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CBSE Class 10 · Hindi B · board exam 2027

Chapter 11: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र (प्रह्लाद अग्रवाल)

This chapter’s questions from CBSE’s real papers of 2023–2026 — the 13 asked most often, 3 with the full model answer, 10 with how the answer begins — and objective questions with the board’s key.

marks a year (about)
1
questions a year (about)
1
rank in Hindi B
#24

From 4 years of papers, 2023–2026 · full chapter-wise marks

Chapter 11 notes (PDF) →

Important questions — the ones the board asked most (13)

  1. Q1Case-based5 marksAsked: 2023

    निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर लिखिए : राज कपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह भी किया। पर वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी, जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी। 'तीसरी कसम' कितनी ही महान् फ़िल्म क्यों न रही हो, लेकिन यह एक दुःखद सत्य है कि इसे प्रदर्शित करने के लिए बमुश्किल वितरक मिले। बावजूद इसके कि 'तीसरी कसम' में राज कपूर और वहीदा रहमान जैसे नामजद सितारे थे, शंकर-जयकिशन का संगीत था, जिनकी लोकप्रियता उन दिनों सातवें आसमान पर थी और इसके गीत भी फ़िल्म के प्रदर्शन के पूर्व ही बेहद लोकप्रिय हो चुके थे, लेकिन इस फ़िल्म को खरीदने वाला कोई नहीं था। दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने का गणित जानने वाले की समझ से परे थी। उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज़ नहीं थी। (i) राज कपूर ने शैलेंद्र को किस बात से आगाह किया था ? (ii) शैलेंद्र को किस प्रकार का व्यक्ति माना जा सकता है ? (iii) 'तीसरी कसम' फ़िल्म का दुःखद सत्य क्या था ? (iv) गद्यांश में आई पंक्ति - 'दो से चार बनाने का गणित' - का अर्थ है : (v) ''उसमें रची-बसी करुणा तराज़ू पर तौली जा सकने वाली चीज़ नहीं थी।'' - पंक्ति का आशय है :

    Medha Ma’am

    Medha Ma’am

    AskMedha’s AI teacher

    Model answer · comprehension passage, Shailendra

    1. 1.(i) राज कपूर ने एक सच्चे मित्र की तरह शैलेंद्र को फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह किया था।1 mark
    2. 2.(ii) शैलेंद्र एक आदर्शवादी और भावुक कवि थे। उन्हें अपार संपत्ति और यश की उतनी कामना नहीं थी, जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की।1 mark
    3. 3.(iii) 'तीसरी कसम' एक महान फ़िल्म थी, उसमें राज कपूर और वहीदा रहमान जैसे सितारे और शंकर-जयकिशन का लोकप्रिय संगीत था, फिर भी इसे प्रदर्शित करने के लिए बमुश्किल वितरक मिले और कोई इसे खरीदने वाला नहीं था।1 mark
    4. 4.(iv) 'दो से चार बनाने का गणित' का अर्थ है पैसे को दुगना करने यानी केवल मुनाफ़ा कमाने का व्यावसायिक हिसाब।1 mark
    5. 5.(v) इसका आशय है कि फ़िल्म में भरी करुणा भावना से अनुभव करने की चीज़ थी; उसका मूल्य पैसे या लाभ-हानि के हिसाब से नहीं आँका जा सकता था।1 mark

    Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme

  2. Q2Short answer3 marksAsked: 2024

    'तीसरी कसम' एक कलात्मक फिल्म थी।' - इस कथन को 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए

