CBSE Class 10 · Hindi B · board exam 2027
Chapter 1: साखी (कबीर)
This chapter’s questions from CBSE’s real papers of 2023–2026 — the 20 asked most often, 3 with the full model answer, 17 with how the answer begins — and objective questions with the board’s key. All 21 questions of this chapter, with answers, are in the app.
- marks a year (about)
- 2
- questions a year (about)
- 1
- rank in Hindi B
- #13
From 4 years of papers, 2023–2026 · full chapter-wise marks
Important questions — the ones the board asked most (20)
- Q1Short answer6 marksAsked: 2025
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए : (I) 'कबीर की साखियों में कौन-कौन से जीवन-मूल्य उभरते हैं ? (II) बादलों से पर्वत के छिप जाने पर कवि की कल्पना, 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए । (III) 'मनुष्यता' कविता में कवि लोगों से किस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा करता है ? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए । (IV) 'दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोप एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद' 'तोप' कविता से उद्धृत इन पंक्तियों का प्रतीकार्थ स्पष्ट कीजिए ।

Medha Ma’am
AskMedha’s AI teacher
Model answer · Poetry section short answers
- 1.कबीर की साखियों से मीठी वाणी बोलने, अहंकार त्यागने और निंदक को पास रखकर अपने स्वभाव को सुधारने के जीवन-मूल्य उभरते हैं। वे सिखाते हैं कि ईश्वर हमारे भीतर है, पोथी पढ़ने से बढ़कर प्रेम है और बाहरी आडंबर व्यर्थ हैं।2 marks
- 2.बादलों से पर्वत छिपने पर कवि कल्पना करता है कि पर्वत पारे जैसे चमकीले पंख फड़फड़ाकर उड़ गया है। अब केवल झरनों का शोर बचा है, मानो आकाश धरती पर टूट पड़ा हो। शाल के पेड़ डरकर धरती में धँस गए हैं, तालाब से धुआँ उठ रहा है मानो वह जल गया हो, और इंद्र बादल रूपी विमान में घूमकर जादू का खेल दिखा रहा है।2 marks
- 3.(III) कवि चाहता है कि मनुष्य परोपकारी बने और दूसरों के लिए जिए-मरे। वह धन के घमंड में न रहे, सभी मनुष्यों को अपना भाई माने और एक-दूसरे का सहारा बनकर सबके साथ आगे बढ़े। (IV) यहाँ तोप अत्याचार, दमन और शक्ति के अहंकार का प्रतीक है। कवि बताता है कि कोई शक्ति कितनी भी बड़ी हो, एक दिन उसका अंत निश्चित है। अन्याय और अत्याचार सदा नहीं टिकते।2 marks
Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme
- Q2Short answer5 marksAsked: 2026
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए : (i) सुख-दुख के विषय में कबीर और सांसारिक मनुष्यों के दृष्टिकोण में क्या अंतर है ? 'साखी' कविता के आधार पर लिखिए। (ii) 'मनुष्यता' कविता में कवि मनुष्य को मृत्यु से भयभीत न होने की सलाह क्यों दे रहा है ? (iii) आपकी पाठ्यपुस्तक की किस कविता में प्रकृति-सौंदर्य का वर्णन किया गया है ? उस कविता में वर्णित प्रकृति के कोमल रूप का वर्णन कीजिए। (iv) 'तोप' कविता के माध्यम से कवि ने हमें देशभक्ति का कौन-सा पाठ पढ़ाया है ? स्पष्ट कीजिए।

Medha Ma’am
AskMedha’s AI teacher
Model answer · Kabir Sakhi, Manushyata, Toop
- 1.संसार के लोग खाने-सोने और भोग-विलास को ही सुख मानते हैं; 'सोना' उनके अज्ञान का प्रतीक है। कबीर ज्ञान के कारण जागते हैं और संसार की अज्ञानता तथा प्रभु-वियोग पर दुखी होकर रोते हैं। उनके लिए प्रभु-मिलन ही सच्चा सुख है।2 marks
- 2.कवि कहता है कि मनुष्य मरणशील है और मृत्यु निश्चित है, इसलिए उससे डरना व्यर्थ है। हमें परोपकार भरा जीवन जीना चाहिए, ताकि हमारी मृत्यु 'सुमृत्यु' बने और सब हमें याद करें।1.5 marks
