CBSE Class 10 · Hindi B · board exam 2027
Chapter 13: पतझर में टूटी पत्तियाँ (रवींद्र केलेकर)
This chapter’s questions from CBSE’s real papers of 2023–2026 — the 6 asked most often, 3 with the full model answer, 3 with how the answer begins — and objective questions with the board’s key.
- marks a year (about)
- 1
- questions a year (about)
- 0
- rank in Hindi B
- #27
From 4 years of papers, 2023–2026 · full chapter-wise marks
Important questions — the ones the board asked most (6)
- Q1Short answer6 marksAsked: 2024
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए : (क) ‘झेन की देन’ पाठ में लेखक के मित्र द्वारा बताए गए मानसिक रोग के कारणों पर अपनी टिप्पणी कीजिए । (ख) ‘तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र’ पाठ के संदर्भ में लिखिए कि संगीतकार जयकिशन और शैलेंद्र में किस बात को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी ? उन दोनों के तर्कों को प्रस्तुत कीजिए । (ग) ‘डायरी का एक पन्ना’ पाठ में वर्णित स्वतंत्रता आंदोलन और अंग्रेज़ी सत्ता की क्रूरता का उल्लेख संक्षेप में कीजिए ।

Medha Ma’am
AskMedha’s AI teacher
Model answer
- 1.लेखक के मित्र के अनुसार जापान में जीवन की रफ़्तार बहुत बढ़ गई है। वहाँ लोग चलते नहीं, दौड़ते हैं; बोलते नहीं, बकते हैं और अकेले में खुद से बड़बड़ाते रहते हैं। अमेरिका से होड़ में वे महीने भर का काम एक दिन में करना चाहते हैं, जिससे दिमाग का तनाव बढ़ता है और उसका 'इंजन' टूट जाता है। मेरे विचार से यह बात सही है और आज हमारे देश पर भी लागू होती है, इसलिए हमें संतुलित और शांत जीवन अपनाना चाहिए।3 marks
- 2.(ख) गीत 'प्यार हुआ, इकरार हुआ है' की पंक्ति 'रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर दोनों में असहमति थी। जयकिशन चाहते थे कि 'दसों दिशाएँ' की जगह 'चारों दिशाएँ' लिखा जाए, क्योंकि आम दर्शक चार दिशाएँ ही समझते हैं। शैलेंद्र इसके लिए तैयार नहीं हुए। उनका तर्क था कि कलाकार का कर्तव्य दर्शकों की रुचि के नाम पर उथलापन थोपना नहीं, बल्कि उनकी रुचि का परिष्कार करना है। (ग) 26 जनवरी को कलकत्ता में स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी थी, पर पुलिस ने सभा पर रोक लगाकर पार्कों और मैदानों को घेर लिया। सुभाष बाबू के नेतृत्व में जुलूस निकला तो पुलिस ने लाठियाँ बरसाईं, सुभाष बाबू को पकड़कर लॉकअप भेज दिया। स्त्रियों ने मोनुमेंट की सीढ़ियों पर झंडा फहराकर घोषणा पढ़ी। अनेक लोग घायल हुए और बहुत-सी स्त्रियाँ गिरफ़्तार हुईं। यह अंग्रेज़ी सत्ता की क्रूरता और जनता के साहस दोनों को दिखाता है।3 marks
Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme
- Q2Short answer3 marksAsked: 2024
‘गिन्नी का सोना’ पाठ में ‘वे सोने में ताँबा नहीं बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी क़ीमत बढ़ाते थे ।’ — यह कथन किसके लिए कहा गया है और क्यों ? इसका तात्पर्य समझाइए

Medha Ma’am
AskMedha’s AI teacher
Model answer · Gandhiji's ideals and practicality
- 1.यह कथन गांधीजी के लिए कहा गया है। कुछ लोग उन्हें 'प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट' कहते हैं, क्योंकि वे व्यावहारिकता को पहचानते थे और उसकी कीमत जानते थे। फिर भी वे अपने आदर्शों पर दृढ़ रहते थे।1 mark
- 2.ऐसा इसलिए कहा गया है कि गांधीजी कभी आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर उतरने नहीं देते थे। इसके उलट, वे व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर चढ़ाते थे, यानी व्यवहार को ऊपर उठाते थे।1 mark
- 3.इसका तात्पर्य यह है कि ताँबा व्यावहारिकता का प्रतीक है और सोना शुद्ध आदर्श का। गांधीजी व्यवहार में आदर्श मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे। वे आदर्शों से समझौता करके उनका मूल्य नहीं घटाते थे। इसलिए उनके जीवन में सोना, यानी आदर्श, ही हमेशा आगे रहता था।1 mark
- पहले अनुच्छेद में 'गांधीजी', 'व्यावहारिकता' और 'आदर्शों पर दृढ़' तीनों बातें लिखिए।
- कारण बताते समय लिखिए कि गांधीजी 'व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर चढ़ाते थे'।
- तात्पर्य में साफ़ लिखिए कि 'ताँबा व्यावहारिकता का प्रतीक है और सोना शुद्ध आदर्श का', और गांधीजी व्यवहार की 'कीमत बढ़ाते थे'।
Marks split as in the board’s published marking scheme
- Q3Short answer3 marksAsked: 2023
'पतझर में टूटी पत्तियाँ' के लेखक के अनुसार 'सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए ।' क्या आप लेखक के विचार से सहमत हैं ? अपने पक्ष के समर्थन या विरोध में तर्क सहित उत्तर दीजिए

