बिहार बोर्ड 10वीं · हिंदी · मैट्रिक परीक्षा 2027
अध्याय 11: नौबतखाने में इबादत (यतीन्द्र मिश्र) — नोट्स
इस अध्याय के 8 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।
1. कमरुद्दीन का बचपन और डुमराँव-काशी का नाता
चलिए, आज हम उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की कहानी शुरू से सुनते हैं।
- • कमरुद्दीन = बिस्मिल्ला खाँ, जन्म 1916, डुमराँव, बिहार
- • रीड = नरकट घास से बनी, डुमराँव के कछारों में मिलती
- • काशी = ननिहाल, बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी, नौबतखाना
- • मामा सादिक हुसैन व अलीबख्श = शहनाईवादक, उस्ताद
2. रसूलनबाई-बतूलनबाई और संगीत की पहली प्रेरणा
देखिए, एक रास्ता था।
- • बालाजी मंदिर का रास्ता = रसूलनबाई-बतूलनबाई के यहाँ से होकर
- • सुनाई देते थे: ठुमरी, टप्पे, दादरा
- • संगीत के प्रति पहली आसक्ति इन्हीं बहनों को सुनकर हुई
3. शहनाई क्या है और उसका नाम कैसे पड़ा
देखिए, शहनाई को संगीत शास्त्र में सुषिर-वाद्य कहा जाता है।
- • सुषिर-वाद्य = फूँककर बजाए जाने वाले वाद्य
- • अरब में फूँक वाद्य = 'नय' (जिसमें रीड हो)
- • शहनाई = 'शाहेनय' = सुषिर वाद्यों में शाह
- • उपयोग = मांगलिक अवसर, मंगलध्वनि
4. सच्चे सुर की चाह और इबादत
देखिए, बिस्मिल्ला खाँ साहब दशकों से एक ही चीज़ माँगते रहे - एक सच्चा सुर।
- • सजदे में प्रार्थना: 'मेरे मालिक एक सुर बख्श दे'
- • चाह: सुर में ऐसी तासीर कि आँसू निकल आएँ
- • पाँचों वक्त की नमाज = सुर पाने की प्रार्थना
- • दर्शाता है: विनम्रता, सच्ची साधना
5. मुहर्रम से जुड़ाव
देखिए, बिस्मिल्ला खाँ का नाम एक मुस्लिम पर्व से भी जुड़ा है।
- • मुहर्रम = शिया मुसलमानों का शोक पर्व, दस दिन
- • खानदान में मुहर्रम में शहनाई-संगीत वर्जित
- • आठवीं तारीख = खड़े होकर शहनाई, आठ किमी पैदल नौहा
- • इस दिन राग-रागिनी नहीं बजती
6. बचपन की यादें और फिल्मों का शौक
देखिए, कमरुद्दीन साहब अपनी जवानी से भी ज्यादा अपने बचपन को याद करते थे।
- • अठन्नी मेहनताना = बालाजी मंदिर में शहनाई बजाने से
- • शौक = सुलोचना की फिल्में, कुलसुम की कचौड़ी
- • 'संगीतमय कचौड़ी' = घी में छन की आवाज में आरोह-अवरोह
- • सम पर आने पर पत्थर पटकते थे (दाद देने का बचपना)
7. काशी से अटूट प्रेम और शहनाई की ऊँचाई
देखिए, बिस्मिल्ला खाँ जब कभी काशी से बाहर रहते थे, तो वे क्या करते थे?
- • काशी से बाहर = विश्वनाथ-बालाजी की दिशा में मुँह करके शहनाई बजाना
- • रीड 15-20 मिनट में गीली होती, दूसरी रीड इस्तेमाल होती
- • काशी संस्कृति की पाठशाला, संगीत-भक्ति अभिन्न
- • बिस्मिल्ला खाँ = बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई
- • शहनाई: डेढ़ शतक का साज → दो शतक का साज, सरताज बनी
8. भारत रत्न पर विनम्रता और अंतिम विदाई
देखिए, एक बार एक शिष्या ने खाँ साहब से कहा कि अब आपको भारत रत्न मिल चुका है, तो फटी तहमत मत पहनिए।
- • शिष्या की बात: फटी तहमत न पहनें
- • खाँ साहब का उत्तर: 'भारत रत्न शहनाई पे मिला है, लुंगिया पे नहीं'
- • दुआ: फटा सुर न बख्शें, लुंगिया फटी तो कल सिल जाएगी
- • निधन: 21 अगस्त 2006, आयु नब्बे वर्ष
- • सबसे बड़ी देन: संगीत को संपूर्णता से सीखने की जिजीविषा
सारांश
देखिए, आज हमने उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की पूरी ज़िंदगी की कहानी देखी। शुरुआत में हमने उनके बचपन को जाना, और डुमराँव तथा काशी से उनके नाते को समझा। फिर रसूलनबाई और बतूलनबाई से उन्हें संगीत की पहली प्रेरणा कैसे मिली, यह देखा। उसके बाद हमने शहनाई के बारे में पढ़ा — यह कैसे एक सुषिर-वाद्य है, और इसके नाम की उत्पत्ति कैसे हुई। याद है न, वे सच्चे सुर के लिए खुदा से कितनी विनम्रता से प्रार्थना करते थे? और मुहर्रम पर्व से उनका जुड़ाव भी हमने समझा। इसके साथ ही हमने उनके बचपन की मस्ती, फिल्मों के शौक, और कुलसुम की संगीतमय कचौड़ी की प्यारी यादें भी सुनीं। अंत में हमने देखा कि काशी से उनकी प्रीति कभी टूटी नहीं, शहनाई को ऊँचाइयों तक ले जाने की उनकी साधना कैसी थी, भारत रत्न मिलने पर भी वे कितने सहज और विनम्र रहे, और आख़िर में उनके निधन तक की पूरी कहानी जानी। अच्छा बताइए, इन सबमें आपको सबसे ज़्यादा किस बात ने छुआ?
AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं हिंदी, अध्याय 11। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- "नौबतखाने में इबादत (यतीन्द्र मिश्र)" के नोट्स PDF में कैसे मिलेंगे?
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- ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
- अध्याय की पाठ्यपुस्तक के अपने पाठ से, भाग-भाग करके, किताब के ही शब्दों में; फिर एक दूसरे, स्वतंत्र मॉडल ने हर भाग को किताब से मिलाकर जाँचा है। पूरा पाठ, हर भाग का जाँच-प्रश्न और अभ्यास AskMedha ऐप में है।
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मेधा मैम एक AI टीचर हैं — कोई लाइव ट्यूटर नहीं। हर उत्तर दो बार जाँचा जाता है; ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति की है।