'कर चले हम फ़िदा' कविता के अनुसार सीमा पर सैनिकों को बर्फ़ीली ऊँची चोटियों और जमा देने वाली ठंड जैसी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ झेलनी पड़ती हैं, क्योंकि वहाँ उनकी साँस थमने लगती है और नब्ज़ जमने लगती है। उन्हें हर क्षण मृत्यु का सामना करना पड़ता है। अपने बलिदान के बाद देश-रक्षा की चिंता भी उन्हें रहती है, इसीलिए वे देशवासियों से कहते हैं कि अब वतन तुम्हारे हवाले है।2 marks
- (ii) में दोनों कारण लिखिए: विरासत और इतिहास को संरक्षित रखना, और अंग्रेजी सत्ता की क्रूरता तथा स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का स्मरण कराना।
- (iii) में कम से कम दो संकट लिखिए, जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ और हर क्षण मृत्यु का सामना।
Marks split as in the board’s published marking scheme
- Q2Case-based5 marksAsked: 2025
निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए : 5×1=5 गिरि का गौरव गाकर झर-झर मद में नस-नस उत्तेजित कर मोती की लड़ियों-से सुन्दर झरते हैं झाग भरे निर्झर ! गिरिवर के उर से उठ-उठ कर उच्चाकांक्षाओं से तरुवर हैं झाँक रहे नीरव नभ पर अनिमेष, अटल, कुछ चिंता पर। (i) झरने पर्वतों के यश का गुणगान क्यों कर रहे हैं ? (A) प्रसन्नता अभिव्यक्त करने के लिए (B) उनका आभार प्रकट करने के लिए (C) पर्वतों की महानता दर्शाने के लिए (D) जोश, उमंग, उत्साह प्रकट करने के लिए (ii) 'मद में नस-नस उत्तेजित कर' – पंक्ति के संदर्भ में बताइए, किसकी नस-नस मद में उत्तेजित होने की बात कही जा रही है ? (A) कवि की (B) पर्वतों की (C) झरनों की (D) वृक्षों की (iii) पर्वतों पर लगे वृक्ष किसे छूना चाहते हैं ? (A) आकाश की ऊँचाई को (B) पर्वतों की ऊँची चोटी को (C) पर्वतों की गहराई को (D) झरनों के सौंदर्य को (iv) पर्वत शिखरों पर लगे वृक्षों के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ? I. वृक्ष पर्वतों के हृदय में उठने वाली उच्चाकांक्षाओं के मूर्त रूप हैं। II. वृक्ष साधकों की भाँति गंभीर चिंतन में लीन हैं। III. वृक्ष अनहोनी की आशंका से आकाश की ओर झाँक रहे हैं। IV. वृक्ष वर्षा की आशा से आकाश की ओर ताक रहे हैं। विकल्प : (A) केवल I (B) केवल III (C) I और II दोनों (D) III और IV दोनों (v) काव्यांश के संदर्भ में 'अनिमेष' शब्द का अर्थ निम्नलिखित में से नहीं है : (A) एकटक (B) निरंतर (C) स्थिर दृष्टि (D) निर्लिप्त
- Q3Case-based5 marksAsked: 2023
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : उड़ गया, अचानक लो, भूधर फड़का अपार पारद के पर ! रव-शेष रह गए हैं निर्झर ! है टूट पड़ा भू पर अंबर ! धँस गए धरा में सभय शाल ! उठ रहा धुआँ, जल गया ताल ! — यों जलद-यान में विचर-विचर था इंद्र खेलता इंद्रजाल ! (i) 'भूधर के उड़ जाने' का आशय : (a) उसके पंछी समान उड़ने से है (b) उसके अदृश्य हो जाने से है (c) उसके बादलों के साथ चले जाने से है (d) उसके बादलों के पंख लगाने से है (ii) 'है टूट पड़ा भू पर अंबर' — पंक्ति में क्या कल्पना की गई है ? (a) अंबर ने धरती पर बाणों की वर्षा शुरू कर दी (b) अंबर ने धरती पर मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी (c) अंबर ने बादलों रूपी सेना द्वारा भूमि पर आक्रमण कर दिया (d) अंबर बादलों की गड़गड़ाहट के साथ धरती पर गिर पड़ा (iii) शाल के वृक्षों के भयभीत होने का कारण इनमें से क्या नहीं है ? (a) आसमान से मूसलाधार वर्षा (b) तालाबों का जलना (c) चारों तरफ उठता धुआँ (d) बादलों की गड़गड़ाहट (iv) प्रस्तुत काव्यांश में किस ऋतु में कहाँ के सौंदर्य का वर्णन किया गया है ? (a) वर्षा ऋतु में मैदानी भागों के सौंदर्य का (b) वर्षा ऋतु में पर्वतीय प्रदेश के सौंदर्य का (c) वसंत ऋतु में तटीय प्रदेश के सौंदर्य का (d) वसंत ऋतु में पर्वतीय प्रदेश के सौंदर्य का (v) प्रस्तुत काव्यांश में किसका मानवीकरण किया गया है ? (a) पर्वतों का (b) अंबर का (c) वृक्षों का (d) प्रकृति का
- Q4Short answer3 marksAsked: 2024
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में वर्णित पर्वतीय प्रदेश की सुंदरता का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए
How the model answer begins
1. 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में सुमित्रानंदन पंत ने पावस (वर्षा ऋतु) में पर्वतीय प्रदेश के पल-पल बदलते प्रकृति-वेश का बहुत सुंदर वर्णन किया है। वर्षा से पहले मेखलाकार (करधनी के आकार का) विशाल पर्वत अपने सहस्र…
The full answer from Medha Ma’am → - Q5Short answer3 marksAsked: 2023
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में कवि को धरती पर आकाश का टूट पड़ना क्यों प्रतीत होता है ?
