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CBSE Class 10 · Hindi A · board exam 2027

Chapter 6: संगतकार (मंगलेश डबराल) — notes

The chapter’s 5 parts in the book’s order — the first idea of each and the points Medha Ma’am writes on the board — and the summary at the end. The full lesson and a check question for each part are in the app.

  1. 1. कवि मंगलेश डबराल का परिचय

    देखिए, सबसे पहले जान लेते हैं कि यह कविता किसने लिखी है।

    • • जन्म: 1948, काफलपानी गाँव, टिहरी गढ़वाल
    • • शिक्षा: देहरादून
    • • कार्य: जनसत्ता में साहित्य संपादक (1983)
    • • निधन: 2020
  2. 2. कविता-संग्रह और लेखन की विशेषता

    अब जानते हैं मंगलेश डबराल की रचनाओं के बारे में।

    • • चार कविता-संग्रह: पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं, आवाज़ भी एक जगह है
    • • सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार, पहल सम्मान
    • • विशेषता: सूक्ष्म सौंदर्यबोध, पारदर्शी भाषा
    • • प्रतिकार का तरीका: सुंदर सपना रचकर, शोर-शराबे से नहीं
  3. 3. शब्द-संपदा: संगतकार से जुड़े कठिन शब्द

    चलिए, कविता में जाने से पहले कुछ कठिन शब्द समझ लेते हैं।

    • • संगतकार = मुख्य गायक का सहयोगी कलाकार
    • • गरज = ऊँची गंभीर आवाज़
    • • अंतरा = टेक छोड़कर गीत का चरण
    • • जटिल = कठिन, तान = स्वर-विस्तार
    • • नौसिखिया = अभी सीखने वाला
    • • ढाँढ़स बँधाना = तसल्ली देना
  4. 4. संगीत की सरगम और सप्तक की जानकारी

    कविता के विषय को और अच्छे से समझने के लिए संगीत से जुड़ी कुछ बातें जान लेते हैं।

    • • सरगम: सा रे ग म प ध नि (सात स्वर)
    • • सप्तक = सात का समूह
    • • मध्य सप्तक = साधारण ध्वनि
    • • तार सप्तक = मध्य सप्तक से ऊपर
    • • मंद्र सप्तक = मध्य सप्तक से नीचे
  5. 5. संगतकार जैसे सहयोगियों की भूमिका पर विचार

    चलिए, अब एक बात सोचते हैं।

    • • संगतकार न हो तो कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले की स्थिति पर विचार
    • • मंच के पीछे काम करने वालों की भूमिका महत्वपूर्ण
    • • प्रश्न: संगतकार प्रतिभावान होकर भी शीर्ष स्थान क्यों नहीं पाते?
    • • फ़िल्म की सफलता में अभिनेताओं के अलावा और लोगों का योगदान
    • • गायिका के साथ संगतकारों का परिचय भी ज़रूरी

Summary

चलिए, आज हमने जो पढ़ा उसे एक बार समेट लेते हैं। सबसे पहले हमने जाना, संगतकार कविता के रचयिता मंगलेश डबराल का जन्म 1948 में काफलपानी गाँव में हुआ। उनकी शिक्षा देहरादून में हुई, और वे पत्रकारिता तथा संपादन से जुड़े रहे। फिर हमने उनके चार कविता-संग्रहों के बारे में जाना, और उनकी सूक्ष्म सौंदर्यबोध व पारदर्शी भाषा की विशेषता को समझा। इसमें वे सामंती बोध और पूँजीवादी छल-छद्म का प्रतिकार, एक सुंदर सपना रचकर करते हैं। इसके बाद हमने संगतकार, गरज, अंतरा, तान जैसे शब्दों के अर्थ सीखे, जो इस कविता को समझने में मदद करते हैं। फिर हमने संगीत की सरगम, यानी सात स्वरों के बारे में जाना, और तीन प्रकार के सप्तक के बारे में भी — मध्य, तार और मंद्र। अंत में हमने यह सोचा कि संगतकार जैसे सहयोगी कलाकारों की, और मंच के पीछे काम करने वालों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। भले ही वे हमेशा मुख्य या शीर्ष स्थान तक न पहुँच पाएँ। अच्छा, आप बताइए — क्या आपको लगता है कि असली ज़िंदगी में भी ऐसे संगतकार हमारे आसपास होते हैं?

AskMedha · Medha Ma’am — CBSE Class 10 Hindi A, Chapter 6. Written from the textbook, checked twice.

Questions parents and students ask

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Medha Ma’am is an AI teacher, not a live tutor. Every answer is checked twice; a person takes responsibility.