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बिहार बोर्ड 10वीं · संस्कृत · मैट्रिक परीक्षा 2027

अध्याय 4: संस्कृतसाहित्ये लेखिकाः — नोट्स

इस अध्याय के 5 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।

  1. 1. वैदिककाल में ऋषिकाएँ

    देखिए, समाज पुरुषों और स्त्रियों दोनों से मिलकर बनता है।

    • • वैदिकयुगे ऋषयः एव नहीं, ऋषिकाः भी मन्त्रदर्शिकाः
    • • ऋग्वेदे चतुर्विंशतिः ऋषिकाः
    • • अथर्ववेदे पञ्च ऋषिकाः
    • • नाम - यमी, अपाला, उर्वशी, इन्द्राणी, वागाम्भृणी
  2. 2. उपनिषद् और महाभारत की विदुषी स्त्रियाँ

    देखिए, वेदों के बाद भी यह परंपरा नहीं रुकी।

    • • बृहदारण्यकोपनिषदि - मैत्रेयी (याज्ञवल्क्यस्य पत्नी), दार्शनिकरुचिमती
    • • याज्ञवल्क्य तां आत्मतत्त्वं शिक्षयति
    • • जनकसभायां - गार्गी वाचक्नवी, शास्त्रार्थकुशला
    • • महाभारते - सुलभा, वेदान्तानुशीलनपरा
  3. 3. लौकिक संस्कृत में कवयित्रियाँ - विजयाङ्का

    देखिए, अब हम लौकिक संस्कृत साहित्य की बात करते हैं।

    • • लौकिकसंस्कृतसाहित्ये - लगभग चत्वारिंशत् कवयित्रीणां सार्धशतं पद्यानि
    • • विजयाङ्का - प्रथमकल्पा, श्यामवर्णा
    • • पद्य - नीलोत्पलदलश्यामां विजयाङ्कां जानता। वृथैव दण्डिना प्रोक्ता सर्वशुक्ला सरस्वती।।
    • • कालः - अष्टमशतकम्
    • • विजयभट्टारिका (चन्द्रादित्यस्य राज्ञी) = विजयाङ्का (मतानुसार)
    • • अन्य - शीला भट्टारिका, देवकुमारिका, रामभद्राम्बा
  4. 4. विजयनगर राज्य की राज्ञी लेखिकाएँ

    चलिए, अब विजयनगर राज्य की बात करते हैं।

    • • कम्पनरायस्य राज्ञी - गङ्गादेवी, महाकाव्य - 'मधुराविजयम्' (चतुर्दशशतकम्)
    • • विषय - स्वस्वामिनः मदुरै-विजयघटना, अलङ्काराणां सन्निवेशः आवर्जकः
    • • अच्युतरायस्य राज्ञी - तिरुलाम्बा (षोडशशतकम्)
    • • रचना - 'वरदाम्बिकापरिणय' नामक चम्पूकाव्य
    • • संस्कृतसाहित्ये दीर्घतमं समस्तपदम् अत्रैव
  5. 5. आधुनिककाल की संस्कृतलेखिकाएँ

    चलिए, अब आधुनिककाल की बात करते हैं।

    • • पण्डिता क्षमाराव (1890-1953 ई०)
    • • रचना - 'शंकरचरितम्' (पितुः शंकरपाण्डुरंगपण्डितस्य जीवनचरितम्)
    • • गान्धिदर्शनप्रभाविता रचनाएँ - सत्याग्रहगीता, मीरालहरी, कथामुक्तावली, विचित्रपरिषद्यात्रा, ग्रामज्योतिः
    • • वर्तमानकाल - पुष्पादीक्षित, वनमाला भवालकर, मिथिलेश कुमारी मिश्र

सारांश

चलिए, अब जो पढ़ा उसे याद करते हैं। इस पाठ में हमने देखा कि संस्कृतसाहित्य में स्त्रियों का योगदान वैदिककाल से ही रहा है। सबसे पहले, वैदिककाल में यमी, अपाला, उर्वशी जैसी ऋषिकाओं ने मन्त्रदर्शन किया। फिर, उपनिषदों और महाभारत में मैत्रेयी, गार्गी, सुलभा जैसी दार्शनिक स्त्रियों की चर्चा आई। इसके बाद, लौकिक संस्कृतसाहित्य में हमने विजयाङ्का जैसी कवयित्रियों के स्फुट पद्य देखे, जो प्रथमकल्पा और श्यामवर्णा थी। फिर, विजयनगर राज्य की रानियों गङ्गादेवी और तिरुलाम्बा की महाकाव्य तथा चम्पूकाव्य रचनाओं के बारे में जाना। अन्त में, आधुनिककाल की पण्डिता क्षमाराव और वर्तमानकाल की कवयित्रियों के योगदान को देखा। तो देखिए, वैदिकयुग से आधुनिकसमय तक, संस्कृतलेखिकाओं की यह परम्परा कितनी सुदीर्घ रही है। अच्छा, बताइए — इनमें से कौन सी कवयित्री या रचना आपको सबसे दिलचस्प लगी?

AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं संस्कृत, अध्याय 4। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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