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बिहार बोर्ड 10वीं · सामाजिक विज्ञान · मैट्रिक परीक्षा 2027

अध्याय 2: सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली — नोट्स

इस अध्याय के 8 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।

  1. 1. सत्ता की साझेदारी क्यों जरूरी है

    देखिए, हर समाज में अलग-अलग समूह होते हैं — जाति, धर्म, रंग, भाषा के आधार पर।

    • • सत्ता की साझेदारी = अलग-अलग समूहों को शासन में हिस्सेदारी देना
    • • बेल्जियम: भाषायी-जातीय समूहों को साझीदार बनाया
    • • श्रीलंका: तमिलों की उपेक्षा → गृहयुद्ध
    • • लोकतंत्र = सत्ता सबके हाथ में बँटी
    • • सत्ता की साझेदारी = एकता-अखंडता की पहली शर्त
  2. 2. लोकतंत्र में साझेदारी के तरीके

    देखिए, लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी कई तरीकों से होती है।

    • • भाषायी-धार्मिक समूहों में बँटवारा — बेल्जियम उदाहरण
    • • हित समूह: व्यापारी, किसान, मजदूर
    • • राजनीतिक दल = साझेदारी का जीवंत स्वरूप
    • • गठबंधन सरकार = साझेदारी का अद्यतन रूप
    • • जनआंदोलन: नेपाल, बोलिविया जलयुद्ध
  3. 3. क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर वितरण

    देखिए, अब समझते हैं कि सरकार के भीतर सत्ता किस तरह बँटती है।

    • • क्षैतिज वितरण = एक ही स्तर पर अंगों में बँटवारा
    • • विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका
    • • नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था — अमेरिका, भारत
    • • ऊर्ध्वाधार वितरण = विभिन्न स्तरों पर बँटवारा
    • • ऊर्ध्वाधार वितरण = संघवाद
  4. 4. संघीय शासन व्यवस्था की विशेषताएँ

    देखिए, एकात्मक व्यवस्था में शासन का एक ही स्तर होता है, बाकी सब उसके अधीन काम करते हैं।

    • • संघीय व्यवस्था ≠ एकात्मक व्यवस्था
    • • दोहरी सरकार: केन्द्र + प्रांत
    • • लिखित संविधान, स्वतंत्र न्यायपालिका
    • • गठन-1: स्वतंत्र राज्य मिलें — अमेरिका, स्विटजरलैंड
    • • गठन-2: बड़े देश को बाँटें — भारत, बेल्जियम, स्पेन
  5. 5. भारत में संघवाद और तीन सूचियाँ

    देखिए, भारत बहुत बड़ा देश है।

    • • भारत: 20 प्रमुख + सैकड़ों अन्य भाषाएँ
    • • संघ सूची — प्रतिरक्षा, विदेशनीति, मुद्रा (केन्द्र)
    • • राज्य सूची — जेल, स्वास्थ्य, पुलिस (राज्य)
    • • समवर्ती सूची — दोनों; टकराव में केन्द्र का कानून मान्य
    • • अवशिष्ट विषय — केन्द्र को अधिकार
    • • विशेष दर्जा: जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल, सिक्किम
  6. 6. विश्व के उदाहरण और भारत में संघवाद की सफलता

    देखिए, संघीय व्यवस्था की सफलता सिर्फ कागज़ पर लिखे नियमों से नहीं आती।

    • • सोवियत संघ 1989 — केन्द्रीकरण से विघटन
    • • वेस्टइंडिज 1962 — कमजोर केन्द्र से भंग
    • • नाइजीरिया — जातीय प्रभुत्व से सैनिक शासन
    • • भारत — लोकतांत्रिक चरित्र से अक्षुण्ण
    • • राज्य गठन: नागालैंड, उत्तराखंड, झारखंड
    • • भाषा: हिन्दी राष्ट्रभाषा + अंग्रेजी जारी
  7. 7. केन्द्र की ताकत और केन्द्र-राज्य संबंध

    देखिए, हमारे संविधान निर्माता एक संघीय व्यवस्था चाहते थे, ताकि विविधताओं को साथ लेकर चला जा सके।

    • • आपातकालीन प्रावधान — केन्द्र सबसे शक्तिशाली
    • • केन्द्र के पास ज्यादा वित्तीय शक्तियाँ
    • • इकहरी प्रशासनिक व्यवस्था
    • • 1980 के दशक: जम्मू, आंध्र सरकार बर्खास्त
    • • 1990 के बाद: गठबंधन राजनीति → साझेदारी की नई संस्कृति
  8. 8. भारत में विकेन्द्रीकरण और बिहार की पंचायती राज व्यवस्था

    देखिए, भारत बहुत बड़ा देश है।

    • • विकेन्द्रीकरण = तीसरा स्तर — स्थानीय सरकार
    • • बलवंत राय मेहता समिति 1959 — त्रि-स्तरीय ढाँचा
    • • ग्राम पंचायत → पंचायत समिति → जिला परिषद्
    • • 73वाँ संशोधन 1992 — अनुच्छेद 243, 11वीं अनुसूची
    • • बिहार में महिला आरक्षण 50%
    • • 74वाँ संशोधन — नगर पंचायत, नगर परिषद्, नगर निगम

सारांश

चलिए, अब इस पूरे अध्याय को एक बार साथ दोहरा लेते हैं। देखिए, सबसे पहले हमने क्या सीखा था — अलग-अलग सामाजिक समूहों को सत्ता में साझीदार बनाना ही लोकतंत्र की एकता की पहली शर्त है। यह बेल्जियम और श्रीलंका के उदाहरणों से साफ हुआ था, याद है आपको? फिर हमने देखा कि लोकतंत्र में साझेदारी कैसे होती है — राजनीतिक दलों से, हित समूहों से, गठबंधन सरकारों से, और जनआंदोलनों से भी। सरकार के भीतर यह साझेदारी दो तरह से बँटती है — एक क्षैतिज वितरण, और एक ऊर्ध्वाधार वितरण। इस ऊर्ध्वाधार वितरण को ही हम संघवाद कहते हैं। इसके बाद हमने भारतीय संघीय व्यवस्था की खूबियाँ पढ़ीं। अधिकारों का बँटवारा तीन सूचियों में होता है, और कुछ प्रावधान केन्द्र को थोड़ा ज़्यादा शक्तिशाली बनाते हैं। फिर हमने दुनिया के कुछ उदाहरण देखे — सोवियत संघ, वेस्टइंडिज, और नाइजीरिया। इनसे यह समझ आया कि आपसी विश्वास न हो, तो संघीय व्यवस्था टूट भी सकती है। लेकिन भारत का संघ अपने लोकतांत्रिक स्वभाव की वजह से बचा रहा। अंत में हमने सत्ता के विकेन्द्रीकरण के तीसरे स्तर को पढ़ा — यानी स्थानीय स्वशासन। बिहार की त्रिस्तरीय पंचायती राज और नगरीय शासन व्यवस्था की संरचना, उसके काम, और आय के स्रोत — यह सब विस्तार से देखा। अच्छा, बताइए तो — इन सबमें से आपको सबसे दिलचस्प कौन सा हिस्सा लगा?

AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं सामाजिक विज्ञान, अध्याय 2। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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मेधा मैम एक AI टीचर हैं — कोई लाइव ट्यूटर नहीं। हर उत्तर दो बार जाँचा जाता है; ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति की है।