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बिहार बोर्ड 10वीं · सामाजिक विज्ञान · मैट्रिक परीक्षा 2027

अध्याय 4: हमारी वित्तीय संस्थाएँ — नोट्स

इस अध्याय के 7 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।

  1. 1. वित्तीय संस्थाएँ क्या हैं और क्यों चाहिए

    देखिए, कोई भी काम करने के लिए रुपये-पैसे चाहिए होते हैं, है न?

    • • वित्तीय संस्थाएँ: उद्यम व व्यवसाय की वित्तीय आवश्यकता पूरी करने वाली संस्था
    • • केन्द्रीय बैंक: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया
    • • सरकारी वित्तीय संस्थाएँ: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक
    • • अर्द्धसरकारी वित्तीय संस्थाएँ: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, बिहार राज्य कॉपरेटिव बैंक
  2. 2. राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ: मुद्रा बाजार और पूँजी बाजार

    देखिए, वित्तीय संस्थाएँ दो तरह की होती हैं।

    • • वित्तीय संस्थाएँ: राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय
    • • राष्ट्रीय के दो अंग: मुद्रा बाजार, पूँजी बाजार
    • • मुद्रा बाजार: अल्पकालीन व मध्यकालीन वित्त
    • • पूँजी बाजार: दीर्घकालीन वित्त
    • • संगठित बैंकिंग: केन्द्रीय बैंक, वाणिज्य बैंक, सहकारी बैंक
    • • वित्तीय राजधानी: मुंबई, पूँजी बाजार क्षेत्र: दलाल स्ट्रीट
  3. 3. राज्य स्तरीय वित्तीय संस्थाएँ: गैर-संस्थागत स्रोत

    देखिए, बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्यतः खेती पर टिकी है।

    • • गैर-संस्थागत स्रोत: महाजन, सेठ-साहूकार, व्यापारी, रिश्तेदार
    • • गैर-संस्थागत ऋण: ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 48%
    • • उदाहरण: दीनदयाल ने 2000 रुपये, 10% प्रतिमाह ब्याज पर लिया
    • • भुगतान न करने पर जमीन किसान के नाम हो गई
  4. 4. संस्थागत वित्तीय स्रोत

    देखिए, संस्थागत वित्तीय स्रोत में कई संस्थाएँ आती हैं।

    • • सहकारी साख व्यवस्था त्रिस्तरीय: प्राथमिक समिति, केन्द्रीय सहकारी बैंक, राज्य सहकारी बैंक
    • • प्राथमिक सहकारी समिति: कम से कम दस व्यक्ति, अल्पकालीन ऋण
    • • भूमि विकास बैंक: 15-20 वर्ष का दीर्घकालीन ऋण
    • • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक: स्थापना 1975 ई०
    • • नाबार्ड: कृषि-ग्रामीण विकास हेतु पुनर्वित संस्था
  5. 5. व्यावसायिक बैंक के कार्य

    देखिए, व्यावसायिक बैंक हमारी अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    • • व्यावसायिक बैंक के 4 कार्य: जमा स्वीकारना, ऋण देना, सामान्य उपयोगिता कार्य, एजेंसी कार्य
    • • जमा के 4 प्रकार: स्थायी, चालू, संचयी, आवर्ती जमा
    • • ऋण के प्रकार: नकद साख, अधिविकर्ष, विनिमय बिल भुनाना
    • • अन्य सुविधाएँ: लॉकर, ATM, क्रेडिट कार्ड
  6. 6. सहकारिता और राज्य के विकास में भूमिका

    देखिए, सहकारिता का मतलब है मिल-जुलकर काम करना।

    • • सहकारिता: स्वेच्छा से मिलकर आर्थिक हित बढ़ाना
    • • मूल तत्व: स्वैच्छिक सदस्यता, जनतंत्रात्मक प्रबंधन, नैतिक-सामाजिक उद्देश्य
    • • सिद्धांत: सब प्रत्येक के लिए और प्रत्येक सबके लिए
    • • 1904 ई०: सहकारिता साख समिति विधान
    • • 1935 ई०: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना, कृषि साख विभाग
  7. 7. स्वयं-सहायता-समूह

    देखिए, गरीब परिवार अभी भी ज्यादातर गैर-संस्थागत स्रोतों पर निर्भर रहते हैं।

    • • स्वयं-सहायता-समूह: 15-20 पड़ोसी सदस्य, नियमित बचत
    • • प्रति-व्यक्ति बचत: 25 से 100 रुपये या अधिक
    • • उदाहरण: दर्शन गाँव, नवादा - 20 महिलाएँ
    • • पंजाब नेशनल बैंक से ऋण: 15000 रुपये
    • • लाभ: 6000 रुपये, प्रत्येक को 300 रुपये आमदनी

सारांश

चलिए, अब जो पढ़ा उसे एक बार साथ में याद करते हैं। देखिए, साख या ऋण की जरूरत पूरी करने के लिए वित्तीय संस्थाएँ होती हैं। ये सरकारी भी हो सकती हैं, और अर्द्धसरकारी भी। वित्तीय संस्थाएँ दो तरह की होती हैं। पहली, राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ, जिनमें मुद्रा बाजार और पूँजी बाजार आते हैं। दूसरी, राज्य स्तरीय वित्तीय संस्थाएँ। इनमें भी दो भाग हैं — गैर-संस्थागत स्रोत, जैसे महाजन और सेठ-साहूकार, और संस्थागत स्रोत, जैसे सहकारी बैंक, भूमि विकास बैंक, व्यावसायिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और नाबार्ड। आपने व्यावसायिक बैंकों के चार मुख्य काम भी जाने — जमा स्वीकारना, ऋण देना, सामान्य उपयोगिता के काम, और एजेंसी के काम। फिर आपने सहकारिता के सिद्धांत समझे, और बिहार के विकास में इसकी भूमिका भी। अंत में आपने स्वयं-सहायता-समूह के बारे में पढ़ा। यह गाँव की गरीब महिलाओं को बचत और ऋण के जरिए स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण में मदद करता है, जैसा नवादा जिले की महिलाओं की कहानी से साफ हुआ। अच्छा, बताइए — इनमें से कौन सी बात आपको सबसे दिलचस्प लगी?

AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं सामाजिक विज्ञान, अध्याय 4। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
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मेधा मैम एक AI टीचर हैं — कोई लाइव ट्यूटर नहीं। हर उत्तर दो बार जाँचा जाता है; ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति की है।