How the model answer begins
1. कवि को धरती पर आकाश का टूट पड़ना इसलिए प्रतीत होता है क्योंकि पावस (वर्षा ऋतु) में पर्वत प्रदेश पर अचानक घने बादल छा गए। इन बादलों ने पूरे पहाड़ को ढक लिया। ऐसा लगा मानो भूधर (पहाड़) पारद के पर, अर्थात् पारे के समान धवल…
The full answer from Medha Ma’am → - Q6Short answer3 marksAsked: 2023
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में आई पंक्ति 'हैं झाँक रहे नीरव नभ पर' का आशय स्पष्ट कीजिए
How the model answer begins
1. सुमित्रानंदन पंत की कविता 'पर्वत प्रदेश में पावस' की इस पंक्ति में पर्वत पर उगे ऊँचे-ऊँचे तरुवर (पेड़) की बात है। ये तरुवर गिरिवर के उर (पर्वत के हृदय) से उठ-उठकर ऊपर की ओर बढ़े हैं। ये पर्वत की उच्चाकांक्षा, यानी ऊँचा…
The full answer from Medha Ma’am → - Q7Short answer3 marksAsked: 2023
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर लिखिए कि झरने पर्वत का गुणगान क्यों और कैसे कर रहे हैं
How the model answer begins
1. 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में झरने पर्वत का गुणगान इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे पर्वत के नैसर्गिक सौंदर्य से प्रभावित हैं। वर्षा ऋतु में पर्वत का रूप बहुत मनोहर हो जाता है। झरने पर्वत की महानता और विशालता से भी…
The full answer from Medha Ma’am → - Q8Short answer3 marksAsked: 2023
'पर्वतीय प्रदेश में पावस' कविता में झरनों का वर्णन किस रूप में हुआ है ? अपने शब्दों में लिखिए
How the model answer begins
1. 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में झरनों का वर्णन बहुत सजीव और मनोहारी रूप में हुआ है। कवि ने मानवीकरण अलंकार का प्रयोग करके बताया है कि पावस (वर्षा ऋतु) में पर्वत से बहते झरने झर-झर की मधुर आवाज़ करते हुए मानो पर्वत का…
The full answer from Medha Ma’am → - Q9Short answer3 marksAsked: 2023
'पर्वत प्रदेश में पावस' के आधार पर लिखिए कि शाल के वृक्ष कहाँ चले गए और क्यों
How the model answer begins
1. 'पर्वत प्रदेश में पावस' के अनुसार शाल के वृक्ष मानो डरकर धरती में धँस गए।
The full answer from Medha Ma’am → - Q10Short answer3 marksAsked: 2023
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर लिखिए कि कवि को ऐसा क्यों लगता है कि जैसे अचानक पर्वत पंख लगाकर उड़ गया हो ?
How the model answer begins
1. वर्षा ऋतु में जब घने बादल और कोहरा पर्वत को चारों ओर से घेर लेते हैं, तब पर्वत का विशाल रूप उस आवरण में पूरी तरह छिप जाता है और वह दिखाई देना बंद हो जाता है, अर्थात पर्वत ओझल हो जाता है।
The full answer from Medha Ma’am → - Q11Short answer3 marksAsked: 2023
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर पर्वतों द्वारा अपने रूप-सौंदर्य को निहारने की कल्पना और कारण को स्पष्ट कीजिए
How the model answer begins
1. कवि ने मानवीकरण अलंकार के माध्यम से कल्पना की है कि पर्वत अपने चरणों में स्थित तालाब रूपी दर्पण में अपने विशाल आकार और सौंदर्य को निहार रहे हैं। मनुष्य की भाँति पर्वत भी अपने रूप-सौंदर्य को देखने के लिए दर्पण का सहारा…
The full answer from Medha Ma’am → - Q12Short answer3 marksAsked: 2023
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में पर्वतों की दृष्टि किसे कहा गया है ? पर्वत अपना प्रतिबिंब कहाँ और क्यों निहार रहे हैं ?