    Medha Ma’am

    Medha Ma’am

    AskMedha’s AI teacher

    Model answer · Teesri Kasam as an artistic film

    1. 1.शैलेंद्र ने 'तीसरी कसम' फ़िल्म में भारतीय ग्रामीण जीवन की सादगी और संवेदनाओं को अत्यंत गहराई और ईमानदारी के साथ चित्रित किया है। फ़िल्म में हीरामन और हीराबाई के माध्यम से एक सीधे-सादे गाड़ीवान और नौटंकी की बाई के कोमल रिश्ते को बड़ी सूक्ष्मता से दिखाया गया है। यह फ़िल्म व्यावसायिक दृष्टि से असफल रही क्योंकि इसकी करुणा और संवेदना को तराज़ू पर तौला नहीं जा सकता था, फिर भी इसकी कलात्मक श्रेष्ठता के कारण इसे राष्ट्रपति स्वर्णपदक सहित कई पुरस्कार मिले।1 mark
    2. 2.फ़िल्म की पटकथा और संवादों में व्यावसायिकता के स्थान पर मानवीय भावनाओं और लोक संस्कृति को प्राथमिकता दी गई है। गाड़ीवान का गीत गाते हुए मस्ती में झूमना, बच्चों का टप्पर-गाड़ी के पीछे गाते हुए दौड़ना जैसे दृश्य ग्रामीण जीवन और लोक-तत्त्व को सजीव करते हैं। हीरामन-हीराबाई के सरल और सच्चे प्रेम को बिना किसी व्यावसायिक चमक-दमक के प्रस्तुत करने के कारण ही यह फ़िल्म व्यावसायिक असफलता का शिकार हुई, क्योंकि दर्शक और वितरक इस कलात्मक संवेदना को समझ नहीं पाए।1 mark
    3. 3.शैलेंद्र ने फ़िल्म के माध्यम से किसी भी प्रकार के बनावटीपन से बचते हुए एक शुद्ध और कलात्मक सिनेमाई अनुभव प्रस्तुत किया है। उन्होंने दुख को भी वीभत्स और ग्लोरीफ़ाई किए बिना सहज स्थिति में, जीवन-सापेक्ष रूप में दिखाया है, जो अन्य फ़िल्मों से बिलकुल अलग था। फणीश्वरनाथ रेणु की मूल कहानी के प्रति निष्ठा रखते हुए उन्होंने उसकी बारीकियों को साहित्यिक मूल्य सहित पूरी तरह फ़िल्म में उतारा, जिससे यह एक सच्ची कलात्मक फ़िल्म बन सकी।1 mark
    • पहले बिंदु में 'हिरामन-हीराबाई', 'ग्रामीण जीवन' और 'व्यावसायिक असफलता' शब्द अवश्य लिखें।
    • दूसरे बिंदु में 'लोक संस्कृति' और 'मानवीय भावनाएं' शब्दों का प्रयोग करें, पहले बिंदु की बातें न दोहराएँ।
    • तीसरे बिंदु में 'बनावटीपन', 'साहित्यिक मूल्य' और 'निष्ठा' शब्द लिखना न भूलें।

    Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme

  3. Q3Short answer3 marksAsked: 2024

    'तीसरी कसम' फिल्म को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

    Medha Ma’am

    Medha Ma’am

    AskMedha’s AI teacher

    Model answer · challenges faced by film 'Teesri Kasam'

    1. 1.'तीसरी कसम' फ़िल्म के निर्माण में धन की कमी रही जिसके कारण शूटिंग के दौरान काम बार-बार रुकता रहा और यह फ़िल्म बनने में तीन साल से भी अधिक का समय लग गया।1 mark
    2. 2.फ़िल्म में राजकपूर और वहीदा रहमान जैसे नामज़द सितारे होने तथा शंकर-जयकिशन का लोकप्रिय संगीत होने के बावजूद इसे प्रदर्शित करने के लिए बमुश्किल वितरक मिले। फ़िल्म को खरीदने वाला कोई नहीं था, जिससे इसके सिनेमाघरों में प्रदर्शन में बहुत कठिनाई हुई।1 mark
    3. 3.फ़िल्म की विषय-वस्तु और शैली व्यावसायिक सिनेमा से बिल्कुल भिन्न थी। इसमें रची-बसी करुणा तराज़ू पर तौली जा सकने वाली चीज़ नहीं थी, इसलिए दो से चार बनाने का गणित जानने वाले व्यापारिक सोच वाले लोगों की समझ से यह फ़िल्म परे थी और इसे दर्शकों तक पहुँचाना कठिन हो गया था।1 mark
    • पहले बिंदु में 'धन की कमी' और 'तीन साल' दोनों शब्द अवश्य लिखें।
    • दूसरे बिंदु में 'वितरक' न मिलने की बात स्पष्ट रूप से लिखें।
    • तीसरे बिंदु में फ़िल्म की विषय-वस्तु को 'व्यावसायिक सिनेमा' से अलग बताना न भूलें।

    Marks split from a structure derived from past papers (checked twice); not CBSE’s official scheme

  4. Q4Short answer3 marksAsked: 2024

    फिल्मकार शैलेंद्र के बारे में लेखक ने क्या कहा है ? उन कथनों से आपके मन में शैलेंद्र की कौन-सी छवि उभरती है ?

