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बिहार बोर्ड 10वीं · सामाजिक विज्ञान · मैट्रिक परीक्षा 2027

अध्याय 3: लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष — नोट्स

इस अध्याय के 7 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।

  1. 1. प्रतिस्पर्धा एवं जनसंघर्ष का अर्थ

    देखिए, आप सोच रहे होंगे — लोकतंत्र इतना मजबूत कैसे बना?

    • • लोकतंत्र का विकास: प्रतिस्पर्धा + जनसंघर्ष
    • • संघर्ष = सत्ताधारी बनाम हिस्सेदारी चाहनेवाले
    • • समाधान: जनता की लामबंदी / संसद / न्यायपालिका
    • • संगठित राजनीति के माध्यम: राजनीतिक दल, दबाव-समूह, आंदोलनकारी समूह
  2. 2. बिहार का छात्र आंदोलन और आपातकाल

    देखिए, 1971 में काँग्रेस ने 'गरीबी हटाओ' का नारा देकर सरकार बनाई।

    • • 1974: बिहार छात्र आंदोलन, नेतृत्व- जयप्रकाश नारायण
    • • नारा/आह्वान: संपूर्ण क्रांति
    • • 12 जून 1975: इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला
    • • 25 जून 1975: आपातकाल की घोषणा
    • • 1977 चुनाव: जनता पार्टी को 542 में से 330 सीटें
  3. 3. भारत के जनसंघर्ष: चिपको, दलित पैंथर्स, किसान यूनियन, ताड़ी-विरोधी, नर्मदा बचाओ

    चलिए, अब कुछ और जनसंघर्षों को देखते हैं।

    • • चिपको आंदोलन- उत्तराखंड, पेड़ कटाई पर 15 वर्ष रोक
    • • दलित पैंथर्स- 1972, महाराष्ट्र, दलित युवा संगठन
    • • भारतीय किसान यूनियन- गन्ना-गेहूँ मूल्य, कर्ज माफी की माँग
    • • ताड़ी-विरोधी आंदोलन- आंध्र प्रदेश, नारा: ताड़ी की बिक्री बंद करो
    • • नर्मदा बचाओ आंदोलन- 245 गाँव डूबने की आशंका, ढाई लाख लोग प्रभावित
  4. 4. सूचना के अधिकार का आंदोलन और पड़ोसी देशों में जनसंघर्ष

    देखिए, सूचना के अधिकार का आंदोलन राजस्थान के एक छोटे गाँव से शुरू हुआ था।

    • • सूचना के अधिकार- राजस्थान से शुरू, जून 2005 में कानून बना
    • • नेपाल- सप्तदलीय गठबंधन, अप्रैल 2006, लगभग 5 लाख आंदोलनकारी
    • • बोलिविया- पानी के निजीकरण के विरुद्ध संघर्ष
    • • बांग्लादेश- 2008 चुनाव, अवामी लीग की सफलता
    • • श्रीलंका- तमिल आबादी का जातीय संघर्ष
  5. 5. राजनीतिक दल का अर्थ और कार्य

    चलिए, अब लोकतंत्र की असली कार्यशैली समझते हैं।

    • • राजनीतिक दल= समान उद्देश्य के लिए काम करनेवाला व्यक्ति-समूह
    • • उद्देश्य: सत्ता प्राप्त करना / सत्ता को प्रभावित करना
    • • भारत में दलीय व्यवस्था शुरू: 1885 (भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस)
    • • कार्य: नीति-निर्माण, शासन संचालन, चुनाव संचालन, लोकमत निर्माण,
    • • मध्यस्थता, राजनीतिक प्रशिक्षण, दलीय कार्य, गैर-राजनीतिक कार्य
    • • उपनाम: लोकतंत्र का प्राण
  6. 6. दलों में प्रतियोगिता, राष्ट्रीय विकास में योगदान और चुनौतियाँ

    देखिए, दुनिया में तीन तरह की दलीय व्यवस्था चलती है — एकदलीय, द्विदलीय, और बहुदलीय।

    • • दलीय व्यवस्था: एकदलीय, द्विदलीय, बहुदलीय
    • • प्रतियोगिता का कारण: सत्ता प्राप्ति
    • • चुनौतियाँ: आंतरिक लोकतंत्र की कमी, नेतृत्व संकट, वंशवाद, काला धन-अपराधी, सिद्धांतहीनता, अवसरवादी गठबंधन
    • • उपाय: दलबदल कानून, न्यायालय आदेश, आंतरिक लोकतंत्र, युवा-महिला भागीदारी, चुनाव खर्च सरकार द्वारा
  7. 7. भारत के प्रमुख राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दल

    देखिए, भारत में दल दो तरह के होते हैं।

    • • राष्ट्रीय दल बनाम राज्य/क्षेत्रीय दल- निर्धारण निर्वाचन आयोग करता है
    • • राष्ट्रीय दल मान्यता: 4 राज्यों में 6% वैध मत + 4 लोकसभा सीटें, या 2% (11) सीटें 3 राज्यों से
    • • भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस- स्थापना 1885
    • • भारतीय जनता पार्टी- 1980, प्रथम अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी
    • • सी०पी०आई०- 1925, एस० ए० डांगे; सी०पी०आई०(एम०)- 1964
    • • बसपा- 1984, काशीराम; राजद- 1997, लालू प्रसाद

सारांश

चलिए, अब इस पूरे अध्याय को एक बार साथ में याद करते हैं। देखिए, सबसे पहले हमने क्या सीखा था? यही कि लोकतंत्र, प्रतिस्पर्धा और जनसंघर्ष से आगे बढ़ता है। और सत्ता में बैठे लोग भी जनता के दबाव से बच नहीं सकते। फिर हमने बिहार के छात्र आंदोलन को देखा, आपातकाल को देखा, और 1977 के चुनाव को भी। इनसे हमें पता चला कि जनसंघर्ष एक तानाशाह सरकार को भी झुका सकता है। इसके बाद हमने कुछ आंदोलनों के बारे में पढ़ा — चिपको आंदोलन, दलित पैंथर्स, भारतीय किसान यूनियन, ताड़ी-विरोधी आंदोलन, और नर्मदा बचाओ आंदोलन। इनसे हमने समझा कि लोग अपनी माँगों के लिए कैसे एक साथ आते हैं। फिर सूचना के अधिकार के आंदोलन की बात हुई। और साथ ही नेपाल, बोलिविया, बांग्लादेश, श्रीलंका के जनसंघर्षों की भी। इनसे क्या साबित हुआ? यही कि लोकतंत्र की लड़ाई सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। उसके बाद हमने राजनीतिक दल किसे कहते हैं, यह जाना। उनके काम क्या हैं, यह भी समझा। और यह भी जाना कि उन्हें 'लोकतंत्र का प्राण' क्यों कहा जाता है। और अंत में हमने देखा कि दलों के बीच की प्रतियोगिता से लोकतंत्र कैसे मजबूत होता है। उनका राष्ट्रीय विकास में क्या योगदान है, उनके सामने कौन-कौन सी चुनौतियाँ हैं, और उनके क्या उपाय हो सकते हैं। साथ ही भारत के मुख्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों से भी हमारा परिचय हुआ। अच्छा, बताइए — इन सबमें से आपको सबसे दिलचस्प कौन सा आंदोलन लगा?

AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं सामाजिक विज्ञान, अध्याय 3। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
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मेधा मैम एक AI टीचर हैं — कोई लाइव ट्यूटर नहीं। हर उत्तर दो बार जाँचा जाता है; ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति की है।