Ask Medha

बिहार बोर्ड 10वीं · सामाजिक विज्ञान · मैट्रिक परीक्षा 2027

अध्याय 6: शहरीकरण एवं शहरी जीवन — नोट्स

इस अध्याय के 8 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।

  1. 1. शहरीकरण का अर्थ और गाँव-शहर में अंतर

    चलिए, आज समझते हैं कि शहरीकरण क्या होता है।

    • • शहरीकरण = गाँव का शहर/कस्बे में विकसित होना
    • • गाँव: कम आबादी, कृषि, स्वच्छ वातावरण
    • • शहर: अधिक आबादी, व्यापार-उत्पादन, प्रदूषित
    • • शहर स्थापना के आधार: व्यापार मार्ग, बंदरगाह, धार्मिक स्थल
  2. 2. शहरों की स्थापना के ऐतिहासिक चरण

    देखिए, सामंती व्यवस्था की बात करते हैं।

    • • सामंती व्यवस्था का शिखर: 13वीं सदी तक
    • • आधुनिक शहर का इतिहास: लगभग 200 वर्ष पुराना
    • • 3 प्रक्रियाएँ: औद्योगिक पूंजीवाद, औपनिवेशिक शासन, लोकतांत्रिक आदर्श
    • • स्थायी कृषि → अतिरिक्त उत्पादन → संपत्ति जमाव → सामाजिक विषमता
  3. 3. ग्रामीण और नगरीय व्यवस्था के आधार तथा प्रवजन

    देखिए, ग्रामीण और नगरीय व्यवस्था को समझने के दो मुख्य आधार होते हैं।

    • • 2 आधार: जनसंख्या घनत्व, कृषि आधारित क्रियाओं का अनुपात
    • • गाँव: जीवन निर्वाह अर्थव्यवस्था
    • • शहर: मुद्रा प्रधान अर्थव्यवस्था
    • • प्रवजन = कृषक वर्ग का गाँव से शहर की ओर पलायन
  4. 4. इंग्लैंड और लंदन में शहरीकरण तथा मजदूरों की स्थिति

    आधुनिक काल में औद्योगीकरण ने शहरीकरण के स्वरूप को गहन रूप से प्रभावित किया, पर 1850 ई.

    • • मैनचेस्टर 1851: 3/4 से अधिक लोग प्रवासी मजदूर
    • • लंदन की आबादी: 1810 में 10 लाख → 1880 में 40 लाख
    • • टेनेमेंट्स = भीड़ वाले सस्ते मकान
    • • भूमिगत रेल का उद्घाटन: 10 जनवरी 1863
    • • गार्डन सिटी अवधारणा - एवेनेजर हावर्ड
  5. 5. शहरी जीवन में सामाजिक बदलाव - व्यक्तिवाद, घेटो, महिलाएँ और वर्ग

    देखिए, शहर का जीवन हमेशा आधुनिकता से जुड़ा होता है।

    • • व्यक्तिवाद = व्यक्ति की स्वतंत्रता व अधिकार को मान्यता
    • • घेटो = समान पहचान वालों की बस्ती
    • • महिलाओं का राजनीतिक भागीदारी: 1870 ई. के बाद
    • • मध्यम वर्ग = शिक्षक, वकील, चिकित्सक, इंजीनियर
    • • श्रमिक वर्ग ने बनाए ट्रेड यूनियन
  6. 6. औपनिवेशिक भारतीय शहर बम्बई

    पश्चिमी यूरोपीय शहरों के मुकाबले भारत में शहरीकरण धीमा रहा - बीसवीं शताब्दी के शुरुआत में केवल 11 प्रतिशत लोग ही शहरों में रहते थे।

    • • 20वीं सदी शुरुआत में भारत: 11% लोग शहरों में
    • • बम्बई: पहले 7 टापू, फिर जुड़े
    • • 1854: पहली कपड़ा मिल; 1921: 85 मिलें, 1,46,000 मजदूर
    • • बम्बई प्रति व्यक्ति क्षेत्रफल: 9.5 वर्ग गज (लंदन: 155 वर्ग गज)
    • • 1898: सिटी ऑफ बॉम्बे इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट स्थापित
  7. 7. सिंगापुर और पेरिस का नियोजित विकास

    देखिए, सभी एशियाई शहर अनियोजित नहीं थे।

    • • सिंगापुर: 1965 में आजादी, आवास कार्यक्रम शुरू
    • • 86% जनता को मिले अच्छे मकान
    • • पेरिस पुनर्निर्माण: बेरॉन हॉसमान, 1850-1870
    • • बुलेवर्ड्स = छायादार सड़कें
    • • 350,000 लोग उजाड़े गए
  8. 8. पाटलीपुत्र से आधुनिक पटना तक

    देखिए, पटना शहर का विकास शहरीकरण की एक बहुत अच्छी मिसाल है।

    • • पाटलीपुत्र स्थापना: अजातशत्रु, 6वीं सदी ई.पू.
    • • मौर्यकाल में आबादी: लगभग 4 लाख
    • • शेरशाह सूरी: 1541 ई. में दुर्ग निर्माण
    • • 1912: बिहार-उड़ीसा अलग राज्य, पटना राजधानी
    • • वर्तमान पटना: 12 लाख से अधिक आबादी

सारांश

चलिए, आज जो पढ़ा उसे एक बार समेट लेते हैं। शहरीकरण क्या है? गाँव का धीरे-धीरे शहर में बदलना, यही शहरीकरण है। इसमें व्यापार की भूमिका रही, धर्म की भूमिका रही। और बाद में औद्योगिक पूंजीवाद, औपनिवेशिक शासन, और लोकतांत्रिक आदर्शों ने भी निर्णायक भूमिका निभाई। अब सोचिए — गाँव और नगर में फ़र्क क्या है? जनसंख्या घनत्व का, और खेती पर निर्भरता का। इसी फ़र्क से गाँव से शहर की ओर प्रवजन शुरू हुआ, यानी लोग गाँव छोड़कर शहर जाने लगे। इंग्लैंड को याद कीजिए। वहाँ औद्योगीकरण से मैनचेस्टर और लंदन जैसे शहर बढ़े। वहाँ टेनेमेंट्स थे, यानी तंग बस्तियाँ। अपराध था, गरीबी थी। लेकिन इसके साथ गार्डन सिटी जैसा समाधान भी आया, और भूमिगत रेलवे भी आई। शहरी जीवन ने नई चीज़ें भी दीं — व्यक्तिवाद, घेटो, महिलाओं की भागीदारी, और व्यवसायी, मध्यम व श्रमिक वर्ग। फिर हमने बम्बई, सिंगापुर और पेरिस देखे। तीनों ने अपने-अपने ढंग से शहरी विकास की कहानी लिखी। और अंत में पाटलीपुत्र से आधुनिक पटना तक का सफर देखा, अपने ही राज्य के शहरीकरण का उदाहरण। अच्छा बताइए, इनमें से कौन-सा शहर आपको सबसे दिलचस्प लगा?

Ask Medha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं सामाजिक विज्ञान, अध्याय 6। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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मेधा मैम एक AI टीचर हैं — कोई लाइव ट्यूटर नहीं। हर उत्तर दो बार जाँचा जाता है; ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति की है।