    How the model answer begins

    1. लेखक ने शैलेंद्र को गीतकार नहीं, कवि कहा है। उनके अनुसार शैलेंद्र एक आदर्शवादी, भावुक और संवेदनशील कवि थे। सिनेमा की चकाचौंध के बीच रहते हुए भी वे यश, धन-लिप्सा और मोह-माया से कोसों दूर थे। जो बात उनकी ज़िंदगी में थी,…

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  5. Q5Short answer3 marksAsked: 2024

    फ़िल्मकार शैलेंद्र के जीवन की कौन-सी विशेषताएँ आप अपनाना चाहेंगे और क्यों ? ‘तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र’ के संदर्भ में लिखिए

    How the model answer begins

    1. मैं फ़िल्मकार शैलेंद्र की पहली विशेषता उनकी आदर्शवादी सोच और संवेदनशीलता अपनाना चाहूँगा। वे सिनेमा की चकाचौंध के बीच रहते हुए भी यश और धन-लिप्सा से कोसों दूर थे। उन्होंने ‘तीसरी कसम’ धन या यश के लिए नहीं, बल्कि केवल…

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  6. Q6Short answer2 marksAsked: 2026

    तीसरी कसम फ़िल्म की कहानी सुनकर राजकपूर ने शैलेंद्र को क्या समझाया ? इससे उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता का पता चलता है ?

    How the model answer begins

    1. 'तीसरी कसम' फ़िल्म की कहानी सुनकर राजकपूर ने बड़े उत्साह से उसमें काम करना स्वीकार किया, पर शैलेंद्र को फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह भी किया। वे जानते थे कि फ़िल्म-निर्माण में बड़े व्यावसायिक सूझबूझ वाले भी चक्कर…

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  7. Q7Short answer2 marksAsked: 2026

    शैलेंद्र द्वारा वर्णित कहानी सुनकर राजकपूर को फ़िल्म की असफलता का पूर्वाभास हो गया था, फिर भी उन्होंने फ़िल्म में काम करना क्यों स्वीकार किया ? पाठ के संदर्भ में अनुमानित उत्तर दीजिए

    How the model answer begins

    1. राजकपूर शैलेंद्र को अपना घनिष्ठ मित्र मानते थे और उनकी भावनाओं का सम्मान करते थे। इसी कारण वे अपने मित्र का दिल दुखाना नहीं चाहते थे, इसलिए फ़िल्म की असफलता का पूर्वाभास होते हुए भी उन्होंने फ़िल्म में काम करना स्वीकार…

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  8. Q8Short answer2 marksAsked: 2026

    शंकर जयकिशन द्वारा आग्रह करने पर भी शैलेंद्र का गीत के बोलों में बदलाव के लिए तैयार न होना, उनके चरित्र की किस विशेषता को दर्शाता है ? 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर लिखिए

    How the model answer begins

    1. शंकर जयकिशन द्वारा आग्रह करने पर भी शैलेंद्र का गीत के बोलों में बदलाव के लिए तैयार न होना उनके स्वाभिमानी और आत्मविश्वासी स्वभाव को दर्शाता है। वे अपने लिखे हुए गीतों के प्रति इतने आश्वस्त थे कि संगीतकार जयकिशन की…

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  9. Q9Short answer2 marksAsked: 2026

    'व्यथा आदमी को पराजित ही नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश भी देती है ।' - 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ से उद्धृत पंक्ति के पक्ष या विपक्ष में अपना मत स्पष्ट कीजिए

