बिहार बोर्ड 10वीं · हिंदी · मैट्रिक परीक्षा 2027
अध्याय 2: रसखान — नोट्स
इस अध्याय के 5 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।
1. रसखान का जीवन और परिचय
देखिए, रसखान के जीवन के बारे में पूरी सही सूचनाएँ नहीं मिलतीं।
- • रसखान: दिल्ली के पठान राजवंश में जन्म
- • रचनाकाल: जहाँगीर का राज्यकाल
- • ब्रजभूमि में आकर कृष्णभक्ति में तल्लीन
- • गोस्वामी विट्ठलनाथ द्वारा 'पुष्टिमार्ग' में दीक्षा
- • ग्रंथ: 'प्रेमवाटिका' (1610 ई०) और 'सुजान रसखान'
2. रसखान के सवैये और उनकी विशेषता
देखिए, रसखान ने कृष्ण की लीला का गान कैसे किया।
- • कृष्ण-लीला का गान सवैयों में, पदों में नहीं
- • रसखान सवैया छंद में सिद्ध कवि
- • ध्वनि प्रवाह में अपूर्व माधुरी
- • उल्लास+मादकता+उत्कटता का संयोग
- • भारतेन्दु: 'इन मुसलमान हरिजनन पै, कोटिन हिन्दू वारिये'
3. रसखान रचनावली से संकलित छंद
रसखान सम्प्रदायमुक्त कृष्ण भक्त कवि हैं और हिंदी के लोकप्रिय जातीय कवि माने जाते हैं।
- • रसखान: सम्प्रदायमुक्त कृष्ण भक्त कवि
- • संकलित छंद: दोहे, सोरठा, सवैया
- • दोहे-सोरठा में: राधा-कृष्ण के युगल रूप पर रीझ
- • सवैया में: ब्रज पर जीवन न्योछावर करने की विदग्धता
4. 'प्रेम-अयनि श्री राधिका' - दोहे और सोरठा
देखिए, इस भाग में रसखान राधा और कृष्ण के प्रेम की बात करते हैं।
- • श्री राधिका = प्रेम-अयनि (प्रेम का घर)
- • नंदनंद = प्रेम-बरन (प्रेम का रंग)
- • दोनों = प्रेम-बाटिका के माली-मालिन
- • मोहन की छवि देख आँखें वापस नहीं आतीं
- • नंदनंद ने मन का माणिक्य (मन) चुराया - इसलिए 'चोर'
- • नैननि में बसा चितचोर पलक ओट नहीं होता
5. 'करील के कुंजन ऊपर वारौं' - सवैया
देखिए, यह सवैया रसखान की एक बहुत गहरी चाहत को दिखाता है।
- • लकुटी-कामरिया पर तीनों लोक का राज तजना
- • आठहुँ सिद्धि, नवनिधि का सुख बिसारना
- • नंद की गाइ चराइ का सुख चाहना
- • इन आँखिन सों ब्रज के बनबाग तड़ाग निहारना
- • कोटिक रौ कलधौत (इन्द्र) के धाम करील के कुंजन पर वारना
सारांश
चलिए, अब आज का पूरा पाठ एक बार याद करते हैं। देखिए, रसखान के जीवन के बारे में पूरी पक्की जानकारी नहीं मिलती। पर उनके ग्रंथ 'प्रेमवाटिका' से इतना पता चलता है कि वे दिल्ली के पठान राजवंश से थे, और जहाँगीर के समय में हुए। बाद में वे ब्रजभूमि आ गए, कृष्णभक्त बन गए, और गोस्वामी विट्ठलनाथ से पुष्टिमार्ग की दीक्षा ली। उन्होंने कृष्ण की लीला का गान किया, खासकर सवैयों में। ये सवैया अपनी सरसता, माधुर्य, और उल्लास-मादकता-उत्कटता के मेल के लिए जाने जाते हैं। उनकी रचनावली से चुने गए दोहे-सोरठा राधा-कृष्ण के प्रेम पर रीझ दिखाते हैं — जैसे 'प्रेम-अयनि श्री राधिका' में राधा और कृष्ण को प्रेम का घर और रंग कहा गया है, और कृष्ण को मन चुराने वाला 'चोर' कहा गया है। और अंत में, सवैया 'करील के कुंजन ऊपर वारौं' में कवि की एक गहरी चाह दिखती है — वे राज-पाट और सिद्धियाँ छोड़कर ब्रज के वन-बाग देखना चाहते हैं, और करील के छोटे कुंजन पर इन्द्र के महल तक न्योछावर करना चाहते हैं। अच्छा, बताइए — रसखान ने भक्ति के लिए क्या-क्या त्याग किया?
AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं हिंदी, अध्याय 2। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- "रसखान" के नोट्स PDF में कैसे मिलेंगे?
- "PDF में सहेजें" दबाएँ — फ़ोन का प्रिंट पेज खुलेगा; वहाँ "Save as PDF" चुनें। PDF में सिर्फ़ नोट्स रहते हैं।
- ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
- अध्याय की पाठ्यपुस्तक के अपने पाठ से, भाग-भाग करके, किताब के ही शब्दों में; फिर एक दूसरे, स्वतंत्र मॉडल ने हर भाग को किताब से मिलाकर जाँचा है। पूरा पाठ, हर भाग का जाँच-प्रश्न और अभ्यास AskMedha ऐप में है।
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मेधा मैम एक AI टीचर हैं — कोई लाइव ट्यूटर नहीं। हर उत्तर दो बार जाँचा जाता है; ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति की है।