How the model answer begins
1. 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में पर्वतों की दृष्टि उन पर खिले हुए हज़ारों पुष्पों को कहा गया है। कवि ने पर्वत पर उगे हुए पुष्पों को ही पर्वत की आँखें मानकर 'सहस्र दृग-सुमन' कहा है, जिनसे पर्वत चारों ओर फैली वर्षा ऋतु…
The full answer from Medha Ma’am → - Q13Short answer2 marksAsked: 2026
आपकी पाठ्यपुस्तक की किस कविता में प्रकृति-सौंदर्य का वर्णन किया गया है ? उस कविता में वर्णित प्रकृति के कोमल रूप का वर्णन कीजिए
How the model answer begins
1. सुमित्रानंदन पंत की कविता 'पर्वत प्रदेश में पावस' में प्रकृति-सौंदर्य का वर्णन किया गया है। इसमें पावस (वर्षा ऋतु) में प्रकृति का कोमल रूप इस प्रकार है: मेखलाकार पर्वत पर रंग-बिरंगे पुष्प खिले हैं। दर्पण-से ताल में…
The full answer from Medha Ma’am → - Q14Short answer2 marksAsked: 2026
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में कवि ने प्रकृति को मानवीय क्रियाकलाप करते हुए दिखाया है, प्रकृति के किन्हीं दो क्रियाकलापों का उल्लेख कीजिए
How the model answer begins
1. 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में कवि ने मानवीकरण अलंकार द्वारा प्रकृति को मनुष्य की तरह काम करते हुए दिखाया है। प्रकृति के दो मानवीय क्रियाकलाप ये हैं: (1) मेखलाकार पर्वत अपने सहस्र दृग-सुमन, अर्थात् हज़ारों पुष्प रूपी…
The full answer from Medha Ma’am → - Q15Short answer2 marksAsked: 2026
‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता के आधार पर ‘अवलोक रहा है बार-बार’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए
How the model answer begins
1. ‘अवलोक रहा है बार-बार’ पंक्ति का आशय है कि पावस (वर्षा ऋतु) में विशाल पर्वत अपने सहस्र दृग-सुमन, अर्थात् हज़ारों पुष्प रूपी आँखों से, अपने नीचे फैले ताल (तालाब) में अपने महाकार (विशाल आकार) को बार-बार निहार रहा है। जल…
The full answer from Medha Ma’am → - Q16Short answer2 marksAsked: 2026
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर 'था इंद्र खेलता इंद्रजाल' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए
How the model answer begins
1. 'था इंद्र खेलता इंद्रजाल' पंक्ति का आशय है कि पावस (वर्षा ऋतु) में पर्वत प्रदेश के प्राकृतिक दृश्य पल-पल बदलते रहते हैं। कभी बादलों के कारण लगता है कि भू पर अंबर टूट पड़ा है, झरने केवल आवाज़ (रव-शेष) बनकर रह जाते हैं,…
The full answer from Medha Ma’am → - Q17Short answer2 marksAsked: 2025
‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता में कवि ने पर्वत की विशालता को किस प्रकार चित्रित किया है? स्पष्ट कीजिए
How the model answer begins
1. कवि ने पर्वत को 'मेखलाकार' अर्थात् करधनी के आकार का बताकर उसकी विशालता चित्रित की है। पर्वत प्रदेश में पहाड़ों की अपार श्रृंखला दूर-दूर तक फैली है, जो करधनी की तरह धरती को घेरे हुए लगती है। ये ऊँचे पर्वत अपने 'महाकार'…
The full answer from Medha Ma’am →
Objective questions with the board’s key (6)
- 1. CBSE 2025
पावस ऋतु थी, पर्वत प्रदेश, पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश। मेखलाकार पर्वत अपार अपने सहस्र दृग-सुमन फाड़, अवलोक रहा है बार-बार नीचे जल में निज महाकार, - जिसके चरणों में पला ताल दर्पण-सा फैला है विशाल ! 'पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश' पंक्ति का अभिप्राय है :
- (A) प्रकृति अपनी वेशभूषा बार-बार बदल रही है
- (B) पर्वतों पर बादल बार-बार रूप बदल रहे हैं
- (C) प्रकृति का रूप सौंदर्य पल-पल नए रूप धारण कर रहा है ✓
- (D) बादल बार-बार प्रकृति को नया रूप प्रदान कर रहे हैं
Answer: (C)
- 2. CBSE 2025
गिरि का गौरव गाकर झर-झर मद में नस-नस उत्तेजित कर मोती की लड़ियों-से सुन्दर झरते हैं झाग भरे निर्झर ! गिरिवर के उर से उठ-उठ कर उच्चाकांक्षाओं से तरुवर हैं झाँक रहे नीरव नभ पर अनिमेष, अटल, कुछ चिंता पर । झरने पर्वतों के यश का गुणगान क्यों कर रहे हैं ?
