बिहार बोर्ड 10वीं · सामाजिक विज्ञान · मैट्रिक परीक्षा 2027
अध्याय 1: लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी — नोट्स
इस अध्याय के 6 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।
1. लोकतंत्र में द्वंद्ववाद और सामाजिक विभाजन
देखिए, आपने पिछली कक्षा में पढ़ा था कि लोकतंत्र में लोग ही शासन के केन्द्र बिन्दु होते हैं।
- • लोकतंत्र में लोग ही शासन के केन्द्र बिन्दु
- • द्वंद्व (Conflict) = सामाजिक भिन्नताओं से टकराव
- • मुंबई-मैसूर : क्षेत्रीय आधार पर हिंसा
- • बेल्जियम : 59% डच (फ्लेमिश), 40% फ्रेंच (बेलोनिया)
- • भारत : भाषा+क्षेत्र+जाति+धर्म का जटिल विभाजन
2. सामाजिक विभिन्नता और सामाजिक विभाजन में अंतर
देखिए, हर सामाजिक भिन्नता सामाजिक विभाजन नहीं बनती।
- • सामाजिक विभिन्नता ≠ सामाजिक विभाजन सदैव
- • जन्म आधारित विभाजन: जाति, स्त्री-पुरुष
- • इच्छा आधारित विभाजन: धर्म-परिवर्तन, पेशा
- • विभाजन जब अंतर अधिक महत्त्वपूर्ण बन जाए
- • उत्तरी आयरलैंड: धर्म+वर्ग समान = गहरा टकराव
- • नीदरलैंड: धर्म+वर्ग अलग = टकराव नहीं
3. सामाजिक विभाजन के तीन निर्धारक तत्त्व
देखिए, सामाजिक विभाजन की राजनीति तीन बातों पर टिकी होती है।
- • तत्त्व 1: पहचान – बहु-स्तरीय पहचान राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा हो
- • तत्त्व 2: राजनीतिक दल माँगों को कैसे उठाते हैं
- • तत्त्व 3: सरकार माँगों पर कैसी प्रतिक्रिया देती है
- • भारत: सत्ता में साझेदारी → समरसता बरकरार
- • युगोस्लाविया: असंभव माँगें → देश टूट गया
- • श्रीलंका: तमिलों की माँग दबी → तनाव
4. जातिगत असमानताएँ और राजनीति में जाति
देखिए, जाति क्या है?
- • जाति = वंशानुगत पेशा आधारित समुदाय
- • वर्ण-व्यवस्था: ब्राह्मण-क्षत्रिय-वैश्य-शूद्र
- • अंत्यज (अछूत) = सत्ता से वंचित जातियाँ
- • सुधारक: फुले, गाँधी, अंबेदकर, पेरियार
- • 1967 तक सवर्ण वर्चस्व → नब्बे बाद पिछड़े-दलित
5. धर्म, सांप्रदायिकता एवं धर्मनिरपेक्ष शासन
देखिए, धर्म तब समस्या बन जाता है जब उसे राष्ट्र का आधार मान लिया जाए।
- • सांप्रदायिकता = राजनीति में धर्म का दुरुपयोग
- • रूप 1: धार्मिक पूर्वाग्रह/सोच
- • रूप 2: धर्म आधारित राजनीतिक गोलबंदी
- • रूप 3: हिंसा-दंगा-नरसंहार
- • भारत: कोई राजकीय धर्म नहीं (धर्मनिरपेक्ष)
- • श्रीलंका-बौद्ध, पाकिस्तान-इस्लाम, इंग्लैंड-ईसाई
6. लैंगिक मसले और राजनीति
देखिए, लैंगिक असमानता भी एक तरह की सामाजिक असमानता है।
- • लैंगिक असमानता = स्त्री-पुरुष को असमान सामाजिक भूमिका
- • श्रम का लैंगिक विभाजन (sexual division of labour)
- • कृषि में महिला भागीदारी: 40% (महिला कामगारों में 75%)
- • महिला साक्षरता 54%, पुरुष साक्षरता 76%
- • 1918 इंग्लैंड: महिलाओं को पहला मतदान अधिकार
- • भारत लोकसभा: महिला प्रतिनिधि 11% से कम
सारांश
अच्छा, तो चलिए अब पूरे पाठ को एक बार साथ में देखते हैं। सबसे पहले हमने क्या देखा था? यही कि लोकतंत्र में सामाजिक भिन्नताओं से द्वंद्व पैदा होता है। जैसे मुंबई में क्षेत्र के आधार पर, या बेल्जियम में भाषा के आधार पर। फिर हमने समझा कि सामाजिक विभिन्नता तभी सामाजिक विभाजन बनती है, जब कोई एक अंतर बाकी अंतरों से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण बन जाए। और तीन चीज़ें — पहचान, दलों की माँगें, और सरकार की प्रतिक्रिया — मिलकर यह तय करती हैं कि यह विभाजन देश को तोड़ेगा, या नहीं। उसके बाद हमने जाति की कहानी पढ़ी — वर्ण-व्यवस्था से लेकर अंत्यज की स्थिति तक, और समाज सुधारकों के प्रयास भी देखे। फिर हमने धर्म और सांप्रदायिकता को समझा, और यह भी जाना कि भारत धर्मनिरपेक्ष देश क्यों बना। और अंत में हमने लैंगिक भेदभाव देखा — कैसे महिलाओं के काम को कम आँका जाता है, और सत्ता में उनकी भागीदारी अभी भी कम है। अच्छा, बताइए — इनमें से कौन सा हिस्सा आपको सबसे दिलचस्प लगा?
AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं सामाजिक विज्ञान, अध्याय 1। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- "लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी" के नोट्स PDF में कैसे मिलेंगे?
- "PDF में सहेजें" दबाएँ — फ़ोन का प्रिंट पेज खुलेगा; वहाँ "Save as PDF" चुनें। PDF में सिर्फ़ नोट्स रहते हैं।
- ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
- अध्याय की पाठ्यपुस्तक के अपने पाठ से, भाग-भाग करके, किताब के ही शब्दों में; फिर एक दूसरे, स्वतंत्र मॉडल ने हर भाग को किताब से मिलाकर जाँचा है। पूरा पाठ, हर भाग का जाँच-प्रश्न और अभ्यास AskMedha ऐप में है।
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मेधा मैम एक AI टीचर हैं — कोई लाइव ट्यूटर नहीं। हर उत्तर दो बार जाँचा जाता है; ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति की है।