बिहार बोर्ड 10वीं · सामाजिक विज्ञान · मैट्रिक परीक्षा 2027
अध्याय 5: रोजगार एवं सेवाएँ — नोट्स
इस अध्याय के 7 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।
1. रोजगार और सेवा क्षेत्र क्या है
देखिए, सबसे पहले समझते हैं कि रोजगार किसे कहते हैं।
- • रोजगार = मानव संसाधन को काम में लगाना
- • बेरोजगार = काम योग्य पर काम न पाने वाला
- • सेवा क्षेत्र = शक्ति-दक्षता पर आधारित रोजगार का क्षेत्र
- • रोजगार और सेवाएँ एक-दूसरे के पूरक
2. आर्थिक विकास के तीन क्षेत्र
देखिए, आर्थिक विकास के मुख्य रूप से तीन क्षेत्र होते हैं।
- • आर्थिक विकास के तीन क्षेत्र:
- • (क) कृषि क्षेत्र
- • (ख) उद्योग क्षेत्र
- • (ग) सेवा क्षेत्र
- • 2006-07: कृषि 18.5%, उद्योग 26.4%, सेवा 55.1%
3. सेवा क्षेत्र के दो भाग
देखिए, सेवा क्षेत्र को हम दो भागों में बाँटते हैं।
- • सेवा क्षेत्र के दो भाग:
- • (क) सरकारी सेवा - सैन्य, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त, बैंकिंग
- • (ख) गैर सरकारी सेवा - बैंकिंग, दूरसंचार, यातायात, स्वरोजगार
- • कुछ सेवाएँ दोनों स्तर पर - यातायात, शिक्षा, स्वास्थ्य
4. सेवा क्षेत्र का महत्त्व और रोजगार सृजन
देखिए, सेवा और रोजगार को एक तराजू के दो पलड़े समझिए।
- • सेवा + रोजगार = एक तराजू के दो पलड़े
- • किसान उदाहरण: धान → साफ कर पैकेट बनाना → अधिक मूल्य
- • वस्तु में गुणवत्ता वृद्धि = Value Added
- • योजनाएँ: काम के बदले अनाज (2004), नरेगा
5. भारत विश्व को सेवा प्रदाता के रूप में और Out Sourcing
21वीं शताब्दी में विश्व के सेवा क्षेत्र में भारतीय श्रम-शक्ति का बहुत बड़ा योगदान रहा है, जैसे इंग्लैंड की स्वास्थ्य-परिवहन सेवाओं में और अमेरिका के अंतरिक्ष विज्ञान तथा सूचना प्रौद्योगिकी में।
- • Out Sourcing = नियमित सेवा बाहरी/विदेशी स्रोत से लेना
- • कारण: भारत में कुशल व सस्ती श्रमशक्ति
- • उदाहरण: कॉल सेंटर, लेखांकन, बैंकिंग सेवाएँ
- • भारत = अग्रणी युवा देश
6. बुनियादी सुविधाएँ (आधारभूत संरचना)
देखिए, सेवा क्षेत्र को बढ़ने के लिए कुछ बुनियादी सुविधाएँ चाहिए होती हैं।
- • बुनियादी सुविधाएँ = विकास की रीढ़ की हड्डी
- • आर्थिक संरचना: वित्त, ऊर्जा, यातायात, संचार
- • गैर आर्थिक संरचना: शिक्षा, स्वास्थ्य, नागरिक सेवाएँ
- • BIMARU: बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा
7. मानव पूँजी और सेवा क्षेत्र में शिक्षा की भूमिका
आर्थिक विकास केवल वस्तुओं के उत्पादन से नहीं होता, इसके लिए मानव पूँजी निर्माण जरूरी है, जो भौतिक पूँजी से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि भौतिक पूँजी दिखाई देती है जबकि मानवीय पूँजी अदृश्य होती है।
- • मानव पूँजी के घटक: भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य
- • भौतिक पूँजी = दृश्य, मानव पूँजी = अदृश्य
- • सूचना तकनीकी केंद्र: बंगलौर, पुणे, मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली
- • मंदी का असर: विकसित देशों पर अधिक, भारत पर कम
सारांश
चलिए, अब जो पढ़ा उसे एक बार समेट लेते हैं। देखिए, रोजगार और सेवाएँ एक-दूसरे के पूरक हैं। आर्थिक विकास के तीन क्षेत्र होते हैं — कृषि, उद्योग और सेवा। इनमें सेवा क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक बढ़ा है। सेवा क्षेत्र दो भागों में बँटा है — सरकारी और गैर सरकारी। सुरेश के परिवार की कहानी से हमने देखा, कैसे शिक्षा और मेहनत से सेवाओं का लाभ मिलता है। सेवा क्षेत्र रोजगार भी बनाता है, जैसे किसान के उदाहरण में Value Added से हमने देखा। सरकार नरेगा जैसी योजनाओं से भी रोजगार देती है। भारत Out Sourcing के जरिए दुनिया को सेवाएँ देने वाला देश बन गया है। इसके लिए अच्छी बुनियादी सुविधाएँ और मजबूत मानव पूँजी जरूरी है। और अंत में, आधुनिक मंदी का असर विकसित देशों पर ज्यादा पड़ा, जबकि भारत और बिहार पर कम पड़ा। अच्छा, बताइए — इनमें से कौन सी बात आपको सबसे दिलचस्प लगी?
AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं सामाजिक विज्ञान, अध्याय 5। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- "रोजगार एवं सेवाएँ" के नोट्स PDF में कैसे मिलेंगे?
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- ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
- अध्याय की पाठ्यपुस्तक के अपने पाठ से, भाग-भाग करके, किताब के ही शब्दों में; फिर एक दूसरे, स्वतंत्र मॉडल ने हर भाग को किताब से मिलाकर जाँचा है। पूरा पाठ, हर भाग का जाँच-प्रश्न और अभ्यास AskMedha ऐप में है।
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