    How the model answer begins

    1. मैं इस पंक्ति के पक्ष में हूँ। व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है। दुख में और संघर्ष की स्थिति में व्यक्ति को अपनी कमजोरी का पता चलता है, साथ ही उसे अपने आत्मबल और बौद्धिक बल का ज्ञान भी होता…

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  10. Q10Short answer2 marksAsked: 2026

    शैलेंद्र फ़िल्म की असफलता के खतरों को पहले से जानते थे फिर भी उन्होंने 'तीसरी कसम' फ़िल्म क्यों बनाई ? 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर उत्तर लिखिए

    How the model answer begins

    1. शैलेंद्र ने असफलता के खतरे जानते हुए भी 'तीसरी कसम' फ़िल्म इसलिए बनाई क्योंकि वे एक आदर्शवादी भावुक कवि थे। राजकपूर ने सच्चे मित्र की तरह उन्हें फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह किया था। फिर भी शैलेंद्र को अपार संपत्ति…

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  11. Q11Short answer2 marksAsked: 2025

    तीसरी कसम फ़िल्म में राजकपूर अभिनय नहीं करता। वह हीरामन के साथ एकाकार हो गया है। 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' - पाठ के संदर्भ में कथन का आशय स्पष्ट कीजिए

    How the model answer begins

    1. इस कथन का आशय है कि 'तीसरी कसम' में राजकपूर हीरामन का अभिनय करते नहीं लगते, बल्कि खुद हीरामन में ढल गए हैं। लोकप्रिय फ़िल्मों के प्रतिष्ठित कलाकार और एशिया के सबसे बड़े शोमैन होने के बावजूद उन्होंने शुद्ध देहाती…

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  12. Q12Short answer2 marksAsked: 2025

    राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित 'तीसरी कसम' फिल्म को प्रदर्शित करने के लिए वितरक क्यों नहीं मिल रहे थे ?

    How the model answer begins

    1. 'तीसरी कसम' को वितरक इसलिए नहीं मिल रहे थे, क्योंकि इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने का गणित जानने वाले, अर्थात केवल धन कमाने की इच्छा रखने वाले वितरकों की समझ से परे थी। उसमें रची-बसी करुणा तराज़ू पर तौली जा…

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  13. Q13Short answer2 marksAsked: 2025

    'तीसरी कसम' फ़िल्म अभिनय के दृष्टिकोण से राजकपूर के जीवन की सबसे सुंदर फ़िल्म थी, सिद्ध कीजिए

    How the model answer begins

    1. राजकपूर ने हीरामन के चरित्र में भोलापन, सादगी और ग्रामीण परिवेश की सहजता को पूरी तरह आत्मसात किया है। 'तीसरी कसम' में राजकपूर खालिस देहाती गाड़ीवान हीरामन के साथ एकाकार हो गए हैं, जो सिर्फ़ दिल की ज़ुबान समझता है, दिमाग…

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Objective questions with the board’s key (10)

  1. 1. CBSE 2024

    'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए कि फिल्मों में त्रासद स्थितियों की भी प्रशंसा (ग्लोरीफाई) क्यों की जाती है ?

    • (A) अधिक से अधिक धन कमाने हेतु
    • (B) दर्शकों का मनोरंजन करने हेतु
    • (C) अधिकाधिक लोकप्रियता पाने हेतु
    • (D) दर्शकों का भावनात्मक शोषण करने हेतु ✓

    Answer: (D)

  2. 2. CBSE 2024

    'बड़े भाई साहब' पाठ के कथानायक के आँसू बहाने का कारण -

    • (A) आगे की कक्षा की कठिन पढ़ाई का डर
    • (B) बड़े भाई साहब की डाँट-फटकार ✓
    • (C) अम्मा-बाबा की याद आना
    • (D) अध्यापकों की डाँट-फटकार

    Answer: (B)

  3. 3. CBSE 2023

    'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर लिखिए कि भारतीय फिल्मों की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है ?

    • (A) लोक तत्त्व का अभाव ✓
    • (B) लोक कला का अभाव
    • (C) लोक संगीत का अभाव
    • (D) लोक कल्याण का अभाव

    Answer: (A)

  4. 4. CBSE 2023

    'झेन की देन' पाठ के संदर्भ में लिखिए कि मनोरुग्णता से बचाव कैसे किया जा सकता है ?

