बिहार बोर्ड 10वीं · सामाजिक विज्ञान · मैट्रिक परीक्षा 2027
अध्याय 8: प्रेस संस्कृति एवं राष्ट्रवाद
बिहार बोर्ड (BSEB) के 2016–2026 के असली पेपरों से इस अध्याय के 3 सबसे ज़्यादा पूछे गए प्रश्न (VVI) — 3 के आदर्श उत्तर पूरे — और ऑब्जेक्टिव प्रश्न बोर्ड की उत्तर-कुंजी के साथ।
- अंक हर साल (लगभग)
- 2
- प्रश्न हर साल (लगभग)
- 2
- सामाजिक विज्ञान में स्थान
- #21
2021–2026 के 6 साल के पेपरों पर आधारित · पूरा अंक वितरण
VVI प्रश्न — बोर्ड ने जिन्हें सबसे ज़्यादा बार पूछा (3)
- Q1दीर्घ उत्तरीय4 अंकपूछा गया: 2021
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में प्रेस की भूमिका एवं प्रभावों की समीक्षा करें ।

मेधा मैम
AskMedha की AI शिक्षिका
आदर्श उत्तर · प्रेस की भूमिका, राष्ट्रीय आंदोलन
- 1.प्रेस ने राष्ट्रवादी विचारों के प्रसार तथा जनमानस में राजनीतिक जागृति एवं एकता उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रेस के माध्यम से राष्ट्रीय नेताओं ने अंग्रेजी राज की शोषणकारी नीतियों का पर्दाफाश करते हुए जनजागरण फैलाने का कार्य किया। समाचार पत्रों ने राष्ट्रीय नेताओं के विचार आम जनता तक पहुँचाए और सम्पूर्ण देश के लोगों के बीच राजनीतिक एवं सांस्कृतिक एकता स्थापित करने का कार्य किया।1 अंक
- 2.राजा राममोहन राय का 'संवाद कौमुदी', हरीश चंद्र मुखर्जी का 'हिन्दू पैट्रियट', सुरेंद्रनाथ बनर्जी का 'बंगाली' तथा बाल गंगाधर तिलक के 'केसरी' एवं 'मराठा' जैसे समाचार पत्रों ने ब्रिटिश नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए जनता को संगठित किया। फिरोजशाह मेहता, तिलक, ऐनी बेसेंट, गांधी सरीखे महान नेता संपादकीय के द्वारा समाचार पत्रों के माध्यम से राष्ट्रीय आन्दोलन के लिए जनमत जुटाने का प्रयास करते थे।1 अंक
- 3.प्रेस ने औपनिवेशिक शासन की शोषणकारी नीतियों, अकालों तथा दमनकारी कानूनों को उजागर कर जनमत निर्माण किया। प्रेस ने सरकार की नीतियों की समीक्षा तथा जनमत का निर्माण कर लोकतांत्रिक तरीके से उसके विरोध का मार्ग प्रशस्त किया। साथ ही इसने सम्पूर्ण देश के लोगों के बीच सामाजिक कुरीतियों को दूर करने अर्थात् सामाजिक सुधार एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए एक मंच भी प्रदान किया और शोषण के विरुद्ध जनमत तैयार करने का कार्य किया।1 अंक
- 4.प्रेस की बढ़ती शक्ति से भयभीत होकर ब्रिटिश सरकार ने लिटन के समय 1878 में वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट के माध्यम से समाचार पत्रों पर प्रतिबंध जैसे दमनकारी कानून लागू किए। इस दमनकारी कानून ने भी राष्ट्रीय आन्दोलन एवं जनमानस को उद्वेलित किया, फिर भी प्रेस ने राष्ट्रीय आंदोलन को प्रभावित करना जारी रखा।1 अंक
- दूसरे बिंदु में 'संवाद कौमुदी', 'हिन्दू पैट्रियट', 'बंगाली' तथा 'केसरी' नामक समाचार पत्रों के नाम अवश्य लिखें।
- चौथे बिंदु में 'वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट' के साथ वर्ष '1878' स्पष्ट रूप से लिखें।
- तीसरे बिंदु में 'शोषण', 'जनमत' और 'सामाजिक सुधार' शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
अंक-विभाजन: पिछले पेपरों से निकाली गई संरचना (दो स्वतंत्र जाँच); बिहार बोर्ड की आधिकारिक नहीं
- Q2दीर्घ उत्तरीय4 अंकपूछा गया: 2024
मुद्रण क्रांति ने भारत में राष्ट्रवाद के विकास में किस प्रकार सहायता की ?

