बिहार बोर्ड 10वीं · हिंदी · मैट्रिक परीक्षा 2027
अध्याय 8: जित-जित मैं निरखत हूँ (पं० बिरजू महाराज) — नोट्स
इस अध्याय के 5 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।
1. बचपन की तालीम और शुरुआती सीख
देखिए, बिरजू महाराज अपने बचपन की बात बताते हैं।
- • रोज बाबूजी के साथ जाना
- • हैट गिरने से चैकिंग में शक
- • कपिला जी की हायर ट्रेनिंग याद करना
- • अम्मा जी के कहने पर ही बाबूजी मानते
- • सात साल की उम्र में परन किड़ तक सुनाना
2. रामपुर से लखनऊ जाना और अधीनता
देखिए, बिरजू महाराज बताते हैं कि उस ज़माने में नौकरी एक ही जगह टिककर होती थी।
- • रामपुर में नौकरी - अधीनता जैसी स्थिति
- • हिन्दू-मुस्लिम दंगे का डर
- • अम्मा और बिरजू महाराज लखनऊ गए
- • तालीम - क्लास में व ताऊ जी से सीखना
- • बाबूजी के प्राइवेट प्रोग्राम - जौनपुर, मैनपुरी, कानपुर, देहरादून, कलकत्ता, बंबई
3. कलकत्ते का प्रथम पुरस्कार
देखिए, बिरजू महाराज बता रहे हैं कि कलकत्ते के प्राइवेट प्रोग्रामों में उन्हें बहुत मजा आया।
- • कलकत्ते में फर्स्ट प्राइज मिला
- • शम्भू महाराज चाचाजी व बाबूजी साथ गए
- • उम्र - आठ साढ़े आठ साल
- • चेन और मैडल मिला
- • आमलेट नहीं, दाल का चिल्ला खाते थे
- • लच्छू महाराज - न्यू थियेटर्स कंपनी, कलकत्ता
4. बाबूजी की मृत्यु और आखिरी प्रोग्राम
देखिए बोर्ड पर।
- • बिरजू महाराज की उम्र - साढ़े नौ साल
- • बाबूजी की मृत्यु
- • आखिरी प्रोग्राम - मैनपुरी में
5. परन, बंदिश और अन्य महत्वपूर्ण शब्द
देखिए, इस पाठ में कुछ खास शब्द आएँगे।
- • परन - तबले के बोल जिन पर नर्तक नाचे व ताल दे
- • बंदिश - ठुमरी आदि के गायन के बोल, स्थायी
- • गण्डा बाँधना - दीक्षित करना, शिष्य बनाना
- • नज़राना - भेंट, उपहार, गुरुदक्षिणा
- • शागिर्द - शिष्य
- • लाजवाब - अद्वितीय, अनुपम
सारांश
चलिए, अब इस पूरे पाठ को एक बार साथ में समेटते हैं। देखिए, बिरजू महाराज अपनी बात शुरू करते हैं अपने बचपन की तालीम से। वे रोज बाबूजी के साथ जाते थे। सात साल की उम्र में ही वे परन किड़ तक खूब सुनाने लगे थे। फिर बात आती है रामपुर की नौकरी की अधीनता की। उसके बाद हिन्दू-मुस्लिम दंगों के डर से वे लखनऊ चले जाते हैं। इसके बाद कलकत्ते के एक प्राइवेट प्रोग्राम का जिक्र आता है। वहाँ उन्हें फर्स्ट प्राइज मिला, एक चेन मिली, और एक मैडल भी मिला। उस समय वे मुश्किल से आठ-नौ साल के थे। आगे साढ़े नौ साल की उम्र में बाबूजी की मृत्यु हो जाती है। और मैनपुरी में उनके साथ हुआ आखिरी प्रोग्राम एक दुखद घटना के रूप में सामने आता है। अंत में लेखक परन, बंदिश, और गण्डा बाँधना जैसे शब्दों के अर्थ से अपनी नृत्य-भाषा को समझाते हैं। अच्छा, अब आप बताइए — इनमें से कौन-सी घटना आपको सबसे ज्यादा छू गई?
Ask Medha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं हिंदी, अध्याय 8। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- "जित-जित मैं निरखत हूँ (पं० बिरजू महाराज)" के नोट्स PDF में कैसे मिलेंगे?
- "PDF में सहेजें" दबाएँ — फ़ोन का प्रिंट पेज खुलेगा; वहाँ "Save as PDF" चुनें। PDF में सिर्फ़ नोट्स रहते हैं।
- ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
- अध्याय की पाठ्यपुस्तक के अपने पाठ से, भाग-भाग करके, किताब के ही शब्दों में; फिर एक दूसरे, स्वतंत्र मॉडल ने हर भाग को किताब से मिलाकर जाँचा है। पूरा पाठ, हर भाग का जाँच-प्रश्न और अभ्यास Ask Medha ऐप में है।
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