बिहार बोर्ड 10वीं · हिंदी · मैट्रिक परीक्षा 2027
अध्याय 1: गुरु नानक — नोट्स
इस अध्याय के 5 भाग, किताब के क्रम में — हर भाग की पहली बात और वे बिंदु जो मेधा मैम बोर्ड पर लिखती हैं — और अंत में सारांश। पूरा पाठ और हर भाग का जाँच-प्रश्न ऐप में।
1. गुरु नानक का जीवन-परिचय
देखिए, आज हम बात करेंगे गुरु नानक की।
- • जन्म : 1469 ई०, तलवंडी, जिला लाहौर
- • जन्म-स्थान : नानकाना साहब (अब पाकिस्तान)
- • पिता : कालूचंद खत्री, माँ : तृप्ता, पत्नी : सुलखणी
- • निर्गुण ब्रह्म की भक्ति, वर्णाश्रम व कर्मकांड का विरोध
- • सिख धर्म के प्रवर्तक, बाबर से भेंट
- • मृत्यु : सन् 1539, 'वाहगुरु' कहते हुए
2. गुरु नानक की भाषा और रचनाएँ
देखिए, गुरु नानक ने पंजाबी के साथ-साथ हिंदी में भी रचनाएँ कीं।
- • भाषा : पंजाबी मिश्रित ब्रजभाषा + खड़ी बोली
- • शैली : उलटबाँसी नहीं अपनाई (कबीर से भिन्न)
- • उपदेश : गुरु-महत्ता, संसार की क्षणभंगुरता, नाम-जप की महिमा
- • संग्रहकर्ता : पाँचवें गुरु अर्जुनदेव, सन् 1604 ई०
- • संग्रह का नाम : 'गुरु ग्रंथ साहिब'
- • रचनाएँ : जपुजी, आसादीवार, रहिरास, सोहिला
3. नानक के पदों की भाव-भूमि
देखिए बोर्ड पर।
- • नानक : निर्गुण निराकार ईश्वर के उपासक
- • पद : प्रेम व भक्ति के मधुर गीत
- • आलोचना : कर्मकांडमूलक सांप्रदायिकता की
- • स्थापना : भेदभाव के स्थान पर प्रेम-सद्भाव
- • पहला पद : नाम-कीर्तन की महिमा
- • दूसरा पद : अंतःकरण की निर्मलता व गोविंद से एकाकार
4. 'राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा' पद
देखिए, इस पद में नानक जी क्या कहना चाहते हैं।
- • भाव : राम नाम बिनु जन्म व्यर्थ
- • बिनु नावै : मति भटकती (बिखु खावै, बिखु बोलै)
- • पुस्तक-पाठ, व्याकरण, संध्या बिनु गुरसबद : मुक्ति नहीं
- • दंड-कमंडल-तीर्थ भ्रमण बिनु राम नाम : शांति नहीं
- • हरि नाम जप से ही पार होना
- • ईश्वर सर्वव्यापी : जल थल महीअल सब जीवों में
5. 'जो नर दुख में दुख नहिं मानै' पद
देखिए, अब यह दूसरा पद है।
- • दुख में दुख न मानना, सुख-भय से मुक्त
- • कंचन और माटी को समान जानना
- • निंदा-स्तुति, लोभ-मोह-अभिमान से रहित
- • हर्ष-शोक, मान-अपमान से न्यारा
- • आसा-मनसा त्यागकर निरासा में रहना
- • गुरु कृपा से : नानक लीन गोबिंद सों ज्यों पानी सँग पानी
सारांश
चलिए, अब इस पाठ को एक बार समेट लेते हैं। गुरु नानक का जन्म 1469 ई० में, तलवंडी ग्राम में हुआ था। उन्होंने हिन्दू और मुसलमान, दोनों की उपासना को समान माना। उन्होंने निर्गुण ब्रह्म की भक्ति का प्रचार किया, और सिख धर्म की स्थापना की। देखिए, उन्होंने पंजाबी के साथ-साथ, ब्रजभाषा और खड़ी बोली मिली हिंदी में भी पद रचे। इन पदों का संग्रह गुरु अर्जुनदेव ने किया, और उसे नाम दिया — 'गुरु ग्रंथ साहिब'। उनके पदों में क्या मिलता है? कर्मकांड की आलोचना, और प्रेम पर आधारित सद्भाव की स्थापना। पहला पद है 'राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा'। इसमें बताया गया है कि राम नाम के बिना सारे कर्मकांड व्यर्थ हैं। दूसरा पद है 'जो नर दुख में दुख नहिं मानै'। यह हमें सिखाता है कि सुख-दुख से ऊपर उठकर, मन की निर्मलता से गोविंद में लीन हो जाना चाहिए। अच्छा, अब आप बताइए — इन दोनों पदों में कौन-सी बात एक जैसी लगती है आपको?
AskMedha · मेधा मैम — बिहार बोर्ड 10वीं हिंदी, अध्याय 1। पाठ्यपुस्तक से लिखा, दो बार जाँचा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- "गुरु नानक" के नोट्स PDF में कैसे मिलेंगे?
- "PDF में सहेजें" दबाएँ — फ़ोन का प्रिंट पेज खुलेगा; वहाँ "Save as PDF" चुनें। PDF में सिर्फ़ नोट्स रहते हैं।
- ये नोट्स कहाँ से लिखे गए हैं?
- अध्याय की पाठ्यपुस्तक के अपने पाठ से, भाग-भाग करके, किताब के ही शब्दों में; फिर एक दूसरे, स्वतंत्र मॉडल ने हर भाग को किताब से मिलाकर जाँचा है। पूरा पाठ, हर भाग का जाँच-प्रश्न और अभ्यास AskMedha ऐप में है।
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