मेधा मैम
AskMedha की AI शिक्षिका
आदर्श उत्तर · मुद्रण क्रांति, राष्ट्रवाद का विकास
- 1.मुद्रण क्रांति के कारण भारत में किताबें, समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ सस्ते दामों में बड़ी संख्या में उपलब्ध होने लगीं, जिससे विचारों को तेजी से फैलानेवाली अनिवार्य सामाजिक संस्था का रूप मुद्रण को मिल गया। इस प्रकार राष्ट्रवादी विचार तथा समाचार तीव्र गति से आम जनता तक पहुँचने लगे।1 अंक
- 2.भारतीय समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं ने ब्रिटिश सरकार की नीतियों एवं शोषण के विरुद्ध जागृति लाने तथा देशप्रेम की भावना जागृत करने का कार्य किया। प्रेस ने औपनिवेशिक शासन की सरकार की नीतियों की समीक्षा तथा जनमत का निर्माण कर लोकतांत्रिक तरीके से उसके विरोध का मार्ग प्रशस्त किया, जिससे राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में राष्ट्रीय चेतना का विकास हुआ।1 अंक
- 3.भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों ने आम जनता से भावनात्मक संबंध स्थापित कर उन्हें राष्ट्रीय आन्दोलन के पक्ष में तैयार किया। इस प्रकार सम्पूर्ण देश के लोगों के बीच सामाजिक कुरीतियों को दूर करने तथा राजनीतिक एवं सांस्कृतिक एकता स्थापित करने का कार्य हुआ और भारतीय प्रेस ने संपूर्ण भारत को एकता के सूत्र में बांधकर एक साझा राष्ट्रीय पहचान का निर्माण किया।1 अंक
- 4.फिरोजशाह मेहता, तिलक, ऐनी बेसेंट, गांधी सरीखे महान नेताओं ने संपादकीय के द्वारा समाचार पत्रों के माध्यम से राष्ट्रीय आन्दोलन के लिए जनमत जुटाने का प्रयास किया। सूरत फूट के पश्चात नरम दल के नेताओं तथा बाल-लाल-पाल के नेतृत्व में अतिवादी राष्ट्रवाद के विचारों को फैलाने का कार्य भी प्रेस ने किया। इस प्रकार छपी हुई सामग्री के माध्यम से स्वराज की माँग व्यापक रूप से प्रचारित हुई, जिससे राष्ट्रीय आन्दोलन एवं राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया तीव्र हुई।1 अंक
- पहले बिंदु में 'सस्ते दाम' और 'राष्ट्रवादी विचार' शब्द अवश्य लिखें।
- दूसरे बिंदु में 'समाचार पत्र', 'औपनिवेशिक शासन' और 'राष्ट्रीय चेतना' शब्दों का उल्लेख करें।
- चौथे बिंदु में 'स्वराज' और 'जन आंदोलन' या 'राष्ट्रीय आन्दोलन' शब्द लिखना न भूलें।
अंक-विभाजन: पिछले पेपरों से निकाली गई संरचना (दो स्वतंत्र जाँच); बिहार बोर्ड की आधिकारिक नहीं
- Q3लघु उत्तरीय2 अंकपूछा गया: 2026
पाण्डुलिपि क्या है ? इसकी क्या उपयोगिता है ?

मेधा मैम
AskMedha की AI शिक्षिका
आदर्श उत्तर · पाण्डुलिपि, अर्थ एवं उपयोगिता
- 1.पाण्डुलिपि हाथ से लिख कर तैयार की गई रचना है जो कागज, ताड़पत्र, भोजपत्र आदि पर स्याही या किसी अन्य माध्यम से लिखी जाती थी। इस प्रकार तैयार की गई हस्तलिखित रचनाओं में संस्कृत, अरबी एवं फारसी साहित्य की अनेकानेक तस्वीर युक्त सुलेखन कला से परिपूर्ण रचनाएँ होती थीं और इन्हें मजबूती प्रदान करने के लिए इन पर जिल्द भी चढ़ाई जाती थी।1 अंक
- 2.पाण्डुलिपियों की उपयोगिता यह थी कि छापाखाने के आविष्कार से पहले पुस्तकों के न होने पर लोग इन्हीं पाण्डुलिपियों के माध्यम से ज्ञान अर्जन करते थे, अर्थात् ये प्राचीन ज्ञान के संरक्षण और उसके हस्तांतरण में सहायक सिद्ध होती थीं। यह उस समय इतिहास लेखन का महत्वपूर्ण स्रोत भी थी, क्योंकि इसके माध्यम से तत्कालीन सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक व राजनीतिक जीवन की जानकारी प्राप्त होती थी।1 अंक
- पहले बिंदु में 'हस्तलिखित', 'ताड़पत्र' और 'भोजपत्र' शब्द अवश्य लिखें।
- दूसरे बिंदु में 'संरक्षण' या 'इतिहास लेखन का स्रोत' में से कोई एक उपयोगिता स्पष्ट शब्दों में लिखें।
- दोनों बिंदुओं को अलग-अलग पैराग्राफ में लिखें, एक बात को दोनों जगह न दोहराएँ।
अंक-विभाजन: पिछले पेपरों से निकाली गई संरचना (दो स्वतंत्र जाँच); बिहार बोर्ड की आधिकारिक नहीं
ऑब्जेक्टिव प्रश्न — उत्तर-कुंजी सहित (10)
- 1. बिहार बोर्ड 2026
निम्नलिखित में से कौन-सा पत्र ब्रिटिश सरकार का पूर्ण समर्थक था ?