- 3.(iii) 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में प्रकृति-सौंदर्य का वर्णन है। उसमें पर्वत अपने चरणों में फैले दर्पण जैसे तालाब में अपना विशाल रूप निहारता है, उस पर खिले फूल उसकी हज़ारों आँखें लगते हैं, झरने मोती की लड़ियों-से झरते हैं और ऊँचे पेड़ आकाश की ओर ताकते हैं। (iv) कवि बताता है कि अंग्रेज़ व्यापारी बनकर आए थे और इसी तोप से हमारे शूरवीरों को मारकर हमें गुलाम बनाया। इसलिए हमें देश की आज़ादी के लिए सदा सजग और एकजुट रहना चाहिए।1.5 marks
Marks split as in the board’s published marking scheme
- Q3Case-based5 marksAsked: 2026
निम्नलिखित काव्यांश (दोहों) को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कर लिखिए : कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढै बन माँहि । ऐसें घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखै नाँहि ।। बिरह भुबंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ । राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होई ।। (i) ‘बौरा’ किसे कहा गया है ? (A) जो परमात्मा के प्रेम में डूबा है । (B) जो संसार के प्रेम में डूबा है । (C) जिसे किसी साँप ने डँस लिया हो । (D) जिसे सांसारिक प्रेम में निराशा मिली हो । (ii) ‘ऐसें घटि घटि राँम है’ में ‘घटि घटि’ का गलत अर्थ है - (A) जीव मात्र (B) कण-कण (C) हर जगह (D) हर घड़ी

Medha Ma’am
AskMedha’s AI teacher
Model answer · multiple choice, Kabir's sakhi
- 1.प्रश्न (i) का सही उत्तर विकल्प (A) है अर्थात 'जो परमात्मा के प्रेम में डूबा है।' 'राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ' पंक्ति में बौरा उसे कहा गया है जो ईश्वर के वियोग में व्याकुल होकर भी जीवित रहता है, अर्थात जो परमात्मा के प्रेम में डूबा हुआ व्यक्ति है।2.5 marks
- 2.प्रश्न (ii) का सही उत्तर विकल्प (D) है अर्थात 'हर घड़ी'। 'ऐसें घटि घटि राँम है' में 'घटि घटि' का अर्थ हर घड़ी नहीं होता है, क्योंकि यहाँ 'घटि घटि' का प्रयोग जीव मात्र, कण-कण और हर जगह के अर्थ में हुआ है, समय के अर्थ में नहीं।2.5 marks
- उत्तर में सीधे विकल्प अक्षर जैसे (A) और (D) अवश्य लिखें।
- 'बौरा' के लिए 'परमात्मा के प्रेम में डूबा' वाक्यांश ज्यों का त्यों लिखें।
- 'घटि घटि' के सही अर्थ (जीव मात्र, कण-कण, हर जगह) बताकर स्पष्ट करें कि 'हर घड़ी' गलत अर्थ क्यों है।
Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme
- Q4Case-based5 marksAsked: 2024
निम्नलिखित पठित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : (i) 'कस्तूरी कुंडल बसै ...' दोहे में किसका वर्णन किया गया है ? (ii) 'जब मैं था तब हरि नहीं' पंक्ति में 'मैं' से अभिप्राय है - (iii) 'जब मैं था तब हरि नहीं' दोहे के अनुसार हृदय में ईश्वर का निवास कब असंभव है ? (iv) 'जब दीपक देख्या माँहि' - पंक्ति में 'दीपक' प्रतीकार्थ है - (v) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए : कथन : ईश्वर सृष्टि के कण-कण में निवास करते हैं पर हम उन्हें देख नहीं पाते । कारण : मनुष्य के पास दिव्य-दृष्टि नहीं है ।
How the model answer begins
1. कस्तूरी कुंडल बसै दोहे में ईश्वर की सर्वव्यापकता और मनुष्य की अज्ञानता का वर्णन किया गया है। जैसे कस्तूरी मृग अपनी नाभि में कस्तूरी होते हुए भी उसे वन में ढूँढता रहता है, वैसे ही मनुष्य कण-कण में व्याप्त ईश्वर को बाहर…
The full answer from Medha Ma’am → - Q5Case-based5 marksAsked: 2023
