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बिहार बोर्ड 10वीं · हिंदी · मैट्रिक परीक्षा 2027

अध्याय 7: परंपरा का मूल्यांकन (रामविलास शर्मा) — नोट्स

इस अध्याय के 6 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।

  1. 1. परंपरा का ज्ञान क्यों आवश्यक है

    देखिए, आज हम रामविलास शर्मा के निबंध 'परंपरा का मूल्यांकन' से सीखेंगे।

    • • परंपरा का ज्ञान = नया क्रांतिकारी साहित्य रचनेवालों के लिए जरूरी
    • • इतिहास का महत्त्व = ऐतिहासिक भौतिकवाद के लिए
    • • परंपरा का ज्ञान = आलोचना के लिए
    • • प्रगतिशील आलोचना = परंपरा का मूर्त ज्ञान (अमूर्त सिद्धांत नहीं)
  2. 2. साहित्य का वर्गीय मूल्यांकन

    देखिए, परंपरा का मूल्यांकन करते समय हम पहले एक साहित्य का मूल्य तय करते हैं।

    • • पहला मूल्यांकन: श्रमिक जनता के हित प्रतिबिंबित करनेवाला साहित्य
    • • दूसरा: संपत्तिशाली वर्ग का साहित्य - अभ्युदयशील या ह्रासमान?
    • • उदाहरण: आग जलाना, भाप-बिजली की मशीनें - दोनों वर्गों के काम आती हैं
    • • साहित्य का स्थायी पक्ष = इंद्रिय-बोध, भावनाएँ
  3. 3. साहित्य में विकास-प्रक्रिया और प्रतिभा की भूमिका

    साहित्य में विकास-प्रक्रिया समाज की तरह नहीं होती।

    • • साहित्य का विकास ≠ समाज का विकास
    • • कवि: पूर्ववर्ती से सीखते हैं, नकल नहीं करते
    • • नकल का साहित्य = अधम कोटि
    • • उदाहरण: एटमबम दुबारा बना, शेक्सपियर जैसा नाटक नहीं बना
    • • कला का पूर्णतः निर्दोष होना भी एक दोष है
    • • साहित्य के मूल्य राजनीतिक मूल्यों से अधिक स्थायी - वर्जिल/शेक्सपियर का उदाहरण
  4. 4. चेतना की सापेक्ष स्वाधीनता

    देखिए, द्वंद्वात्मक भौतिकवाद क्या कहता है।

    • • द्वंद्वात्मक भौतिकवाद: चेतना आर्थिक संबंधों से प्रभावित, पर सापेक्ष स्वाधीन
    • • भौतिकवाद ≠ भाग्यवाद
    • • उदाहरण 1: एथेन्स की गुलामी-सभ्यता ने यूरोप को प्रभावित किया, अमेरिका के गुलाम-मालिकों ने कुछ नहीं दिया
    • • उदाहरण 2: सामन्तवाद सब जगह, पर महान कविता केवल भारत-ईरान में
    • • उदाहरण 3: पूँजीवाद सब यूरोप में, पर रैफेल-दा विंची-माइकल एंजेलो इटली की देन
  5. 5. जनसमुदाय, जाति और अस्मिता

    देखिए, साहित्य के विकास में जैसे प्रतिभाशाली इंसानों की भूमिका होती है, वैसे ही पूरे जनसमुदायों और जातियों की भी भूमिका होती है।

    • • जाति की अस्मिता = यूनानी संस्कृति का उदाहरण
    • • जनसमुदाय बदलता है, अस्मिता नष्ट नहीं होती
    • • बंगाल विभाजित पर साहित्यिक परंपरा के ज्ञान से सांस्कृतिक रूप से अविभाजित
    • • विभाजित बंगाल vs विभाजित पंजाब - परंपरा के ज्ञान का अंतर
    • • राष्ट्रीय अस्मिता: हिटलर के आक्रमण पर रूसी जाति का उदाहरण
    • • इतिहास: समाज-व्यवस्था में विच्छिन्न, जातीय अस्मिता में अविच्छिन्न
  6. 6. भारत की बहुजातीय अस्मिता और समाजवाद

    देखिए, दुनिया का कोई भी देश भारत जैसा बहुजातीय राष्ट्र नहीं है।

    • • भारत की राष्ट्रीयता = संस्कृति और इतिहास की देन, राजनीतिक प्रभुत्व नहीं
    • • भारतीय संस्कृति में व्यास और वाल्मीकि की निर्णायक भूमिका
    • • समाजवाद = राष्ट्रीय आवश्यकता (साधनों का सर्वोत्तम उपयोग)
    • • समाजवादी संस्कृति पुरानी संस्कृति को आत्मसात् करती है
    • • सपना: सुब्रह्मण्य भारती उत्तर भारत में, रवीन्द्रनाथ तमिलनाडु में - मूलभाषा में पढ़े जाएँ

सारांश

चलिए, इस पूरे निबंध को एक बार फिर से समेटते हैं। देखिए, रामविलास शर्मा जी कहते हैं कि साहित्य की परंपरा का ज्ञान, नया क्रांतिकारी साहित्य लिखनेवालों के लिए सबसे ज़रूरी है। और यही ज्ञान प्रगतिशील आलोचना को जन्म देता है। फिर वे साहित्य का वर्गीय मूल्यांकन करना सिखाते हैं। पर साथ ही यह भी दिखाते हैं कि साहित्य का हर स्तर वर्ग-हितों से बँधा नहीं रहता, उसमें मनुष्य की स्थायी भावनाएँ भी होती हैं। इसके बाद वे साहित्य के विकास की प्रकृति समझाते हैं — नकल और मौलिकता का अंतर, और प्रतिभाशाली मनुष्यों की निर्णायक, पर दोषरहित-न-होनेवाली भूमिका। फिर द्वंद्वात्मक भौतिकवाद के सहारे वे साहित्य की सापेक्ष स्वाधीनता को एथेन्स, भारत-ईरान और इटली के उदाहरणों से सिद्ध करते हैं। अंत में वे जाति और राष्ट्र की अस्मिता की बात करते हैं, भारत की विशिष्ट बहुजातीय संस्कृति में व्यास-वाल्मीकि की भूमिका बताते हैं, और समाजवाद को राष्ट्रीय आवश्यकता बताते हुए एक स्वप्न देखते हैं — कि समाजवादी व्यवस्था में साहित्य की परंपरा का पूरा ज्ञान सबको मिलेगा, और भारतीय साहित्य मानव संस्कृति की धारा में एक नया योगदान देगा। अच्छा, आप बताइए — इस पूरे निबंध में आपको सबसे ज़रूरी बात कौन सी लगी?

Ask Medha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं हिंदी, अध्याय 7। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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मेधा मैम एक AI टीचर हैं — कोई लाइव ट्यूटर नहीं। हर उत्तर दो बार जाँचा जाता है; ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति की है।