बिहार बोर्ड 10वीं · हिंदी · मैट्रिक परीक्षा 2027
अध्याय 4: नाखून क्यों बढ़ते हैं (हजारी प्रसाद द्विवेदी) — नोट्स
इस अध्याय के 6 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।
1. बच्चे का सवाल और नाखूनों की अजब आदत
देखिए, एक दिन लेखक की छोटी लड़की ने एक सवाल पूछा।
- • सवाल: आदमी के नाखून क्यों बढ़ते हैं?
- • नाखून काटो तो फिर उग आते हैं
- • जैसे निर्लज्ज अपराधी फिर सेंध पर हाजिर
- • यही अचरज पूरे निबंध का आरंभ-बिंदु है
2. जंगली जीवन में नाखून ही थे हथियार
देखिए बोर्ड पर, लाखों वर्ष पहले मनुष्य जंगली था।
- • लाखों वर्ष पहले मनुष्य जंगली था
- • नाखून ही उसके मुख्य अस्त्र थे
- • फिर पत्थर, हड्डी (दधीचि का वज्र), लोहे के हथियार बने
- • लोहे वाले जीते - आर्य विजयी हुए
- • अब बंदूक, तोप, बम, एटम बम तक पहुँचा
- • फिर भी नाखून आज भी बढ़ते हैं
3. नाखून बढ़ना पशुता, काटना मनुष्यता
देखिए, एक बात सोचिए।
- • सहजात वृत्ति यानी जन्म से चली आ रही आदतें
- • उदाहरण: नाखून बढ़ना, केश बढ़ना, दाँत दुबारा उठना, पलकें गिरना
- • सहजात वृत्ति = अनजान स्मृति
- • नाखून बढ़ना = पशुत्व का प्रमाण
- • नाखून काटना = मनुष्यता की निशानी
- • अस्त्र बढ़ाना मनुष्यता का विरोधी है
4. कामसूत्र के समय नाखूनों का शृंगार
देखिए, कुछ हजार साल पहले की बात है।
- • कुछ हजार साल पहले नाखून सुकुमार विनोद के काम आने लगे
- • वात्स्यायन का कामसूत्र: दो हजार वर्ष पहले नाखून सँवारे जाते थे
- • आकृतियाँ: त्रिकोण, वर्तुलाकार, चंद्राकार, दंतुल
- • सिक्थक (मोम) व अलक्तक (आलता) से लाल-चिकना बनाना
- • गौड़ देश: बड़े नख पसंद, दाक्षिणात्य: छोटे नख पसंद
5. स्वाधीनता में छिपा 'स्व' का बंधन
देखिए, लेखक एक दिलचस्प बात बताते हैं।
- • इण्डिपेण्डेन्स = अनधीनता (अधीनता का अभाव)
- • स्वाधीनता = अपने ही अधीन रहना
- • स्वतंत्रता, स्वराज्य, स्वाधीनता - सबमें 'स्व' का बंधन
- • अपने ऊपर अपना बंधन = संस्कृति की बड़ी विशेषता
- • कालिदास: सब पुराना अच्छा नहीं, सब नया बुरा नहीं
- • बंदरिया (पुराने का अंधा मोह) मनुष्य का आदर्श नहीं
6. मनुष्यमात्र का सामान्य धर्म
देखिए, लेखक कहते हैं कि भारतवर्ष में बहुत सी जातियाँ आईं।
- • सबका सामान्य धर्म: अपने बंधनों से अपने को बाँधना
- • महाभारत: निर्वैरता, सत्य और अक्रोध सबका धर्म
- • गौतम: दूसरों के दुख-सुख को सहानुभूति से देखना ही मनुष्यता
- • बूढ़े की बात: भीतर देखो, हिंसा-क्रोध छोड़ो, प्रेम अपनाओ
- • सफलता मारणास्त्र से, चरितार्थता प्रेम-त्याग में
- • निष्कर्ष: नाखून बढ़ें तो बढ़ें, मनुष्य उन्हें बढ़ने नहीं देगा
सारांश
चलिए, पूरे पाठ को एक बार साथ समेटते हैं। देखिए, यह निबंध शुरू होता है लेखक की छोटी लड़की के एक सवाल से — नाखून क्यों बढ़ते हैं, और काटने पर भी बार-बार क्यों लौट आते हैं। फिर लेखक बताते हैं कि लाखों वर्ष पहले जंगली मनुष्य के लिए नाखून ही सबसे बड़ा अस्त्र थे। धीरे-धीरे मनुष्य पत्थर, हड्डी, लोहे से होता हुआ आज एटम बम तक पहुँच गया, पर नाखून अब भी बढ़ते हैं। इसी से पता चलता है — नाखून बढ़ना मनुष्य के भीतर छिपी पशुता की सहजात वृत्ति है, और उन्हें काटना उसकी मनुष्यता की निशानी है। अच्छा, फिर कामसूत्र के ज़माने की बात आती है, जहाँ नाखूनों को सजाने-सँवारने की एक पूरी कला बताई गई थी। यह भारतीय संस्कृति की एक खासियत दिखाती है। आगे लेखक 'स्वाधीनता' शब्द के ज़रिए यह दिखाते हैं कि अपने ऊपर अपना ही बंधन लगाना भारतीय संस्कृति की बड़ी विशेषता रही है। और महाभारत का सामान्य धर्म — निर्वैरता, सत्य, अक्रोध — इसी भावना से जुड़ा हुआ है। अंत में लेखक यह सीख देते हैं कि मनुष्य की असली सार्थकता अस्त्र बढ़ाने में नहीं है, बल्कि प्रेम और त्याग में है। इसलिए नाखून बढ़ें तो बढ़ें, मनुष्य उन्हें बढ़ने नहीं देगा। अच्छा, आप बताइए — इस पूरे निबंध में आपको सबसे दिलचस्प बात कौन सी लगी?
AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं हिंदी, अध्याय 4। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- "नाखून क्यों बढ़ते हैं (हजारी प्रसाद द्विवेदी)" के नोट्स PDF में कैसे मिलेंगे?
- "PDF में सहेजें" दबाएँ — फ़ोन का प्रिंट पेज खुलेगा; वहाँ "Save as PDF" चुनें। PDF में सिर्फ़ नोट्स रहते हैं।
- ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
- अध्याय की पाठ्यपुस्तक के अपने पाठ से, भाग-भाग करके, किताब के ही शब्दों में; फिर एक दूसरे, स्वतंत्र मॉडल ने हर भाग को किताब से मिलाकर जाँचा है। पूरा पाठ, हर भाग का जाँच-प्रश्न और अभ्यास AskMedha ऐप में है।
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मेधा मैम एक AI टीचर हैं — कोई लाइव ट्यूटर नहीं। हर उत्तर दो बार जाँचा जाता है; ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति की है।