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : सुखिया सब संसार है, खायै अरु सोवै। दुखिया दास कबीर है, जागै अरु रोवै।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ। राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ।। (i) कबीरदास जी क्यों दुःखी हैं ? (ii) 'सोना' और 'जागना' क्रमशः किसके प्रतीकार्थ हैं ? (iii) किस व्यक्ति पर 'मंत्र' का कोई प्रभाव नहीं दिखाई देता ? (iv) कबीरदास जी के अनुसार 'बौरा' कौन है ? (v) 'मंत्र न लगना' का अर्थ है :
How the model answer begins
1. कबीरदास जी ईश्वर अर्थात् राम से विरह के कारण दुःखी हैं। संसार के लोग सांसारिक सुखों में मग्न रहकर खाते और सोते हैं, परंतु कबीर दास राम के वियोग में जागते और रोते रहते हैं, इसलिए वे दुःखी हैं।
The full answer from Medha Ma’am → - Q6Case-based5 marksAsked: 2024
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै । दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै ।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोय । राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ ।। (i) पहले दोहे में 'सोना' और 'जागना' प्रतीकार्थ है - (A) अज्ञानता और ज्ञान का (B) निष्क्रियता और सक्रियता का (C) अचेतनता और चेतनता का (D) निर्जीवता और सजीवता का (ii) कबीर दुखी हैं क्योंकि वे - (A) एकाकी जीवन व्यतीत कर रहे हैं । (B) ईश्वर से वियोग के कारण व्यथित हैं । (C) सांसारिक सुखों का भोग नहीं कर पा रहे हैं । (D) ईश्वरीय सत्य से लोगों को परिचित नहीं करवा पा रहे हैं । (iii) 'मंत्र न लगना' का आशय है - (A) मंत्रों का निष्फल होना (B) पूजा-पाठ का काम न आना (C) कोई उपाय काम न आना (D) मंत्रोच्चार की विधि न जानना (iv) राम वियोगी व्यक्ति की तुलना किससे की गई है ? (A) विक्षिप्त व्यक्ति से (B) विरह रूपी व्यक्ति से (C) विष युक्त सर्प के तन से (D) विरह रूपी सर्प से ग्रसित व्यक्ति से
How the model answer begins
1. पहले दोहे में 'सोना' और 'जागना' प्रतीकार्थ अचेतनता और चेतनता का है। सही विकल्प (C) है।
The full answer from Medha Ma’am → - Q7Short answer3 marksAsked: 2023
कबीर के अनुसार ईश्वर कहाँ निवास करता है सांसारिक मनुष्यों द्वारा उसे न देख पाने का क्या कारण है, और उस तक कैसे पहुँचा जा सकता है ?
How the model answer begins
1. कबीर के अनुसार ईश्वर कण-कण में, घट-घट में और मनुष्य के हृदय में ही निवास करता है। जैसे कस्तूरी हिरण की नाभि में ही होती है, वैसे ही राम हर प्राणी के भीतर हैं।
The full answer from Medha Ma’am → - Q8Short answer3 marksAsked: 2023
कबीर स्वयं को दुःखी और संसार को सुखी क्यों मानते हैं ? कारण स्पष्ट कीजिए
How the model answer begins
1. कबीर संसार को सुखी इसलिए मानते हैं कि संसार के लोग केवल खाने-पीने और सोने में मग्न रहते हैं — "सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै।" वे माया-मोह, धन और सांसारिक सुखों को ही सच्चा सुख मान लेते हैं। अपने अज्ञान के कारण वे…
The full answer from Medha Ma’am → - Q9Short answer3 marksAsked: 2023
'सुखिया सब संसार है, खाये अरु सोवै । दुखिया दास कबीर है, जागै अरु रौवै ।' — साखी के संदर्भ में कबीर के दुखी और जाग्रत होने का कारण लिखिए । क्या जागना भी दुख का कारण हो सकता है ? स्पष्ट कीजिए
How the model answer begins
1. कबीर इसलिए दुखी हैं क्योंकि वे सांसारिक मनुष्यों की अज्ञानता देखते हैं। संसार के लोग केवल 'खायै अरू सोवै' अर्थात् खाने और सोने में ही जीवन बिता रहे हैं। वे ईश्वर को नहीं पहचानते और अपना जीवन व्यर्थ गँवा रहे हैं।