    • (A) अमेरिका जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा-भावना का त्याग करके ।
    • (B) अमेरिका जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा में आगे निकल कर ।
    • (C) अतीत और भविष्य की चिंता छोड़ वर्तमान में जी कर । ✓
    • (D) वर्तमान की चिंता त्याग अतीत और भविष्य में जी कर ।

    Answer: (C)

  5. 5. CBSE 2023

    ‘तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र’ पाठ के आधार पर लिखिए कि भारतीय फिल्मों की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है ?

    • (A) लोक तत्त्व का अभाव ✓
    • (B) लोक कला का अभाव
    • (C) लोक संगीत का अभाव
    • (D) लोक कल्याण का अभाव

    Answer: (A)

  6. 6. CBSE 2023

    ‘झेन की देन’ पाठ के संदर्भ में लिखिए कि मनोरुग्णता से बचाव कैसे किया जा सकता है ?

    • (A) अमेरिका जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा-भावना का त्याग करके ।
    • (B) अमेरिका जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा में आगे निकल कर ।
    • (C) अतीत और भविष्य की चिंता छोड़ वर्तमान में जी कर । ✓
    • (D) वर्तमान की चिंता त्याग अतीत और भविष्य में जी कर ।

    Answer: (C)

  7. 7. CBSE 2023

    ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म निर्माण के पीछे शैलेन्द्र का क्या उद्देश्य था ?

    • (A) आत्म संतुष्टि के सुख की कामना ✓
    • (B) अपार संपत्ति के सुख की कामना
    • (C) अपार यश के सुख की कामना
    • (D) साहित्य संरक्षण के सुख की कामना

    Answer: (A)

  8. 8. CBSE 2023

    ‘झेन की देन’ पाठ से हमें क्या सीख मिलती है ?

    • (A) हमें अपने से बड़े देशों से कभी प्रतिस्पर्धा नहीं करनी चाहिए ।
    • (B) हमें सिर्फ अपने से छोटे देशों से ही प्रतिस्पर्धा रखनी चाहिए ।
    • (C) हमें वर्तमान से अधिक अतीत और भविष्य की चिंता करनी चाहिए ।
    • (D) हमें अतीत और भविष्य की चिंता त्याग कर वर्तमान में जीना चाहिए । ✓

    Answer: (D)

  9. 9. CBSE 2023

    वर्तमान समाज में मौजूद शाश्वत मूल्य किसकी देन हैं ? (गिन्नी का सोना)

    • (A) व्यवहारवादी व्यक्तियों की
    • (B) आदर्शवादी व्यक्तियों की ✓
    • (C) प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों की
    • (D) स्वतंत्रता सेनानियों की

    Answer: (B)

  10. 10. CBSE 2023

    उत्कृष्ट होते हुए भी 'तीसरी कसम' फिल्म सिनेमाघरों में क्यों नहीं चली ?

    • (A) फिल्म की संवेदना का प्रचार न होने के कारण ✓
    • (B) अच्छे गीतों के अभाव के कारण
    • (C) फिल्म में कमजोर अभिनय के कारण
    • (D) फिल्म की कमजोर पटकथा के कारण

    Answer: (A)

Questions parents and students ask

How many marks does "तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र (प्रह्लाद अग्रवाल)" carry in CBSE Class 10 Hindi B?
In the CBSE papers of 2023–2026, this chapter carried about 1 marks and about 1 questions a year; by marks it ranks 24 in Hindi B.
Which are the most important (VVI) questions of "तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र (प्रह्लाद अग्रवाल)"?
The 13 questions above are from the board’s real papers, each with the years it was asked; the most-asked come first with their full model answers. All 13 written questions of this chapter, with answers, are in the AskMedha app.
Do the answers follow the board’s marking scheme?
Yes. CBSE publishes its marking schemes; every model answer here is written point by point to the marks the board’s own scheme gives, and checked by a second, independent model.

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Every question of every chapter with its model answer, practice questions in the board’s own shapes, 60 minutes of class a day, written answers marked, a test every Sunday and a WhatsApp report to parents.

Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.