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CBSE Class 10 · Sanskrit · board exam 2027

Chapter 7: विचित्रः साक्षी — notes

The chapter’s 5 parts in the book’s order — the first idea of each and the points Medha Ma’am writes on the board — and the summary at the end. The full lesson and a check question for each part are in the app.

  1. 1. कथा का आधार और पात्रों का परिचय

    देखिए, यह कहानी श्री ओमप्रकाश ठाकुर जी ने लिखी है।

    • • कथा: ओमप्रकाश ठाकुर रचित
    • • आधार: बंकिमचन्द्र चटर्जी का निर्णय
    • • निर्धन जन - भूरि परिश्रम्य वित्तम् उपार्जितवान्
    • • पुत्र: महाविद्यालये, छात्रावासे निवसन्
    • • अर्थकाश्र्येन पीडित: पदातिरेव प्राचलत्
  2. 2. रात्रि-निवास और विचित्र दैवगति

    देखिए, पैदल चलते-चलते शाम हो गई थी।

    • • निशान्धकारे प्रसृते विजने प्रदेशे
    • • पदयात्रा न शुभावहा
    • • करुणापरो गृही आश्रयं प्रायच्छत्
    • • चौर: मञ्जूषाम् आदाय पलायित:
    • • चौरस्य पादध्वनिना प्रबुद्ध: अतिथि:
  3. 3. वास्तविक चोर और निर्दोष अतिथि

    देखिए, अब कहानी में एक मोड़ आता है।

    • • चौर: उच्चै: क्रोशितुम् आरभत
    • • 'चौरोऽयम् चौरोऽयम्'
    • • ग्रामवासिन: अतिथिम् एव चौरं मत्वा अभर्त्सयन्
    • • ग्रामस्य आरक्षी एव चौर: आसीत्
    • • अतिथि: कारागृहे प्राक्षिप्त:
  4. 4. विचित्र साक्षी और न्यायाधीश का निर्णय

    न्याय प्रमाण पर टिका होता है, और प्रमाण के बिना कोई भी न्याय नहीं कर सकता।

    • • न्याय: प्रमाणाधीन: भवति
    • • शव: न्यायाधीशं सर्वं सप्रमाणं निवेदितवान्
    • • आरक्षी अध्वनि अतिथिम् उक्तवान् -
    • • 'निजकृत्यस्य फलं भुङ्क्ष्व'
    • • न्यायाधीश: आरक्षिणे कारादण्डम् आदिशत्
    • • तं जनं ससम्मानं मुक्तवान्
  5. 5. सन्देश - बुद्धिमानों की युक्ति

    देखिए, इस कथा के अन्त में एक श्लोक आता है - 'दुष्कराण्यपि कर्माणि मतिवैभवशालिन:।

    • • दुष्कराण्यपि कर्माणि मतिवैभवशालिन:।
    • • नीतिं युक्तिं समालम्ब्य लीलयैव प्रकुर्वते॥
    • • मतिवैभवशालिन: = बुद्धिसम्पत्तिसम्पन्ना:
    • • समालम्ब्य = सहारा लेकर
    • • लीलयैव = लीलया + एव = खेल-खेल में

Summary

देखिए, आज हमने "साक्षी" कहानी पढ़ी। एक निर्धन पिता था। वह अपने रुग्ण पुत्र को देखने पैदल निकला था। रात बिताने के लिए वह एक गृहस्थ के घर रुका। उसी रात उस घर में चोरी हुई। असली चोर जब चिल्लाया, तो ग्रामवासियों ने निर्दोष अतिथि को ही चोर मान लिया। जबकि सच यह था — ग्राम का आरक्षी ही चोर था। न्यायाधीश के पास पहले कोई प्रमाण नहीं था, इसलिए वे निर्णय नहीं कर सके। फिर शव ने सब कुछ सप्रमाण बता दिया — यह भी, कि रास्ते में आरक्षी ने अतिथि से क्या कहा था। तब न्यायाधीश ने आरक्षी को कारादण्ड दिया, और उस निर्दोष जन को सम्मान के साथ मुक्त कर दिया। इससे हमने क्या सीखा? मतिवैभवशाली लोग नीति और युक्ति का सहारा लेकर कठिन से कठिन काम भी खेल-खेल में कर लेते हैं। अच्छा, आप बताइए — इस कहानी में सच्चाई को सामने लाने में किसने सबसे बड़ी भूमिका निभाई?

AskMedha · Medha Ma’am — CBSE Class 10 Sanskrit, Chapter 7. Written from the textbook, checked twice.

Questions parents and students ask

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Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.