- (A) प्रसन्नता अभिव्यक्त करने के लिए
- (B) उनका आभार प्रकट करने के लिए ✓
- (C) पर्वतों की महानता दर्शाने के लिए
- (D) जोश, उमंग, उत्साह प्रकट करने के लिए
Answer: (B)
- 3. CBSE 2025
गिरि का गौरव गाकर झर-झर मद में नस-नस उत्तेजित कर मोती की लड़ियों-से सुन्दर झरते हैं झाग भरे निर्झर ! गिरिवर के उर से उठ-उठ कर उच्चाकांक्षाओं से तरुवर हैं झाँक रहे नीरव नभ पर अनिमेष, अटल, कुछ चिंता पर । पर्वत शिखरों पर लगे वृक्षों के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ? I. वृक्ष पर्वतों के हृदय में उठने वाली आकांक्षाओं के मूर्त रूप हैं। II. वृक्ष साधकों की भाँति गंभीर चिंतन में लीन हैं। III. वृक्ष अनहोनी की आशंका से आकाश की ओर झाँक रहे हैं। IV. वृक्ष वर्षा की आशा से आकाश की ओर ताक रहे हैं। विकल्प :
- (A) केवल I
- (B) केवल III
- (C) I और II दोनों ✓
- (D) III और IV दोनों
Answer: (C)
- 4. CBSE 2025
उड़ गया अचानक लो, भूधर फड़का अपार पारद के पर ! रव-शेष रह गए हैं निर्झर ! है टूट पड़ा भू पर अंबर ! धँस गए धरा में सभय शाल ! उठ रहा धुआँ, जल गया ताल ! - यों जलद-यान में विचर-विचर था इंद्र खेलता इंद्रजाल । ‘भूधर’ के उड़ने से क्या अभिप्राय है ?
- (A) पर्वतों के पंख लगना
- (B) पर्वतों का अदृश्य होना ✓
- (C) पर्वतों का बादलों के पार जाना
- (D) पर्वतों का आकाश की ऊँचाई को छूना
Answer: (B)
- 5. CBSE 2024
'सब अँधियारा मिटि गया' - कबीर के 'दोहे' की इस पंक्ति में अँधियारा किसका प्रतीक है?
- (A) निराशा
- (B) अहंकार
- (C) अज्ञान ✓
- (D) कालिमा
Answer: (C)
- 6. CBSE 2024
'गिरि का गौरव गाकर झर-झर' - पंक्ति में झरने के 'झर-झर' स्वर में कवि ने क्या कल्पना की है? 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर लिखिए :
- (A) बादलों की गड़गड़ाहट की
- (B) झरनों की कल-कल करती मधुर ध्वनि की
- (C) पक्षियों के कलरव की जुगल-बंदी की
- (D) पर्वत के गौरव-गान की ✓
Answer: (D)
Questions parents and students ask
- How many marks does "पर्वत प्रदेश में पावस (सुमित्रानंदन पंत)" carry in CBSE Class 10 Hindi B?
- In the CBSE papers of 2023–2026, this chapter carried about 2 marks and about 1 questions a year; by marks it ranks 17 in Hindi B.
- Which are the most important (VVI) questions of "पर्वत प्रदेश में पावस (सुमित्रानंदन पंत)"?
- The 17 questions above are from the board’s real papers, each with the years it was asked; the most-asked come first with their full model answers. All 17 written questions of this chapter, with answers, are in the AskMedha app.
- Do the answers follow the board’s marking scheme?
- Yes. CBSE publishes its marking schemes; every model answer here is written point by point to the marks the board’s own scheme gives, and checked by a second, independent model.
The same preparation, with Medha Ma’am — on your phone
Every question of every chapter with its model answer, practice questions in the board’s own shapes, 60 minutes of class a day, written answers marked, a test every Sunday and a WhatsApp report to parents.
Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.