बिहार बोर्ड 10वीं · विज्ञान · मैट्रिक परीक्षा 2027
अध्याय 11: मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार — नोट्स
इस अध्याय के 6 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।
1. मानव नेत्र की बनावट
देखिए, हमारी आँख एक बहुत ही कीमती ज्ञानेंद्रिय है।
- • नेत्र गोलक का व्यास ≈ 2.3 cm
- • कॉर्निया - पारदर्शी झिल्ली, अधिकांश अपवर्तन यहीं
- • परितारिका - पुतली का साइज नियंत्रित करती है
- • अभिनेत्र लेंस - रेटिना पर उलटा, वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है
- • रेटिना - विद्युत सिग्नल बनाकर मस्तिष्क भेजती है
2. समंजन क्षमता, निकट बिंदु और दूर बिंदु
देखिए, अभिनेत्र लेंस एक रेशेदार, जेलीवत पदार्थ का बना होता है।
- • समंजन - फोकस दूरी समायोजित करने की क्षमता
- • पेशियाँ शिथिल → लेंस पतला → f बढ़ी → दूर देखना
- • पेशियाँ सिकुड़ी → लेंस मोटा → f घटी → पास देखना
- • निकट-बिंदु (सामान्य वयस्क) = 25 cm
- • दूर-बिंदु (सामान्य नेत्र) = अनंत
3. दृष्टि दोष और उनका संशोधन
देखिए, कभी-कभी नेत्र धीरे-धीरे अपनी समंजन क्षमता खो देते हैं।
- • निकट-दृष्टि - दूर नहीं, पास साफ दिखे → अवतल लेंस
- • प्रतिबिंब रेटिना के सामने बनता है
- • दीर्घ-दृष्टि - पास नहीं, दूर साफ दिखे → उत्तल लेंस
- • प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है
- • जरा-दूरदृष्टिता - उम्र से समंजन क्षमता घटे → द्विफोकसी लेंस
4. प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन और विक्षेपण
देखिए, काँच के प्रिज्म के दो पार्श्व फलक होते हैं।
- • प्रिज्म कोण - दो पार्श्व फलकों के बीच का कोण
- • विचलन कोण ∠D - निर्गत व आपतित किरण के बीच कोण
- • VIBGYOR - बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल
- • विक्षेपण - श्वेत प्रकाश का रंगों में बँटना
- • लाल सबसे कम झुके, बैंगनी सबसे अधिक झुके
- • इंद्रधनुष - जल की बूँदों द्वारा परिक्षेपण व आंतरिक परावर्तन
5. वायुमंडलीय अपवर्तन - तारों का टिमटिमाना
देखिए, हमारे वायुमंडल का अपवर्तनांक एक जैसा नहीं रहता।
- • तारों का टिमटिमाना - वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण
- • आभासी स्थिति वास्तविक स्थिति से ऊँची दिखे
- • ग्रह विस्तृत स्रोत - औसत परिवर्तन शून्य → नहीं टिमटिमाते
- • सूर्योदय लगभग 2 मिनट पहले, सूर्यास्त 2 मिनट बाद दिखे
6. प्रकाश का प्रकीर्णन - आकाश का नीला रंग व रक्ताभ सूर्य
देखिए, हमारा वायुमंडल खाली नहीं है।
- • टिंडल प्रभाव - कणों से टकराकर प्रकाश का मार्ग दिखना
- • सूक्ष्म कण → नीला प्रकाश अधिक प्रकीर्ण
- • लाल की तरंगदैर्घ्य नीले से लगभग 1.8 गुनी
- • आकाश नीला - नीले प्रकाश का प्रबल प्रकीर्णन
- • वायुमंडल न हो तो आकाश काला दिखे
- • सूर्योदय-सूर्यास्त में मोटी परत से गुजरने पर सूर्य रक्ताभ दिखे
सारांश
चलिए, अब जो पढ़ा उसे एक बार साथ दोहराते हैं। सबसे पहले हमने जाना, मानव नेत्र बिलकुल कैमरे की तरह काम करता है। इसमें कॉर्निया, परितारिका, पुतली, अभिनेत्र लेंस और रेटिना — ये सब मिलकर हमें देखने लायक बनाते हैं। फिर हमने समंजन क्षमता समझी, साथ ही निकट-बिंदु यानी 25 cm, और दूर-बिंदु यानी अनंत। उसके बाद आपने दृष्टि दोष सीखे — निकट-दृष्टि, दीर्घ-दृष्टि, और जरा-दूरदृष्टिता। और यह भी सीखा कि इन्हें अवतल और उत्तल लेंस से कैसे ठीक किया जाता है। फिर हमने देखा, प्रिज्म प्रकाश को अपवर्तित करता है, और विक्षेपित भी। इसी वजह से श्वेत प्रकाश सात रंगों में बँट जाता है, याद है — VIBGYOR। और इसी से इंद्रधनुष बनता है। उसके बाद हमने वायुमंडलीय अपवर्तन समझा। इसी के कारण तारे टिमटिमाते हैं, और सूर्योदय-सूर्यास्त भी असल समय से पहले या बाद में दिखते हैं। अंत में प्रकाश के प्रकीर्णन से हमने जाना, आकाश नीला क्यों दिखता है, और सूर्योदय-सूर्यास्त के समय सूर्य लाल क्यों दिखता है। अच्छा बताइए — इनमें से कौन सा हिस्सा आपको सबसे दिलचस्प लगा?
AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं विज्ञान, अध्याय 11। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- "मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार" के नोट्स PDF में कैसे मिलेंगे?
- "PDF में सहेजें" दबाएँ — फ़ोन का प्रिंट पेज खुलेगा; वहाँ "Save as PDF" चुनें। PDF में सिर्फ़ नोट्स रहते हैं।
- ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
- अध्याय की पाठ्यपुस्तक के अपने पाठ से, भाग-भाग करके, किताब के ही शब्दों में; फिर एक दूसरे, स्वतंत्र मॉडल ने हर भाग को किताब से मिलाकर जाँचा है। पूरा पाठ, हर भाग का जाँच-प्रश्न और अभ्यास AskMedha ऐप में है।
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