CBSE Class 10 · Sanskrit · board exam 2027
Chapter 3: चित्रवर्णनम् — notes
The chapter’s 6 parts in the book’s order — the first idea of each and the points Medha Ma’am writes on the board — and the summary at the end. The full lesson and a check question for each part are in the app.
1. चित्रवर्णनम् का अर्थ और नियम
चित्रवर्णनम् का अर्थ है किसी चित्र को देखकर उसके विषय में संस्कृत में वाक्य लिखना।
- • चित्रवर्णनम् = चित्र देखकर पाँच वाक्य लिखना
- • मञ्जूषा = सहायक पदों की सूची
- • मञ्जूषा के पद अनिवार्य नहीं
- • स्वेच्छा से भी वाक्य-संरचना सम्भव
- • प्रत्येक चित्र पर पञ्चवाक्यानि लिखनी हैं
2. रक्षाबन्धन का चित्र — उदाहरणवाक्यानि
देखिए, यह पहला चित्र है — रक्षाबन्धन पर्व का।
- • चित्र १ — रक्षाबन्धनपर्व
- • (i) अत्र रक्षाबन्धनपर्वण: आयोजनं भवति।
- • (ii) भगिनी अग्रजस्य मणिबन्धे रक्षासूत्रस्य बन्धनं करोति।
- • (iii) तस्या: अनुज: अपि स्वक्रमस्य प्रतीक्षां करोति।
- • (iv) अग्रजस्य रक्षाबन्धनं कृत्वा भगिनी अनुजस्य मणिबन्धे अपि रक्षाबन्धनं करिष्यति।
- • (v) मातापितरौ रक्षाबन्धनं दृष्ट्वा मोदेते।
3. विपद् और सहायता के चित्र — उदग्रविमानम् व सैनिक:
देखिए, अब दूसरा चित्र देखते हैं।
- • चित्र २ — विपद् में सहायता
- • पद: उदग्रविमानम्, सैनिक:, जलौघपीडिता:
- • पद: वृद्धस्य, लम्बितसोपाने, आरोहयति
- • पद: पातयन्ति, सहायताम्, उत्थापयन्ति
- • चित्र ३ — सीमा-रक्षा
- • पद: देशरक्षकेभ्य:, सैनिका:, आतंकवादिनौ, सन्नद्धा:
4. दुर्घटना और यातायात के चित्र
अच्छा, अब चौथा चित्र देखिए।
- • चित्र ४ — दुर्घटना में सहायता
- • पद: चिकित्सका:, परिचारिका:, क्रेनयानेन, व्रणितम्
- • चित्र ५ — यातायात-नियम
- • पद: शिरस्त्राणस्य, दण्डशुल्कम्, यातायातरक्षी, आत्मरक्षायै
- • चित्र ७ — कारदुर्घटना व क्षमाभाव
- • पद: क्रुद्धौ, दोषारोपणम्, आरक्षी, क्षमाभावस्य आवश्यकता
5. वर्षा ऋतु और फलविक्रेता के चित्र
देखिए, अब छठा चित्र देखिए — यह वर्षा ऋतु का चित्र है।
- • चित्र ६ — वर्षा ऋतु
- • पद: मण्डूक:, इन्द्रधनुष:, दोलाभि:, टर्र-टर्र इति शब्दम्
- • चित्र ८ — फलविक्रेता
- • पद: कदलीफलानि, द्राक्षा, नारिकेलानि, ग्राहकाय, तोलयति
- • चित्र ९ — धावन-प्रतियोगिता
- • पद: सप्त बालिका:, प्रशिक्षक:, प्रथमस्थाने
6. किसान का चित्र
देखिए, अब आ गया है दसवाँ और आखिरी चित्र।
- • चित्र १० — कृषक
- • पद: कृषक:, वृषभौ, हलम्, चालयति
- • पद: स्वेदपूर्णम्, परिश्रमकारणात्, सूर्यातपे
- • पद: मेघानां प्रतीक्षाम्
- • कृषक: अन्नदाता, अन्नोत्पादने योगदानम्
Summary
देखिए, इस पाठ में आपने क्या सीखा। चित्रवर्णनम् में आपने सीखा कि किसी चित्र को देखकर मञ्जूषा में दिए गए सहायक पदों की सहायता से, या अपनी इच्छा से, पाँच संस्कृत वाक्य कैसे बनाए जाते हैं। पहले हमने रक्षाबन्धन पर्व के चित्र पर उदाहरण वाक्य देखे। उनसे भगिनी, अग्रज, अनुज और मातापितरौ के कार्यों का वर्णन हुआ। फिर जलौघपीडितों की सहायता, सीमा-रक्षा, दुर्घटना, और यातायात-नियम जैसे चित्रों की मञ्जूषाओं से हमने समझा कि किस प्रकार के पद किस स्थिति में प्रयुक्त होते हैं। इसके बाद वर्षा ऋतु, फलविक्रेता और धावन-प्रतियोगिता के चित्रों के पद भी हमने देखे। अन्त में किसान के चित्र से यह सीखा कि वह अन्नदाता है, और अन्नोत्पादन में उसका योगदान है। तो हर चित्र की मञ्जूषा के पदों को जोड़कर पाँच-पाँच वाक्य बनाने का अभ्यास करना — यही इस पाठ का उद्देश्य है। अच्छा, बताइए — अगर आपके सामने अभी एक नया चित्र आए, तो आप सबसे पहले क्या देखेंगे?
AskMedha · Medha Ma’am — CBSE Class 10 Sanskrit, Chapter 3. Written from the textbook, checked twice.
Questions parents and students ask
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- From the chapter’s own textbook text, part by part, in the book’s own terms; a second, independent model then checked every part against the book. The full lesson, a check question for each part and the practice are in the AskMedha app.
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Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.