CBSE Class 10 · Sanskrit · board exam 2027
Chapter 1: शुचिपर्यावरणम् — notes
The chapter’s 6 parts in the book’s order — the first idea of each and the points Medha Ma’am writes on the board — and the summary at the end. The full lesson and a check question for each part are in the app.
1. मङ्गलाचरण - सौ वर्षों की कामना
देखिए बोर्ड पर।
- • मङ्गलम् - यजुर्वेद तथा ऋग्वेद के दो मन्त्र
- • पश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः शतम्
- • शृणुयाम शरदः शतं प्रब्रवाम शरदः शतम्
- • अदीनाः स्याम शरदः शतम्
- • आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः
2. प्रदूषित वायुमण्डल और धरातल
देखिए, अब कवि अपने गीत में आज के पर्यावरण की दशा बताते हैं।
- • वायुमण्डलं भृशं दूषितं न हि निर्मलं जलम्।
- • कुत्सितवस्तुमिश्रितं भक्ष्यं समलं धरातलम्॥
- • करणीयं बहिरन्तर्जगति तु बहु शुद्धीकरणम्।
- • ध्रुवपद - शुचि... (शुचि पर्यावरणम्)
3. प्रकृति की ओर जाने की अभिलाषा
देखिए बोर्ड पर, यह एक सुन्दर श्लोक है।
- • कञ्चित् कालं नय मामस्मान्नगराद् बहुदूरम्।
- • प्रपश्यामि ग्रामान्ते निर्झर-नदी-पयःपूरम्॥
- • एकान्ते कान्तारे क्षणमपि मे स्यात् सञ्चरणम्।
- • हरिततरूणां ललितलतानां माला रमणीया।
- • कुसुमावलिः समीरचालिता स्यान्मे वरणीया॥
4. वन में शान्ति और नगर का कोलाहल
देखिए बोर्ड पर, यह श्लोक है।
- • अयि चल बन्धो! खगकुलकलरवगुञ्जितवनदेशम्।
- • पुर-कलरवसम्भ्रमितजनेभ्यो धृतसुखसन्देशम्॥
- • चाकचिक्यजालं नो कुर्याज्जीवितरहरणम्।
- • प्रस्तर तले लतातरुगुल्मा नो भवन्तु पिष्टाः।
- • पाषाणी सभ्यता निसर्गे स्यान्न समाविष्टा॥
- • मानवाय जीवनं कामये नो जीवनमरणम्।
5. समास परिचय
अब समास की जानकारी लेते हैं।
- • समास के चार भेद: अव्ययीभाव, तत्पुरुष, बहुव्रीहि, द्वन्द्व
- • अव्ययीभाव - पूर्वपद प्रधान - निर्मक्षिकम्
- • तत्पुरुष - उत्तरपद प्रधान - राजपुरुषः
- • कर्मधारय - कज्जलमलिनम् = कज्जलम् इव मलिनम्
- • द्विगु - त्रिभुजम् = त्रयाणां भुजानां समाहारः
- • बहुव्रीहि - पीताम्बरः = पीतम् अम्बरम् यस्य सः
6. भावविस्तार - पञ्चमहाभूत और पर्यावरण
देखिए बोर्ड पर, पाँच नाम लिखे हैं — पृथिवी, जल, तेज, वायु और आकाश।
- • पञ्चमहाभूत - पृथिवी, जल, तेज, वायु, आकाश
- • पर्यावरणम् = आब्रियते परितः समन्तात् लोकोऽनेन
- • वायुप्रदूषण - वाहनैः धूमः कृष्णः घातकः
- • जलप्रदूषण - दूषितद्रवैः नदी-समुद्राः दूषिताः
- • निवारण - शोधनं रोपणं रक्षावर्धनं वायुवारिणः
- • वनानां भूमेः च संरक्षणं वरम्
Summary
चलिए, अब इस पूरे पाठ को एक बार समेट लेते हैं। देखिए, कवि हरिदत्त शर्मा ने सबसे पहले मङ्गलाचरण रखा। उसमें सौ वर्षों तक स्वस्थ और स्वावलम्बी जीवन की वैदिक कामना की गई। फिर कवि ने बताया — वायुमण्डल, जल, भोज्य पदार्थ और धरातल, ये सब दूषित हो चुके हैं। इसलिए बाहर और भीतर, दोनों जगह शुद्धीकरण ज़रूरी है। इसके बाद कवि अपने मित्र से एक अभिलाषा व्यक्त करता है। वह चाहता है, नगर से दूर, झरने-नदी और वनों के प्राकृतिक वातावरण में ले चला जाए। अन्त में कवि नगरीय चकाचौंध से सावधान रहने को कहता है। साथ ही, वह चाहता है कि पाषाणी सभ्यता प्रकृति को निगल न जाए। इस तरह वह मानव के लिए सच्चे जीवन की कामना करता है। और हाँ, इसी पाठ के साथ हमने समास के चार भेद भी पढ़े। साथ ही पञ्चमहाभूतों से बने पर्यावरण की, और उसके प्रदूषण व निवारण की भी बात की। अच्छा, अब आप बताइए — इस गीत का जो मूल भाव है, वह एक शब्द में क्या होगा?
AskMedha · Medha Ma’am — CBSE Class 10 Sanskrit, Chapter 1. Written from the textbook, checked twice.
Questions parents and students ask
- How do I get the "शुचिपर्यावरणम्" notes as a PDF?
- Press "Save as PDF" — the phone’s print sheet opens; choose "Save as PDF" there. The PDF holds the notes only.
- Where are these notes written from?
- From the chapter’s own textbook text, part by part, in the book’s own terms; a second, independent model then checked every part against the book. The full lesson, a check question for each part and the practice are in the AskMedha app.
The same preparation, with Medha Ma’am — on your phone
Every question of every chapter with its model answer, practice questions in the board’s own shapes, 60 minutes of class a day, written answers marked, a test every Sunday and a WhatsApp report to parents.
Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.