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बिहार बोर्ड 10वीं · संस्कृत · मैट्रिक परीक्षा 2027

अध्याय 11: व्याघ्रपथिककथा — नोट्स

इस अध्याय के 6 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।

  1. 1. पाठ का परिचय - हितोपदेश से कथा

    देखिए, आज हम एक नई कथा पढ़ेंगे।

    • • ग्रन्थ - हितोपदेश (नारायणपण्डित रचित)
    • • खण्ड - मित्रलाभ
    • • विषय - लोभस्य दुष्परिणाम
  2. 2. वृद्ध व्याघ्र का कङ्कण दिखाना और पथिक की सावधानी

    देखिए बोर्ड पर।

    • • वृद्धव्याघ्रः स्नातः कुशहस्तः सरस्तीरे
    • • कथन - 'इदं सुवर्णकङ्कणं गृह्यताम्'
    • • श्लोक - अनिष्टादिष्टलाभेऽपि न गतिर्जायते शुभा
    • • पथिक का प्रश्न - 'कुत्र तव कङ्कणम् ?'
    • • व्याघ्रः हस्तं प्रसार्य दर्शयति
  3. 3. व्याघ्र की आत्मकथा - दुर्वृत्त से धर्मशील तक

    देखिए, पथिक को शक हुआ - एक हिंसक जानवर पर भरोसा कैसे करूँ।

    • • व्याघ्र पूर्वे अतिदुर्वृत्तः आसीत्
    • • अनेकगोमानुषवधात् पुत्रा दाराश्च मृताः, वंशहीनः
    • • धार्मिकेण आदिष्टः - 'दानधर्मादिकं चरतु भवान्'
    • • अब - स्नानशीलः दाता वृद्धः गलितनखदन्तः
    • • श्लोक - दरिद्रान्भर कौन्तेय ! मा प्रयच्छेश्वरे धनम््
  4. 4. सात्त्विक दान का श्लोक और व्याघ्र का निमन्त्रण

    देखिए, व्याघ्र अब एक श्लोक बोलता है।

    • • श्लोक - दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे
    • • देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं विदुः
    • • व्याघ्र का कथन - 'तदत्र सरसि स्नात्वा सुवर्णकङ्कणं गृहाण'
  5. 5. पथिक का पङ्क में फँसना और चिन्तन

    देखिए, व्याघ्र की बातों पर भरोसा करके पथिक लोभ में आ जाता है।

    • • पथिकः लोभात् सरः स्नातुं प्रविशति
    • • महापङ्के निमग्नः, पलायितुमक्षमः
    • • व्याघ्रः - 'अहह महापङ्के पतितोऽसि, अतस्त्वामहमुत्थापयामि'
    • • शनैः शनैः उपगम्य व्याघ्रेण धृतः
    • • श्लोक - अवशेन्द्रियचित्तानां हस्तिस्नानमिव क्रिया
  6. 6. पथिक का अन्त और लोभ का दुष्परिणाम

    देखिए, यही सोचते-सोचते वह पथिक व्याघ्र के हाथों मारा गया, और खा लिया गया।

    • • पथिकः व्याघ्रेण व्यापादितः खादितश्च
    • • अन्तिम श्लोक - कङ्कणस्य तु लोभेन मग्नः पङ्के सुदुस्तरे
    • • वृद्धव्याघ्रेण संप्राप्तः पथिकः स मृतो यथा
    • • शिक्षा - लोभः पापस्य कारणम्

सारांश

चलिए, अब इस पूरी कहानी को एक बार फिर से याद करते हैं। देखिए, एक बूढ़ा बाघ सरोवर के किनारे नहाकर खड़ा होता है, और राहगीरों को सोने के कङ्कण का लालच देता है। शुरू में एक राहगीर उस पर शक करता है। लेकिन बाघ उसे अपनी पुरानी बुरी आदतों की बात बताता है, यह भी कहता है कि अब उसका कोई वंश नहीं बचा, और वह धर्मशास्त्र पढ़कर दानी बूढ़ा बन गया है। फिर वह एक सात्त्विक दान का श्लोक भी सुनाता है। इससे राहगीर का विश्वास जीत लेता है। लालच में आकर वह राहगीर सरोवर में उतरता है, और उतरते ही गहरे कीचड़ में फँस जाता है। अब वह भाग नहीं पाता। बाघ धीरे-धीरे उसके पास आकर उसे पकड़ लेता है। तभी राहगीर को समझ आता है कि सिर्फ़ ज्ञान होना काफ़ी नहीं, उस पर अमल करना भी ज़रूरी है। लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है। अंत में बाघ उसे मार डालता है, और खा जाता है। तो यह कथा हमें क्या सिखाती है — बताइए, लालच का नतीजा हमेशा कैसा होता है?

AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं संस्कृत, अध्याय 11। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
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मेधा मैम एक AI टीचर हैं — कोई लाइव ट्यूटर नहीं। हर उत्तर दो बार जाँचा जाता है; ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति की है।