AskMedha

CBSE Class 10 · Hindi A · board exam 2027

Chapter 11: नौबतखाने में इबादत (यतींद्र मिश्र) — notes

The chapter’s 8 parts in the book’s order — the first idea of each and the points Medha Ma’am writes on the board — and the summary at the end. The full lesson and a check question for each part are in the app.

  1. 1. काशी, बालाजी मंदिर और नौबतखाना

    चलिए, पहले उस जगह और उस समय में चलते हैं, जहाँ से यह कहानी शुरू होती है।

    • • समय: सन् 1916-1922, स्थान: काशी
    • • पंचगंगा घाट - बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी
    • • नौबतखाना = मंगलध्वनि निकलने की जगह
    • • अमीरुद्दीन (6 वर्ष) और शम्सुद्दीन (9 वर्ष)
    • • मामा: सादिक हुसैन व अलीबख्श - शहनाई वादक
    • • अमीरुद्दीन ही आगे चलकर बिस्मिल्ला खाँ बने
  2. 2. डुमराँव और रीड का महत्त्व

    चलिए, अब जानते हैं कि अमीरुद्दीन कहाँ पैदा हुआ, और शहनाई किससे बनती है।

    • • अमीरुद्दीन का जन्मस्थान: डुमराँव, बिहार
    • • शहनाई में रीड का प्रयोग होता है
    • • रीड = नरकट (घास) से बनती है
    • • नरकट सोन नदी के किनारे मिलती है
    • • रीड अंदर से पोली होती है - इससे फूँका जाता है
  3. 3. रसूलनबाई-बतूलनबाई और संगीत की प्रेरणा

    देखिए, अब अमीरुद्दीन 14 साल का हो चुका है।

    • • अमीरुद्दीन की उम्र: 14 साल
    • • रास्ता: रसूलनबाई-बतूलनबाई के घर से होकर
    • • सुनाई देते थे: ठुमरी, टप्पे, दादरा
    • • संगीत के प्रति आसक्ति इन्हीं बहनों से मिली
  4. 4. शहनाई का इतिहास और मंगलध्वनि

    चलिए, अब शहनाई के इतिहास के बारे में थोड़ा जान लेते हैं।

    • • शहनाई = सुषिर-वाद्य (वैदिक काल में उल्लेख नहीं)
    • • अरब में 'नय' कहते हैं फूँककर बजाने वाले वाद्य को
    • • शहनाई की उपाधि: 'शाहेनय' (सुषिर वाद्यों में शाह)
    • • तानसेन की बंदिश में भी शहनाई का वर्णन
    • • शहनाई = मांगलिक अवसर का वाद्य
    • • दक्षिण भारत में समान वाद्य: नागस्वरम्
  5. 5. मुहर्रम और बिस्मिल्ला खाँ की आस्था

    देखिए, बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई से जुड़ा एक पर्व है - मुहर्रम।

    • • मुहर्रम = शिया मुसलमानों का शोक, 10 दिन
    • • इमाम हुसैन व वंशजों की याद में शोक
    • • 8वीं तारीख: खड़े होकर शहनाई, 8 किमी नौहा
    • • इस दिन कोई राग नहीं बजता
    • • काशी विश्वनाथ व बालाजी मंदिर के प्रति गहरी श्रद्धा
    • • रीड 15-20 मिनट में गीली हो जाती है
  6. 6. बचपन की यादें - फिल्म, कचौड़ी और संगीत

    देखिए, बिस्मिल्ला खाँ साहब को अपनी जवानी के सुकून भरे दिन भी याद आते हैं।

    • • अमीरुद्दीन (4 वर्ष) छुपकर नाना की शहनाई सुनता
    • • मेहनताना: एक अठन्नी (बालाजी मंदिर में बजाने का)
    • • पसंद: सुलोचना की फ़िल्में, कुलसुम की कचौड़ी
    • • कचौड़ी तलने की आवाज़ में आरोह-अवरोह दिखते थे
    • • इसी से बना नाम: 'संगीतमय कचौड़ी'
  7. 7. काशी की गंगा-जमुनी तहज़ीब

