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बिहार बोर्ड 10वीं · हिंदी · मैट्रिक परीक्षा 2027

अध्याय 8: एक वृक्ष की हत्या (कुँवर नारायण) — नोट्स

इस अध्याय के 5 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।

  1. 1. कवि कुँवर नारायण का परिचय

    देखिए, पहले यह जान लीजिए कि यह कविता किसने लिखी है।

    • • जन्म: 19 सितंबर 1927 ई०, लखनऊ
    • • रचना-शुरुआत: सन् 1950 के आस-पास
    • • काव्य संग्रह: 'इन दिनों' आदि
    • • प्रबंधकाव्य: 'आत्मजयी'
    • • पुरस्कार: साहित्य अकादमी पुरस्कार आदि
  2. 2. नगर संवेदना के कवि

    देखिए, अब समझते हैं कि कुँवर नारायण किस तरह के कवि हैं।

    • • कुँवर नारायण: नगर संवेदना के कवि
    • • वैयक्तिक व सामाजिक ऊहापोह का तनाव
    • • 'आत्मजयी' से भरपूर प्रतिष्ठा
    • • गुण: संयम, परिष्कार, साफ-सुथरापन
    • • विशेषता: भाषा व विषय की विविधता
  3. 3. कविता का परिचय और उसकी चिंता

    देखिए, अब इस कविता का विषय समझते हैं।

    • • विषय: एक काटे गए वृक्ष का बहाना
    • • व्यक्त होती है: पर्यावरण, मनुष्य, सभ्यता के विनाश की व्यथा
    • • कविता संग्रह: 'इन दिनों'
    • • स्वरूप: आज के समय का रचनात्मक अभिलेख
  4. 4. क्या-क्या बचाना है

    देखिए बोर्ड पर, कवि यहाँ बार-बार एक ही बात दोहराता है - बचाना है।

    • • बचाना है घर को - लुटेरों से
    • • बचाना है शहर को - नादिरों से
    • • बचाना है देश को - देश के दुश्मनों से
    • • बचाना है नदियों को - नाला होने से, हवा को - धुआँ होने से
    • • बचाना है खाने को - जहर होने से
    • • बचाना है जंगल को - मरुथल होने से, मनुष्य को - जंगल होने से
  5. 5. मनुष्य के जंगल हो जाने की चिंता

    चलिए, अब कविता के सबसे गहरे भाव को समझते हैं।

    • • बचाना है - मनुष्य को जंगल हो जाने से
    • • क्रम: घर → शहर → देश → नदी/हवा/खाना → जंगल → मनुष्य
    • • चिंता: मनुष्यता और सजीवता के खोने की
    • • मूल भाव: पर्यावरण व मनुष्यता दोनों का बचाव जरूरी

सारांश

चलिए, अब इस कविता को एक बार फिर याद कर लेते हैं। यह कविता लिखी है कुँवर नारायण ने। वे लखनऊ में जन्मे थे। और उन्हें नगर की संवेदना का कवि माना जाता है। उन्होंने 'इन दिनों' जैसा संग्रह लिखा। और 'आत्मजयी' जैसा प्रबंधकाव्य भी रचा। अच्छा, अब बताइए — यह कविता किस बहाने से बात करती है? एक वृक्ष की हत्या के बहाने से। इसी बहाने से यह कविता पर्यावरण, मनुष्य और सभ्यता के विनाश की गहरी व्यथा व्यक्त करती है। कविता में पहले घर को लुटेरों से बचाने की बात कही गई है। फिर शहर को नादिरों से बचाने की। और देश को देश के दुश्मनों से बचाने की। इसके बाद चिंता आती है — नदियों को नाला होने से बचाने की। हवा को धुआँ होने से बचाने की। और खाने को जहर होने से बचाने की। आगे बढ़ते हुए, जंगल को मरुथल होने से बचाने की बात आती है। और अंत में, सबसे गहरी चिंता के रूप में, मनुष्य को जंगल हो जाने से बचाने की बात कही गई है। इस तरह, यह कविता एक वृक्ष की हत्या के बहाने पूरे पर्यावरण और पूरी मनुष्यता के बचाव की सीख देती है। अच्छा बताइए, इन सब में आपको सबसे ज़्यादा गहरी चिंता कौन सी लगी?

AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं हिंदी, अध्याय 8। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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