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बिहार बोर्ड 10वीं · हिंदी · मैट्रिक परीक्षा 2027

अध्याय 9: आविन्यों (अशोक वाजपेयी) — नोट्स

इस अध्याय के 6 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।

  1. 1. अशोक वाजपेयी का परिचय

    चलिए, आज हम इस पाठ के रचनाकार से मिलते हैं।

    • • जन्म: 16 जनवरी 1941 ई०, दुर्ग, छत्तीसगढ़
    • • मूल निवास: सागर, मध्यप्रदेश
    • • माता: निर्मला देवी, पिता: परमानंद वाजपेयी
    • • शिक्षा: बी०ए० (सागर वि०वि०), एम०ए० अंग्रेजी (सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली)
    • • वृत्ति: भारतीय प्रशासनिक सेवा, प्रथम कुलपति महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय
    • • सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार आदि
  2. 2. 'आविन्यों' पुस्तक और पाठ का परिचय

    देखिए, यह पाठ अशोक वाजपेयी की किताब 'आविन्यों' से लिया गया है।

    • • आविन्यों = दक्षिणी फ्रांस का मध्ययुगीन ईसाई मठ
    • • संग्रह: गद्य और कविता दोनों की रचनाएँ
    • • प्रवास: लगभग बीस-एक दिन, एकांत रचनात्मक प्रवास
    • • सीख: रचना में प्रतिभा के साथ स्थान-परिवेश की भी भूमिका
  3. 3. ला शत्रूज़ का कलाकेन्द्र और रहन-सहन

    चलिए, अब देखते हैं कि ला शत्रूज़ नामक जगह आजकल कैसी दिखती है।

    • • ला शत्रूज़: पुराना ईसाई मठ, अब कलाकेन्द्र
    • • जीर्णोद्धार: संवेदनशील ढंग से पुराना रूप लौटाया गया
    • • चैम्बर्स: दो-दो कमरे, फर्नीचर चौदहवीं सदी जैसा
    • • रसोईघर-स्नानघर: सर्वथा आधुनिक
    • • सप्ताह में 5 दिन सामूहिक रात्रि भोजन
    • • औसतन पचासक सैलानी प्रतिदिन आते
  4. 4. लेखक का प्रवास और उनकी उपलब्धि

    देखिए, लेखक को फ्रेंच सरकार की तरफ़ से एक न्यौता मिला था।

    • • प्रवास: 24 अक्टूबर से 10 नवम्बर 1994 (उन्नीस दिन)
    • • साथ ले गए: हिन्दी टाइपराइटर, 3-4 पुस्तकें, संगीत के टेप
    • • उपलब्धि: 35 कविताएँ + 27 गद्य रचनाएँ
    • • पहला अनुभव: निपट एकांत में रहना
  5. 5. आविन्यों का सांस्कृतिक महत्त्व

    देखिए, आविन्यों फ्रांस का एक प्रमुख कलाकेन्द्र रहा है।

    • • आविन्यों: फ्रांस का प्रमुख कलाकेन्द्र
    • • पिकासो की कृति: 'ल मादामोजेल द आविन्यों'
    • • आन्द्रे ब्रेतां, रेने शाँ, पाल एलुआर ने मिलकर ~30 संयुक्त कविताएँ लिखीं
    • • पुस्तक = स्मृति का दस्तावेज
  6. 6. कविता: 'प्रतीक्षा करते हैं पत्थर'

    चलिए, अब इस कविता को समझते हैं।

    • • पत्थर: किसी देवता या काल की नहीं, प्रतीक्षा करते हैं
    • • धीरज से रेशा-रेशा झिरते, शिरा-शिरा छिलते हुए
    • • घेरता है: हरे सपने, भूरी पहेलियाँ, पीला पड़ता समय, छीजती भाषा, आदिम अँधेरा
    • • बिना माथा झुकाये प्रार्थना, बिना पसीजे कामना, बिना शब्द कविता

सारांश

चलिए, अब इस पाठ को एक बार फिर से याद करते हैं। हमने सबसे पहले अशोक वाजपेयी के जीवन और उनकी रचनाओं को जाना। फिर समझा कि आविन्यों, दक्षिणी फ्रांस का एक मध्ययुगीन ईसाई मठ है। लेखक वहाँ एकांत में रचनात्मक प्रवास पर गए थे। हमने देखा कि वहाँ की पुरानी इमारत, जिसे ला शत्रूज़ कहते हैं, उसका जीर्णोद्धार करके एक कलाकेन्द्र बना दिया गया है। वहाँ चौदहवीं सदी का फर्नीचर भी है, और आधुनिक सुविधाएँ भी। लेखक उन्नीस दिनों के प्रवास में पैंतीस कविताएँ और सत्ताईस गद्य रचनाएँ लिख पाए। आविन्यों का सांस्कृतिक महत्त्व पिकासो की कृति से, और अतियथार्थवादी कवियों की साझी रचनाओं से भी जुड़ा है। अंत में हमने 'प्रतीक्षा करते हैं पत्थर' कविता पढ़ी। उसमें पत्थरों का मानवीकरण करके धीरज और मौन प्रतीक्षा की भावना को दिखाया गया है। अच्छा, आप बताइए — इस पूरे पाठ में आपको सबसे दिलचस्प बात कौन सी लगी?

AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं हिंदी, अध्याय 9। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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