The full answer from Medha Ma’am → - Q10Short answer3 marksAsked: 2023
"अब घर जालौं तास का जे चले हमारे साथि" — साखी के संदर्भ में 'घर' शब्द की प्रतीकात्मकता स्पष्ट करते हुए इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए
How the model answer begins
1. इस साखी में कबीर कहते हैं कि गुरु के माध्यम से ज्ञान मिलने पर उन्होंने ज्ञान रूपी मुराड़ा (जलती हुई लकड़ी) हाथ में लेकर अपना अहंकार रूपी घर जला दिया है। ज्ञान पाकर उन्होंने मोह-माया और विषय-वासना को भी त्याग दिया है।
The full answer from Medha Ma’am → - Q11Short answer3 marksAsked: 2023
पठित कविता के आधार पर वाणी के संबंध में कबीर के विचारों पर प्रकाश डालिए
How the model answer begins
1. कबीर के अनुसार मनुष्य को "मन का आपा खोइ" अर्थात् मन का अहंकार (आपा) त्यागकर वाणी (बाँणी) बोलनी चाहिए। बोली गई वाणी कठोर या अहंकार से भरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि कठोर वचन अहंकार से ही निकलते हैं।
The full answer from Medha Ma’am → - Q12Short answer3 marksAsked: 2023
'साखी' शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए अपने पाठ्यक्रम में संकलित कबीर की साखियों का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए
How the model answer begins
1. 'साखी' शब्द संस्कृत के 'साक्षी' शब्द से बना है, जिसका अर्थ है प्रत्यक्ष ज्ञान अथवा अनुभव के आधार पर गुरु द्वारा दिया गया सत्य का गवाह अथवा प्रमाण। कबीर शास्त्रीय ज्ञान की अपेक्षा अनुभव ज्ञान को अधिक महत्त्व देते थे,…
The full answer from Medha Ma’am → - Q13Case-based2 marksAsked: 2024
काव्य खण्ड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए : (i) 'सब अँधियारा मिटि गया' - कबीर के 'दोहे' की इस पंक्ति में अँधियारा किसका प्रतीक है? (ii) 'गिरि का गौरव गाकर झर-झर' - पंक्ति में झरने के 'झर-झर' स्वर में कवि ने क्या कल्पना की है? 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर लिखिए :
How the model answer begins
1. 'सब अँधियारा मिटि गया' पंक्ति में अँधियारा अज्ञान, मोह और माया का प्रतीक है। कबीर कहते हैं कि जब उन्होंने अपने भीतर ज्ञान रूपी दीपक देखा, तब उनके मन का सारा भ्रम और अज्ञान का अँधियारा मिट गया। यह अँधियारा उस भ्रम का…
The full answer from Medha Ma’am → - Q14Short answer2 marksAsked: 2026
सुख-दुख के विषय में कबीर और सांसारिक मनुष्यों के दृष्टिकोण में क्या अंतर है ? ‘साखी’ कविता के आधार पर लिखिए
How the model answer begins
1. कबीर के अनुसार ज्ञान प्राप्ति ही सच्चा सुख है और अज्ञानता से बड़ा कोई दुख नहीं है। इसके विपरीत सामान्य मनुष्य भौतिक संपदा, खाने और सोने जैसे निजी स्वार्थों की पूर्ति में ही सुख तलाशता है। कबीर कहते हैं— 'सुखिया सब संसार…
The full answer from Medha Ma’am → - Q15Short answer2 marksAsked: 2026
ईश्वर की सर्वव्यापकता का उल्लेख करने के लिए कबीर ने 'साखी' में क्या उदाहरण दिया है ? इसके माध्यम से कवि ने क्या स्पष्ट किया है ?
How the model answer begins
1. ईश्वर की सर्वव्यापकता बताने के लिए कबीर ने कस्तूरी और मृग (हिरण) का उदाहरण दिया है। कस्तूरी हिरण की कुंडलि (नाभि) में ही बसती है, फिर भी हिरण उसे वन में ढूँढता फिरता है। इस उदाहरण से कवि ने स्पष्ट किया है कि राम (ईश्वर)…
The full answer from Medha Ma’am → - Q16Short answer2 marksAsked: 2025
साधारणतः निंदक किसी को पसंद नहीं होते फिर भी कबीरदासजी ने निंदकों को अपने पास रखने की सलाह क्यों दी है ?