Medha Ma’am
AskMedha’s AI teacher
Model answer · present moment, Patjhar mein Tooti Patiyan
- 1.हम लेखक के इस विचार से पूर्णतः सहमत हैं कि सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है, वही सत्य है और उसी का महत्व सबसे अधिक है, क्योंकि यही क्षण वास्तव में हमारे हाथ में होता है।1 mark
- 2.हम अक्सर या तो गुज़रे हुए दिनों की खट्टी-मीठी यादों में उलझे रहते हैं या भविष्य के रंगीन सपने देखते रहते हैं। इस प्रकार हम भूतकाल और भविष्यकाल में जीते रहते हैं, जिससे मन में अशांति बनी रहती है और हम वर्तमान के सुख-चैन से वंचित रह जाते हैं।1 mark
- 3.असल में भूतकाल और भविष्यकाल दोनों मिथ्या हैं क्योंकि एक चला गया है और दूसरा अभी आया नहीं है, इसलिए सत्य केवल वर्तमान ही है। इसी वर्तमान क्षण में हम कोई कार्य कर सकते हैं और अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं, इसीलिए लेखक ने वर्तमान में जीने की बात कही है।1 mark
- पहले वाक्य में ही 'सहमत' शब्द लिखकर अपना पक्ष स्पष्ट करें।
- दूसरे पैराग्राफ में 'भूतकाल', 'भविष्यकाल' और 'अशांति' शब्द अवश्य लिखें।
- तीसरे पैराग्राफ में 'सत्य केवल वर्तमान है' पंक्ति दोहराते हुए 'कार्य' और 'सार्थक' शब्द लिखें।
Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme
- Q4Short answer2 marksAsked: 2026
‘चा-नो-यू’ जैसी परंपराएँ व्यक्ति को आत्मबोध कराती हैं । ‘झेन की देन’ पाठ के आधार पर इस कथन पर प्रकाश डालिए
How the model answer begins
1. ‘चा-नो-यू’ जैसी परंपराएँ व्यक्ति को आत्मबोध कराती हैं, क्योंकि ये भागदौड़ भरे जीवन में कुछ चैन भरे पल देती हैं। ‘झेन की देन’ पाठ में टी-सेरेमनी के शांत वातावरण में चाय पीते हुए लेखक के दिमाग की रफ़्तार धीमी होकर बंद हो…
The full answer from Medha Ma’am → - Q5Short answer2 marksAsked: 2026
'व्यवहारवादी लोग हमेशा सजग रहते हैं । हानि-लाभ का हिसाब लगाकर ही कदम उठाते हैं । 'गिन्नी का सोना' पाठ के आधार पर लिखिए कि लेखक यहाँ किस 'सजगता' की बात कर रहा है ?
How the model answer begins
1. लेखक व्यवहारवादी लोगों की स्वार्थ भरी सजगता की बात कर रहा है। ऐसे लोग हर कदम पर स्वार्थसिद्धि का ध्यान रखते हैं और पहले देखते हैं कि उसमें उनका अपना लाभ है या हानि। उन्हें अपनी व्यक्तिगत छवि की चिंता रहती है। उनमें…
The full answer from Medha Ma’am → - Q6Short answer2 marksAsked: 2025
‘गिन्नी का सोना’ पाठ में दिए गए प्रसंग के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए
How the model answer begins
1. ‘गिन्नी का सोना’ प्रसंग का महत्त्व यह है कि यह बताता है कि समाज को उदात्त रूप प्रदान करने के लिए आदर्शों को अपनाना आवश्यक है। शुद्ध आदर्श शुद्ध सोने जैसे होते हैं और व्यावहारिकता ताँबे जैसी होती है। जब व्यावहारिकता का…
The full answer from Medha Ma’am →
Objective questions with the board’s key (2)
- 1. CBSE 2023
वर्तमान समाज में मौजूद शाश्वत मूल्य किसकी देन हैं ? (गिन्नी का सोना)
- (A) व्यवहारवादी व्यक्तियों की
- (B) आदर्शवादी व्यक्तियों की ✓
- (C) प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों की
- (D) स्वतंत्रता सेनानियों की
Answer: (B)
- 2. CBSE 2023
उत्कृष्ट होते हुए भी 'तीसरी कसम' फिल्म सिनेमाघरों में क्यों नहीं चली ?
- (A) फिल्म की संवेदना का प्रचार न होने के कारण ✓
- (B) अच्छे गीतों के अभाव के कारण
- (C) फिल्म में कमजोर अभिनय के कारण
- (D) फिल्म की कमजोर पटकथा के कारण
Answer: (A)
Questions parents and students ask
- How many marks does "पतझर में टूटी पत्तियाँ (रवींद्र केलेकर)" carry in CBSE Class 10 Hindi B?
- In the CBSE papers of 2023–2026, this chapter carried about 1 marks and about 0 questions a year; by marks it ranks 27 in Hindi B.
- Which are the most important (VVI) questions of "पतझर में टूटी पत्तियाँ (रवींद्र केलेकर)"?
- The 6 questions above are from the board’s real papers, each with the years it was asked; the most-asked come first with their full model answers. All 6 written questions of this chapter, with answers, are in the AskMedha app.
- Do the answers follow the board’s marking scheme?
- Yes. CBSE publishes its marking schemes; every model answer here is written point by point to the marks the board’s own scheme gives, and checked by a second, independent model.
The same preparation, with Medha Ma’am — on your phone
Every question of every chapter with its model answer, practice questions in the board’s own shapes, 60 minutes of class a day, written answers marked, a test every Sunday and a WhatsApp report to parents.
Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.