बिहार बोर्ड 10वीं · विज्ञान · मैट्रिक परीक्षा 2027
अध्याय 13: विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव — नोट्स
इस अध्याय के 7 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।
1. चुंबकीय क्षेत्र और क्षेत्र रेखाएँ
देखिए, दिक्सूचक की सुई को आपने देखा होगा।
- • दिक्सूचक की सुई = छोटा छड़ चुंबक
- • चुंबकीय क्षेत्र = चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें उसके बल का संसूचन हो
- • चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ: उत्तर ध्रुव से निकलकर दक्षिण ध्रुव पर विलीन
- • चुंबक के भीतर दिशा: दक्षिण ध्रुव → उत्तर ध्रुव
- • रेखाएँ पास-पास = क्षेत्र अधिक प्रबल
- • दो क्षेत्र रेखाएँ कभी नहीं काटतीं
2. विद्युत धारावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र तथा दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम
देखिए, जब किसी सीधे तार में विद्युत धारा बहती है, तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बनती हैं।
- • तार में धारा → चारों ओर संकेंद्रीय वृत्ताकार क्षेत्र रेखाएँ
- • धारा की दिशा उलटने पर क्षेत्र की दिशा भी उलटती है
- • धारा बढ़ने पर क्षेत्र बढ़ता है; तार से दूर जाने पर क्षेत्र घटता है
- • दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम: अँगूठा = धारा की दिशा, अँगुलियाँ = क्षेत्र की दिशा
- • उदाहरण: धारा पूर्व→पश्चिम, पूर्वी सिरे से क्षेत्र दक्षिणावर्त
3. वृत्ताकार पाश और परिनालिका में चुंबकीय क्षेत्र
देखिए, एक सीधे तार को मोड़कर वृत्त जैसा पाश बना दीजिए।
- • वृत्ताकार पाश के केंद्र पर क्षेत्र रेखाएँ ≈ सीधी रेखा, सब एक दिशा में
- • n फेरों की कुंडली का क्षेत्र = एकल फेरे का n गुना
- • परिनालिका = बेलनाकार, पास-पास लिपटी विद्युतरोधी कुंडली
- • परिनालिका के भीतर क्षेत्र समांतर व एकसमान
- • परिनालिका के सिरे = उत्तर ध्रुव व दक्षिण ध्रुव जैसे
- • नर्म लोहे की छड़ + परिनालिका = विद्युत चुंबक
4. चुंबकीय क्षेत्र में विद्युत धारावाही चालक पर बल और फ्लेमिंग का वामहस्त नियम
देखिए, जब किसी चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखकर उसमें धारा बहाई जाती है, तो उस चालक पर एक बल लगता है।
- • चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल लगता है
- • धारा की दिशा उलटने पर बल की दिशा उलटती है
- • क्षेत्र की दिशा उलटने पर बल की दिशा उलटती है
- • बल अधिकतम जब धारा ⟂ क्षेत्र
- • फ्लेमिंग वामहस्त नियम: तर्जनी=क्षेत्र, मध्यमा=धारा, अँगूठा=बल
- • धारा की दिशा = इलेक्ट्रॉन गति के विपरीत
5. विद्युत मोटर
देखिए, अब बात करते हैं विद्युत मोटर की।
- • विद्युत मोटर: विद्युत ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा
- • कुंडली ABCD, भुजाएँ AB व CD क्षेत्र के लंबवत
- • AB व CD में धारा की दिशा परस्पर विपरीत
- • फ्लेमिंग वामहस्त नियम से AB अधोमुखी, CD उपरिमुखी बल
- • विभक्त वलय = दिक्परिवर्तक, हर आधे घूर्णन में धारा उलटती है
- • नर्म लौह-क्रोड + कुंडली = आर्मेचर
6. वैद्युतचुंबकीय प्रेरण और विद्युत जनित्र
देखिए, जब किसी चालक के पास चुंबकीय क्षेत्र बदलता है, तो दूसरे चालक या कुंडली में अपने आप धारा बन जाती है।
- • वैद्युतचुंबकीय प्रेरण: परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र → प्रेरित विद्युत धारा
- • खोजकर्ता: माइकल फैराडे, सन् 1831
- • फ्लेमिंग दक्षिण-हस्त नियम: तर्जनी=क्षेत्र, अँगूठा=गति, मध्यमा=प्रेरित धारा