- (A) द पायनियर ✓
- (B) इंडियन मिरर
- (C) अमृत बाजार पत्रिका
- (D) मिरात-उल-अकबार
उत्तर: (A)
- 2. बिहार बोर्ड 2026
मुद्रण कला के आविष्कार का श्रेय किस देश को जाता है ?
- (A) चीन ✓
- (B) जर्मनी
- (C) ब्रिटेन
- (D) दक्षिण कोरिया
उत्तर: (A)
- 3. बिहार बोर्ड 2026
भारतीय समाचार पत्रों के मुक्ति दाता के रूप में किसे जाना जाता है ?
- (A) चार्ल्स मेटकाफ ✓
- (B) लॉर्ड मैकाले
- (C) लॉर्ड लिटन
- (D) लॉर्ड रिपन
उत्तर: (A)
- 4. बिहार बोर्ड 2026
बॉम्बे क्रॉनिकल का प्रकाशन किसने प्रारंभ किया ?
- (A) एम. जी. रणाडे
- (B) फिरोज़शाह मेहता ✓
- (C) भारतेन्दु हरिश्चंद्र
- (D) मोतीलाल घोष
उत्तर: (B)
- 5. बिहार बोर्ड 2026
वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट किस वायसराय के कार्यकाल में पारित हुआ ?
- (A) लॉर्ड लिटन ✓
- (B) लॉर्ड रिपन
- (C) लॉर्ड कर्जन
- (D) लॉर्ड डलहौजी
उत्तर: (A)
- 6. बिहार बोर्ड 2025
अमृत बाजार पत्रिका किस भाषा का समाचार पत्र था ?
- (A) हिन्दी
- (B) बंगला ✓
- (C) मराठी
- (D) गुजराती
उत्तर: (B)
- 7. बिहार बोर्ड 2025
मिरात-उल-अखबार किसने शुरू किया?
- (A) बदरुद्दीन तैयबजी
- (B) फिरोज मेहता
- (C) दादाभाई नौरोजी
- (D) राजा राममोहन राय ✓
उत्तर: (D)
- 8. बिहार बोर्ड 2025
'मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है।' यह कथन किसका है?
- (A) मार्टिन लूथर ✓
- (B) गुटेनबर्ग
- (C) महात्मा गांधी
- (D) कार्ल मार्क्स
उत्तर: (A)
- 9. बिहार बोर्ड 2024
'संवाद कौमुदी' का प्रकाशन किस भाषा में हुआ ?
- (A) बंगला ✓
- (B) हिन्दी
- (C) मराठी
- (D) अंग्रेजी
उत्तर: (A)
- 10. बिहार बोर्ड 2023
'न्यू इंडिया' समाचारपत्र को किसने शुरू किया ?
- (A) महात्मा गाँधी
- (B) एनी बेसेंट ✓
- (C) राजा राममोहन राय
- (D) मनमोहन घोष
उत्तर: (B)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- बिहार बोर्ड 10वीं सामाजिक विज्ञान में "प्रेस संस्कृति एवं राष्ट्रवाद" से कितने अंक आते हैं?
- 2021 से 2026 के बिहार बोर्ड के पेपरों में इस अध्याय से औसतन लगभग 2 अंक और लगभग 2 प्रश्न हर साल पूछे गए; सामाजिक विज्ञान में अंकों के हिसाब से यह 21वाँ अध्याय है।
- "प्रेस संस्कृति एवं राष्ट्रवाद" के VVI प्रश्न कौन से हैं?
- ऊपर दिए गए 3 प्रश्न बोर्ड के असली पेपरों से हैं, जिस-जिस साल पूछे गए उस साल के साथ; जो सबसे ज़्यादा बार पूछे गए वे पहले हैं और उनके आदर्श उत्तर पूरे दिए गए हैं। इस अध्याय के कुल 3 लिखित प्रश्न और उनके उत्तर AskMedha ऐप में हैं।
- क्या ये उत्तर बोर्ड की marking scheme के अनुसार हैं?
- BSEB अपनी marking scheme प्रकाशित नहीं करता। हर उत्तर पिछले पेपरों से निकाली गई अंक-संरचना पर बिंदुवार लिखा गया है और एक दूसरे, स्वतंत्र मॉडल से जाँचा गया है; इसे बोर्ड की आधिकारिक scheme नहीं कहा जाता।
यही तैयारी, मेधा मैम के साथ — आपके फ़ोन पर
हर अध्याय का हर प्रश्न, हर आदर्श उत्तर और बोर्ड के ढंग के अभ्यास प्रश्न; रोज़ 60 मिनट की क्लास, जाँचे हुए लिखित उत्तर, हर रविवार टेस्ट और माता-पिता को WhatsApp रिपोर्ट।
मेधा मैम एक AI टीचर हैं — कोई लाइव ट्यूटर नहीं। हर उत्तर दो बार जाँचा जाता है; ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति की है।