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बिहार बोर्ड 10वीं · सामाजिक विज्ञान · मैट्रिक परीक्षा 2027

अध्याय 1: प्राकृतिक आपदा : एक परिचय — नोट्स

इस अध्याय के 6 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।

  1. 1. प्राकृतिक आपदा क्या है

    देखिए, नौवीं कक्षा में आपने उन आपदाओं के बारे में पढ़ा था जो मनुष्य की गलतियों से होती हैं।

    • • प्राकृतिक आपदा = प्रकृति में अकारण व्यवधान
    • • अति विनाशकारी: बाढ़, सूखाड़, भूकंप, सुनामी
    • • अन्य: चक्रवात, ओलावृष्टि, हिमस्खलन, भूस्खलन
  2. 2. सुनामी और बाढ़

    देखिए, आपको पता है सुनामी क्यों आती है?

    • • सुनामी = समुद्र तली पर भूकम्पीय तरंगों से उठी तटीय तबाही
    • • बाढ़ = नदी का जल-स्तर औसत प्रवाह से ऊपर उठकर फैलना
    • • उदाहरण: कोसी नदी बाढ़ (2008)
    • • कोसी = 'बिहार का शोक' (Sorrow of Bihar)
  3. 3. भूकंप और सूखाड़

    भूकंप तब होता है जब पृथ्वी में कंपन होता है, और इसका मापन रिक्टर स्केल से किया जाता है।

    • • भूकंप = पृथ्वी में कंपन, मापन रिक्टर स्केल से
    • • 1934 का भूकंप = बिहार में विनाशकारी, सैकड़ों मृत
    • • सूखाड़ = औसत वार्षिक वर्षा में 25% से अधिक कमी
    • • 50 से० मी० से कम वर्षा वाले क्षेत्र में प्रायः हर वर्ष सूखाड़
    • • 2009 में बिहार व देश के कई भाग सूखाड़ग्रस्त
  4. 4. भू-स्खलन और हिम स्खलन

    भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में भू-स्खलन और मृदा-स्खलन जैसी घटनाएँ अक्सर होती रहती हैं।

    • • भू-स्खलन/मृदा-स्खलन: जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में अधिक
    • • कारण: विकास कार्यों से तीव्र ढाल की चट्टानें कमजोर होना
    • • हिम स्खलन: अत्यंत ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में
    • • बिहार के लिए आपदा नहीं, पर्वतीय राज्यों के लिए गंभीर आपदा
  5. 5. प्राकृतिक आपदा प्रबंधन की व्यवस्था

    देखिए, कोई भी आपदा आए, उसका प्रबंधन करना जरूरी होता है।

    • • प्रबंधन स्तर: राष्ट्रीय - नोडल मंत्रालय
    • • राज्य - आपदा प्रबंधन विभाग
    • • जिला - जिला पदाधिकारी कार्यालय
    • • प्रखंड - पंचायत समिति, गाँव - ग्रामीण आपदा प्रबंधन समिति
    • • सूखाड़ प्रबंधन: कुँए व तालाब की सामूहिक खुदाई
    • • भूकंप प्रबंधन: आयताकार/वर्गाकार भवन आकृति प्राथमिकता
  6. 6. विनाशकारी आपदाओं के वर्ष और सहभागिता की जरूरत

    देखिए, अब कुछ जरूरी वर्ष याद कर लेते हैं।

    • • विनाशकारी चक्रवात - 29 अक्टूबर 1999
    • • विनाशकारी भूकंप - 1934
    • • प्रमुख सूखाड़ वर्ष - 1966
    • • प्रमुख सुनामी - 26 दिसंबर 2004
    • • उद्देश्य: पूर्व जानकारी से विनाश कम करना

सारांश

चलिए, अब इस अध्याय को एक बार साथ दोहराते हैं। देखिए, सबसे पहले आपने जाना कि प्राकृतिक आपदा प्रकृति में अकारण उत्पन्न व्यवधान से होती है। इसमें मनुष्य कुछ नहीं कर पाता, वह निःसहाय रहता है। फिर आपने सुनामी और बाढ़ को समझा। याद है, कोसी नदी को क्या कहा जाता है? इसे 'बिहार का शोक' कहा जाता है। उसके बाद आपने जाना कि भूकंप को रिक्टर स्केल से मापा जाता है। और सूखाड़ तब माना जाता है, जब वर्षा में 25 प्रतिशत से ज़्यादा कमी हो। फिर आपने पर्वतीय क्षेत्रों की समस्या समझी — भू-स्खलन और हिम स्खलन। यह बिहार के लिए आपदा नहीं है, पर पहाड़ी राज्यों के लिए बहुत गंभीर है। उसके बाद आपने देखा कि आपदा प्रबंधन राष्ट्रीय स्तर से लेकर गाँव स्तर तक कैसे काम करता है, और इसमें आमलोगों की भागीदारी कितनी ज़रूरी है। अंत में आपने भारत की बड़ी विनाशकारी आपदाओं के साल याद किए, और यह समझा कि अगर पहले से जानकारी हो, तो विनाश को कम किया जा सकता है। अच्छा, अब बताइए — इन सबमें से आपको कौन सी आपदा सबसे दिलचस्प लगी?

AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं सामाजिक विज्ञान, अध्याय 1। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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