- • जनित्र: यांत्रिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा
- • ac जनित्र: सर्पी वलय, धारा दिशा बदलती रहती है
- • dc जनित्र: विभक्त वलय दिक्परिवर्तक, भारत में ac की आवृत्ति 50 Hz
7. घरेलू विद्युत परिपथ
देखिए, अब बात करते हैं घर के बिजली के कनेक्शन की।
- • विद्युन्मय तार (लाल) व उदासीन तार (काला) के बीच विभवांतर = 220 V
- • 15 A परिपथ: गीज़र, कूलर जैसे उच्च शक्ति साधित्र
- • 5 A परिपथ: बल्ब, पंखे
- • भूसंपर्क तार (हरा) = सुरक्षा के लिए, धरती की प्लेट से जुड़ा
- • साधित्र पार्श्वक्रम में जुड़े रहते हैं
- • फ्यूज़: अतिभारण/लघुपथन में पिघलकर परिपथ तोड़ देता है
सारांश
देखिए, चलिए आज जो पढ़ा उसे एक बार साथ दोहरा लेते हैं। आपने सीखा कि विद्युत धारा अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। और दिक्सूचक की सुई असल में एक छोटा चुंबक होती है। इसी से चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ खींची जाती हैं — ये उत्तर ध्रुव से निकलती हैं, दक्षिण ध्रुव पर मिलती हैं, और कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं। फिर आपने देखा कि सीधे तार में, वृत्ताकार पाश में, और परिनालिका में धारा बहने पर क्षेत्र का पैटर्न कैसा बनता है। इसकी दिशा दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम से पता चलती है। और परिनालिका के भीतर नर्म लोहा रखकर आपने विद्युत चुंबक बनाना भी सीखा। इसके बाद आपने जाना — चुंबकीय क्षेत्र में रखा धारावाही चालक बल महसूस करता है। इसकी दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। इसी सिद्धांत पर विद्युत मोटर चलती है, जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है। फिर आया वैद्युतचुंबकीय प्रेरण — जहाँ बदलता हुआ चुंबकीय क्षेत्र किसी कुंडली में धारा प्रेरित कर देता है। इसकी दिशा फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम से मिलती है। इसी पर विद्युत जनित्र काम करता है, जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलकर ac या dc धारा देता है। और अंत में आपने घरेलू विद्युत परिपथ पढ़ा — विद्युन्मय, उदासीन और भूसंपर्क तार, 220 V का विभवांतर, 15 A और 5 A के अलग परिपथ, और फ्यूज़ जो लघुपथन या अतिभारण से बचाता है। अच्छा, बताइए — इनमें से कौन सा हिस्सा आपको सबसे दिलचस्प लगा?
AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं विज्ञान, अध्याय 13। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- "विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव" के नोट्स PDF में कैसे मिलेंगे?
- "PDF में सहेजें" दबाएँ — फ़ोन का प्रिंट पेज खुलेगा; वहाँ "Save as PDF" चुनें। PDF में सिर्फ़ नोट्स रहते हैं।
- ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
- अध्याय की पाठ्यपुस्तक के अपने पाठ से, भाग-भाग करके, किताब के ही शब्दों में; फिर एक दूसरे, स्वतंत्र मॉडल ने हर भाग को किताब से मिलाकर जाँचा है। पूरा पाठ, हर भाग का जाँच-प्रश्न और अभ्यास AskMedha ऐप में है।
यही तैयारी, मेधा मैम के साथ — आपके फ़ोन पर
हर अध्याय का हर प्रश्न, हर आदर्श उत्तर और बोर्ड के ढंग के अभ्यास प्रश्न; रोज़ 60 मिनट की क्लास, जाँचे हुए लिखित उत्तर, हर रविवार टेस्ट और माता-पिता को WhatsApp रिपोर्ट।
मेधा मैम एक AI टीचर हैं — कोई लाइव ट्यूटर नहीं। हर उत्तर दो बार जाँचा जाता है; ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति की है।