बिहार बोर्ड 10वीं · हिंदी · मैट्रिक परीक्षा 2027
अध्याय 5: भारतमाता (सुमित्रानंदन पंत) — नोट्स
इस अध्याय के 4 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।
1. कवि परिचय - सुमित्रानंदन पंत
चलिए, पहले कवि को जान लेते हैं।
- • जन्म: सन् 1900, कौसानी (अलमोड़ा)
- • पिता: गंगादत्त पंत (एकाउंटेंट, कौसानी टी स्टेट)
- • शिक्षा: गाँव में प्रारंभिक, बनारस से हाईस्कूल
- • निवास: कालाकांकर फिर आजीवन इलाहाबाद
- • निधन: 29 दिसंबर 1977 ई०
- • आरंभिक काव्य: प्रकृति प्रेम व शिशु सुलभ जिज्ञासा
2. पंतजी की काव्य-यात्रा और कृतियाँ
देखिए, अब समझते हैं कि पंतजी की कविता कैसे आगे बढ़ी।
- • प्रवृत्ति से छायावादी, विचार उदार मानवतावादी
- • यात्रा: प्रकृति सौंदर्य → मानव सौंदर्य → समाजवाद → अरविन्द दर्शन
- • अंतिम काव्य: 'लोकायतन'
- • प्रमुख कृतियाँ: पल्लव, वीणा, गुंजन, ग्राम्या, चिदंबरा आदि
- • 'चिदंबरा' पर 'भारतीय ज्ञानपीठ' प्राप्त
3. कविता का स्रोत और मुख्य भाव
अच्छा, अब बात करते हैं कविता की।
- • कविता का स्रोत: संग्रह 'ग्राम्या'
- • आधुनिक हिंदी के उत्कृष्ट प्रगीतों में शामिल
- • पहले: अतीत के गरिमा-गान का चित्र
- • अब: वर्तमान भारत पिछड़ा, धुँधला, मटमैला दिखता है
- • कवि: वर्तमान भारत का यथातथ्य चित्र प्रस्तुत करता है
4. भारतमाता का चित्र - अंतिम पंक्तियाँ
अच्छा, अब इन पंक्तियों को समझते हैं।
- • चिंतित भृकुटि, क्षितिज तिमिरांकित
- • नमित नयन, नभ वाष्पाच्छादित
- • आनन श्री शशि की छाया-सी उपमित
- • गीता प्रकाशिनी किंतु ज्ञान मूढ़
- • अहिंसा का स्तन्य पिलाकर तप-संयम सफल
- • उपाधि: जग-जननी, जीवन-विकासिनी
सारांश
चलिए, अब इस पाठ को एक बार फिर से याद करते हैं। सबसे पहले आपने सुमित्रानंदन पंत का जीवन-परिचय जाना था - उनका जन्म, उनकी शिक्षा, और उनका निधन। फिर आपने उनकी काव्य-यात्रा समझी। यह यात्रा प्रकृति सौंदर्य से शुरू हुई, फिर मानव सौंदर्य तक पहुँची, फिर समाजवाद तक, और अंत में अरविन्द दर्शन तक। साथ ही आपने उनकी प्रमुख कृतियों के बारे में भी जाना, और यह भी कि उन्हें 'भारतीय ज्ञानपीठ' सम्मान मिला था। इसके बाद आपको 'भारतमाता' कविता का परिचय मिला। यह कविता संग्रह 'ग्राम्या' से ली गई है, और यह वर्तमान भारत का यथार्थवादी चित्र दिखाती है। अंत में, कविता के अंश से आपने भारतमाता का एक रूप देखा - चिंतित, नमित, और छाया-सी मुखश्री वाला। आपने यह भी समझा कि भारतमाता गीता-प्रकाशिनी होते हुए भी ज्ञान-मूढ़ दशा में हैं, उनमें अहिंसा का तप-संयम है, और वे जग-जननी तथा जीवन-विकासिनी स्वरूप में भी हैं। अच्छा बताइए, इनमें से आपको सबसे अच्छा कौन-सा भाव लगा?
AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं हिंदी, अध्याय 5। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- "भारतमाता (सुमित्रानंदन पंत)" के नोट्स PDF में कैसे मिलेंगे?
- "PDF में सहेजें" दबाएँ — फ़ोन का प्रिंट पेज खुलेगा; वहाँ "Save as PDF" चुनें। PDF में सिर्फ़ नोट्स रहते हैं।
- ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
- अध्याय की पाठ्यपुस्तक के अपने पाठ से, भाग-भाग करके, किताब के ही शब्दों में; फिर एक दूसरे, स्वतंत्र मॉडल ने हर भाग को किताब से मिलाकर जाँचा है। पूरा पाठ, हर भाग का जाँच-प्रश्न और अभ्यास AskMedha ऐप में है।
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