बिहार बोर्ड 10वीं · सामाजिक विज्ञान · मैट्रिक परीक्षा 2027
अध्याय 8: प्रेस संस्कृति एवं राष्ट्रवाद — नोट्स
इस अध्याय के 6 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।
1. छापाखाने से पहले का समय और मुद्रण का आरंभ (चीन-कोरिया)
देखिए, जरा सोचिए — अगर छपाई होती ही नहीं, तो क्या होता?
- • आविष्कार की जननी: आवश्यकता
- • 105 ई० - टस्-प्लाई-लून ने कागज बनाया (चीन)
- • 594 ई० - लकड़ी के ब्लॉक से मुद्रण शुरू
- • ब्लॉक प्रिंटिंग = स्याही लगे काठ के ब्लॉक से छपाई
- • 1041 ई० - पि-शेंग ने मिट्टी के मुद्र बनाए
- • 13वीं सदी पूर्वार्ध - धातु टाइप से पहली पुस्तक (कोरिया)
2. गुटेनवर्ग और प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार
अच्छा, अब चलिए यूरोप चलते हैं।
- • यूरोप में मूवेबुल टाइप तेज फैला - रोमन लिपि में कम अक्षर
- • मिश्र-धातु: सीसा + टिन (रांगा) + विसमथ
- • हैंडप्रेस के भाग: प्लेट, बेड
- • 1440 ई० - फस्ट का बाइबिल छापने का ठेका
- • 1448 ई० - गुटेनवर्ग ने 36 लाइन बाइबिल छापी
3. मुद्रण क्रांति का प्रभाव और यूरोप में फैलाव
देखिए, प्रेस बनते ही किताबों की संख्या तेज़ी से बढ़ी।
- • 15वीं सदी उत्तरार्ध: 2 करोड़ किताबें
- • 16वीं सदी: 20 करोड़ किताबें
- • मार्टिन लूथर - 95 स्थापनाएँ - विटेनवर्ग गिरजाघर
- • लूथर: "मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम् देन है"
- • मुद्रण क्रांति ने फ्रांसीसी क्रांति के लिए परिस्थितियाँ बनाईं
- • 1475 ई० - कैक्सटन ने इंग्लैंड में मुद्रण पहुँचाया
4. भारत में प्रेस का विकास और समाचार पत्रों की स्थापना
देखिए, छापाखाना आने से पहले भारत में हाथ से लिखी पांडुलिपियों की परंपरा थी।
- • 16वीं सदी - पुर्तगालियों ने भारत में प्रेस लाया
- • 1766 - विलियम बोल्टस का पहला समाचार पत्र
- • 1780 - हिक्की का 'बंगाल गजट'
- • 1816 - गंगाधर भट्टाचार्य का पहला भारतीय पत्र
- • 1821 - राममोहन राय का 'संवाद कौमुदी'
5. एंग्लो-इंडियन प्रेस बनाम भारतीय प्रेस तथा राष्ट्रवादी पत्रकार
देखिए, 1857 के विद्रोह के बाद अख़बार दो हिस्सों में बँट गए।
- • 1857 के बाद: एंग्लो-इंडियन प्रेस बनाम भारतीय प्रेस
- • एंग्लो-इंडियन प्रेस: सरकार-समर्थक, विशेषाधिकार प्राप्त
- • 1858 - विद्यासागर का 'सोम प्रकाश'
- • 1867 - भारतेंदु हरिश्चंद्र का 'कविवचन सुधा'
- • 1881 - तिलक का 'मराठा' व 'केसरी'
- • गांधी जी - 'यंग इंडिया' व 'हरिजन'
6. प्रेस की भूमिका और उस पर लगे प्रतिबंध
देखिए, प्रेस ने राष्ट्रीय आंदोलन के हर पक्ष को छुआ - राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक भी।
- • वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट - 1878 ई० (लार्ड लिटन)
- • बंधनपत्र व जमानत पर प्रकाशन की अनुमति
- • अमृत बाजार पत्रिका - रातोंरात अंग्रेजी में बदली
- • क्रेनवुक ने निगरानी वाली धारा हटाई (सितंबर 1878)
- • बंगाल विभाजन (कर्जन) - प्रेस व आंदोलन को नया जीवन
सारांश
चलिए, अब जो हमने इस पूरे पाठ में पढ़ा, उसे एक बार साथ में दोहराते हैं। सबसे पहले हमने देखा, कि छपाई से पहले मनुष्य गुफाओं में चित्र बनाता था। फिर चीन और कोरिया में कागज़ और ब्लॉक प्रिंटिंग का आविष्कार हुआ। उसके बाद जर्मनी के गुटेनबर्ग ने मिश्र-धातु और हैंडप्रेस बनाई, और मुद्रण को तेज़ और सस्ता बना दिया। इससे यूरोप में किताबों की भरमार हो गई, और मार्टिन लूथर के साथ धर्म सुधार आंदोलन, और फ्रांसीसी क्रांति जैसी बड़ी घटनाएँ हुईं। फिर आपने जाना, कि भारत में पुर्तगाली प्रेस लाए, और हिक्की, गंगाधर भट्टाचार्य, राममोहन राय — जैसे लोगों ने समाचार पत्र शुरू किए। 1857 के बाद प्रेस, एंग्लो-इंडियन और भारतीय प्रेस में बँट गया। तिलक, भारतेंदु, गांधी — जैसे नेताओं ने प्रेस को राष्ट्रवाद फैलाने का हथियार बनाया। अंत में आपने देखा, कि प्रेस ने राष्ट्रीय आंदोलन को दिशा दी। इससे घबराकर अंग्रेज़ों ने वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट जैसे प्रतिबंध लगाए। पर प्रेस ने आगे चलकर राष्ट्र-निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अच्छा, बताइए — इन सबमें से कौन सी घटना आपको सबसे दिलचस्प लगी?
AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं सामाजिक विज्ञान, अध्याय 8। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- "प्रेस संस्कृति एवं राष्ट्रवाद" के नोट्स PDF में कैसे मिलेंगे?
- "PDF में सहेजें" दबाएँ — फ़ोन का प्रिंट पेज खुलेगा; वहाँ "Save as PDF" चुनें। PDF में सिर्फ़ नोट्स रहते हैं।
- ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
- अध्याय की पाठ्यपुस्तक के अपने पाठ से, भाग-भाग करके, किताब के ही शब्दों में; फिर एक दूसरे, स्वतंत्र मॉडल ने हर भाग को किताब से मिलाकर जाँचा है। पूरा पाठ, हर भाग का जाँच-प्रश्न और अभ्यास AskMedha ऐप में है।
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मेधा मैम एक AI टीचर हैं — कोई लाइव ट्यूटर नहीं। हर उत्तर दो बार जाँचा जाता है; ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति की है।