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बिहार बोर्ड 10वीं · संस्कृत · मैट्रिक परीक्षा 2027

अध्याय 1: मङ्गलम् — नोट्स

इस अध्याय के 6 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।

  1. 1. पाठ का परिचय - उपनिषद् और परमात्मा की महिमा

    देखिए, आज हम पढ़ेंगे पाठ 'मङ्गलम्'।

    • • पाठ - मङ्गलम्, प्रथमः पाठः
    • • उपनिषद् - दर्शनशास्त्र के सिद्धान्त
    • • प्रधान विषय - परमात्मा की महिमा
    • • पाँच मन्त्र - ईशावास्य, कठ, मुण्डक (2), श्वेताश्वतर
  2. 2. हिरण्मय पात्र से सत्य का मुख ढका है

    देखिए बोर्ड पर, यह श्लोक है — हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्, तत्त्वं पूषन्नपावृणु सत्यधर्माय दृष्टये।

    • • हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्।
    • • तत्त्वं पूषन्नपावृणु सत्यधर्माय दृष्टये॥ (ईशावास्य 15)
    • • हिरण्मयेन = स्वर्णमयेन, ज्योतिर्मयेन
    • • अपिहितम् = आच्छादितम्
    • • अपावृणु = अपसारय
    • • सत्यधर्माय दृष्टये = सत्यधर्मवान् के लिए प्राप्ति हेतु
  3. 3. आत्मा अणु से भी सूक्ष्म, महान से भी महान

    देखिए, अब दूसरा मन्त्र लेते हैं।

    • • अणोरणीयान् महतो महीयान् आत्मास्य जन्तोर्निहितो गुहायाम्।
    • • तमक्रतु: पश्यति वीतशोको धातुप्रसादान्महिमानमात्मन:॥ (कठ 1.2.20)
    • • सत्यमेव जयते नानृतम्।
    • • गुहायाम् = हृदि, वीतशोकः = शोकरहितः
  4. 4. सत्य का मार्ग और सत्य का परम स्थान

    देखिए, अब तीसरा मन्त्र लेते हैं।

    • • सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयान:।
    • • येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत् सत्यस्य परं निधानम्॥ (मुण्डक 3.1.6)
    • • पन्थाः = मार्गः
    • • विततः = विस्तीर्णः
    • • आप्तकामाः = जिनकी कामना पूर्ण हो गई
  5. 5. नदियों की तरह विद्वान समुद्र रूपी परमात्मा में मिल जाता है

    देखिए, यह चौथा मन्त्र भी मुण्डक उपनिषद् से लिया गया है।

    • • यथा नद्य: स्यन्दमाना: समुद्रे-स्तं गच्छन्ति नामरूपे विहाय।
    • • तथा विद्वान् नामरूपाद् विमुक्त: परात्परं पुरुषमुपैति दिव्यम्॥ (मुण्डक 3.2.8)
    • • स्यन्दमानाः = प्रवहन्त्यः (प्रवाहित होती हुई)
    • • विहाय = छोड़कर
  6. 6. तेज से परे महान पुरुष को जानने से मृत्यु का पार होना

    चलिए, अब पाँचवाँ और आख़िरी मन्त्र देखते हैं।

    • • वेदाहमेतं पुरुषं महान्तम् आदित्यवर्णं तमसः परस्तात्।
    • • तमेव विदित्वाति मृत्युमेति नान्यः पन्था विद्यतेऽयनाय॥ (श्वेताश्वतर 3.8)
    • • अत्येति = पारंगच्छति
    • • अयनाय = मुक्ति के लिए

सारांश

देखिए, अब मङ्गलम् पाठ को एक बार पूरा याद करते हैं। इस पाठ में उपनिषदों से पाँच मन्त्र लिए गए हैं। इन पाँचों में परमात्मा की महिमा बताई गई है। पहले मन्त्र में क्या प्रार्थना है? सत्य का जो मुख ढका हुआ है, उसे हटाने की। दूसरे मन्त्र में आत्मा की सूक्ष्मता और महानता बताई गई है, और साथ में सत्य की जय भी। तीसरे मन्त्र में सत्य के मार्ग की बात है, और उसके परम स्थान की भी। चौथे मन्त्र में एक सुंदर उपमा है — जैसे नदियाँ समुद्र में जाकर मिल जाती हैं, वैसे ही विद्वान परमात्मा में समा जाता है। पाँचवें मन्त्र में शिक्षा है कि तेज से परे जो महान पुरुष है, उसे जानकर मनुष्य मृत्यु को पार कर लेता है। तो देखिए, पूरा पाठ मिलकर किसकी वन्दना है? सत्यस्वरूप, सर्वव्यापक और सर्वाधार परमात्मा की। अच्छा बताइए, इन पाँच मन्त्रों में से आपको सबसे अच्छी उपमा कौन सी लगी?

Ask Medha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं संस्कृत, अध्याय 1। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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