    देखिए, काशी को संस्कृति की पाठशाला कहा गया है।

    • • काशी = संस्कृति की पाठशाला, 'आनंदकानन'
    • • संकटमोचन मंदिर - हनुमान जयंती पर 5 दिन संगीत सभा
    • • काशी के कलाकार: कंठे महाराज, विद्याधरी, मौजुद्दीन खाँ आदि
    • • गंगा-जमुनी तहज़ीब: मुहर्रम-होली एक-दूसरे के पूरक
    • • भक्ति और संगीत धर्म से परे
  8. 8. भारतरत्न और शहनाई के प्रति समर्पण

    देखिए, एक शिष्या ने एक बार खाँ साहब से डरते-डरते पूछा।

    • • शिष्या का प्रश्न: फटी तहमत क्यों पहनते हैं?
    • • खाँ साहब का उत्तर: भारतरत्न शहनाई पे मिला, लुंगी पे नहीं
    • • दुआ: 'फटा सुर न बख्शें'
    • • निधन: 21 अगस्त 2006, आयु 90 वर्ष
    • • सबसे बड़ी देन: 80 वर्ष तक सीखने की जिजीविषा बनाए रखी

Summary

चलिए, अब इस पूरी कहानी को एक बार साथ में याद करते हैं। देखिए, यह कहानी शुरू होती है काशी के बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी से। वहीं छ: साल का अमीरुद्दीन अपने शहनाई वादक मामाओं के साथ रहता था। आगे चलकर यही अमीरुद्दीन बड़ा होकर बनता है — उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ। अच्छा, अमीरुद्दीन का जन्म हुआ था डुमराँव में, और वह जगह शहनाई की रीड के लिए जानी जाती है। उसे संगीत की पहली प्रेरणा मिली थी रसूलनबाई और बतूलनबाई से। फिर हमने जाना कि शहनाई एक सुषिर-वाद्य है, यानी फूँक से बजने वाला वाद्य। इसे पहले 'शाहेनय' कहा जाता था, और यह मांगलिक अवसरों पर बजाया जाने वाला वाद्य है। मुहर्रम में बिस्मिल्ला खाँ की गहरी आस्था थी, काशी विश्वनाथ के प्रति उनकी श्रद्धा थी, और बचपन में फ़िल्म देखने और कचौड़ी खाने की मीठी यादें भी थीं — इनसे पता चलता है कि वे कितने सहज और इंसानी थे। काशी की गंगा-जमुनी तहज़ीब में संगीत, भक्ति और धर्म, ये तीनों एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। और अंत में, भारतरत्न मिलने के बाद भी बिस्मिल्ला खाँ की सादगी नहीं बदली, सच्चे सुर की चाहत भी नहीं बदली। इसी से हमें यह सीख मिलती है कि उनकी सबसे बड़ी पूँजी थी — अस्सी बरस तक भी संगीत सीखते रहने की वह निरंतर ललक। अच्छा बताइए, इस कहानी से आपको सबसे ज़्यादा क्या बात छू गई?

AskMedha · Medha Ma’am — CBSE Class 10 Hindi A, Chapter 11. Written from the textbook, checked twice.

Questions parents and students ask

How do I get the "नौबतखाने में इबादत (यतींद्र मिश्र)" notes as a PDF?
Press "Save as PDF" — the phone’s print sheet opens; choose "Save as PDF" there. The PDF holds the notes only.
Where are these notes written from?
From the chapter’s own textbook text, part by part, in the book’s own terms; a second, independent model then checked every part against the book. The full lesson, a check question for each part and the practice are in the AskMedha app.

The same preparation, with Medha Ma’am — on your phone

Every question of every chapter with its model answer, practice questions in the board’s own shapes, 60 minutes of class a day, written answers marked, a test every Sunday and a WhatsApp report to parents.

Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.