How the model answer begins
1. कबीरदासजी ने निंदकों को पास रखने की सलाह इसलिए दी है क्योंकि निंदक अपनी आलोचनाओं से हमें हमारी कमियों से अवगत कराता है। वे कहते हैं – "निंदक नेड़ा राखिये, आँगण कुटी बँधाइ। बिन साबण पाँणीं बिना, निरमल करै सुभाइ।।"…
The full answer from Medha Ma’am → - Q17Short answer2 marksAsked: 2025
'समाज में परिवर्तन या सुधार लाने की शुरुआत अपने घर से करनी चाहिए ।' - कबीर की साखी के माध्यम से इस कथन को सिद्ध कीजिए
How the model answer begins
1. कबीर की साखी कहती है कि समाज में परिवर्तन या सुधार की शुरुआत पहले स्वयं से, अर्थात् अपने मन से करनी चाहिए। दूसरों पर दोष लगाने से पहले व्यक्ति को अपने भीतर झाँककर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। कबीर ने पहले स्वयं में सुधार…
The full answer from Medha Ma’am → - Q18Short answer2 marksAsked: 2025
'वाणी की मधुरता का प्रभाव सर्वव्यापक होता है।' - कबीर की साखी के माध्यम से इस कथन को सिद्ध कीजिए
How the model answer begins
1. कबीर ने अपनी साखी 'ऐसी बाँणी बोलिये, मन का आपा खोइ। अपना तन सीतल करै, औरन कौं सुख होइ।।' में कहा है कि मन का आपा (अहंकार) खोकर मीठी वाणी बोलनी चाहिए। ऐसी मधुर वाणी से बोलने वाले और सुनने वाले, दोनों को सुख मिलता है।…
The full answer from Medha Ma’am → - Q19Short answer2 marksAsked: 2025
कबीर की साखी के अनुसार उनके रुदन का कारण स्पष्ट कीजिए
How the model answer begins
1. कबीर कहते हैं, 'सुखिया सब संसार है, खायै अरु सोवै। दुखिया दास कबीर है, जागै अरु रोवै।' संसार के लोग खाने-सोने और भोग-विलास को ही सुख मानकर ईश्वर को भूल गए हैं। उनकी यह अज्ञानता देखकर ज्ञानी कबीर जागते और रोते हैं।
The full answer from Medha Ma’am → - Q20Short answer2 marksAsked: 2025
कबीर के, निंदक को पास रखने वाले विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं और क्यों?
How the model answer begins
1. मैं कबीर के निंदक को पास रखने वाले विचार से पूरी तरह सहमत हूँ, क्योंकि निंदक व्यक्ति के साथ रहने से हमें अपनी कमियों को जानने तथा उन्हें सुधारने का अवसर मिलता है। कबीर कहते हैं— 'निंदक नेड़ा राखिये, आँगण कुटी बँधाइ',…
The full answer from Medha Ma’am →
1 more questions of this chapter, each with its model answer, in the AskMedha app.
Objective questions with the board’s key (10)
- 1. CBSE 2026
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढै बन माँहि । ऐसें घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखै नाँहि ।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ । राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ ।। ‘बौरा’ किसे कहा गया है ?
- (A) जो परमात्मा के प्रेम में डूबा है । ✓
- (B) जो संसार के प्रेम में डूबा है ।
- (C) जिसे किसी साँप ने डँस लिया हो ।
- (D) जिसे सांसारिक प्रेम में निराशा मिली हो ।
Answer: (A)
- 2. CBSE 2026
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढै बन माँहि । ऐसें घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखै नाँहि ।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ । राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ ।। निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : परमात्मा प्रत्येक प्राणी के हृदय में निवास करता है । कारण : सांसारिक मोह-माया में लिप्त प्राणी इस सत्य से सुपरिचित होता है । विकल्प :
- (A) कथन और कारण दोनों गलत हैं ।
- (B) कथन गलत है, लेकिन कारण सही है ।
- (C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की गलत व्याख्या करता है । ✓
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है ।
Answer: (C)
- 3. CBSE 2026
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढे बन माँहि । ऐसें घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखे नाँहि ।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ । राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ ।। ‘बौरा’ किसे कहा गया है ?
- (A) जो परमात्मा के प्रेम में डूबा है । ✓
- (B) जो संसार के प्रेम में डूबा है ।
- (C) जिसे किसी साँप ने डँस लिया हो ।
- (D) जिसे सांसारिक प्रेम में निराशा मिली हो ।
Answer: (A)
- 4. CBSE 2026
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढे बन माँहि । ऐसें घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखे नाँहि ।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ । राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ ।। ‘विरह भुवंगम तन बसै’ का भाव है -
- (A) भुजंग का तन में वास होना
- (B) भुजंग से विरह की अनुभूति होना
- (C) परमात्मा का तन से विरह होना
- (D) परमात्मा से विरह की अनुभूति होना ✓
Answer: (D)
- 5. CBSE 2026
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढे बन माँहि । ऐसें घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखे नाँहि ।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ । राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ ।। ‘ऐसें घटि घटि राँम है’ में ‘घटि घटि’ का गलत अर्थ है -
- (A) जीव मात्र
- (B) कण-कण
- (C) हर जगह
- (D) हर घड़ी ✓
Answer: (D)
- 6. CBSE 2026
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढे बन माँहि । ऐसें घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखे नाँहि ।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ । राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ ।। निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए : कथन : परमात्मा प्रत्येक प्राणी के हृदय में निवास करता है । कारण : सांसारिक मोह-माया में लिप्त प्राणी इस सत्य से सुपरिचित होता है । विकल्प :
- (A) कथन और कारण दोनों गलत हैं ।
- (B) कथन गलत है, लेकिन कारण सही है ।
- (C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की गलत व्याख्या करता है । ✓
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है ।
Answer: (C)
- 7. CBSE 2026
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढे बन माँहि । ऐसें घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखे नाँहि ।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ । राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ ।। ‘राम वियोगी ना जिवै’ का आशय है -
- (A) राम का वियोगी स्वयं मृत्यु को प्राप्त हो जाता है ।
- (B) राम का वियोगी स्वयं मृत्यु का वरण कर लेता है ।
- (C) राम का वियोगी सांसारिक मोह-माया से मुक्त हो जाता है ।
- (D) राम से विरही व्यक्ति की स्थिति विक्षिप्तों जैसी हो जाती है । ✓
Answer: (D)
- 8. CBSE 2024
‘सब अँधियारा मिटि गया’ - कबीर के ‘दोहे’ की इस पंक्ति में अँधियारा किसका प्रतीक है?
- (A) निराशा
- (B) अहंकार
- (C) अज्ञान ✓
- (D) कालिमा
Answer: (C)
- 9. CBSE 2024
‘गिरि का गौरव गाकर झर-झर’ - पंक्ति में झरने के ‘झर-झर’ स्वर में कवि ने क्या कल्पना की है? ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता के आधार पर लिखिए :
- (A) बादलों की गड़गड़ाहट की
- (B) झरनों की कल-कल करती मधुर ध्वनि की
- (C) पक्षियों के कलरव की जुगल-बंदी की
- (D) पर्वत के गौरव-गान की ✓
Answer: (D)
- 10. CBSE 2024
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढै बन माँहि । ऐसें घटि घटि राम है, दुनियाँ देखै नाँहि ।। जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि । सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि ।। 'कस्तूरी कुंडल बसै ...' दोहे में किसका वर्णन किया गया है ?
- (A) कस्तूरी ढूँढने वाले मृग का
- (B) सांसारिकता में लीन मानव का
- (C) अपनी ही विशेषता से अनजान मनुष्य का
- (D) ईश्वर की सर्वव्यापकता का ✓
Answer: (D)
Questions parents and students ask
- How many marks does "साखी (कबीर)" carry in CBSE Class 10 Hindi B?
- In the CBSE papers of 2023–2026, this chapter carried about 2 marks and about 1 questions a year; by marks it ranks 13 in Hindi B.
- Which are the most important (VVI) questions of "साखी (कबीर)"?
- The 20 questions above are from the board’s real papers, each with the years it was asked; the most-asked come first with their full model answers. All 21 written questions of this chapter, with answers, are in the AskMedha app.
- Do the answers follow the board’s marking scheme?
- Yes. CBSE publishes its marking schemes; every model answer here is written point by point to the marks the board’s own scheme gives, and checked by a second, independent model.
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